जैव विविधता अभिसमय के समक्ष भारत की 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट | 07 Mar 2026
स्रोत: डाउन टू अर्थ
चर्चा में क्यों?
भारत ने जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) को अपनी 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क (KMGBF) के अनुरूप 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (NBT) और 142 संकेतकों की दिशा में देश की प्रगति का व्यापक मूल्यांकन प्रदान किया गया है।
- 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों में से केवल 2 ही सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में शेष लक्ष्यों के लिये नीतियों की रूपरेखा दी गई है, लेकिन इसमें मात्रात्मक साक्ष्य या वर्ष 2030 के लिये स्पष्ट अनुमानों का अभाव है।
जैव विविधता पर कन्वेंशन को प्रस्तुत की गई 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट के संबंध में प्रमुख तथ्य क्या हैं ?
- परिचय: वर्ष 2022 में KMGBF के अंगीकरण के बाद से यह भारत का पहला ‘पूर्ण प्रगति आकलन’ है, जो वर्ष 2030 तक जैव विविधता के ह्रास को रोकने के लिये राष्ट्र की प्रतिबद्धता पर एक महत्त्वपूर्ण ‘रियलिटी चेक’ के रूप में कार्य करता है।
- तैयारी और कार्यक्षेत्र: यह रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा 33 केंद्रीय मंत्रालयों, भारतीय वन्यजीव संस्थान, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण से प्राप्त सुझावों और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) से प्राप्त तकनीकी सहायता के साथ तैयार की गई है।
- रिपोर्ट का महत्त्व: विश्व के सर्वाधिक जैव विविधता वाले देशों में से एक होने के नाते भारत का प्रदर्शन वैश्विक जैव विविधता परिणामों के लिये महत्त्वपूर्ण है। रिपोर्ट के आँकड़े KMGBF के 23 वैश्विक लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति पर नज़र रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय आकलन में सहायक होंगे, जिनमें '30×30' लक्ष्य (वर्ष 2030 तक भूमि और समुद्र के 30% हिस्से का संरक्षण) भी शामिल है।
- लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में प्रगति: डिजिटल NR7 डेटा पोर्टल के माध्यम से संकलित 142 राष्ट्रीय संकेतकों का उपयोग करके प्रगति का आकलन किया जाता है।
- NBT1 (जैव विविधता-समावेशी योजना): वन और वृक्ष आवरण में निरंतर प्रगति हुई है और अब यह 25.17% (827,357 वर्ग किमी.) है, जो वर्ष 2021 और 2023 के दौरान 1,445.81 वर्ग किमी. की वृद्धि को दर्शाती है। आर्द्रभूमि सूचीकरण पूर्ण किया जा चुका है, PARIVESH 2.0 पोर्टल ने पर्यावरणीय स्वीकृतियों को सुव्यवस्थित किया है तथा पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों को अधिसूचित किया गया है।
- NBT2 (पारिस्थितिक तंत्र पुनर्स्थापन): भारत ने अपने 'बॉन चैलेंज' संकल्प के तहत 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि के लक्ष्य के मुकाबले 24.1 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया है अथवा पुनर्स्थापन की प्रक्रिया में रखा है।
- भारत के वन कार्बन भंडार में लगभग 81.5 मिलियन टन की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 7,285.5 मिलियन टन हो गया, जबकि मैंग्रोव क्षेत्र में मामूली वृद्धि हुई तथा बाँस क्षेत्र में 1,540 वर्ग किमी. का विस्तार दर्ज किया गया है।
- समुद्री संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार हुआ है और सरकार अब औपचारिक संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क से परे अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (OECM) की पहचान कर रही है।
- महत्त्वपूर्ण चुनौतियाँ और चिंताएँ:
- भूमि अपक्षय: पुनर्स्थापना प्रयासों के बावजूद भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 29.77% (97 मिलियन हेक्टेयर) अपक्षय के अधीन है, जिससे यह संकेत मिलता है कि नए अपक्षय की दर पुनर्स्थापना की तुलना में अधिक हो सकती है।
- संरक्षण कवरेज (30x30 लक्ष्य): भारत के भौगोलिक क्षेत्र का केवल 5% से थोड़ा अधिक हिस्सा औपचारिक रूप से संरक्षित क्षेत्रों के रूप में नामित है। रिपोर्ट यह स्पष्ट नहीं करती कि क्या भारत 2030 तक वैश्विक 30% संरक्षण लक्ष्य प्राप्त करेगा।
- प्रजातियों के पुनरुद्धार में पक्षपात: प्रमुख प्रजातियों (जैसे– बाघ 3,167, एशियाई शेर, गैंडे और पहली राष्ट्रीय हिम तेंदुआ मूल्यांकन) की सफलता को अधिक महत्त्व दिया गया है। हालाँकि कम परिचित प्रजातियों के बारे में डेटा सीमित है।
- डेटा अंतराल और निगरानी: जैव विविधता का डेटा विभिन्न विभागों में बिखरा हुआ है और नए संकेतकों के लिये कोई एक समान विधि नहीं है। अलग-अलग संग्रह अंतराल और तेज़ी से हो रहे तकनीकी बदलावों के कारण दीर्घकालिक रुझानों की तुलना करना कठिन है।
- आर्थिक और तकनीकी क्षमता: रिपोर्ट में सीमित वित्तीय संसाधन और तकनीकी क्षमता को संरचनात्मक बाधाओं के रूप में दर्शाया गया है, साथ ही पारिस्थितिक तंत्रों पर जलवायु परिवर्तन (बाढ़, सूखा, वनाग्नि) के बढ़ते प्रभाव को भी उजागर किया गया है।
- कृषि और आक्रामक प्रजातियाँ: हालाँकि देश के 8.65% हिस्से पर कृषि-वानिकी का विस्तार है, लेकिन रिपोर्ट में कीटनाशकों की कमी, पोषक तत्त्वों के अपवाह तथा आक्रामक प्रजातियों के नियंत्रण जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर मात्रात्मक विश्लेषण का अभाव है, जो जैव विविधता के नुकसान के प्रमुख कारक हैं।
कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा
- परिचय: KMGBF एक महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिसे दिसंबर 2022 में जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (CBD) के पार्टीज़ की कॉन्फ्रेंस (COP15) में अपनाया गया।
- इसका उद्देश्य 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकना और पलटना तथा वर्ष 2050 तक प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन सुनिश्चित करना है। यह पूर्व के आइची जैव विविधता लक्ष्यों (2011-20) की जगह लेता है।
- ढाँचा: यह चार दीर्घकालिक लक्ष्यों के इर्द-गिर्द बनाया गया है जो वर्ष 2050 के लिये हैं (प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन की दृष्टि) और 23 क्रियात्मक लक्ष्यों हेतु 2030 तक (वैश्विक उपलब्धि) निर्धारित किये गए हैं, जो पारिस्थितिक तंत्र संरक्षण, सतत उपयोग और लाभ-साझाकरण जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल करते हैं।
- 30x30" लक्ष्य (लक्ष्य 3): इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वर्ष 2030 तक विश्व के कम-से-कम 30% स्थलीय, अंतर्देशीय जल और तटीय एवं समुद्री क्षेत्रों को संरक्षित क्षेत्रों तथा 'अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों' (OECMs) के माध्यम से प्रभावी ढंग से संरक्षित एवं प्रबंधित किया जाए। यह वर्तमान वैश्विक कवरेज के लगभग 16% से एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है।
- कार्यान्वयन तंत्र: जैव विविधता अभिसमय (CBD) के सभी पक्षों, जिसमें भारत भी शामिल है, के लिये यह आवश्यक है कि वे GBF के अनुरूप अपने राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें लागू करें, अपनी 'राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीतियों और कार्ययोजनाओं' (NBSAPs) को अद्यतन (Update) करें तथा प्रगति की निगरानी के लिये मज़बूत निगरानी प्रणालियाँ स्थापित करें।
जैव विविधता पर अभिसमय
- परिचय: जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन से उत्पन्न एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जो जैविक संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग के लिये प्राथमिक वैश्विक ढाँचा प्रदान करती है।
- तीन मुख्य उद्देश्य: CBD तीन परस्पर संबंधित लक्ष्यों पर आधारित है:
- जैव विविधता का संरक्षण,
- इसके घटकों का सतत उपयोग, और
- आनुवंशिक संसाधनों से उत्पन्न लाभों का उचित व न्यायसंगत साझाकरण।
- व्यापक क्षेत्र: यह अभिसमय जैव विविधता को सभी स्तरों पर कवर करता है, जिसमें प्रजातियों में विविधता (आनुवंशिक) और पारिस्थितिक तंत्र शामिल है। यह स्थलीय, समुद्री और अन्य जलीय पारिस्थितिक तंत्रों पर लागू होता है।
- प्रमुख पूरक प्रोटोकॉल:
- कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल (2000): आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी से उत्पन्न सजीव संशोधित जीवों (LMO) के सुरक्षित संचालन, परिवहन और उपयोग पर केंद्रित है।
- नागोया अभिगम और लाभ साझाकरण प्रोटोकॉल (2010): आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न लाभों के उचित और न्यायसंगत साझाकरण के लिये एक कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, जिससे CBD के तीसरे उद्देश्य को क्रियान्वित किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा (KMGBF) क्या है?
यह CBD के 15वें अभिसमय (COP15, 2022) में अपनाया गया एक वैश्विक समझौता है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक जैव विविधता के नुकसान को कम करना है, जो वर्ष 2030 के लिये 23 लक्ष्यों और वर्ष 2050 के लिये चार दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया गया है।
2. KMGBF के तहत "30x30 लक्ष्य" क्या है?
इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक संरक्षित क्षेत्रों और अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (OECM) के माध्यम से विश्व की कम-से-कम 30% भूमि, अंतर्देशीय जल और समुद्री क्षेत्रों का संरक्षण करना है।
3. 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार भारत में कौन-से जैव विविधता लक्ष्य वर्तमान में सही दिशा में हैं?
NBT1 (जैव विविधता-समावेशी भूमि और समुद्री उपयोग योजना) और NBT2 (पारिस्थितिक तंत्र बहाली) को 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों में से सही दिशा में होने के रूप में पहचाना गया है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रश्न. भूमंडलीय पर्यावरण सुविधा' के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2014)
(a) यह 'जैव विविधता पर अभिसमय' एवं 'जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र ढाँचा अभिसमय' के लिये वित्तीय क्रियाविधि के रूप में काम करता है
(b) यह भूमंडलीय स्तर पर पर्यावरण के मुद्दों पर वैज्ञानिक अनुसंधान करता है
(c) यह OECD के अधीन एक अभिकरण है, जो अल्पविकसित देशों को उनके पर्यावरण की सुरक्षा के विशिष्ट उद्देश्य से प्रौद्योगिकी और निधियों का अंतरण सुकर बनाता है
(d) दोनों (a) और (b)
उत्तर: (a)
प्रश्न. ‘‘मोमेंटम फॉर चेंज: क्लाइमेट न्यूट्रल नाउ’’ यह पहल किसके द्वारा प्रवर्तित की गई है? (2018)
(a) जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल
(b) UNEP सचिवालय
(c) UNFCCC सचिवालय
(d) विश्व मौसमविज्ञान संगठन
उत्तर: (c)
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