अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन से अमेरिका की वापसी | 31 Jan 2026

स्रोत: द हिंदू  

चर्चा में क्यों? 

जनवरी 2026 में अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) से हटने की घोषणा की, जो वर्ष 2021 में इसमें शामिल होने के पाँच वर्ष बाद की गई। इस कदम से वैश्विक जलवायु प्रयासों के कमज़ोर पड़ने और विश्व-स्तर पर सौर ऊर्जा के विस्तार में बाधा उत्पन्न होने की आशंका है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) क्या है?

  • परिचय: यह एक कार्योन्मुख सहयोगात्मक मंच है तथा भारत में मुख्यालय (गुरुग्राम, हरियाणा) वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन है।
    • इसे वर्ष 2015 में पेरिस में आयोजित COP 21 (UNFCCC) के अवसर पर भारत और फ्राँस द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया था, जो ऐतिहासिक पेरिस समझौते के साथ ही हुआ।
    • सभा इसका सर्वोच्च निर्णय-निर्माण निकाय है, जिसमें प्रत्येक सदस्य देश का प्रतिनिधित्व होता है।
  • सदस्यता: प्रारंभ में यह कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच स्थित देशों तक सीमित था। वर्ष 2020 में इसके फ्रेमवर्क समझौते में संशोधन के बाद सदस्यता सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के लिये उपलब्ध करा दी गई। वर्तमान में इसके 100 से अधिक हस्ताक्षरकर्त्ता देश हैं, जिनमें से 90 से अधिक देशों ने इसे अनुमोदित कर पूर्ण सदस्यता प्राप्त कर ली है।
  • उद्देश्य: इसका लक्ष्य वित्तीय सहायता को सुगम बनाकर, निवेशकों के जोखिम को कम करके तथा सौर ऊर्जा को अपनाने की प्रक्रिया को तेज़ करके विकासशील देशों में सौर ऊर्जा को किफायती और सुलभ बनाना है। यह स्वयं सौर ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण नहीं करता।
  • मुख्य रणनीति: ISA अपनी ‘टुवर्ड्स 1000’ रणनीति के तहत 2030 तक निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करता है: 
    • 1,000 अरब अमेरिकी डॉलर (USD) के निवेश को जुटाना।
    • स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से 1,000 मिलियन लोगों को ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
    • 1,000 गीगावाट (GW) सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करना।
    • प्रतिवर्ष 1,000 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी लाना।
  • महत्त्वपूर्ण पहल: 
    • वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (OSOWOG): महाद्वीपों (एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका) में क्षेत्रीय सौर विद्युत अंतर-संपर्क विकसित करने हेतु एक कार्यक्रम।
    • SUNRISE नेटवर्क: सौर अपशिष्ट प्रबंधन, पुनर्चक्रण और नवाचार के माध्यम से सौर क्षेत्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
    • SIDS सोलर प्रोक्योरमेंट प्लेटफॉर्म: छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) और विश्व बैंक के साथ संयुक्त सौर खरीद तथा ऊर्जा अनुकूलन क्षमता बढ़ाने के लिये किया गया सहयोग।
    • वैश्विक क्षमता केंद्र एवं ISA अकादमी: उत्कृष्टता के केंद्र (जैसे “सिलिकॉन वैली”) के रूप में स्थापित तथा वैश्विक सौर कौशल प्रशिक्षण के लिये AI-आधारित ई-लर्निंग प्लेटफॅार्म।

भारत का सौर उद्योग

  • मज़बूत विनिर्माण आधार: भारत ने महत्त्वपूर्ण घरेलू क्षमता विकसित कर ली है, जिसमें सोलर मॉड्यूल निर्माण लगभग 144 GW और सोलर सेल निर्माण लगभग 25 GW (जो तेज़ी से बढ़ रहा है) तक पहुँच गया है, जिससे प्रमुख घटकों के लिये आयात पर निर्भरता कम हुई है।
  • चीनी आयात पर निर्भरता: उच्च दक्षता वाले मॉड्यूल्स के लिये आपूर्ति शृंखला पर चीन का दबदबा है (वैश्विक सेल क्षमता का 70%) और भारत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY 25) में चीन से 1.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के सौर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल्स का आयात किया।
  • मज़बूत निवेश शृंखला: निवेश सुरक्षित है क्योंकि परियोजनाओं को मज़बूत घरेलू मांग से गति मिल रही है, जिसे उपयोगिताओं के साथ दीर्घकालिक अनुबंधों का समर्थन प्राप्त है। साथ ही इनका वित्तपोषण मुख्य रूप से भारतीय बैंकों और वैश्विक संस्थानों द्वारा किया जाता है, न कि अमेरिकी पूंजी द्वारा।

ISA से अमेरिका के हटने का संभावित प्रभाव क्या हो सकता है और निवारण हेतु क्या कदम उठाने की आवश्यकता है?

ISA से अमेरिका के हटने का संभावित प्रभाव

आगे की राह

यह वैश्विक जलवायु कार्रवाई में अमेरिका की प्रतिबद्धता में कमी का संकेत देता है, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में। साथ ही, यह सौर ऊर्जा पर वैश्विक एकीकृत सहयोग की धारणा को कमज़ोर करता है।


ISA को ग्लोबल साउथ के सौर ऊर्जा संक्रमण के लिये एक अनिवार्य और तटस्थ मंच के रूप में सक्रिय रूप से स्थापित किया जाए, ताकि अमेरिका द्वारा छोड़े गए खाली स्थान को भरा जा सके।

यह निवेशकों के विश्वास को कम कर सकता है और विकासशील देशों (अफ्रीका, द्वीपीय राष्ट्र) में सौर परियोजनाओं के लिये जोखिम की धारणा बढ़ा सकता है

जलवायु वित्तपोषण के लिये यूरोपीय संघ, जापान, विकास बैंक (ADB, AIIB) और निजी फंडों के साथ साझेदारी को तेज़ करें। निवेश आकर्षित करने के लिये जोखिम-निवारक उपकरण  तैयार करें।

ग्रिड इंटीग्रेशन, ऊर्जा भंडारण और परियोजना प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी तकनीकी विशेषज्ञता तथा नवाचार क्षमता का नुकसान।

ISA के अन्य तकनीकी अग्रणी देशों (जैसे– फ्राँस, जर्मनी, जापान) के साथ सहयोग को गहरा करना और भारतीय अनुसंधान एवं विकास संस्थानों (जैसे– सौर ऊर्जा का राष्ट्रीय संस्थान) का सदुपयोग करना

इससे ISA के सदस्य देशों में विश्वसनीय, गैर-चीनी साझेदारों की तलाश कर रही भारतीय कंपनियों के लिये रास्ते खुलते हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी और परियोजना क्रियान्वयन को प्रदर्शित करने के लिये ISA प्लेटफॉर्म का उपयोग करना। भारतीय सौर ऊर्जा निर्यात के लिये बेहतर बाज़ार पहुँच सुनिश्चित करने हेतु ISA देशों के साथ वार्त्ता को गति देना।

इससे वैश्विक जलवायु शासन का प्रतिस्पर्द्धी गुटों में विभाजन तेज़ हो जाता है, जिससे समन्वित कार्रवाई जटिल हो जाती है।

विशिष्ट परियोजनाओं पर अमेरिका सहित सभी पक्षकारों के साथ संवाद बनाए रखने के लिये ISA का उपयोग करना, यह सुनिश्चित करते हुए कि यह एक वैचारिक निकाय के बजाय एक समावेशी, कार्रवाई-उन्मुख निकाय बना रहे।

निष्कर्ष

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) से अमेरिका का बाहर होना एक कूटनीतिक चाल अवश्य है, लेकिन यह भारत के लिये अपनी जलवायु नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करने, वैकल्पिक वित्तीय संसाधन जुटाने और ISA को वैश्विक दक्षिण के न्यायसंगत सौर संक्रमण के प्रमुख मंच के रूप में स्थापित करने का एक रणनीतिक अवसर भी प्रस्तुत करता है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) से अमेरिका की वापसी भारत की जलवायु कूटनीति के लिये एक चुनौती प्रस्तुत करने के साथ एक अवसर भी प्रस्तुत करती है। समालोचनात्मक रूप से परीक्षण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) क्या है?
ISA भारत-फ्राँस के नेतृत्व वाली अंतर्सरकारी संगठन (2015) है, जो वित्त सुविधा, जोखिम में कमी और क्षमता निर्माण के माध्यम से विकासशील देशों में किफायती सौर ऊर्जा को बढ़ावा देता है।

2. ISA की 'टुवर्ड्स 1000' रणनीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1,000 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश जुटाना एवं 1,000 गीगावाट सौर क्षमता स्थापित करके स्वच्छ ऊर्जा पहुँच प्रदान करना और उत्सर्जन को कम करना है।

3. भारत के सौर उद्योग की प्रमुख सामर्थ्य क्या है?
भारत के पास 144 गीगावाट मॉड्यूल निर्माण क्षमता वाला एक लचीला, स्वदेशी रूप से संचालित सौर उद्योग है, जो इसे ऐसे बाहरी निर्णयों से बचाता है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)

  1. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को वर्ष 2015 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में प्रारंभ किया गया था।
  2. इस गठबंधन में संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश सम्मिलित हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1, न ही 2

उत्तर: (a)