रायसीना संवाद 2026
चर्चा में क्यों?
रायसीना संवाद 2026 का 11वाँ संस्करण नई दिल्ली में संपन्न हुआ, जिसमें वैश्विक विदेश नीति के साथ तकनीकी नवाचार को एकीकृत करने के उद्देश्य से रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल (SDI) का महत्त्वपूर्ण शुभारंभ किया गया।
रायसीना संवाद 2026 के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?
- रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल: विज्ञान और प्रौद्योगिकी को विदेश नीति के साथ एकीकृत करने के लिये एक नया ढाँचा शुरू किया गया, जिसमें AI शासन, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं तथा विकासशील देशों हेतु भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दिया गया।
- बहुध्रुवीय विश्व की ओर परिवर्तन: संवाद में एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के उदय को स्वीकार किया गया, जिसमें वैश्विक दक्षिण भविष्य की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
- उभरती दक्षिण-दक्षिण साझेदारियाँ (South-South Partnerships) और लचीले बहुपक्षीय समूह वैश्विक शासन को तेज़ी से प्रभावित कर रहे हैं।
- ब्रिक्स (BRICS), भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) और भारत, फ्राँस, संयुक्त अरब अमीरात त्रिपक्षीय समूह के माध्यम से भारत की रणनीतिक भागीदारी इस बदलाव को दर्शाती है, जो भारत को नई साझेदारियों के निर्माता तथा 'वैश्विक दक्षिण' के एक प्रमुख स्वर के रूप में स्थापित करती है।
- परिवर्तित बहुपक्षवाद: वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाने के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रबल मांग की गई, जिसमें भारत की स्थायी सदस्यता के लिये बढ़ता समर्थन भी शामिल है।
- समुद्री सुरक्षा पर ध्यान: भारतीय महासागर, लाल सागर और इंडो-पैसिफिक में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं, समुद्र के नीचे संचार केबलों तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया।
रायसीना संवाद
- रायसीना संवाद: वर्ष 2016 में विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा शुरू किया गया था। रायसीना संवाद नाम नई दिल्ली की रायसीना हिल्स के नाम पर रखा गया है। इसका आयोजन प्रतिवर्ष विदेश मंत्रालय द्वारा ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के सहयोग से किया जाता है।
- यह भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत का प्रमुख सम्मेलन है, जो जर्मनी के म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन और सिंगापुर के शांगरी-ला संवाद के समकक्ष माना जाता है।
- रायसीना संवाद वैश्विक नेतृत्वकर्त्ताओं, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और पत्रकारों को एक साथ लाकर वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करने का मंच प्रदान करता है।
- 2026 की थीम: 'संस्कार – अस्मिता, अनुकूलन, उन्नति' (Samskara – Assertion, Accommodation, Advancement), जो यह दर्शाती है कि सभ्यताएँ किस प्रकार अपनी पहचान को स्थापित करती हैं, विविधता को स्वीकार करती हैं और प्रगति की ओर अग्रसर होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. रायसीना संवाद क्या है?
रायसीना संवाद भारत का प्रमुख भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र सम्मेलन है, जिसका आयोजन हर वर्ष भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के सहयोग से किया जाता है।
2. रायसीना विज्ञान कूटनीति पहल (SDI) क्या है?
यह एक नया ढाँचा है, जिसका उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को विदेश नीति के साथ एकीकृत करना है, जिसमें AI शासन, सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखलाओं और डिजिटल अवसंरचना सहयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है।
3. रायसीना संवाद भारत की विदेश नीति के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह भारत के लिये एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से वह विश्व नेताओं के साथ संवाद करता है, वैश्विक शासन से जुड़े विमर्शों को प्रभावित करता है और भू-राजनीति तथा भू-अर्थशास्त्र में अपनी रणनीतिक दृष्टि प्रस्तुत करता है।
4. रायसीना संवाद 2026 की थीम क्या थी ?
इसकी थीम 'संस्कार – अस्मिता, अनुकूलन, उन्नति' थी, जो इस बात पर प्रकाश डालती है कि सभ्यताएँ किस प्रकार अपनी पहचान को स्थापित करती हैं, विविधता को स्वीकार करती हैं और सामूहिक रूप से प्रगति की ओर अग्रसर होती हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये: (2020)
अंतर्राष्ट्रीय समझौता/सेट-अप विषय
1. अल्मा-अता की घोषणा : लोगों की स्वास्थ्य देखभाल
2. हेग कन्वेंशन : जैविक और रासायनिक हथियार
3. तालानोआ संवाद : वैश्विक जलवायु परिवर्तन
4. अंडर 2 गठबंधन : बाल अधिकार
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 4
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 2, 3 और 4
उत्तर: (c)
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा खुला बाज़ार परिचालन (OMO) क्रय
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में चलनिधि उपलब्ध कराने हेतु दो चरणों में 1 लाख करोड़ रुपये का खुला बाज़ार परिचालन (OMO) क्रय की घोषणा की है।
- प्रत्येक 50,000 करोड़ रुपये के OMO क्रय को अग्रिम कर के बहिर्गमन से ठीक पूर्व निर्धारित किया गया है। सामान्यतः मार्च के मध्य में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग प्रणाली से बाहर चले जाते हैं, अर्थात इस रणनीतिक समयावधि के चयन का उद्देश्य संभावित चलनिधि संकट के मध्य संतुलन स्थापित करना है।
खुला बाज़ार परिचालन (OMO)
- परिचय: OMO मौद्रिक नीति का मात्रात्मक साधन है, जिसके अंतर्गत सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs), जैसे- दिनांकित प्रतिभूतियाँ तथा ट्रेज़री बिल का क्रय-विक्रय किया जाता है।
- प्रतिभूतियों का क्रय बैंकिंग प्रणाली में चलनिधि का प्रवेशन कराता है (विस्तारवादी प्रभाव), जबकि प्रतिभूतियों का विक्रय चलनिधि का अवशोषण करता है (संकुचनकारी प्रभाव)।
- इस प्रकार यह प्रक्रिया मुद्रा आपूर्ति को प्रभावित करती है।
- भारत में क्रियान्वयन: भारत में RBI, OMO को नीलामी अथवा प्रत्यक्ष बाज़ार परिचालन के माध्यम से संचालित करता है। इसमें प्राथमिक डीलर, वाणिज्यिक बैंक तथा अन्य पात्र प्रतिभागी सम्मिलित होते हैं। समस्त लेन-देन RBI के इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से संपन्न होते हैं।
- उद्देश्य: बैंकिंग प्रणाली में दीर्घकालिक चलनिधि आपूर्ति स्थिति को संतुलित करना तथा अल्पकालिक ब्याज दरों को स्थिर बनाकर मौद्रिक नीति के प्रेषण तंत्र को सुदृढ़ करना।
- इसके अलावा इसका उद्देश्य अतिरिक्त चलनिधि का अवशोषण कर मुद्रास्फीति प्रबंधन करना भी है, ताकि चलनिधि की कमी की स्थिति में चलनिधि प्रविष्ट कर आर्थिक संवृद्धि को समर्थन प्रदान किया जा सके।
- OMO के प्रकार:
- एकमुश्त (आउटराइट) OMO: इसमें प्रतिभूतियों का स्थायी क्रय या विक्रय किया जाता है, जिससे चलनिधि में दीर्घकालिक परिवर्तन होता है। उदाहरण: हाल ही में घोषित 1 लाख करोड़ रुपये का क्रय।
- अस्थायी परिचालन: अल्पकालिक तरलता समायोजन के लिये चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के माध्यम से परिचालित किये जाते हैं। इसमें रेपो तथा रिवर्स रेपो परिचालन सम्मिलित होते हैं।
- महत्त्व: यह आरक्षित नकदी निधि अनुपात (CRR) तथा सांविधिक चलनिधि अनुपात (SLR) जैसे अन्य मात्रात्मक साधनों का पूरक है। इसके माध्यम से RBI सीजनल फैक्टर्स (जैसे- अग्रिम कर बहिर्गमन), बाह्य आघात अथवा पूंजी प्रवाह के प्रभावों के अनुसार चलनिधि का सूक्ष्म समायोजन कर सकता है। यह प्रक्रिया नीतिगत दरों में प्रत्यक्ष परिवर्तन किये बिना चलनिधि प्रबंधन को प्रभावी बनाती है।
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और पढ़ें: मौद्रिक नीति का मात्रात्मक साधन |
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955
अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता तथा पश्चिम एशिया के तेल आपूर्ति मार्गों में व्यवधान के बीच भारत ने रिफाइनरियों को आवश्यक वस्तु (EC) अधिनियम, 1955 के अंतर्गत द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के उत्पादन में वृद्धि करने का निर्देश दिया है।
- साथ ही, वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में स्थायित्व बना रहे, इस हेतु अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिये रूस से कच्चा तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति प्रदान की है।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955: इसे भारत सरकार द्वारा नागरिकों को उचित मूल्य पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा जमाखोरी, कालाबाज़ारी एवं कृत्रिम अभाव को रोकने के उद्देश्य से अधिनियमित किया गया था।
- ऐतिहासिक रूप से यह कानून जमाखोरी पर नियंत्रण, खुदरा मुद्रास्फीति को संतुलित करने तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बनाए रखने हेतु सरकार का प्रमुख साधन रहा है।
- धारा 3: इसके अंतर्गत केंद्र सरकार आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, प्रदाय तथा वितरण को नियंत्रित कर सकती है। सरकार भंडारण सीमा निर्धारित करना, व्यापार का विनियमन करना, मूल्य निर्धारित करना तथा जमाखोरी पर प्रतिबंध लगाना जैसे उपाय कर सकती है।
- धारा 5: इसके अंतर्गत केंद्र सरकार, धारा 3 के तहत प्राप्त अपनी शक्तियों को राज्य सरकारों अथवा अधिकृत अधिकारियों को प्रत्यायोजित कर सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर त्वरित एवं प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित हो सके।
- वर्ष 2020 का संशोधन: संसद ने वर्ष 2020 में अधिनियम में संशोधन करते हुए केंद्र सरकार की शक्तियों को कुछ विशिष्ट वस्तुओं, जैसे- अनाज, दलहन, आलू, प्याज, खाद्य तिलहन तथा ईंधन तेल के असाधारण परिस्थितियों में विनियमन तक सीमित कर दिया था। इनमें युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि तथा गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियाँ सम्मिलित हैं।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत LPG: पेट्रोलियम उत्पाद, जिनमें LPG भी सम्मिलित है, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत ‘आवश्यक वस्तु’ के रूप में वर्गीकृत किये गए हैं।
- केंद्र सरकार ने तेल रिफाइनरियों को LPG के उत्पादन को अधिकतम करने तथा इसके वितरण को घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
- साथ ही, रिफाइनरियों को प्रोपेन तथा ब्यूटेन प्रवाहों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन की ओर मोड़ने से प्रतिबंधित किया गया है, ताकि इन प्रमुख घटकों का उपयोग मुख्यतः LPG आपूर्ति के लिये किया जा सके।
- केंद्र सरकार ने तेल रिफाइनरियों को LPG के उत्पादन को अधिकतम करने तथा इसके वितरण को घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।
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और पढ़ें: आवश्यक वस्तु (EC) अधिनियम, 1955 |
जन औषधि दिवस 2026
चर्चा में क्यों?
जन औषधि दिवस 2026 (7 मार्च) पर, जिसका विषय था "जनऔषधि सस्ती भी, भरोसेमंद भी, सेहत की बात, बचत के साथ", प्रधानमंत्री ने लाखों लोगों के लिये दवा की लागत कम करने में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) की भूमिका को उजागर किया।
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना क्या है?
- परिचय: PMBJP रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत औषध विभाग द्वारा संचालित एक प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं और शल्य चिकित्सा सामग्री को सभी के लिये, विशेषकर आर्थिक रूप से वंचित लोगों के लिये, किफायती (50-80% कम लागत पर) बनाना है, ताकि स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले जेब
- यह योजना मूलतः वर्ष 2008 में जन औषधि योजना के रूप में शुरू हुई थी और वर्ष 2016 में इसका नाम परिवर्तन कर इसे PMBJP कर दिया गया और इसमें विस्तार किया गया।खर्च में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।
- उत्पाद पोर्टफोलियो: इस योजना में उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला है, जिसके अंतर्गत 29 चिकित्सीय श्रेणियों (कैंसर रोधी, हृदय रोग संबंधी और मधुमेह रोधी दवाओं सहित) में लगभग 2,110 दवाएँ और 315 शल्य चिकित्सा संबंधी वस्तुएँ/उपभोग्य वस्तुएँ प्रदान की जाती हैं।
- गुणवत्ता आश्वासन: दवाओं का प्रापण केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (GMP) प्रमाणित निर्माताओं से ही किया जाता है और राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में इनका परीक्षण किया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि किफायती कीमत के लिये गुणवत्ता से समझौता न हो।
- नागरिक-केंद्रित पहलें:
- जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन: वर्ष 2019 में शुरू की गई इस पहल के अंतर्गत ओक्सो-बायोडिग्रेडेबल नैपकिन मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा दिये जाने के उद्देश्य से प्रति पैड 1 रुपये की अत्यधिक रियायती दर पर बेचे जाते हैं।
- जन औषधि सुगम ऐप: वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया यह डिजिटल टूल केंद्रों का जियो-लोकेशन, दवाओं की उपलब्धता और ब्रांडेड विकल्पों की तुलना में बचत दिखाने की सुविधा प्रदान करता है।
- समावेशी उद्यमिता मॉडल: यह योजना फ्रेंचाइज़ी आधारित मॉडल पर आधारित है। इसमें विशेष समूहों जैसे महिलाएँ, SC/ST, दिव्यांगजन और पूर्व सैनिकों को उद्यमिता के लिये प्रोत्साहित करने हेतु 2 लाख रुपये (फर्नीचर, फिक्स्चर और कंप्यूटर उपकरण हेतु) तक की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
- रणनीतिक विस्तार और एकीकरण:
- लक्ष्य: ग्रामीण, दूरस्थ और अल्प सुविधा प्राप्त क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, केंद्रों की संख्या को वर्ष 2026 की शुरुआत तक 18,000 से बढ़ाकर मार्च 2027 तक 25,000 करना।
- नवोन्मेषी स्थान: अंतिम वर्ग तक पहुँच को बेहतर बनाने के लिये उपयुक्त और रणनीतिक स्थानों पर केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं , जिनमें रेलवे स्टेशनों पर 116 केंद्र (जनवरी 2026 तक) और सरकारी अस्पताल परिसर के भीतर स्थित केंद्र शामिल हैं।
- सहकारी भागीदारी: प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का पूर्णतम उपयोग कर केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जो दूरस्थ वर्ग तक पहुँचने के लिये अपने विशाल ग्रामीण नेटवर्क और बुनियादी ढाँचे का उपयोग कर रही हैं।
- आर्थिक प्रभाव: जून 2025 तक, इस योजना के परिणामस्वरूप ब्रांडेड विकल्पों की तुलना में नागरिकों को लगभग 38,000 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):
1. प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएँ और शल्य चिकित्सा सामग्री 50-90% कम कीमतों पर उपलब्ध कराना है, जिससे स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाला जेब खर्च कम हो सके।
2. PMBJP योजना का संचालन किस मंत्रालय द्वारा किया जाता है?
इसका कार्यान्वयन रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन औषध विभाग द्वारा, भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (PMBI) के माध्यम से किया जाता है।
3. PMBJP के अंतर्गत जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाती है?
दवाओं को WHO-GMP प्रमाणित निर्माताओं से प्राप्त किया जाता है और वितरण से पहले NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में उनका परीक्षण किया जाता है।
4. जन औषधि सुविधा सेनेटरी नैपकिन पहल क्या है?
वर्ष 2019 में शुरू की गई यह पहल के अंतर्गत 1 रुपये प्रति पैड की दर से ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराई जाती है, जिससे किफायती मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा मिलता है।
5. PMBJP के तहत जन औषधि केंद्रों के विस्तार का लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य विशेष रूप से ग्रामीण और अल्प सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में वर्ष 2026 में मौजूद 18,000 से अधिक केंद्रों की संख्या को मार्च 2027 तक बढ़ाकर 25,000 करना है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2023)
कथन- I: भारत की सार्वजनिक क्षेत्रक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली सीमित निरोधक, वर्द्धक और पुनःस्थापक देखभाल के साथ मुख्यतः रोगनाशक व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करती है।
कथन- II: भारत के स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के विकेंद्रीकृत उपागम के अंतर्गत, राज्य प्राथमिक रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को जुटाने के लिये उत्तरदायी हैं।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं और कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है।
(b) कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं, किंतु कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या नहीं है।
(c) कथन-I सही है किंतु कथन-II गलत है।
(d) कथन-I गलत है किंतु कथन-II सही है।
उत्तर: (b)
भारत ने ICC पुरुष T20 वर्ल्ड कप 2026 जीता
भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) पुरुष T20 वर्ल्ड कप 2026 जीतकर न्यूज़ीलैंड को फाइनल में 96 रन से हराया। यह मुकाबला नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद में हुआ और यह T20 वर्ल्ड कप में भारत की अब तक की सबसे बड़ी जीत (रनों के अंतर से) है।
- जसप्रीत बुमराह को प्लेयर ऑफ द मैच और संजू सैमसन को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट घोषित किया गया।
- ऐतिहासिक उपलब्धियाँ: भारतीय टीम T20 वर्ल्ड कप को तीन बार (2007, 2024, 2026) जीतने वाली पहली टीम बन गई है। इसके अलावा अपने खिताब को सफलतापूर्वक डिफेंड करने वाली और घरेलू मैदान पर यह टूर्नामेंट जीतने वाली भी पहली टीम बनी।
- पुरुष T20 वर्ल्ड कप: पुरुष T20 वर्ल्ड कप, जिसे ICC द्वारा आयोजित किया जाता है, एक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट चैंपियनशिप है। इसे पहली बार वर्ष 2007 में आयोजित किया गया था और आमतौर पर यह हर दो वर्ष में खेला जाता है।
- ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 के लिये पुरस्कार राशि कुल 13.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें विजेता टीम को 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर दिये जाएंगे।
- भारत–ICC वर्ल्ड रैंकिंग: अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद टीम रैंकिंग में पुरुष टीमों को टेस्ट, एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ODI) और T20 अंतर्राष्ट्रीय (T20I) प्रारूपों में तथा महिला टीमों को ODI और T20 अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में रैंक किया जाता है। यह रैंकिंग डेविड केंडिक्स द्वारा विकसित रेटिंग प्रणाली के आधार पर तैयार की जाती है।
- रेटिंग की गणना कुल अंकों को खेले गए मैचों/सीरीज़ की संख्या से विभाजित करके की जाती है और रैंकिंग को प्रतिवर्ष लगभग 1 मई के आसपास अपडेट किया जाता है।
- मार्च 2026 तक, भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम T20I और ODI दोनों प्रारूपों में विश्व की नंबर 1 रैंकिंग पर है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में इसका रैंकिंग नंबर 4 है।
- भारत की महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम वर्तमान में T20I और ODI, दोनों प्रारूपों में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है।
- क्रिकेट का नियमन:
- अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC): यह क्रिकेट का वैश्विक शासी निकाय है, जो 108 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करता है। इसका मुख्यालय दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित है और यह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के नियमों, टूर्नामेंटों तथा प्रशासन के नियमन के लिये ज़िम्मेदार है।
- ICC पुरुष T20 वर्ल्ड कप 2028 की मेज़बानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड संयुक्त रूप से करेंगे।
- भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI): वर्ष 1928 में स्थापित और मुंबई में मुख्यालय वाला BCCI भारत में क्रिकेट का शासी निकाय है। यह वर्ष 1928 में ही ICC का पूर्ण सदस्य भी बन गया था, जिससे भारत को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का अधिकार प्राप्त हुआ।
- अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC): यह क्रिकेट का वैश्विक शासी निकाय है, जो 108 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करता है। इसका मुख्यालय दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित है और यह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के नियमों, टूर्नामेंटों तथा प्रशासन के नियमन के लिये ज़िम्मेदार है।
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जल महोत्सव 2026
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर, जिसे ‘सुजलाम शक्ति दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है, गुजरात से पूरे देश में जल महोत्सव 2026 अभियान का शुभारंभ किया।
जल महोत्सव 2026
- परिचय: यह केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल जीवन मिशन और पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा संचालित एक मुख्य अभियान है, जिसे प्रत्येक वर्ष 8 मार्च से 22 मार्च तक मनाया जाता है। इसकी टैगलाइन है: ‘गाँव का उत्सव, देश का महोत्सव (Village's festival, nation's festival)’।
- इसका उद्देश्य ग्रामीण पेयजल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी को सशक्त बनाना और जल जीवन मिशन (JJM) के तहत जल संरक्षण को प्रोत्साहन प्रदान करना है।
- मुख्य कार्यक्रम:
- जल अर्पण दिवस: इस दिवस का शुभारंभ ग्रामीण पेयजल संसाधनों को ग्राम पंचायतों (GP) और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को औपचारिक रूप से सौंपने की एक समारोहपूर्वक प्रक्रिया से किया गया।
- जल बंधन और जल संकल्प: जल बंधन (पेयजल अवसंरचना स्थलों पर पवित्र धागे बाँधना) और जल संकल्प (जल संरक्षण के लिये प्रतिज्ञा) जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं, ताकि ग्राम जल प्रणालियों की सुरक्षा और रख-रखाव में सामुदायिक सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की जा सके।
- बहु-स्तरीय क्रियान्वयन: जल महोत्सव को चार स्तरों राष्ट्रीय, राज्य, ज़िला और ग्राम पंचायत पर संरचित किया गया है, ताकि समन्वित और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
- ग्राम पंचायत स्तर पर गतिविधियों में शामिल हैं: ‘हर घर जल’ घोषणाएँ, ‘जल चौपाल’ संवाद, स्कूलों में जल गुणवत्ता परीक्षण प्रदर्शन और ‘लोक जल उत्सव’ कैलेंडर की तैयारी।
- महिलाएँ केंद्र में (सुसजल शक्ति): इस अभियान ने जल प्रबंधन में महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका को उजागर किया। उदाहरण के लिये, 24 लाख से अधिक महिलाएँ फील्ड टेस्टिंग किट्स (FTK) का उपयोग करके जल गुणवत्ता परीक्षण में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
- इस अभियान ने महिला पंप ऑपरेटरों, स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्याओं और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति (VWSC) के सदस्यों के नेतृत्व को भी मान्यता प्रदान की, यह मानते हुए कि नल के पानी तक पहुँच ने पानी लाने के भार को कम किया है।
- कन्वर्जेंस और विज़न: यह अभियान इंटर-मिनिस्ट्रियल कन्वर्जेंस (मंत्रालयों के बीच संविलयन) को बढ़ावा देता है और ‘सुसजल ग्राम’ (जल-संपन्न गाँवों) की दिशा में एक राष्ट्रीय स्तर की आंदोलन बनाने का लक्ष्य रखता है, जो सीधे ‘विकसित भारत (Developed India)’ के व्यापक दृष्टिकोण में योगदान देता है।
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राजकीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति हेतु निर्धारित प्रोटोकॉल
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति ने अपने कार्यक्रम में राज्य की मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों की अनुपस्थिति पर असंतोष व्यक्त किया, जिसके कारण प्रोटोकॉल उल्लंघन और अपमान के आरोपों के साथ एक राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ।
राज्यों में राष्ट्रपति के स्वागत हेतु प्रोटोकॉल
- वरीयता एवं प्रोटोकॉल: राष्ट्रीय वरीयता तालिका में भारत के राष्ट्रपति का सर्वोच्च स्थान है। इसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रपति की सभी यात्राएँ ब्लू बुक में सूचीबद्ध कड़े सुरक्षा एवं रसद संबंधी दिशानिर्देशों के अधीन होती हैं।
- 'ब्लू बुक': 'ब्लू बुक' केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया एक गोपनीय प्रलेख है जो राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्राओं के प्रबंधन के लिये विस्तृत ढाँचा प्रदान करता है।
- इसे ज़िला मजिस्ट्रेट और ज़िला पुलिस प्रमुख द्वारा रखा जाता है, जिसमें सुरक्षा, रसद और औपचारिक व्यवस्थाओं के लिये सभी प्रक्रियाओं का विवरण होता है।
- स्थापित परंपरा: प्रोटोकॉल के अनुसार राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को राष्ट्रपति के आगमन पर (आमतौर पर हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन अथवा अन्य प्रवेश बिंदु पर) उनका स्वागत करना चाहिये तथा प्रस्थान के समय उन्हें विदा करना चाहिये।
- हालाँकि, यदि मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पाते हैं, तो वे किसी वरिष्ठ मंत्री को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त कर सकते हैं।
- पूर्व अनुमोदन: किसी भी प्रोटोकॉल उल्लंघन से बचने के लिये राष्ट्रपति के स्वागत तथा उनसे भेंट करने वाले सभी व्यक्तियों की सूची को राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा पूर्व में अनुमोदित किया जाता है। स्वीकृत सूची अथवा ब्लू बुक में निर्धारित प्रक्रियाओं से किसी भी प्रकार का विचलन प्रोटोकॉल उल्लंघन माना जाता है।
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