ज़ियाओकांग विलेज तथा भारत की सीमा सुरक्षा | 16 Mar 2026

प्रिलिम्स के लिये: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC), सलामी-स्लाइसिंग रणनीति, राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों पर 2005 का भारत-चीन समझौता, सिलीगुड़ी कॉरिडोर, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, ज़ोजिला सुरंग, सेला सुरंग, सीमा सड़क संगठन (BRO), न्योमा एयरबेस, पीएम गतिशक्ति योजना                  

मेन्स के लिये: ज़ियाओकांग बॉर्डर डिफेंस विलेज और भारत को होने वाले खतरों से संबंधित प्रमुख तथ्य। सीमा अवसंरचना को सुदृढ़ करने हेतु भारत द्वारा उठाए गए आवश्यक कदम।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों?

भारत के सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ तेज़ी से निर्मित किये जा रहे 628 ज़ियाओकांग विलेज, जिनमें से लगभग 90% अरुणाचल प्रदेश की दिशा में स्थित हैं, वास्तव में नागरिक बसावट के माध्यम से अपने क्षेत्रीय दावों को सुदृढ़ करने की एक सामरिक रणनीति है।

  • विवादित क्षेत्रों में निर्मित ये द्वि-उपयोगी (नागरिक–सैन्य) विलेज वस्तुतः स्थायी एवं सुदृढ़ चौकियों के रूप में कार्य करते हैं, जो दीर्घकाल में भारत की सुरक्षा तथा संप्रभुता के लिये एक गंभीर चुनौती उत्पन्न कर सकते हैं।

सारांश:

  • चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ 628 द्वि-उपयोगी ज़ियाओकांग विलेज का निर्माण कर रहा है, जिनके माध्यम से वह “सलामी-स्लाइसिंग” रणनीति द्वारा अपने क्षेत्रीय दावों को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहा है।
  • ये बस्तियाँ सैन्य–नागरिक उद्देश्यों के एकीकरण, निरंतर निगरानी तथा सीमा क्षेत्रों में उपस्थिति को सुदृढ़ करने में सहायक हैं, जिससे भारत की उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर दबाव बढ़ता है।
  • इसके प्रत्युत्तर में भारत वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम तथा अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे जैसी परियोजनाओं को तीव्र गति से आगे बढ़ा रहा है, ताकि अपनी सामरिक अवसंरचना और प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके।

ज़ियाओकांग बॉर्डर डिफेंस विलेज क्या हैं?

  • परिचय: चीनी “ज़ियाओकांग” विलेज उन विशेष सीमा बस्तियों को संदर्भित करते हैं जिन्हें मुख्यतः तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन में विवादित सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ निर्मित अथवा उन्नत किया गया है। “ज़ियाओकांग” शब्द का अर्थ है “मध्यम रूप से समृद्ध” या “संपन्न”
  • विस्तार एवं निवेश: यह परियोजना वर्ष 2017 में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सरकार द्वारा प्रारंभ की गई थी। इसके अंतर्गत 21 सीमावर्ती काउंटी में कुल 628 विलेज का विकास किया जा रहा है, जिसमें लगभग 30 बिलियन युआन का सरकारी निवेश किया गया है।
  • द्वि-उपयोगी कार्यप्रणाली: यद्यपि इसे ग्रामीण क्षेत्रों के पुनरुत्थान की पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, किंतु ये बस्तियाँ द्वि-उपयोगी अवसंरचना के रूप में कार्य करती हैं। आवश्यकता पड़ने पर यहाँ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिकों को ठहराया जा सकता है तथा विवादित क्षेत्रों में त्वरित सैन्य तैनाती और गतिशीलता को सुगम बनाया जा सकता है।
  • विधिक एवं सामरिक ढाँचा: इन विलेज का निर्माण चाइना लैंड बॉर्डर लॉ, 2022 द्वारा समर्थित है, जो सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा सीमा रक्षा को सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ समन्वित करने पर बल देता है।
    • इस प्रकार यह पहल “विलेज की दीवार” के रूप में कार्य करती है, जो ग्रे-ज़ोन रणनीतियों के माध्यम से वास्तविक नियंत्रण और क्षेत्रीय दावों को मज़बूत करने का प्रयास करती है।
  • जनसांख्यिकीय परिवर्तन: इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आधारभूत नियंत्रण को सुदृढ़ करना, सीमा-पार गतिविधियों की निगरानी करना तथा तिब्बत में सिनिकीकरण (चीनी संस्कृति और पहचान को बढ़ावा देना) को प्रोत्साहित करना है।
  • अवसंरचनात्मक परिष्करण: इन बस्तियों में केवल आवास ही नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाएँ, जैसे– सड़कें, विद्युत् आपूर्ति, जलापूर्ति और संचार नेटवर्क भी विकसित किये गए हैं, जिनकी पुष्टि प्रायः उपग्रह चित्रों के माध्यम से की जाती है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा 

  • परिचय: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) एक अवधारणात्मक तथा वास्तविक नियंत्रण पर आधारित सीमांकन रेखा है, जो भारत के नियंत्रण वाले क्षेत्र और चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र को अलग करती है। औपचारिक अंतर्राष्ट्रीय सीमा के अभाव में यह मुख्यतः 1962 के भारत–चीन युद्ध के बाद की सैन्य स्थितियों के आधार पर विकसित हुई।
  • उत्पत्ति: इस अवधारणा का प्रस्ताव पहली बार वर्ष 1959 में चीन के प्रधानमंत्री झोउ एनलाई ने रखा था। प्रारंभ में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे अस्वीकार कर दिया था, परंतु बाद में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से भारत ने वर्ष 1993 के बॉर्डर पीस एंड ट्रैंक्विलिटी एग्रीमेंट (BPTA) के अंतर्गत इसे औपचारिक रूप से स्वीकार किया।
  • क्षेत्रीय विभाजन: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है— पश्चिमी क्षेत्र (लद्दाख/अक्साई चिन), जहाँ सबसे अधिक तनाव देखा जाता है; मध्य क्षेत्र (उत्तराखंड/हिमाचल प्रदेश), जो अपेक्षाकृत सबसे कम विवादित क्षेत्र है तथा पूर्वी क्षेत्र (अरुणाचल प्रदेश/सिक्किम), जो मुख्यतः मैकमोहन रेखा का अनुसरण करता है।
    • पूर्वी क्षेत्र में भारत वर्ष 1914 के शिमला सम्मेलन में निर्धारित मैकमोहन रेखा को सीमा के रूप में स्वीकार करता है, जबकि चीन इसकी कानूनी वैधता को अस्वीकार करता है और अरुणाचल प्रदेश को “दक्षिण तिब्बत” कहकर संबोधित करता है।
  • धारणा संबंधी अंतर (परसेप्शन गैप):  संघर्ष का एक प्रमुख कारण LAC की लंबाई को लेकर मतभेद है। भारत के अनुसार इसकी लंबाई लगभग 3,488 किमी. है, जबकि चीन इसे लगभग 2,000 किमी. मानता है। इस अंतर के कारण कई क्षेत्रों में ग्रे ज़ोन में दावों का ओवरलैप होता है।
  • संघर्ष के क्षेत्र: हिमालयी क्षेत्र के दुर्गम भूभाग और अस्पष्ट सीमांकन के कारण कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति उत्पन्न होती रहती है, जैसे- डेपसांग मैदान, गलवान घाटी, वान वैली, पैंगोंग त्सो झील तथा तवांग

ज़ियाओकांग बॉर्डर डिफेंस विलेज भारत के लिये किस प्रकार खतरा उत्पन्न करते हैं? 

  • क्षेत्रीय दावा: विवादित क्षेत्रों में ‘स्थायी आबादी’ स्थापित करके चीन का उद्देश्य अपने भूमि सीमा कानून (2022) के तहत कानूनी दावों को मज़बूत करना है और पूर्ण पैमाने पर संघर्ष को भड़काए बिना यथास्थिति को बदलने के लिये ‘सलामी-स्लाइसिंग’ रणनीति का उपयोग करना है।
  • द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन: इन व्याख्याओं को वर्ष 2005 के भारत-चीन राजनीतिक मापदंडों और मार्गदर्शक सिद्धांतों पर हुए समझौते का उल्लंघन माना जाता है। विशेष रूप से ये व्याख्याएँ पारस्परिक सुरक्षा और सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने से संबंधित समझौते के अनुच्छेदों को कमज़ोर करती हैं।
  • द्वि-उपयोगी अवसंरचना: ज़ियाओकांग और माजिदुनकुन जैसे स्थलों पर बस्तियाँ अग्रिम परिचालन अड्डों के रूप में कार्य करती हैं, जिनमें मज़बूत रसद, संचार नेटवर्क एवं PLA की तैनाती और लामबंदी के लिये डिज़ाइन किये गए आवास शामिल हैं।
  • सैन्य-नागरिक विलय: इन बस्तियों के निवासी राज्य की “आँख और कान” के रूप में कार्य करते हैं। वे एक नागरिक सीमा-रक्षा बल का निर्माण करते हैं, जो निरंतर निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी और भारतीय गतिविधियों के विरुद्ध खुफिया जानकारी एकत्र करने का कार्य करता है।
  • स्ट्रेजिक प्रेशर पॉइंट: तवांग और सिलीगुड़ी कॉरिडोर ('चिकन नेक') जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के निकट इन गाँवों की अवस्थिति भारत के उत्तर-पूर्वी संपर्क मार्ग पर निरंतर भू-सामरिक दबाव बनाए रखती है।"
  • मनोवैज्ञानिक युद्ध: चीनी विलेज/गाँवों का प्रत्यक्ष आधुनिकीकरण भारतीय सीमावर्ती समुदायों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने के उद्देश्य से किया गया है। यह असमानता भारतीय पक्ष में 'सापेक्ष उपेक्षा' की धारणा उत्पन्न कर सकती है, जो परोक्ष रूप से चीन के 'बेहतर शासन' के नैरेटिव (विमर्श) का समर्थन करती है।

भारत को अपनी सीमा अवसंरचना सुदृढ़ करने हेतु कौन-से कदम उठाने चाहिये?

  • स्ट्रैटेजिक लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी: सभी मौसम में सेना की तैनाती और निर्बाध लॉजिस्टिक्स/रसद सुनिश्चित करने के लिये भारत-चीन सीमा सड़क (ICBR) कार्यक्रम के तीसरे चरण और 1,840 किमी. लंबे अरुणाचल फ्रंटियर हाइवे जैसी प्रमुख परियोजनाओं को तीव्र गति से आगे बढ़ाना आवश्यक है।
  • नागरिक-प्रमुख रक्षा: 1,954 बॉर्डर विलेज को आत्मनिर्भर केंद्रों में बदलने के लिये वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (दूसरा चरण) का विस्तार करना आवश्यक है, जिससे पलायन को प्रभावी ढंग से रोका जा सके और LAC के साथ एक ‘नागरिक निगरानी परत’  (Civilian Monitoring Layer) स्थापित की जा सके।
  • उच्च तुंगता अवसंरचना: मौसमी अलगाव को समाप्त करने और भारी हथियारों की त्वरित आवाजाही को सुगम बनाने हेतु रणनीतिक सुरंगों (जैसे– ज़ोज़िला, सेला) और सभी मौसम वाले रेल संपर्कों के निर्माण को प्राथमिकता देनी चाहिये।
  • वायवीय और बहुमाध्यमीय तत्परता: भारी परिवहन संचालन और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वायवीय टोही का समर्थन करने के लिये न्योमा एयरबेस जैसे उन्नत लैंडिंग ग्राउंड (ALG) का उन्नयन करना और हेलिपैड नेटवर्क का विस्तार करना चाहिये।
  • प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी एकीकरण: निरंतर परिस्थितिजन्य जागरूकता बनाए रखने के लिये 150+ नए उपग्रह संसाधनों, AI-संचालित विश्लेषण और ड्रोन का उपयोग करते हुए बहु-स्तरीय ISR (इंटेलिजेंस, सर्वेक्षण और टोही) ढाँचे को लागू किया जाए।
  • ऊर्जा और संस्थागत समन्वय: अग्रिम चौकियों के लिये नवीकरणीय ऊर्जा माइक्रो-ग्रिड्स लागू करना जिससे रसद में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित हो और BRO परियोजनाओं के लिये अंतर-मंत्रालयीय अनुमोदन को तेज़ी से पूर्ण करने हेतु पीएम गति शक्ति ढाँचे का अधिकतम उपयोग किया जाए।
  • राजनयिक निरोध: अनपेक्षित घटनाओं में वृद्धि को रोकने के लिये परामर्श तथा समन्वय के कार्य तंत्र (WMCC) के माध्यम से निरंतर संवाद बनाये रखते हुए इसे भौतिक अवसंरचना के विकास के साथ समन्वित किया जाना चाहिये।

निष्कर्ष

सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन के शियाओकांग विलेज नागरिक बसावट, अवसंरचना विकास तथा सैन्य तैयारियों के एक रणनीतिक संयोजन को दर्शाते हैं, जिसका उद्देश्य वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ क्षेत्रीय दावों को प्रबल करना है। भारत के लिये यह विकास सीमा अवसंरचना, निगरानी और स्थानीय जनसंख्या की सुभेद्यता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है, ताकि संप्रभुता की रक्षा की जा सके और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक संतुलन बनाए रखा जा सके।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. चीन के ‘शियाओकांग’ बॉर्डर विलेज के भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय संप्रभुता पर रणनीतिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. शियाओकांग बॉर्डर डिफेंस विलेज क्या हैं?
शियाओकांग विलेज तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में बनाए गए विलेज हैं, जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और सीमा रक्षा को सुदृढ़ करना है। ये अक्सर नागरिक-सैनिक दोनों उद्देश्यों के लिये कार्य करते हैं।

2. शियाओकांग विलेज के निर्माण का समर्थन कौन-सा कानून करता है?
चीन भूमि सीमा कानून, 2022 सीमा रक्षा को दृढ़ करने, अवसंरचना विकसित करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक बसावट को प्रोत्साहित करने का निर्देश देता है।

3. चीन की बॉर्डर विलेज रणनीति पर भारत की प्रतिक्रिया क्या है?
भारत ने वाइब्रेंट विलेजेज़ प्रोग्राम शुरू किया, जिसका उद्देश्य बॉर्डर विलेज का विकास करना, अवसंरचना सुदृढ़ करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या बनाए रखना है।

4. सीमा विवादों में ‘ग्रे-ज़ोन रणनीति’ का क्या अर्थ है?
ग्रे-ज़ोन रणनीति में क्रमिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं, जैसे– अवसंरचना विकास या नागरिक बसावट जो क्षेत्रीय नियंत्रण को बदल देती हैं लेकिन खुले संघर्ष को उत्पन्न नहीं करतीं।

 

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्न. कभी-कभी समाचारों में देखा जाने वाला ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’  का उल्लेख किसके संदर्भ में किया जाता है? (2016) 

(a) अफ्रीकी संघ

(b) ब्राज़ील

(c) यूरोपीय संघ

(d) चीन

उत्तर: (d)


प्रश्न. भारतीय सेना के अधिकारियों और निम्नलिखित में से किस देश की सेना के अधिकारियों द्वारा संयुक्त आतंकवाद-रोधी सैन्य प्रशिक्षण 'हैंड-इन-हैंड 2007' आयोजित किया गया था? (2008)

(a) चीन

(b) जापान

(c) रूस

(d) अमेरिका

उत्तर: (a)


मेन्स 

प्रश्न. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को चीन की बड़ी 'वन बेल्ट वन रोड' पहल के मुख्य उपसमुच्चय के रूप में देखा जाता है। CPEC का संक्षिप्त विवरण दीजिये और उन कारणों का उल्लेख कीजिये जिनकी वज़ह से भारत ने खुद को इससे दूर किया है। (2018)