वर्षांत समीक्षा-2025: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय | 31 Dec 2025
प्रिलिम्स के लिये: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY), इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), इथेनॉल, कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG), सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (HELP), 2016, सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR), व्यापार घाटा, महंगाई, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, चाबहार बंदरगाह, महत्त्वपूर्ण खनिज, लिथियम, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM), स्माल मॉड्यूलर रिएक्टर।
मेन्स के लिये: वर्ष 2025 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की मुख्य उपलब्धियाँ, भारत के लिये ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने में चुनौतियाँ और आगे की राह।
चर्चा में क्यों?
वर्ष 2025 में, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने किफायती और सतत ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिये एक बहुआयामी रणनीति लागू की, जिसमें अवसंरचना का विस्तार, स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा देना तथा ऊर्जा सुरक्षा के लिये रणनीतिक भंडारों को सुदृढ़ करना शामिल था।
- ऊर्जा सुरक्षा का तात्पर्य किसी राष्ट्र के लिये किफायती मूल्य पर ऊर्जा स्रोतों की निर्बाध उपलब्धता से है, जो उसकी आर्थिक स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सतत विकास को सुनिश्चित करती है।
सारांश
- वर्ष 2025 में भारत ने अवसंरचना विस्तार, स्वच्छ ईंधनों और नियामक सुधारों को समेकित करते हुए एक बहुआयामी ऊर्जा रणनीति अपनाई।
- विविधीकरण के बावजूद, उच्च आयात निर्भरता, भू-राजनीतिक जोखिम और महत्त्वपूर्ण खनिजों की कमी प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
- दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिये घरेलू उत्पादन, भंडारण सहित स्वच्छ ऊर्जा, खनिज आत्मनिर्भरता और भू-रणनीतिक कूटनीति आवश्यक है।
वर्ष 2025 में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या रहीं?
- स्वच्छ रसोई ईंधन की उपलब्धता: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के अंतर्गत लगभग 10.35 करोड़ लाभार्थियों तक पहुँच बनाई गई। वित्त वर्ष 2025-26 के लिये 25 लाख नए कनेक्शनों को स्वीकृति दी गई, जबकि सरल ‘वंचना घोषणा’ प्रक्रिया ने नामांकन को आसान बनाया।
- PMUY लाभार्थियों को ₹300 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी से वित्त वर्ष 2025-26 में औसत रिफिल खपत बढ़कर लगभग 4.85 प्रति वर्ष हो गई, जो LPG के सतत उपयोग को दर्शाती है।
- मार्केटिंग अवसंरचना का विस्तार: 90,000 से अधिक खुदरा आउटलेट्स का डिजिटलीकरण किया गया, 8,400 से अधिक CNG स्टेशन और लगभग 1.57 करोड़ PNG कनेक्शन स्थापित किये गए। 25,429 किमी गैस पाइपलाइन परिचालन में है (अतिरिक्त 10,459 किमी पर कार्य प्रगति पर है)।
- स्वच्छ गतिशीलता एवं ईंधन: 27,400 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किये गए। 4,000 एनर्जी स्टेशन बहु-ईंधन हब के रूप में नियोजित हैं, जिनमें से 1,064 पहले ही परिचालन में हैं।
- गैस ग्रिड एवं टैरिफ सुधार: एकीकृत पाइपलाइन टैरिफ व्यवस्था (वन नेशन, वन ग्रिड, वन टैरिफ) लगभग 90% पाइपलाइनों को शामिल करती है, जिससे क्षेत्रीय लागत असमानताएँ कम हुई हैं।
- जैव ईंधन एवं सतत विमानन ईंधन (SAF): इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ESY) 2024-25 में इथेनॉल मिश्रण 19.24% तक पहुँच गया।
- वित्त वर्ष 2025-26 से कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) के मिश्रण को अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के लिये रोडमैप निर्धारित किया गया है, जिसके तहत वर्ष 2027 से 1–5% मिश्रण लक्ष्य तय किये गए हैं।
- अपस्ट्रीम सुधार: तेल क्षेत्र (विनियमन एवं विकास) संशोधन अधिनियम, 2025 तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 2025 लागू किये गए। हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (HELP), 2016 के तहत 3.78 लाख वर्ग किमी से अधिक क्षेत्रफल वाले ब्लॉकों का आवंटन किया गया, जिससे लगभग 4.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर के प्रतिबद्ध निवेश आकर्षित हुए।
- सामरिक भंडार: सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) की चरण-II सुविधाओं को आगे बढ़ाया गया, जिससे आपूर्ति आघातों के विरुद्ध ऊर्जा सुरक्षा मज़बूत हुई।
- भारत की SPR सुविधाएँ विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलुरु (कर्नाटक) और पडूर (कर्नाटक) में स्थित हैं। चरण-II में चांदीखोल (ओडिशा) में एक नई सुविधा तथा पडूर में विस्तार शामिल है।
भारत के लिये ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
- उच्च और बढ़ती आयात निर्भरता: भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% और प्राकृतिक गैस की लगभग 50% आवश्यकता आयात से पूरी करता है। वित्त वर्ष 2024-2025 में घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन घटकर 28.7 मिलियन टन (MT) रह गया (वित्त वर्ष 2024 में 29.4 MT से), जिससे वैश्विक मूल्य आघातों के प्रति गंभीर संवेदनशीलता उत्पन्न होती है।
- इस जोखिम का उदाहरण वर्ष 2022 के यूक्रेन संकट में देखने को मिला, जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 130 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई, जिससे भारत का व्यापार घाटा और मुद्रास्फीति गंभीर रूप से बढ़ गई।
- भू-राजनीतिक संवेदनशीलता: रूस से भारत द्वारा तेल खरीद के कारण गंभीर आर्थिक प्रभाव सामने आए, जिनमें नायरा एनर्जी पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध, रूसी कंपनियों पर अमेरिका के प्रतिबंध तथा अमेरिका द्वारा लगाया गया 25% टैरिफ और अधिभार शामिल हैं।
- भारत के कच्चे तेल आयात का अधिकांश भाग अस्थिर मध्य पूर्व क्षेत्र से आता है, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे चोकपॉइंट्स से होकर गुजरता है और चाबहार बंदरगाह परियोजना के निलंबन जैसी बाधाओं का सामना करता है।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता: ऊर्जा संक्रमण के लिये आवश्यक लिथियम, कोबाल्ट और निकेल सहित 10 महत्त्वपूर्ण खनिजों के लिये भारत 100% आयात-निर्भर है। यह स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), रक्षा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों के लिये गंभीर जोखिम उत्पन्न करता है। चीन दुर्लभ मृदा प्रसंस्करण का 90% से अधिक, ग्रेफाइट प्रसंस्करण का 95% और परिष्कृत कोबाल्ट उत्पादन का 79% नियंत्रित करता है।
- नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना की बाधाएँ: जनवरी 2025 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता लगभग 217 GW तक पहुँच चुकी है, लेकिन ट्रांसमिशन में देरी, कॉरिडोर भीड़ तथा कमज़ोर माँग जैसी गंभीर सीमाओं का सामना करना पड़ रहा है।
- बड़े पैमाने की सौर और पवन परियोजनाओं का 60% से अधिक केवल तीन राज्यों—गुजरात, राजस्थान तथा तमिलनाडु में केंद्रित है, जिससे अत्यधिक मौसमीय घटनाओं और युद्ध या हाइब्रिड खतरों जैसी भू-राजनीतिक तनावों के प्रति जोखिम बढ़ जाता है।
- सामरिक पेट्रोलियम भंडार की अपर्याप्तता: भारत की कुल तेल भंडारण क्षमता और सामरिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) मिलकर लगभग 77 दिनों की आवश्यकता को ही पूरा कर पाते हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की अनिवार्य 90-दिवसीय शर्त से 13 दिन कम है। भारत की परिमाणित भंडारण क्षमता केवल 39 मिलियन बैरल है, जो चीन के 550 मिलियन बैरल और जापान के 528 मिलियन बैरल की तुलना में बहुत कम है।
- संसाधनों के लिये वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा: अफ्रीका व लैटिन अमेरिका में चीन के राज्य-समर्थित अनुबंध तथा यूरोपीय संघ की हाइड्रोजन आयात रणनीति महत्त्वपूर्ण खनिजों और भविष्य के ईंधनों के लिये वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा को और तीव्र कर देती हैं। चीन की साइनोपेक (Sinopec) और CNPC की तुलना में भारत के विदेशों में रणनीतिक अधिग्रहण सीमित हैं, जिससे इन ऊर्जा बाज़ारों में उसकी सौदेबाज़ी क्षमता कमज़ोर पड़ती है।
भारत का ऊर्जा स्रोत
- पारंपरिक निर्भरता (2005 से पूर्व): कच्चे तेल के 70% से अधिक आयात पश्चिम एशिया से आते थे, मुख्यतः सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत और यूएई।
- प्रारंभिक विविधीकरण (2005-2015): आपूर्ति स्रोतों का विस्तार अफ्रीकी देशों (नाइजीरिया, अंगोला) और वेनेज़ुएला तक किया गया, हालाँकि पश्चिम एशिया अभी भी प्रमुख था (2011-12 में लगभग 60% हिस्सा)।
- ईरान पर प्रतिबंधों का प्रभाव: वर्ष 2010 के बाद संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल आयात में तीव्र गिरावट आई, जो वर्ष 2011-12 में लगभग 11% से घटकर वर्ष 2010 के मध्य तक 7% से कम रह गया, हालाँकि वर्ष 2016 के बाद थोड़ी वृद्धि देखी गई।
- वर्ष 2022 के बाद प्रमुख बदलाव: यूक्रेन संघर्ष के बाद, रूस भारत का प्रमुख आपूर्तिकर्त्ता बन गया, इसका हिस्सा वर्ष 2021-22 में 2% से कम से बढ़कर वर्ष 2023-25 में लगभग 36% हो गया, जो महत्त्वपूर्ण मूल्य छूटों के कारण हुआ।
- वर्तमान आयात मिश्रण: स्रोत अब अधिक संतुलित हैं: रूस (~35%), पश्चिम एशिया (40-45%), अफ्रीका (8-10%) और अमेरिका (10-12%)।
भारत के लिये ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक उपाय क्या है?
- घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना: तेल क्षेत्र (विनियमन एवं विकास) संशोधन अधिनियम, 2025 को पूरी तरह लागू करें, ताकि मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सके और फ्रंटियर बेसिनों जैसे कृष्णा-गोदावरी व अंडमान द्वीप समूह में अन्वेषण के लिये मिशन अन्वेशन का विस्तार किया जा सके। इसके अतिरिक्त, मुंबई हाई जैसे परिपक्व क्षेत्रों में एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी (EOR) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके उत्पादन दरों में सुधार किया जाना चाहिये।
- ऊर्जा आयातों का विविधीकरण: मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के लिये भारत को नए आपूर्तिकर्त्ताओं जैसे गुयाना, ब्राज़ील और कज़ाकिस्तान के साथ दीर्घकालिक अनुबंध करना चाहिये तथा यदि प्रतिबंधों में छूट होती है तो रुपया-रियाल तंत्र के माध्यम से ईरानी आयात को पुनर्जीवित करना चाहिये।
- साथ ही, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बायपास करने वाली पाइपलाइनों का उपयोग करना चाहिये, जैसे UAE की हबशान-फुजैरा पाइपलाइन और सऊदी अरामको की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, ताकि क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान आपूर्ति संबंधी संवेदनशीलता को कम किया जा सके।
- भंडारण के साथ स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति प्रदान करना: नए सौर/पवन ऊर्जा प्रस्तावों में 4 घंटे की बैटरी भंडारण अनिवार्यता को एकीकृत करना और हाइड्रोजन-तैयार पाइपलाइन विकसित करते हुए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को बढ़ाना।
- इसके साथ ही, 2G/3G फीडस्टॉक का उपयोग करके वर्ष 2030 तक इथेनॉल मिश्रण को 30% तक बढ़ाना और शहरी गैस वितरण नेटवर्क में संपीड़ित बायोगैस मिश्रण जनादेश को लागू करना।
- महत्त्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता का निर्माण: भारत को राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) को गति देनी चाहिये, PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से घरेलू शोधन क्षमता का निर्माण करना चाहिये और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने हेतु ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित करनी चाहिये। साथ ही, उसे दीर्घकालिक संसाधन सुरक्षा के लिये राष्ट्रीय भंडार स्थापित करना चाहिये और उन्नत पुनर्चक्रण के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिये।
- भूरणीय ऊर्जा कूटनीति: सीमा पार नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार के लिये अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG) पहल का समर्थन कीजिये। साथ ही, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक अनुकूलन बनाने के लिये अमेरिका, फ्राँस और रूस जैसे साझेदारों के साथ लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती करना।
निष्कर्ष:
वर्ष 2025 में भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति किफायत, विविधीकरण, स्थायित्व और रणनीतिक स्वायत्तता के बीच संतुलित दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है। जहाँ सुधारों, जैव-ईंधनों, गैस अवसंरचना और स्वच्छ परिवहन ने प्रणाली की मजबूती बढ़ाई है, वहीं आयात निर्भरता, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ, महत्त्वपूर्ण खनिजों की संवेदनशीलता और अपर्याप्त भंडारण क्षमता यह दर्शाती हैं कि व्यापक संरचनात्मक सुधारों और सक्रिय ऊर्जा कूटनीति की अब भी आवश्यकता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. “ऊर्जा सुरक्षा केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक महत्त्वपूर्ण भू-राजनीतिक चुनौती भी है।” इस कथन की वर्ष 2025 में भारत की ऊर्जा नीतियों के संदर्भ में समालोचनात्मक समीक्षा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. ऊर्जा सुरक्षा से क्या तात्पर्य है?
ऊर्जा सुरक्षा से तात्पर्य किफायती कीमतों पर ऊर्जा की निर्बाध उपलब्धता से है, जो आर्थिक स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सतत विकास के लिये आवश्यक है।
2. ऊर्जा आयात में विविधता लाने के बावजूद भारत इतना असुरक्षित क्यों है?
भारत अभी भी 85% कच्चे तेल का आयात करता है, भू-राजनीतिक बाधाओं का सामना करता है और आईईए मानदंडों की तुलना में पर्याप्त SPR क्षमता का अभाव है।
3. भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिये खनिजों पर निर्भरता एक प्रमुख कमजोरी क्यों है?
भारत स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्रों के लिये आवश्यक लिथियम और कोबाल्ट जैसे प्रमुख खनिजों के लिये 100% आयात पर निर्भर है, क्योंकि चीन वैश्विक प्रसंस्करण के 90% से अधिक को नियंत्रित करता है, जिससे आपूर्ति शृंखला में गंभीर जोखिम उत्पन्न होते हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2019)
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) भारत सरकार द्वारा स्थापित पहला नियामक निकाय है।
- PNGRB के कार्यों में से एक गैस के लिये प्रतिस्पर्द्धी बाज़ार सुनिश्चित करना है।
- PNGRB के फैसलों के खिलाफ अपील विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: b
प्रश्न. भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2015)
- यह एक पब्लिक लिमिटेड सरकारी कंपनी है।
- यह एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न 1. "वहनीय (ऐफोर्डेबल), विश्वसनीय, धारणीय तथा आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सतत् (सस्टेनबल) विकास लक्ष्यों (एस.डी.जी.) को प्राप्त करने के लिये अनिवार्य है।" भारत में इस संबंध में हुई प्रगति पर टिप्पणी कीजिये। (2018)