AI हेतु भारत का MANAV विज़न | 20 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
भारत के प्रधानमंत्री ने इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 में MANAV विज़न प्रस्तुत किया, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास को निर्देशित करने के लिये एक मानव-केंद्रित ढाँचा है जिसके मूल में नैतिकता, समावेशिता और राष्ट्रीय संप्रभुता है।
भारत का MANAV विज़न कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में क्या महत्त्व रखता है?
- MANAV की परिकल्पना AI को केवल एक स्वायत्त शक्ति होने के बजाय मानवीय आकांक्षाओं के विस्तार के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।
- यह पाँच मूलभूत स्तंभों का संक्षिप्त रूप है:
- M- नैतिक और नीतिगत प्रणाली (मॉरल एंड एथिकल सिस्टम): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक सुदृढ़ नैतिक और नीतिपरक प्रणाली पर आधारित होनी चाहिये।
- A – जवाबदेह शासन (अकाउंटेबल गवर्नेंस): पारदर्शी नियमों और सुदृढ़ निगरानी तंत्रों को सुनिश्चित करना।
- N- राष्ट्रीय संप्रभुता (नेशनल सोवरेंटी): यह सिद्धांत डेटा स्वामित्व को मज़बूत करता है: डेटा उन लोगों का रहता है जो इसे उत्पन्न करते हैं।
- A - सुलभ और समावेशी AI (एक्सेसिबल एंड इनक्लूसिव AI): AI को सामाजिक लाभ के लिये कार्य करना चाहिये, न कि कुछ ही हाथों में केंद्रित एकाधिकार के रूप में।
- V – वैध और न्यायसंगत प्रणाली (वैलिड एंड लेजिटिमेट सिस्टम): AI प्रणालियाँ और उनके अनुप्रयोग वैध, सत्यापन योग्य और भरोसेमंद होने चाहिये।
भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को भय या आशंका की दृष्टि से नहीं देखता, बल्कि इसे एक रणनीतिक संपत्ति और वैश्विक कल्याण का उपकरण मानता है। भारत का दृढ़ मत है कि AI 'सौभाग्य और भविष्य' (फॉर्च्यून एंड फ्यूचर) का वाहक है। इस सकारात्मक दृष्टिकोण का आधार देश की विशाल प्रतिभा, मज़बूत डिजिटल आधारभूत संरचना और एक सुस्पष्ट नीतिगत ढाँचा है।
भारत किस प्रकार MANAV विज़न को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हेतु आगे बढ़ा रहा है?
नैतिक और नीतिपरक AI प्रणालियों को सुनिश्चित करना
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020: भविष्य के लिये तैयार नागरिकों में नैतिक और डेटा-आधारित निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ावा देने के लिये शिक्षा प्रणाली में डिजिटल साक्षरता, कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI अवधारणाओं को प्रारंभिक चरण में ही एकीकृत करना महत्त्वपूर्ण है।
- जनभागीदारी: इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 में भारत ने 24 घंटों के भीतर AI ज़िम्मेदारी अभियान के लिये सबसे अधिक प्रतिज्ञाओं (250,946 से अधिक) का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, जिससे नैतिक AI को एक नीतिगत सिद्धांत से एक सामूहिक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में बदल दिया गया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता में जवाबदेह शासन को बढ़ावा देने के तंत्र
- इंडिया-AI मिशन: 10,300 करोड़ रुपये से अधिक के परिव्यय के साथ स्वीकृत होने के साथ यह शुरुआत से ही शासन तंत्र को समाहित करता है।
- इंडिया-AI मिशन AI सिस्टम के विकास, प्रयोजन और निगरानी के लिये मानकों को संस्थागत रूप प्रदान करता है जिससे कंप्यूट, डेटा, कौशल और नवाचार क्षमता मज़बूत होती है।
इंडिया AI गवर्नेंस दिशा-निर्देश, 2025: विश्वास, समानता, जवाबदेही और संवैधानिक लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित एक पारदर्शी नियामक संरचना स्थापित करता है।
डिजिटल युग में राष्ट्रीय संप्रभुता
- वैश्विक डिजिटल परिदृश्य में संप्रभुता: AI-प्रधान वैश्विक व्यवस्था में संप्रभुता का दायरा भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़ते हुए डेटा नियंत्रण, एल्गोरिद्मिक संरचनाओं तथा डिजिटल अवसंरचना को भी समाहित करता है
- आत्मनिर्भरता संबंधी पहल: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से भारत महत्त्वपूर्ण डेटासेट को सुरक्षित कर रहा है तथा घरेलू कंप्यूटिंग क्षमता को मज़बूत कर रहा है।
- भारत, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जैसी पहलों और एक सुरक्षित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण के माध्यम से, आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास कर रहा है। इन कार्यक्रमों से महत्त्वपूर्ण डेटासेट को सुरक्षित करने और घरेलू कंप्यूटिंग क्षमता को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिल रही है।
- रणनीतिक स्वायत्तता और पैक्स सिलिका पहल: चिप्स और क्लाउड प्रौद्योगिकियों में अनुकूल क्षमताओं का निर्माण करके भारत यह सुनिश्चित करता है कि उसका AI पारिस्थितिक तंत्र वैश्विक स्तर पर सहयोगात्मक होने के साथ-साथ रणनीतिक रूप से स्वायत्त भी बना रहे।
- इस बात का और समर्थन करने के लिये भारत इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 में अमेरिका के नेतृत्व वाली 'पैक्स सिलिका' पहल में औपचारिक रूप से शामिल हुआ।
सुलभ और समावेशी AI सुनिश्चित करना
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): DPI स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और शासन जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सुलभ और विस्तृत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) समाधान को सक्षम बनाती है।
- कंप्यूटिंग का लोकतंत्रीकरण: मेघराज GI क्लाउड और IndiaAI कंप्यूट पोर्टल जैसे प्लेटफॉर्म स्टार्टअप और शोधकर्त्ताओं के लिये ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) और टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) का साझा उपयोग प्रदान करके प्रवेश बाधाओं को कम करते हैं।
- ग्रासरूट क्षमता: IndiaAI कोश (डेटासेट और AI मॉडल के लिये), AI डेटा लैब्स नेटवर्क और राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन जैसी पहलें मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि AI नवाचार व्यापक स्तर पर हो और समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे।
विश्वास, सुरक्षा और वैधता के लिये AI का नियमन
- डीपफेक्स से निपटना: लोकतांत्रिक संवाद और सामाजिक विश्वास पर कृत्रिम मीडिया के खतरों से निपटने के लिये AI प्रणाली को विधिक रूप से सत्यापन योग्य और पारदर्शी होना चाहिये।
- IT संशोधन नियम, 2026: सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 में सिंथेटिक रूप से उत्पन्न सामग्री को औपचारिक रूप से परिभाषित किया गया है तथा इसे सख्ती से नियंत्रित किया गया है, जिससे प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
- सुरक्षित और विश्वसनीय AI स्तंभ: भारत के IndiaAI मिशन का एक प्रमुख घटक यह है कि यह पक्षपात कम करने तथा एल्गोरिद्मिक ऑडिटिंग और गोपनीयता-संरक्षित डिज़ाइन का समर्थन करने में सहायक है ताकि नैतिक उद्देश्यों को लागू करने योग्य मानकों में बदला जा सके।
पैक्स सिलिका पहल
- यह संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाली रणनीतिक पहल है, जिसे दिसंबर 2025 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य सुरक्षित, लचीली और नवाचार-संचालित सिलिकॉन आपूर्ति शृंखला का निर्माण करना है।
- इसका उद्देश्य चीन के प्रभुत्व को कम करना और महत्त्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा संसाधन, सेमीकंडक्टर्स, उन्नत विनिर्माण, AI अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स में निर्भरता को रोकना है।
- पैक्स सिलिका के प्रमुख स्तंभों में से एक यह था कि साझेदार देशों में AI-संचालित समृद्धि को बढ़ावा देने के लिये एक स्थायी आर्थिक व्यवस्था बनाई जाए।
- पैक्स सिलिका के तहत प्रमुख उपायों का ध्यान उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में संयुक्त उद्यम और रणनीतिक सह-निवेश को बढ़ावा देने, संवेदनशील तकनीकों तथा महत्त्वपूर्ण अवसंरचना को संदेहास्पद देशों से सुरक्षित रखने एवं विश्वसनीय तकनीकी पारिस्थितिक तंत्र बनाने पर है।
- पैक्स सिलिका के सदस्य देशों में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़रायल, जापान, कतर, कोरिया गणराज्य, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
वैश्विक AI एजेंडा का विकास
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता सुरक्षा शिखर सम्मेलन, 2023 बैलेचली पार्क (यूके): इस सम्मेलन का ध्यान अस्तित्वगत AI जोखिम और फ्रंटियर मॉडल सुरक्षा पर था, जिसके परिणामस्वरूप बैलेचली डिक्लेरेशन और AI सेफ्टी संस्थानों की स्थापना हुई।
- AI सियोल समिट, दक्षिण कोरिया: इस सम्मेलन ने सुरक्षा, नवाचार और समावेशिता के बीच संतुलन स्थापित किया, तकनीकी कंपनियों ने स्वैच्छिक सुरक्षा प्रतिबद्धताएँ अपनाईं।
- AI एक्शन समिट 2025, पेरिस: इस सम्मेलन में ध्यान “सुरक्षा” से “कार्रवाई” की ओर गया, जिसमें AI में लोक हित, भविष्य का कार्य और AI सिस्टम की पर्यावरणीय स्थिरता पर बल दिया गया।
- ‘लोगों और ग्रह के लिये समावेशी और सतत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)’ पर संयुक्त वक्तव्य 58 देशों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया, जिसमें भारत भी शामिल है।
- इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026: वैश्विक दक्षिण में आयोजित पहला AI समिट होने के नाते, नई दिल्ली में यह बैठक भय आधारित प्रणाली से हटकर “लोग, ग्रह और प्रगति” दृष्टिकोण की ओर मुड़ने का प्रतीक बनी, जो त्वरित AI अपनाने के माध्यम से वास्तविक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित है।
- MANAV विज़न का समर्थन करते हुए भारत ने AI संसाधनों, जैसे– कंप्यूटिंग पावर और डेटासेट तक पहुँच का लोकतंत्रीकरण करने पर ज़ोर दिया तथा स्वैच्छिक वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दिया ताकि विकासशील देश केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि AI समाधानों के निर्माता बन सकें।
- आगामी समिट: स्विट्ज़रलैंड जेनेवा में AI इंपैक्ट समिट 2027 की मेज़बानी करेगा, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय AI कानून और समावेशी शासन पर ध्यान केंद्रित होगा। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात वर्ष 2028 में समिट आयोजित करेगा, जो ज़िम्मेदार AI विकास के लिये वैश्विक सहयोग को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।
निष्कर्ष
MANAV फ्रेमवर्क के माध्यम से भारत वैश्विक AI संवाद को सक्रिय रूप से आकार दे रहा है, जो तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय गरिमा को प्राथमिकता देता है। भारत का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) केवल एक अनियंत्रित तकनीकी शक्ति न बनकर समाज के लिये सुरक्षित, न्यायसंगत और रूपांतरकारी उपकरण के रूप में कार्य करे।
और पढ़ें: इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. भारत में मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस मॉडल बनाने में MANAV फ्रेमवर्क के महत्त्व पर चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. भारत की AI नीति में MANAV का दृष्टिकोण क्या है?
यह एक मानव-केंद्रित AI ढाँचा है जो AI प्रणालियों में नैतिकता, जवाबदेही, संप्रभुता, समावेशिता और कानूनी वैधता पर ध्यान केंद्रित करता है।
2. इंडियाAI मिशन क्या है?
यह 10,300 करोड़ रुपये से अधिक की एक पहल है जिसका उद्देश्य ज़िम्मेदार AI विकास के लिये कंप्यूटिंग क्षमता, डेटासेट, कौशल विकास, नवाचार और शासन तंत्र को मज़बूत करना है।
3. IT नियम संशोधन, 2026 AI जोखिमों को कैसे संबोधित करता है?
यह कृत्रिम मीडिया और डीपफेक को विनियमित करता है, जिससे डिजिटल सामग्री में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
4. पैक्स सिलिका पहल क्या है?
यह साझेदार देशों के बीच सुरक्षित सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला और विश्वसनीय AI पारिस्थितिक तंत्र बनाने के लिये अमेरिका के नेतृत्व वाली एक पहल है।
5. डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना AI समावेशन के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह कंप्यूटिंग संसाधनों, डेटासेट और AI उपकरणों तक सुलभ पहुँच को सक्षम बनाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि नवाचार स्टार्टअप, शोधकर्त्ताओं और वंचित क्षेत्रों तक पहुँच सकें।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न. विकास की वर्तमान स्थिति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है? (2020)
1. औद्योगिक इकाइयों में विद्युत की खपत कम करना
2. सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना
3. रोगों का निदान
4. टेक्स्ट से स्पीच (Text-to-Speech) में परिवर्तन
5. विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1,2,3 और 5
(b) केवल 1,3 और 4
(c) केवल 2,4 और 5
(d) 1,2,3,4 और 5
उत्तर: (b)
प्रश्न. 'वान्नाक्राई, पेट्या और इटर्नलब्लू' पद जो हाल ही में समाचारों में उल्लिखित थे, निम्नलिखित में से किसके साथ संबंधित हैं? (2018)
(a) एक्सोप्लैनेट्स
(b) प्रच्छन्न मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी)
(c) साइबर आक्रमण
(d) लघु उपग्रह
उत्तर: (c)
मेन्स
प्रश्न. कृत्रिम बुद्धि (एआई) की अवधारणा का परिचय दीजिये। एआई क्लिनिकल निदान में कैसे मदद करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में एआई के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं? (2023)
प्रश्न. भारत के प्रमुख शहरों में आईटी उद्योगों के विकास से उत्पन्न होने वाले मुख्य सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या हैं? (2022)
प्रश्न. "चौथी औद्योगिक क्रांति (डिजिटल क्रांति) के प्रादुर्भाव ने ई-गवर्नेंस को सरकार का अविभाज्य अंग बनाने में पहल की है।" विवेचन कीजिये। (2020)