गुजरात ने फिर हासिल किया ‘टाइगर स्टेट’ का दर्जा
जांबूघोड़ा और रतनमहल वन क्षेत्रों में रॉयल बंगाल टाइगर की निरंतर उपस्थिति के बाद गुजरात एक बार फिर टाइगर बियरिंग स्टेट का दर्जा हासिल करने जा रहा है। यह भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
- अद्वितीय जैव विविधता: बाघ की स्थायी उपस्थिति की पुष्टि के बाद गुजरात भारत का एकमात्र राज्य बन गया है, जहाँ तीन प्रमुख बड़े शिकारी पाए जाते हैं: एशियाई शेर, रॉयल बंगाल टाइगर और तेंदुआ।
- प्रवासन मार्ग: बाघ ने मध्य प्रदेश के कट्टीवाड़ा वन्यजीव अभयारण्य से गुजरात के कांजेता रेंज और जांबूघोड़ा वन्यजीव अभयारण्य तक लगभग 60 किमी. की दूरी तय की।
- 90 किमी. प्रवासन मार्ग: कांजेता और जांबूघोड़ा को जोड़ने वाला यह 90 किमी. लंबा मार्ग एक समृद्ध वन क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है, जिसमें प्राकृतिक गुफाएँ और जलस्रोत हैं, जो बाघ संरक्षण के लिये उपयुक्त हैं।
- राज्य वन विभाग राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के साथ समन्वय कर एक मादा बाघ लाने की योजना बना रहा है, ताकि इस क्षेत्र में स्थिर बाघ आबादी स्थापित की जा सके।
- प्राय बेस ऑग्मेंटेशन: बाघ के लिये पर्याप्त शिकार प्राणी उपलब्ध कराने और मानव–वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिये कदा डैम के पास एक शाकाहारी पशु प्रजनन केंद्र (Herbivore Breeding Centre) स्थापित किया गया है, जहाँ चीतल तथा साँभर का प्रजनन किया जाता है और उन्हें जंगल में छोड़ा जाता है।
- जांबूघोड़ा वन्यजीव अभयारण्य: यह एक जैव विविधता का केंद्र है, जिसकी पहचान शुष्क दक्षिणी उष्णकटिबंधीय, शुष्क पर्णपाती और माध्यमिक वनों से होती है, जिनके बीच-बीच में घास के मैदान और औषधीय जड़ी-बूटियाँ पाई जाती हैं।
- परिदृश्य और वन्यजीव: यह क्षेत्र सागवान, महुआ और बाँस के घने जंगलों से घिरा हुआ है, जो जीव-जंतु की विविध प्रजातियों के लिये सुरक्षित आवरण प्रदान करता है।
- यह अभयारण्य तेंदुओं की एक महत्त्वपूर्ण आबादी का आवास है इसके साथ ही यहाँ स्लॉथ बीयर, चौसिंगा (चार सींग वाला हरिण), नीलगाय और हैना भी पाए जाते हैं, जिससे यह क्षेत्र एक महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिकीय मार्ग के रूप में विकसित होता है।
- रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य: गुजरात में मध्य प्रदेश की सीमा के पास स्थित रतनमहल वन्यजीव अभयारण्य (स्थापना: 1982) एक महत्त्वपूर्ण आवास क्षेत्र है, जो राज्य में स्लॉथ बीयर की सबसे बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है।
- अभयारण्य में शुष्क सागौन और मिश्रित पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जिनमें बाँस, महुआ और जामुन के वृक्ष भी शामिल हैं, जो भालुओं के लिये आवश्यक चरागाह प्रदान करते हैं।
- अपने समृद्ध जीव-जंतु के अलावा, जिसमें तेंदुए की महत्त्वपूर्ण संख्या शामिल है, यह क्षेत्र रणनीतिक पारिस्थितिक महत्त्व भी रखता है क्योंकि यह पानम नदी का जलग्रहण क्षेत्र है, जो दाहोद और पंचमहल ज़िलों में जल संरक्षण प्रयासों को बनाए रखने में सहायक है।
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भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक
प्रधानमंत्री की इज़राइल यात्रा की तैयारियों के बीच भारत ने भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी की और सऊदी अरब के साथ एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा संवाद आयोजित किया, जो पश्चिम एशिया में परिष्कृत कूटनीतिक संतुलन को प्रदर्शित करता है।
पश्चिम एशिया कूटनीति में प्रमुख घटनाक्रम
- सऊदी अरब के साथ सुरक्षा सहयोग: तीसरी भारत–सऊदी अरब सुरक्षा कार्य समूह बैठक रियाद (सऊदी अरब) में आयोजित की गई, जिसमें आतंकवाद वित्तपोषण, साइबर आतंकवाद और अपराध–आतंकवाद संबंधी नेटवर्क के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर सहमति हुई।
- यह द्विपक्षीय सुरक्षा संवाद तंत्र है, जिसे वर्ष 2019 में स्थापित उनकी सामरिक साझेदारी परिषद (SPC) के तहत बनाया गया। यह SPC की पॉलिटिकल, कांसुलर और सुरक्षा सहयोग समिति के अधीन कार्य करता है।
- अरब देशों के साथ कूटनीतिक संतुलन: इसके बाद दूसरी भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें फिलिस्तीन के विदेश मंत्री सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- भारत ने गाज़ा में शांति बहाल करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन व्यक्त किया, जिसमें शर्म-एल-शेख शांति शिखर सम्मेलन (2025) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 2803 का उल्लेख किया गया, जिसने गाज़ा के लिये अंतरिम प्रशासन और अंतर्राष्ट्रीय स्थिरीकरण बल का समर्थन किया।
- हालाँकि भारत ने गाज़ा के लिये शांति बोर्ड में शामिल होने के अमेरिकी निमंत्रण पर अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिसका कार्य इज़राइल और हमास के बीच संघर्ष विराम बनाए रखना और गाज़ा का पुनर्निर्माण सुनिश्चित करना है।
- भारत ने पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता को उजागर किया, जिसमें लिबिया, सूडान, सीरिया, लेबनान और यमन शामिल हैं और सागरीय सुरक्षा तथा लेबनान में अपने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन को लेकर चिंताएँ व्यक्त की हैं।
- ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क: इसी समय भारत के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने तेहरान का दौरा किया और ईरानी सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठकें कीं, जबकि क्षेत्रीय तनाव संभावित अमेरिकी–इज़राइली हमले को लेकर बढ़ रहा था।
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ट्रांसजेंडर हेल्थकेयर के लिये विशेषज्ञ पैनल
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित स्वास्थ्य देखभाल के मुद्दों पर तकनीकी और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करने के लिये चिकित्सा विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक समिति का गठन किया है।
- सरकार ने स्वीकार किया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को हाॅर्मोनल, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विभिन्नताओं के कारण अलग-अलग स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताएँ होती हैं।
- यह विशेषज्ञ पैनल लोक स्वास्थ्य नीति को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 एवं 21 के तहत गरिमा, समता और गैर-भेदभाव के संवैधानिक मूल्यों के साथ संरेखित करता है।
- यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के जेन कौशिक बनाम भारत संघ मामले, 2025 में दिये गए निर्देश का अनुसरण करता है, जहाँ एक ट्रांसवूमन के खिलाफ कार्यस्थल पर भेदभाव के आरोपों के बाद एक सलाहकार समिति का गठन किया गया था।
- वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में ट्रांसजेंडर आबादी लगभग 4.88 लाख है, जिसमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे अधिक संख्या है।
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिये सुधारों की समय-सीमा:
- निर्वाचन आयोग के निर्देश (2009): निर्वाचन आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण फॉर्म में "अन्य" के विकल्प को शामिल किया जिससे ट्रांससेक्सुअल व्यक्तियों को अपनी लैंगिक पहचान के रूप में पुरुष, महिला अथवा अन्य का चयन करने की अनुमति मिली।
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय (2014): नेशनल लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी बनाम भारत संघ मामले, 2014 में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर लोगों को "थर्ड जेंडर" के रूप में मान्यता दी, इसे एक मानवाधिकार मुद्दे के रूप में रेखांकित किया।
- विधायी प्रयास: ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 को ट्रांसजेंडर अधिकारों की सुरक्षा के लिये अधिनियमित किया गया।
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भारतीय तटरक्षक बल (ICG) का स्थापना दिवस
प्रधानमंत्री ने भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के स्थापना दिवस के अवसर पर उसके सभी अधिकारियों एवं कार्मिकों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, आपदा मोचन तथा समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण में इस बल की भूमिका की सराहना करते हुए इसे भारत के तटों का एक सुदृढ़ सुरक्षा-कवच बताया।
- गठन एवं इतिहास: भारतीय तटरक्षक बल की स्थापना 1 फरवरी, 1977 को भारतीय समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विधि प्रवर्तन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। इसका गठन नाग समिति (1970) तथा रुस्तमजी समिति (1974–75) की अनुशंसाओं पर आधारित था।
- इसे तटरक्षक अधिनियम, 1978 के अंतर्गत भारत सरकार के एक स्वतंत्र सशस्त्र बल के रूप में औपचारिक रूप से स्थापित किया गया, जिसका आदर्श वाक्य है— “वयं रक्षामः” (हम रक्षा करते हैं)।
- रणनीतिक आवश्यकता: इस बल का गठन समुद्री तस्करी को रोकने, 'मुंबई हाई' जैसे अपतटीय संसाधनों की रक्षा करने और 'संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय' (UNCLOS) के अनुपालन में भारत के 'विशेष आर्थिक क्षेत्र' (EEZ) की निगरानी के लिये किया गया था।
- संगठनात्मक संरचना: इसका नेतृत्व भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक (DGICG) करते हैं, जो नई दिल्ली स्थित मुख्यालय से अपनी कमान का संचालन करते हैं।
- भारत के समुद्री क्षेत्रों को पूर्वी और पश्चिमी तटों में विभाजित किया गया है, जो पाँच तटरक्षक क्षेत्रों—उत्तर-पश्चिम, पश्चिम, पूर्व, उत्तर-पूर्व और अंडमान एवं निकोबार—को कवर करते हैं। इन क्षेत्रों के मुख्यालय क्रमशः गांधीनगर, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और पोर्ट ब्लेयर में हैं। प्रत्येक क्षेत्र का नेतृत्व एक महानिरीक्षक द्वारा किया जाता है।
- जनादेश: भारतीय तटरक्षक बल (ICG) अपतटीय संसाधनों की सुरक्षा करता है, समुद्री कानूनों को लागू करता है, संकट में फँसे नाविकों की सहायता करता है और समुद्री पर्यावरण की रक्षा करता है। यह वैज्ञानिक डेटा भी एकत्र करता है तथा युद्ध के दौरान नौसेना का समर्थन करता है।
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पेनिसिलिन G पर न्यूनतम आयात मूल्य
हाल ही में केंद्र सरकार ने आयात को विनियमित करने के लिये प्रमुख औषधीय इनपुट पेनिसिलिन G और उसके लवण 6-APA तथा एमोक्सिसिलिन पर न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) लागू किया है।
- इस कदम का उद्देश्य विशेष रूप से चीन से होने वाले अल्प लागत आयात पर अंकुश लगाना है, जो घरेलू सक्रिय औषधीय घटक (API) उत्पादकों की संधारणीयता के लिये खतरा हैं।
- वर्तमान में चीन भारत के औषधि उद्योग में प्रयुक्त कच्चे माल का लगभग 70% आपूर्ति करता है, जिसकी अनुमानित कीमत 10–12 अरब डॉलर है, जो भारत की आयात-निर्भरता को दर्शाता है।
- यह MIP एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा; हाँलाकि पूर्णतया निर्यातोन्मुख इकाइयों (EOU), विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) इकाइयों तथा अग्रिम प्राधिकरण के अंतर्गत होने वाले आयात को इससे छूट दी गई है, बशर्ते इन इनपुट्स को घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र में न बेचा जाए।
- न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) सरकार द्वारा निर्धारित एक अस्थायी न्यूनतम मूल्य होता है, जिसके नीचे विशिष्ट वस्तुओं का आयात नहीं किया जा सकता; इसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को सस्ते, शोषणकारी अथवा डंप किये गए आयात से संरक्षण प्रदान करना है।
- यह निर्णय उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना तथा नवंबर में सल्फाडायज़ीन पर लगाए गए MIP जैसे पूर्व उपायों के क्रम में है और स्थानीय उपभोग हेतु आयात को सीमित करते हुए—निर्यात को प्रभावित किये बिना—घरेलू विनिर्माण को समर्थन देने तथा वहनीयता बनाए रखने के बीच संतुलन स्थापित करता है।
पेनिसिलिन G
- बेंज़ाइलपेनिसिलिन (पेनिसिलिन G) एक संकीर्ण-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है, जिसका उपयोग संवेदनशील जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न संक्रमणों के उपचार में किया जाता है।
- मुख से इसका सेवन करने पर इसका अवशोषण अनुपयुक्त होने के कारण, इसे अंतःशिरा या अंतःमाँसपेशीय रूप में दिया जाता है और कुछ मामलों में इसका उपयोग संवेदनशील जीवों से सुरक्षा प्रदान करते हुए निवारक (प्रोफिलैक्टिक) उपचार के लिये भी किया जाता है।
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पेनिसिलिन G क्या है? |
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पेनिसिलिन G एक सक्रिय औषधीय घटक (Active Pharmaceutical Ingredient—API) है, जिसका उपयोग कई सामान्य प्रतिजैविक दवाओं में किया जाता है। API किसी भी दवा का प्रमुख घटक होता है, जो वांछित चिकित्सकीय प्रभाव उत्पन्न करने के लिये उत्तरदायी होता है। अन्य अनेक API की भाँति सस्ते चीनी उत्पादों के कारण भारतीय बाज़ार में पेनिसिलिन का उत्पादन क्रमशः समाप्त हो गया। भारत में पेनिसिलिन के अंतिम संयंत्र का उत्पादन अहमदाबाद स्थित टॉरेंट फार्मा में बंद हो गया है। |
संयुक्त राज्य अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, पेनिसिलिन एक लक्ष्य-विशिष्ट प्रतिजैविक है, जिसका उपयोग निमोनिया, मेनिनजाइटिस, गोनोरिया, सिफलिस आदि जैसे कई गंभीर जीवाणु संक्रमणों के उपचार में किया जाता है। अपर्याप्त अवशोषण के कारण पेनिसिलिन सामान्यतः अंतःशिरा (Intravenous) या अंतःमाँसपेशीय (Intramuscular) रूप से दिया जाता है। कुछ रोगियों में पेनिसिलिन के दुष्प्रभाव भी देखे गए हैं। |
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और पढ़ें: पेनिसिलिन G और PLI योजना |
भारत पर्व 2026
भारत पर्व 2026, एक छह-दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन उत्सव, पर्यटन मंत्रालय द्वारा 26-31 जनवरी, 2026 के दौरान नई दिल्ली स्थित लाल किले में गणतंत्र दिवस समारोहों के अंतर्गत आयोजित किया गया।
- वर्ष 2016 से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह उत्सव भारत की सांस्कृतिक, कलात्मक, पाक-कला एवं आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करने का एक प्रमुख मंच है, जो देश की ‘विविधता में एकता’ को प्रतिबिंबित करता है।
- भारत पर्व 2026 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का स्मरण किया गया, साथ ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और ‘देखो अपना देश’ जैसी राष्ट्रीय पहलों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया गया।
- एक प्रमुख आकर्षण राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों की 41 गणतंत्र दिवस झाँकियों का प्रदर्शन रहा, जिससे आगंतुकों को संस्कृति, विकास और नवाचार की झलक नज़दीक से देखने का अवसर मिला।
- उत्सव में राज्यस्तरीय मंडलियों और सांस्कृतिक संस्थानों द्वारा 48 लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियाँ तथा सशस्त्र बलों एवं अर्द्धसैनिक बैंडों की 22 प्रस्तुतियाँ हुईं, जिन्होंने एक सशक्त देशभक्ति भाव जोड़ा।
- पैन इंडिया फूड कोर्ट में 60 से अधिक स्टॉलों के माध्यम से क्षेत्रीय व्यंजन, मोटे अनाज-आधारित पकवान और जनजातीय खाद्य परंपराएँ प्रस्तुत की गईं, जिससे पाक विरासत, सततता और स्थानीय परंपराओं पर विशेष बल दिया गया।
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