भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार में ग्रिड संबंधी अवरोध | 11 Mar 2026
प्रिलिम्स के लिये: नवीकरणीय ऊर्जा, केंद्रीय विद्युत् विनियामक आयोग, केंद्रीय पारेषण उपयोगिता, ग्रिड इंडिया, वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड।
मेन्स के लिये: भारत का ऊर्जा संक्रमण और नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार, नवीकरणीय एकीकरण में ग्रिड इन्फ्रास्ट्रक्चर और पारेषण संबंधी चुनौतियाँ, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से संबंधित पहलें।
चर्चा में क्यों?
भारत क्लाइमेट फोरम 2026 में, नीति-निर्माताओं और योजनाकारों ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण के गंभीर जोखिम पर प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि अब नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार में उत्पादन क्षमता की कमी की बजाय, ट्रांजीशन (पारेषण) कंजेशन और ग्रिड संचालन मुख्य बाधा बन गए हैं।
सारांश
- भारत ने 50% गैर-जीवाश्म स्थापित ऊर्जा क्षमता का आँकड़ा पार कर लिया है, लेकिन ट्रांजीशन (पारेषण) कंजेशन, कम उपयोग की गई ग्रिड अवसंरचना और परिचालन संबंधी रूढ़िवादिता के कारण हज़ारों मेगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा रुकी हुई है।
- योजना और संचालन के बीच बेहतर समन्वय, समतापूर्ण नीतियाँ, उन्नत ग्रिड प्रबंधन और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विस्तार, भारत के नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार को बनाए रखने एवं वर्ष 2070 के शुद्ध शून्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये आवश्यक हैं।
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा निर्माण से संबंधित क्या चिंताएँ हैं?
- ग्रिड कंजेशन: उत्पादन क्षमता, पारेषण (निकासी) क्षमता की तुलना में अधिक तीव्र गति से बढ़ रही है। उदाहरण के लिये राजस्थान में 23 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता स्थापित है, लेकिन वह केवल 18.9 गीगावाट की निकासी कर सकती हैं; परिणामस्वरूप, 4,000 मेगावाट से अधिक फुल ऑपरेटिंग कैपेसिटी पीक ऑवर के दौरान ऊर्जा का निष्कासन नहीं कर पा रही है।
- T-GNA शटडाउन: यदि ग्रिड कंजेशन को समान रूप से प्रबंधित किया जाता है, तो सभी परियोजनाओं को वित्तीय रूप से प्रबंधनीय ~15% पीक-ऑवर के नुकसान का सामना करना पड़ता।
- इसकी बजाय ग्रिड पूरी तरह से टेंपरेरी जनरल नेटवर्क एक्सेस (T-GNA) वाली परियोजनाओं पर 100% शटडाउन लागू करता है।
- GNA भारत के केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग के तहत एक तंत्र है, जो विद्युत उत्पादकों और उपभोक्ताओं को अंतर-राज्य पारेषण प्रणाली (ISTS) तक अल्पकालिक, गैर-विवेकाधीन आधार पर पहुँचने की अनुमति देता है।
- नेशनल ओपन एक्सेस रजिस्ट्री के माध्यम से प्रबंधित, T-GNA लचीला, अस्थायी और उन्नत या तात्कालिक ऊर्जाक्रम को सक्षम बनाता है।
- स्थायी GNA वाली परियोजनाएँ निर्बाध रूप से संचालित होती हैं, जिससे उन नए डेवलपर्स को भारी नुकसान होता है, जिन्होंने अपनी सारी समय-सीमाओं को पूरा किया।
- मौज़ूदा परिसंपत्तियों का गंभीर रूप से कम उपयोग: ~6,000 मेगावाट क्षमता वहन करने के लिये डिज़ाइन किये गए उच्च-क्षमता वाले 765 किलोवाट डबल-सर्किट कॉरिडोर नियमित रूप से केवल 600–1,000 मेगावाट (20% से कम उपयोग) पर संचालित होते हैं।
- इसके परिणामस्वरूप, विभिन्न नवीन संचालित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ ग्रिड से जुड़ी रहती हैं, लेकिन अपनी ऊर्जा को अंतःक्षेपित करने में असमर्थ होती हैं।
- संरचनात्मक भिन्नता: केंद्रीय पारेषण उपयोगिता (CTU) कॉरिडोर की योजना का निर्माण करती है और डेवलपर्स को पूर्ण अनुमानित क्षमता (जैसे- 6,000 मेगावाट) के आधार पर GNA आवंटित करती है।
- ग्रिड इंडिया (ऑपरेटर), इसके पश्चात उस ऊर्जा के केवल एक भाग (जैसे- 1,000 मेगावाट) को प्रवाहित करने की अनुमति देता है।
- यह तीव्र अंतर एक विश्वसनीयता की समस्या उत्पन्न करता है। डेवलपर्स CTU कनेक्टिविटी स्वीकृतियों के आधार पर अरबों रुपये का निवेश करते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि भौतिक अवसंरचना उपयोग योग्य क्षमता में परिवर्तित नहीं होती।
- संचालनात्मक सतर्कता: ग्रिड संचालक ‘वोल्टेज दोलन और ग्रिड अस्थिरता’ का हवाला देते हुए बिजली के प्रवाह को काफी हद तक सीमित कर देते हैं, जिससे अत्यधिक सतर्कता ही सामान्य नीति बन जाती है।
- STATCOMs, स्टैटिक VAR जेनरेटर, हार्मोनिक फिल्टर और विशेष सुरक्षा योजनाओं जैसी सिद्ध शमन तकनीकें पहले से ही कई नए संयंत्रों में लगी हुई हैं, लेकिन ग्रिड ऑपरेटर उन्हें ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिये उपयोग करने की अनुमति नहीं देते हैं।
- उन्नत वैश्विक ऑपरेटरों के विपरीत, भारतीय संस्थान डायनेमिक सिक्योरिटी आकलन, रियल-टाइम कंटिन्जेंसी प्रबंधन, प्रायिकतामूलक जोखिम मूल्यांकन और अनुकूली लाइन रेटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने में विफल रहते हैं।
- संस्थागत जवाबदेही की कमी: जब ग्रिड अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाता, तब सरकारी संस्थानों को न तो प्रदर्शन समीक्षा का सामना करना पड़ता है और न ही किसी प्रकार के दंड का।
- इस बीच नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स को अवरुद्ध हुई परिसंपत्तियों के कारण आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, और उपभोक्ता अपनी बिजली दरों के माध्यम से कम उपयोग की गई अवसंरचना की लागत चुकाते हैं।
- भंडारण की कमी: जब सूर्य नहीं चमक रहा होता, तब ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिये भारत को वर्ष 2032 तक अनुमानित 411 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज (PHS) की तैनाती अभी भी बेहद अपर्याप्त है।
- आपूर्ति शृंखला की कमज़ोरियाँ: भारत सौर सेल और बैटरियों के निर्माण हेतु आवश्यक महत्त्वपूर्ण खनिजों (लिथियम, कोबाल्ट, दुर्लभ मृदा तत्त्व) और कच्चे माल के लिये अभी भी आयात पर काफी निर्भर है, जिससे यह क्षेत्र वैश्विक आपूर्ति जोखिमों के प्रति संवेदनशील बन जाता है।
भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र
- वर्तमान स्थिति: भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50% से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त किया है, जिससे उसने COP-26 के तहत अपने NDC लक्ष्य को 2030 की समय-सीमा से पाँच वर्ष पहले ही पूरा कर लिया है।
- नवंबर 2025 तक, भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता 262.74 गीगावाट तक पहुँच गई, जो देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 51.5% है।
- सौर ऊर्जा का प्रभुत्व: इस वृद्धि का मुख्य प्रेरक सौर ऊर्जा है। नवंबर 2025 तक सौर क्षमता 132.85 गीगावाट तक पहुँच गई है, जो वर्ष-दर-वर्ष 41% की वृद्धि दर्शाती है।
- पवन ऊर्जा में वृद्धि: पवन ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और नवंबर 2025 तक यह 53.99 गीगावाट तक पहुँच गई है।
- वैश्विक स्थिति: IRENA RE सांख्यिकी 2025 के अनुसार, सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर, पवन ऊर्जा में चौथे स्थान पर और कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी चौथे स्थान पर है।
महत्त्वपूर्ण पहल
- PM सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना: फरवरी 2024 में शुरू की गई इस योजना के तहत वर्ष 2025 में लगभग 14.43 लाख रूफटॉप सोलर (RTS) सिस्टम स्थापित किये गए, जिससे 18.14 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला।
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM): इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
- NGHM इलेक्ट्रोलाइज़र के घरेलू निर्माण तथा हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिये वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है।
- मॉडल और निर्माताओं की अनुमोदित सूची (ALMM): वर्ष 2019 में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किया गया एक विनियामक ढाँचा है, जो सरकार समर्थित परियोजनाओं में अनुमोदित सौर पीवी मॉड्यूल (सूची-I) और सेल (सूची-II) के उपयोग को अनिवार्य बनाता है।
- यह कड़े निरीक्षण और प्रमाणन के माध्यम से गुणवत्ता, प्रदर्शन एवं वारंटी मानकों को सुनिश्चित करते हुए 'मेक इन इंडिया' के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देता है।
- उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना ने विनिर्माण क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा दिया है।
- PM JANMAN & DA JGUA: प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA) उन जनजातीय और PVTG ( विशेषरूप से कमज़ोर जनजातीय समूह) बस्तियों में 'सोलर होम लाइटिंग सिस्टम' तथा 'सोलर मिनी-ग्रिड' जैसी ऑफ-ग्रिड सौर प्रणाली प्रदान करते हैं, जहाँ ग्रिड के माध्यम से बिजली पहुँचाना संभव नहीं है।
- राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति (2025): सितंबर 2025 में अधिसूचित इस नीति का उद्देश्य अप्रयुक्त भू-तापीय क्षमता का उपयोग करके स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करना और भारत की नेट ज़ीरो 2070 प्रतिबद्धता का समर्थन करना है।
- ऑफशोर विंड के लिये व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF): इस क्षेत्र की शुरुआत करने हेतु प्रारंभिक 1,000 मेगावाट की अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं (मुख्य रूप से गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर) के लिये प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से बहुपक्षीय सहयोग को मज़बूत किया गया है तथा वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड जैसी पहलों को बढ़ावा दिया गया है।
भारत की नवीकरणीय ग्रिड समस्याओं का समाधान करने हेतु कौन-से उपाय किये जा सकते हैं?
- ग्रिड ऑपरेटर के जनादेश का पुनर्निर्धारण: 'ग्रिड इंडिया' को केवल ग्रिड स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय, सुरक्षित सीमाओं के भीतर परिसंपत्ति उपयोग को अधिकतम करने के लिये स्पष्ट रूप से अधिकृत किया जाना चाहिये और इसका कड़ाई से मूल्यांकन भी किया जाना चाहिये।
- प्रदर्शन मापदंडों को विश्वसनीयता और दक्षता, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिये।
- समान कटौती लागू करना: पीक कंजेशन (अत्यधिक भीड़भाड़) के दौरान बिजली की कटौती (शटडाउन) को सभी जेनरेटरों (बिजली उत्पादकों) के बीच आनुपातिक रूप से वितरित किया जाना चाहिये।
- वर्तमान प्रणाली, जिसमें T-GNA वाले प्रोजेक्ट्स पर पूरा 100% भार डाला जाता है, असमान व्यावसायिक परिणामों से बचने के लिये समाप्त की जानी चाहिये।
- क्षमता का गतिशील पुनर्वितरण: ग्रिड की अप्रयुक्त या कम उपयोग की गई क्षमता (GNA) का कोई भी हिस्सा व्यर्थ न हो, यह सुनिश्चित करने के लिये विद्युत निकासी की सुरक्षित उपलब्ध क्षमता को पारदर्शी और रीयल-टाइम प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए गतिशील पुनर्वितरित किया जाना चाहिये।
- स्वचालित जवाबदेही समीक्षा तंत्र स्थापित करना: यदि प्रमुख ट्रांसमिशन संपत्तियाँ अपनी नियोजित क्षमता प्रदान करने में लगातार विफल रहती हैं, तो औपचारिक समीक्षा तंत्र स्वतः ही सक्रिय हो जाना चाहिये।
- समीक्षाओं द्वारा यह निश्चित किया जाना चाहिये कि बाधा का कारण तकनीकी, परिचालन संबंधी या देरी है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिये, इन निष्कर्षों को सार्वजनिक करना आवश्यक है।
- उन्नत ग्रिड प्रबंधन ढाँचे को अपनाना: ग्रिड ऑपरेटरों के लिये उन्नत ग्रिड प्रबंधन ढाँचे अपनाना आवश्यक है, जिसके तहत उन्हें रीयल-टाइम आकस्मिकता प्रबंधन, गतिशील सुरक्षा आकलन, अडैप्टिव लाइन रेटिंग्स और संभाव्य जोखिम मूल्यांकन जैसी प्रणालियों को लागू करना होगा।
- योजना और संचालन में संतुलन: भारत की केंद्रीय पारेषण उपयोगिता और ग्रिड इंडिया के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। यह संतुलन सुनिश्चित करेगा कि विशिष्ट क्षमताओं के लिये नियोजित पारेषण (ट्रांसमिशन) गलियारे डेवलपर्स के लिये वास्तविक, उपयोग योग्य विद्युत निकासी में सफलतापूर्वक परिवर्तित हो सकें।
भारत क्लाइमेट फोरम (BCF)
- भारत क्लाइमेट फोरम (BCF) एक नीति और हितधारक मंच है, जो भारत की जलवायु कार्रवाई और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिये रणनीतियों पर चर्चा करने हेतु सरकारी नेतृत्वकर्त्ताओं, उद्योग, वित्तीय संस्थानों एवं अनुसंधान संगठनों को एक साथ लाता है।
- यह फोरम भारत की जलवायु संबंधी महत्त्वाकांक्षाओं (वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो हासिल करना और वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना) और उसकी आर्थिक प्राथमिकताओं (आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत) का समर्थन करता है।
- भारत क्लीनटेक मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म: भारत क्लाइमेट फोरम 2025 में लॉन्च किया गया यह मंच, भारत के भीतर क्लीनटेक के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत, वित्तीय संस्थाओं और अनुसंधान संगठनों को एक साथ लाने का प्रयास करता है।
- इसका लक्ष्य आयातित जलवायु प्रौद्योगिकियों पर भारत की निर्भरता को कम करना, आपूर्ति शृंखला सुरक्षा सुनिश्चित करना और देश को वैश्विक स्वच्छ प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में स्थापित करना है। अनुमान है कि यह केंद्र वर्ष 2030 तक 120 से 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर का वार्षिक बाज़ार आकार प्राप्त कर लेगा, जिससे महत्त्वपूर्ण निर्यात और रोज़गार सृजन की अपार संभावनाएँ हैं।
निष्कर्ष:
भारत के 'नेट ज़ीरो 2070' लक्ष्यों की पूर्ति हेतु नीति-निर्माताओं को तत्काल दो प्रमुख कदम उठाने होंगे। पहला- अरबों की फँसी हुई संपत्तियों को बचाने के लिये, ट्रांसमिशन योजना को गतिशील ग्रिड संचालन के साथ तेज़ी से संरेखित करना होगा। दूसरा- ऊर्जा भंडारण को बढ़ाना अनिवार्य है। अंततः कुशल विद्युत् निकासी सुनिश्चित करने की दिशा में ध्यान केंद्रित करना, उत्पादन क्षमता के विस्तार से अधिक महत्त्वपूर्ण होगा।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न प्रश्न. भारत ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का तेज़ी से विस्तार किया है, लेकिन उसे ग्रिड बुनियादी ढाँचे में संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इनके कारणों का परीक्षण कीजिये और उन्हें दूर करने के उपाय सुझाइये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची (ALMM) क्या है?
अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची के तहत सरकारी सहायता प्राप्त परियोजनाओं में अनुमोदित सौर पीवी मॉड्यूल एवं सेल का उपयोग अनिवार्य है, ताकि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित किया जा सके।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य क्या है?
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उद्देश्य वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है, साथ ही घरेलू इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण को भी समर्थन देना है।
3. पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना क्या है?
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना घरों में विद्युत लागत कम करने और वितरित सौर ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने के लिये छतों पर सौर पैनल लगाने को बढ़ावा देती है।
4. भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के लिये ग्रिड कंजेशन (Grid Congestion) चिंता का विषय क्यों है?
ट्रांसमिशन (पारेषण) की सीमाएँ उत्पादित सभी नवीकरणीय बिजली की निकासी को रोकती हैं, जिससे हज़ारों मेगावाट की स्थापित क्षमता परिचालन में होने के बावजूद बेकार पड़ी रहती है ।
5. नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिये ऊर्जा भंडारण क्यों महत्त्वपूर्ण है?
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और पंपयुक्त जल भंडारण जैसी प्रौद्योगिकियाँ नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर प्रणालियों में आपूर्ति में होने वाले उतार-चढ़ाव को संतुलित करने एवं ग्रिड स्थिरता बनाए रखने में मदद करती हैं।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स:
प्रश्न. भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? (2015)
- यह एक पब्लिक लिमिटेड सरकारी कंपनी है।
- यह एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c)
मेन्स:
प्रश्न. “सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने के लिये सस्ती, विश्वसनीय, टिकाऊ और आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच अनिवार्य है।" इस संबंध में भारत में हुई प्रगति पर टिप्पणी कीजिये। (2018)
प्रश्न. परंपरागत ऊर्जा की कठिनाइयों को कम करने के लिये भारत की ‘हरित ऊर्जा पट्टी’ पर लेख लिखिये। (2013)