प्रिलिम्स फैक्ट्स (03 Mar, 2026)



EASE 9.0 के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) में सुधार

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स

चर्चा में क्यों?

EASE 9.0 सुधार एजेंडा के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग, उत्पादकता में वृद्धि तथा नवीन व्यवसाय मॉडलों के माध्यम से विस्तार की दिशा में महत्त्वपूर्ण संरचनात्मक सुधारों को क्रियान्वित करेंगे, ताकि वे अधिक प्रतिस्पर्द्धी, दक्ष तथा भविष्य-उन्मुख बैंकिंग संस्थानों के रूप में विकसित हो सकें।

EASE 9.0 सुधार एजेंडा के अंतर्गत क्या सुधार प्रस्तावित हैं? 

  • GCC रणनीति एवं नेतृत्व: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक वित्तीय वर्ष 2026–27 में वैश्विक क्षमता केंद्र (Global Capability Centre–GCC) रणनीति को क्रियान्वित करेंगे तथा क्षमता-निर्माण हेतु एक विस्तृत रोडमैप तैयार करेंगे। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जिसने इस वर्ष (कर्नाटक में) राज्य-स्वामित्व वाले बैंकों में प्रथम GCC की स्थापना की है, इस पहल का नेतृत्व करेगा।
    • GCC बहुराष्ट्रीय कंपनियों की अपतटीय इकाइयाँ होती हैं, जो सूचना प्रौद्योगिकी, अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा व्यावसायिक सहायता जैसी रणनीतिक सेवाएँ प्रदान करती हैं।
  • प्रौद्योगिकी अवसंरचना से संबंधित योजनाएँ: बैंकों से अपेक्षा की गई है कि वे व्यवसाय की निरंतरता एवं संस्थागत अनुकूलन को सुनिश्चित करने हेतु एक्टिव-एक्टिव डेटा केंद्र मॉडल का आकलन करेंगे तथा इसे अपनी पाँच-वर्षीय व्यावसायिक योजनाओं में सम्मिलित करेंगे।
    • साथ ही, कोर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अवसंरचना का विकास किया जाएगा, जिसमें लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) लाइसेंसिंग, GPU रणनीति तथा निजी क्लाउड मॉडल का परिनियोजन शामिल होगा।
    • उद्यम-व्यापी सहमति प्रबंधन क्षमताओं का विकास।
    • व्यापक स्तर पर डेटा टोकनाइज़ेशन एवं अनामीकरण का कार्यान्वयन: व्यावसायिक तथा रणनीतिक उद्देश्यों की निरंतर पूर्ति सुनिश्चित करने के लिये बड़े पैमाने पर डेटा टोकनाइज़ेशन एवं अनामीकरण तंत्र लागू किये जाएंगे, ताकि डेटा उपयोग में निरंतरता बनी रहे।
  • सहयोगात्मक समाधान: बैंक अपनी-अपनी क्षमताओं का समेकन कर समग्र एवं उन्नत बैंकिंग समाधान विकसित करेंगे, जिनमें ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी, उन्नत जोखिम आकलन प्रणाली तथा धोखाधड़ी पहचान हेतु मॉडल सम्मिलित होंगे।

बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज़ और इंश्योरेंस (BFSI) GCC क्या हैं?

  • परिचय: BFSI GCC (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) भारत जैसे प्रतिभा-संपन्न स्थानों में एक वैश्विक BFSI संस्थान की 100% स्वामित्व वाली और संचालित सहायक कंपनी है। ये कंपनी रणनीतिक विस्तार हेतु कार्य करती है, जो उच्च-मूल्य वाले कार्यों को केंद्रीकृत करती है, नवाचार को बढ़ावा देती है और परिचालन दक्षता हेतु कार्य करती है।
    • सामान्य GCC के विपरीत, BFSI GCC विशेष रूप से बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) क्षेत्र को जोखिम प्रबंधन, अनुपालन, फिनटेक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सेवा प्रदान करती है।
  • रणनीतिक विकास: GCC (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) प्रारंभिक लागत में लाभ (गृह बाज़ारों की तुलना में 50-60% बचत प्राप्त करने) से विकसित होकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), साइबर सुरक्षा, रेगुलेटरी टेक्नोलॉजी (रेगटेक), डेटा एनालिटिक्स और कोर प्लेटफॉर्म के विकास सहित स्वामित्व क्षमताओं के लिये उन्नत केंद्र बन गए हैं।
  • BFSI GCC के मुख्य कार्य:

  • BFSI GCC ईकोसिस्टम में भारत की स्थिति: भारत के BFSI GCCs के वर्ष 2032 (2023 में यह USD 40–41 बिलियन था) तक USD 125 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है। वर्तमान में भारत में 185–190 BFSI GCCs संचालित हो रहे हैं, जो लगभग 5,40,000 पेशेवरों को रोज़गार देते हैं, जो देश में सभी GCC कर्मचारियों का 25% प्रतिनिधित्व करते हैं।
    • प्रमुख केंद्रों में बंगलुरु (विश्लेषण और इंजीनियरिंग), हैदराबाद (फिनटेक), मुंबई (वित्तीय सेवाओं का केंद्र), पुणे, चेन्नई और गुरुग्राम/NCR शामिल हैं।
  • भारत में BFSI GCCs के उदाहरण: जेपी मॉर्गन चेस, एचएसबीसी, वेल्स फार्गो, सिटीग्रुप, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, ड्यूश बैंक, बार्कलेज, बैंक ऑफ अमेरिका, गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली। 

EASE 9.0 सुधार

  • परिचय: EASE 9.0 सुधार, जिसे फरवरी 2026 में वित्तीय सेवाएँ विभाग ने लॉन्च किया, का उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी संस्थानों में बदलना है, जो विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ संरेखित हों।
    • यह तकनीक-संचालित आधुनिकीकरण, लचीलापन और परिचालन उत्कृष्टता पर ज़ोर देता है, जिसे चार मूलभूत स्तंभों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें RISE के रूप में संक्षेपित किया गया है।
  • मुख्य संरचना – चार मूलभूत स्तंभ (RISE):
    • जोखिम और स्थिरता (Risk & Resilience): वित्तीय और ऋण जोखिम प्रबंधन, संचालन में लचीलापन और पूरे संगठन में जोखिम निगरानी के ढाँचे को सुदृढ़ करना।
    • नवाचार (Innovation): उन्नत तकनीकों का गहन एकीकरण करना, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जनरेटिव AI (GenAI), मशीन लर्निंग (ML), क्लाउड आर्किटेक्चर और माइक्रोसर्विसेज़ शामिल हैं।
    • सामाजिक-आर्थिक प्रभाव (Socio-economic Impact): समावेशी बैंकिंग को बढ़ावा देना, अविकसित वर्गों (जिसमें गिग और प्लेटफॉर्म कार्यकर्त्ता शामिल हैं) के लिये वित्तीय पहुँच सुनिश्चित करना और व्यापक आर्थिक लक्ष्यों में योगदान देना।
    • उत्कृष्टता (Excellence): परिचालन दक्षता, ग्राहक-केंद्रित प्रक्रियाओं, शासन और लागत-कुशल अगली पीढ़ी के संचालन मॉडलों को बढ़ाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. EASE 9.0 क्या है?
EASE 9.0 एक बैंकिंग सुधार एजेंडा है, जिसे फरवरी 2026 में वित्तीय सेवाएँ विभाग (DFS) द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को तकनीकी एकीकरण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के माध्यम से आधुनिक बनाने के लिये लॉन्च किया गया है।

2. EASE 9.0 के तहत RISE ढाँचे का अर्थ है:
यह जोखिम और स्थिरता, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और उत्कृष्टता के लिये है, जो बैंकिंग सुधारों के चार मूलभूत स्तंभ बनाते हैं।

3. BFSI वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) क्या है?
BFSI GCC एक वैश्विक वित्तीय संस्था की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, जो जोखिम प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और नियामक अनुपालन जैसी उच्च-मूल्य वाली कार्यों को केंद्रीकृत रूप से सँभालती है।

4. ग्लोबल BFSI GCC ईकोसिस्टम में भारत कितना महत्त्वपूर्ण है?
भारत में लगभग 185–190 BFSI GCCs स्थित हैं, जो लगभग 5,40,000 पेशेवरों को रोज़गार प्रदान करते हैं और यह क्षेत्र वर्ष 2032 तक USD 125 बिलियन तक बढ़ने का अनुमान है।

5. EASE 9.0 तकनीकी आधुनिकीकरण को कैसे बढ़ावा देता है?
यह AI स्टैक्स, LLM लाइसेंसिंग, सक्रिय-सक्रिय डेटा केंद्र, ब्लॉकचेन एकीकरण, डेटा टोकनाइज़ेशन और क्लाउड आर्किटेक्चर पर ज़ोर देता है, ताकि बैंकों की स्थिरता और उत्पादकता बढ़ाई जा सके।

 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रश्न. भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के संचालन के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2018)

  1. पिछले दशक में भारत सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी के अंतर्वेशन में लगातार वृद्धि हुई है।
  2. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सुव्यवस्थित करने के लिये मूल भारतीय स्टेट बैंक के साथ उसके सहयोगी बैंकों का विलय किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (b)


सतत विकास लक्ष्यों पर नीति आयोग और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के मध्य सहयोग

स्रोत: पीआईबी

नीति आयोग तथा जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) ने “सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में जापान-भारत सहयोगात्मक कार्यों के संवर्द्धन हेतु परियोजना चरण II” के लिये चर्चा अभिलेख (Record of Discussions) पर हस्ताक्षर किये।

  • उद्देश्य एवं प्रसार: परियोजना का उद्देश्य छह प्रमुख क्षेत्रों (वैश्विक साझेदारी, स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास तथा आधारभूत अवसंरचना) में नीतिगत ढाँचे एवं क्रियान्वयन तंत्र को सुदृढ़ करना है।
  • प्रमुख क्षेत्र: यह पहल संस्थागत क्षमता-निर्माण, उन्नत निगरानी एवं मूल्यांकन प्रणाली तथा आकांक्षी ज़िलों एवं आकांक्षी खंडों में SDGs के प्रभावी स्थानीयकरण पर केंद्रित है।
  • गतिविधियाँ: मुख्य गतिविधियों में जन-से-जन आदान-प्रदान, क्षमता-निर्माण कार्यक्रम, जापान–भारत ज्ञान मंचों का आयोजन तथा श्रेष्ठ प्रथाओं की पहचान एवं प्रसार सम्मिलित हैं।

भारत-जापान विकास साझेदारी

  • सहायता का ऐतिहासिक पैमाना: जापान वर्ष 1958 से भारत का सबसे बड़ा द्विपक्षीय दाता रहा है, जिसकी कुल संचयी आधिकारिक विकास सहायता (ODA) 4.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। यह परिवहन, ऊर्जा और जल जैसे क्षेत्रों में 84 से अधिक संचालित परियोजनाओं का समर्थन कर रहा है।
  • अगले दशक के लिये मार्गदर्शक ढाँचा: 'अगले दशक के लिये भारत-जापान संयुक्त विज़न' (अगस्त 2025) सहयोग के लिये 8 रणनीतिक दिशाओं को रेखांकित करता है, जिसमें उन्नत आर्थिक संबंध, प्रौद्योगिकी साझेदारी और स्वच्छ ऊर्जा संबंधी पहलें शामिल हैं।
    • दोनों देशों ने अगले दशक में जापान से भारत में 68 अरब अमेरिकी डॉलर के निजी निवेश का नया लक्ष्य रखा है।
  • हालिया वित्तीय प्रतिबद्धता: मार्च 2025 में जापान की ODA के तहत बुनियादी ढाँचे और सतत विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिये कुल 11,181 करोड़ रुपये के 6 ऋण समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।
  • वित्तीय स्थिरता को दृढ़ता: आर्थिक लचीलेपन को बढ़ाने के लिये बायलेटरल स्वैप अरेंजमेंट को 75 अरब अमेरिकी डॉलर पर नवीनीकृत किया गया (फरवरी 2026 से प्रभावी)।
और पढ़ें: भारत-जापान संबंधों का पुनर्मूल्यांकन

न्यूक्लिक अम्ल प्रवर्द्धन परीक्षण

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी अस्पतालों में न्यूक्लिक अम्ल प्रवर्द्धन परीक्षण (NAT) लागू करने के लिये आवश्यक लागत, व्यावहारिकता (Feasibility) और अवसंरचना से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है, यह जानकारी रक्त आधान‑जनित संक्रमणों की रोकथाम हेतु दायर एक जनहित याचिका (PIL) के उत्तर में मांगी गई है।

  • संवैधानिक आयाम: जनहित याचिका में न्यायालय से आग्रह किया गया है कि ‘सुरक्षित रक्त का अधिकार’ को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत निहित जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग घोषित किया जाए।
    • याचिका में पूरे भारत के सभी रक्त बैंकों में NAT को अनिवार्य बनाए जाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
    • इसका उद्देश्य रक्त आधान से पूर्व HIV, हेपेटाइटिस‑B (HBV), हेपेटाइटिस‑C (HCV), मलेरिया तथा सिफलिस सहित रक्त आधान‑जनित संक्रमणों (TTI) का सटीकता से पता लगाना है।
  • विनियामक ढाँचा: वर्तमान में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत भारत में अनिवार्य रक्त‑जाँच केवल सेरोलॉजिकल परीक्षणों (जैसे- एंज़ाइम‑लिंक्ड इम्यूनोसॉरबेंट असेज़ (ELISA)) तक ही सीमित है।
    • न्यूक्लिक एसिड परीक्षण (NAT) को अभी देश भर में कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं बनाया गया है।
  • थैलेसीमिया संकट: याचिका अत्यधिक संवेदनशील रोगियों की सुरक्षा में तंत्रगत विफलता को रेखांकित करती है और यह उल्लेख करती है कि भारत को ‘विश्व का थैलेसीमिया कैपिटल’ माना जाता है।
    • थैलेसीमिया एक वंशानुगत (आनुवंशिक) रक्त विकार है, जिसकी विशेषता यह है कि शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन (वह प्रोटीन जो लाल रक्त कणों के माध्यम से ऑक्सीजन वहन करता है) का उत्पादन नहीं कर पाता।
      • थैलेसीमिया से पीड़ित रोगियों को प्राणरक्षक रक्त आधान (blood transfusion) प्रत्येक 15 से 20 दिन में करना पड़ता है, जिस कारण यदि रक्त की जाँच समुचित रूप से न हो तो वे TTI के प्रति अत्यंत संवेदनशील हो जाते हैं।
    • याचिका में मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश में ऐसे रोके जा सकने वाले मामलों को रेखांकित किया गया, जहाँ बच्चों को असुरक्षित रक्त आधान के कारण HIV और हेपेटाइटिस का संक्रमण हो गया।

न्यूक्लिक अम्ल प्रवर्द्धन परीक्षण (NAT)

  • यह एक अत्यंत संवेदनशील तकनीक है, जो रक्तदान का परीक्षण वायरल राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) या डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) के लक्षित खंडों के प्रवर्द्धन के माध्यम से करती है।
    • परंपरागत सीरोलॉजिकल परीक्षणों में संक्रमण की पहचान हेतु मानव शरीर द्वारा प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (एंटीबॉडी) उत्पन्न होने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
  • न्यूक्लिक एसिड परीक्षण प्रत्यक्ष रूप से वायरस का पता लगाता है, जिससे ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV), हेपेटाइटिस B वायरस (HBV) तथा हेपेटाइटिस C वायरस (HCV) के लिये “विंडो अवधि” (प्रारंभिक संक्रमण से पहचान योग्य होने तक का समय) में उल्लेखनीय कमी आती है।
    • यह उन्नत परीक्षण उन “फाल्स रिएक्टिव” रक्तदानों की पहचान में भी सहायक है, जिन्हें मानक सीरोलॉजी विधियाँ त्रुटिवश संक्रमित घोषित कर देती हैं।
    • इससे सुरक्षित रक्त अनावश्यक रूप से नष्ट होने से बचता है तथा दाताओं के सटीक परामर्श में सहायता मिलती है।
और पढ़ें: बॉम्बे ब्लड ग्रुप


इनोवेटर्स बिजनेस एनवायरमेंट इंडेक्स (IBEI) 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

स्टार्टअपब्लिंक ने इनोवेटर्स बिजनेस एनवायरमेंट इंडेक्स (IBEI) 2026 जारी किया, जो नियमन, पूंजी और अवसंरचना जैसी मूलभूत व्यावसायिक स्थितियों को 0–100 स्कोर का उपयोग करके मापता है।

इनोवेटर्स बिजनेस एनवायरमेंट इंडेक्स (IBEI)

  • परिचय: IBEI राष्ट्रीय व्यावसायिक वातावरण का मूल्यांकन इसकी पहुँच, पूर्वानुमान क्षमता और नवप्रवर्तकों के लिये कम अवरोध वाले सिस्टम के आधार पर करता है। यह व्यवसाय शुरू करने एवं  उन्हें बढ़ाने हेतु आवश्यक इनपुट एवं सक्षम परिस्थितियों पर केंद्रित है और यह स्टार्टअप की सफलता दर जैसे परिणाम-आधारित मापदंडों से अलग है।
  • पद्धति और संकेतक: इस सूचकांक में प्रमुख स्तंभों के तहत 30 से अधिक मापने योग्य संकेतकों के अंक एकत्रित किये जाते हैं:
    • नियमन और शासन: व्यवसाय शुरू करने और संचालित करने में आसानी और नियामक अवरोध।
    • पूंजी और वित्तीय अवसंरचना तक पहुँच: धन की उपलब्धता और ऋण की शर्तें।
    • कराधान: व्यवसायों के लिये प्रोत्साहन और कर संबंधी शर्तें।
    • डिजिटल अवसंरचना: इंटरनेट गति, स्वतंत्रता और कनेक्टिविटी।
    • वैश्विक गतिशीलता और खुलापन: अंतर्राष्ट्रीय पहुँच, बाज़ार की धारणा तथा शासन की स्थिरता।
  • IBEI रैंकिंग 2026: संयुक्त राज्य अमेरिका ने 100 के स्कोर के साथ पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि सिंगापुर दूसरे और यूनाइटेड किंगडम तीसरे स्थान पर रहा।
  • भारत का प्रदर्शन: भारत को वैश्विक स्तर पर 55.035 अंक के साथ 54वाँ स्थान मिला है। भारत चीन से आगे है, जो 85वें स्थान पर है।
    • रिपोर्ट में भारत के व्यावसायिक वातावरण की विशेषताओं के रूप में मज़बूत क्षेत्रीय ताकत, पूंजी तक भरोसेमंद पहुँच, बड़े बाज़ार का आकार और प्रतिस्पर्द्धात्मक लागत संरचना को दर्शाया गया है।

और पढ़ें: बिजनेस रेडी (B-रेडी) रिपोर्ट 2024


मेनिंगोकोकल बैक्टीरियल इन्फेक्शन

स्रोत: द हिंदू 

मेघालय सरकार ने शिलांग स्थित असम रेजिमेंटल सेंटर (ARC) में संदिग्ध मेनिंगोकोकल जीवाणु संक्रमण (बैक्टीरियल इन्फेक्शन) के कारण दो अग्निवीर प्रशिक्षुओं की मृत्यु के बाद उच्च-स्तरीय स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है।

  • रोग-कारण: यह रोग निसेरिया मेनिंगिटिडिस नामक जीवाणु के कारण होने वाला एक गंभीर एवं तीव्र गति से फैलने वाला संक्रमण है।
  • नैदानिक अभिव्यक्तियाँ: मेनिंगोकोकल संक्रमण मुख्यतः मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु की झिल्ली की सूजन) या मेनिंगोकोसीमिया (जीवन-घातक रक्त संक्रमण/सेप्सिस) का कारण बनता है।
  • संक्रमण का प्रसार: यह संक्रमित व्यक्तियों के नाक/गले के स्राव के सीधे संपर्क से फैलता है।
  • जोखिम कारक: यह संक्रमण 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, किशोरों, युवा वयस्कों (16-23 वर्ष) तथा भीड़भाड़ वाले स्थानों, जैसे– कॉलेज छात्रावास या सैन्य बैरकों में रहने वाले लोगों में अधिक सामान्य है।
  • उपचार: मृत्यु दर को कम करने के लिये एंटीबायोटिक दवाओं से त्वरित उपचार अत्यंत आवश्यक है; उपचार के बावजूद मृत्यु दर लगभग 10%-15% तक हो सकती है।
    • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा रिकमेंडेड मेनिनजाइटिस वैक्सीन (Men5CV), मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस के पाँच मुख्य कारणों से बचाने वाली पहली संयुग्मित/कॉन्जुगेट वैक्सीन है।

और पढ़ें: नई मेनिनजाइटिस वैक्सीन के साथ नाइजीरिया सबसे अग्रणी