अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष में आत्मरक्षा, IHL और UNCLOS | 06 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
हाल ही में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले हुए, जिनमें मिनाब (ईरान) स्थित एक बालिका विद्यालय पर बमबारी भी शामिल है, जिन्हें एक “आसन्न खतरे” के प्रति “पूर्व-निवारक” प्रतिक्रिया के रूप में उचित ठहराया गया, यूनाइटेड नेशन चार्टर के अंतर्गत बल प्रयोग की वैधता, विशेषतः अनुच्छेद 51 और आत्मरक्षा सिद्धांत, को चुनौती देते हैं।
- इसके अतिरिक्त, ईरान की नौसैनिक सीमा से बाहर (श्रीलंका तट से) ईरानी युद्धपोत IRIS देना को टॉरपीडो से डुबोना UNCLOS (समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय) के अंतर्गत नौवहन स्वतंत्रता संबंधी महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।
बल प्रयोग पर अंतर्राष्ट्रीय कानून क्या है?
आत्मरक्षा का सिद्धांत
- बल प्रयोग का प्रतिषेध: अंतर्राष्ट्रीय शांति की नींव संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4) है, जो सदस्य राज्यों को किसी अन्य राज्य की 'क्षेत्रीय अखंडता' या 'राजनीतिक स्वतंत्रता' के खिलाफ बल की धमकी या प्रयोग करने से रोकता है।
- जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अधिकृत किया गया हो, या
- अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार के प्रयोग में।
- नियम के अपवाद: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत बल का प्रयोग केवल दो परिदृश्यों में कानूनी है, अर्थात्
- अनुच्छेद 51 की सख्त व्याख्या: अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा का अधिकार केवल "वास्तविक सशस्त्र हमले" की प्रतिक्रिया में सक्रिय होता है। चूँकि ईरान ने हाल ही में किसी भी राज्य पर हमला नहीं किया था, इसलिये हमले इस सख्त मानदंड को पूरा नहीं करते हैं।
- प्रत्याशित आत्मरक्षा का सिद्धांत: अमेरिका और इज़रायल का तर्क "प्रत्याशित" आत्मरक्षा के विवादास्पद सिद्धांत पर टिका है। हालाँकि, कई भू-राजनीतिक विद्वानों का तर्क है कि अंतर्राष्ट्रीय कानून एक हमले के खिलाफ आत्मरक्षा में बल प्रयोग के अधिकार को मान्यता नहीं देता है, जो अभी तक नहीं हुआ है।
- यहाँ तक कि प्रत्याशित आत्मरक्षा सिद्धांत के तहत भी बल का प्रयोग तभी कानूनी होगा जब तीन शर्तें पूरी होंगी, अर्थात (1) ईरान ने हमला करने का फैसला किया; (2) उसके पास ऐसा करने की क्षमता थी; और (3) यह उस भविष्य के हमले को रोकने का "अंतिम अवसर" था।
- इसके अतिरिक्त, अमेरिका-ईरान परमाणु वार्त्ता, जिसमें ओमान ने मध्यस्थता की थी, जिनेवा में सक्रिय रूप से चल रही थी, फिर भी अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले
अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL)
- अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून के मूल सिद्धांत: यूनाइटेड नेशन चार्टर के विपरीत, जो युद्ध शुरू करने की वैधता (जूस एड बेलम, जिसका लैटिन में शाब्दिक अर्थ है "युद्ध का अधिकार") को संबोधित करता है, अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून यह नियंत्रित करता है कि युद्ध कैसे लड़े जाते हैं (जूस इन बेलो, जिसका लैटिन में शाब्दिक अर्थ है "युद्ध का कानून"), जिससे, संघर्ष कैसे भी शुरू हुआ हो, मानवीय आचरण सुनिश्चित होता है।
- शत्रुता का संचालन चार मूल सिद्धांतों द्वारा नियंत्रित होता है, अर्थात् 'भेदभाव', 'आनुपातिकता', 'सैन्य आवश्यकता' और 'सावधानी'।
- भेदभाव का सिद्धांत: यह सिद्धांत 'योद्धाओं' और 'सैन्य लक्ष्यों' का 'नागरिकों' और 'नागरिक वस्तुओं' (स्कूलों, अस्पतालों, पूजा स्थलों) से स्पष्ट पृथक्करण की आवश्यकता रखता है। यदि किसी लक्ष्य की प्रकृति के बारे में कोई संदेह है, तो उसे नागरिक माना जाना चाहिये।
- स्कूलों सहित विभिन्न नागरिक वस्तुएँ, यदि उनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिये किया जाता है (जैसे, बेस या कमांड पोस्ट के रूप में), तो वे अपनी संरक्षित स्थिति खो सकते हैं। हालाँकि इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है कि मिनाब स्कूल (ईरान, इज़रायली-अमेरिकी हवाई हमले का लक्ष्य) का सैन्य रूप से उपयोग किया गया था।
- बच्चों के लिये कानूनी सुरक्षा: बाल अधिकारों पर सम्मेलन, 1989 (अनुच्छेद 38(4)) के लिये राज्यों को सशस्त्र संघर्ष से प्रभावित बच्चों की रक्षा करने की आवश्यकता होती है।
- इसके अतिरिक्त, रोम संविधि, 1998 नागरिकों और शैक्षणिक भवनों के जानबूझकर लक्ष्यीकरण को युद्ध अपराध के रूप में परिभाषित करती है।
- पार्श्व क्षति का सिद्धांत: यदि स्कूल निकटवर्ती सैन्य सुविधा पर हमले के दौरान आकस्मिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ, तो वैधता आनुपातिकता एवं सावधानी के सिद्धांतों पर निर्भर करती है।
- नागरिकों को आकस्मिक नुकसान केवल तभी कानूनी है, जब अपेक्षित नुकसान हमले से प्रत्याशित "ठोस और प्रत्यक्ष सैन्य लाभ" के संबंध में अत्यधिक न हो।
UNCLOS क्या है और नौसैनिक युद्ध में इसकी क्या भूमिका है?
UNCLOS और नौसैनिक युद्ध:
- हालाँकि संयुक्त राष्ट्र समुद्री विधि सम्मेलन (UNCLOS) समुद्री शासन के लिये मुख्य ढाँचा है, यह शांति काल की गतिविधियों पर केंद्रित है। हालंकि इसमें सशस्त्र संघर्ष के दौरान युद्धरत पक्षों के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले स्पष्ट प्रावधान शामिल नहीं हैं। अमेरिका UNCLOS का सदस्य नहीं है।
- UNCLOS, 1982 (जिसे अक्सर "महासागरों का संविधान" कहा जाता है) एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जो समुद्री गतिविधियों के शासन के लिये एक व्यापक कानूनी ढाँचा स्थापित करती है।
- यह क्षेत्र निर्धारित करता है जैसे क्षेत्रीय समुद्र (12 नौटिकल मील तक), विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (200 नौटिकल मील तक) और हाई सी (200 नौटिकल मील से आगे), साथ ही शांति पूर्ण उपयोग, संसाधन प्रबंधन, नौवहन अधिकार और समुद्री पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है।
- UNCLOS, 1982 (जिसे अक्सर "महासागरों का संविधान" कहा जाता है) एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जो समुद्री गतिविधियों के शासन के लिये एक व्यापक कानूनी ढाँचा स्थापित करती है।
नौसैनिक युद्ध का कानून
- सशस्त्र संघर्षों के दौरान, नौसैनिक युद्ध कानून UNCLOS के साथ समानांतर रूप से लागू होता है। इस ढांचे के तहत, किसी युद्धरत नौसेना का युद्धपोत (जैसे IRIS डीना) उस समय उसकी शांतिपूर्ण भूमिका के बावजूद एक वैध सैन्य लक्ष्य माना जाता है।
- कुछ लोग यह मानते हैं कि हाई सी पर किसी विदेशी युद्धपोत के खिलाफ बल का प्रयोग ‘स्वाभाविक रूप से अवैध’ है, जब तक कि इसे अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के रूप में स्पष्ट रूप से न्यायसंगत न ठहराया जाए या यह किसी चल रहे सशस्त्र संघर्ष का हिस्सा न हो।
- IRIS डेना को वर्ष 2023 में अमेरिका द्वारा रूस को कथित UAV आपूर्ति के लिये प्रतिबंधित किया गया था। हालाँकि प्रतिबंध मुख्य रूप से व्यावसायिक गतिविधियों को सीमित करते हैं और अपने आपमें सैन्य हमले को कानूनी नहीं बनाते। यह जहाज़ एक अंतर्राष्ट्रीय अभ्यास (अभ्यास मिलान 2026) के बाद शांतिपूर्ण मार्ग पर था।
| और पढ़ें: अमेरिकी टॉरपीडो ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को डुबोया |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4) क्या निषेध करता है?
यह किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल का प्रयोग या उसके उपयोग की धमकी देने को निषेध करता है, जो आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का मूल सिद्धांत है।
2. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का दायरा क्या है?
अनुच्छेद 51 केवल वास्तविक सशस्त्र हमले के प्रत्युत्तर में आत्मरक्षा के लिये बल के प्रयोग की अनुमति देता है, जब तक कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आवश्यक कदम नहीं उठाती।
3. अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) के मुख्य सिद्धांत क्या हैं?
मुख्य सिद्धांत हैं: भेदभाव, अनुपात, सैन्य आवश्यकता और सावधानी, जिनका उद्देश्य सशस्त्र संघर्षों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा करना तथा दुख-कष्ट को सीमित करना है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न. कभी-कभी समाचारों में उल्लिखित पद ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ किसकी गतिविधियों के संदर्भ में आता है ? (2018)
(a) चीन
(b) इज़रायल
(c) इराक
(d) यमन
उत्तर: (b)
प्रश्न. भारत द्वारा चाबहार बंदरगाह विकसित करने का क्या महत्त्व है? (2017)
(a) अफ्रीकी देशों से भारत के व्यापार में अपार वृद्धि होगी।
(b) तेल-उत्पादक अरब देशों से भारत के संबंध सुदृढ़ होंगे।
(c) अफगानिस्तान और मध्य एशिया में पहुँच के लिये भारत को पाकिस्तान पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
(d) पाकिस्तान, इराक और भारत के बीच गैस पाइपलाइन का संस्थापन सुकर बनाएगा और उसकी सुरक्षा करेगा।
उत्तर: (c)
प्रश्न. दक्षिण-पश्चिमी एशिया का निम्नलिखित में से कौन-सा एक देश भूमध्यसागर तक फैला नहीं है? (2015)
(a) सीरिया
(b) जॉर्डन
(c) लेबनान
(d) इज़रायल
उत्तर: (b)
