प्रिलिम्स फैक्ट्स (11 Feb, 2026)



PM केयर और राहत कोष पर PMO के निर्देश

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस  

चर्चा में क्यों? 

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को सूचित किया कि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत कोष (PM CARES Fund), प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) तथा राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से संबंधित प्रश्न लोकसभा में अस्वीकार्य हैं।

  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने तर्क दिया कि ये निधियाँ स्वैच्छिक सार्वजनिक योगदान के माध्यम से वित्तपोषित हैं, जिनका भारत की संचित निधि से कोई संबंध नहीं है, जिससे ये भारत सरकार के प्रत्यक्ष सरोकार से बाहर हो जाती हैं। अपनी इस स्थिति के समर्थन में PMO ने लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों के नियम 41(2)(viii) और नियम 41(2)(xvii) का उल्लेख किया।

नोट: लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य-संचालन नियमों के नियम 41, संसद सदस्यों को उन मंत्रियों से प्रश्न पूछने की अनुमति देता है जो उनके विशेष संज्ञान में सार्वजनिक महत्त्व के मामलों पर जानकारी प्राप्त करने से संबंधित हों।

  • नियम 41(2)(viii): प्रश्न उन मामलों से संबंधित नहीं होने चाहिये, जो मुख्य रूप से भारत सरकार के प्रत्यक्ष सरोकार से बाहर हों।
  • नियम 41(2)(xvii): प्रश्न उन निकायों से संबंधित नहीं होने चाहिये जो मुख्य रूप से भारत सरकार के प्रति उत्तरदायी नहीं हों।

संसदीय परिप्रेक्ष्य में ‘प्रश्न’ क्या हैं?

  • परिचय: “प्रश्न” सरकार को उत्तरदायी ठहराने का एक सशक्त संसदीय उपकरण है। यह एक निहित संसदीय अधिकार है, जिसके माध्यम से सदस्य प्रशासन, शासकीय गतिविधियों तथा नीतिगत निर्णयों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
    • सामान्यतः लोकसभा की बैठक का प्रथम घंटा प्रश्नों के लियेये निर्धारित होता है, जिसे प्रश्नकाल कहा जाता है।

प्रश्नों के प्रकार:

प्रकार

विवरण

प्रमुख विशेषताएँ

तारांकित प्रश्न

ऐसा प्रश्न जिसका उत्तर सदस्य सदन में मौखिक रूप से प्राप्त करना चाहता है।

तारांकन (*) से चिह्नित। इसके बाद अनुपूरक प्रश्न पूछने की अनुमति होती है।

अतारांकित प्रश्न

ऐसा प्रश्न जिसके लिये लिखित उत्तर अपेक्षित होता है।

सदन की मेज़ पर रखा हुआ माना जाता है। इस पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता।

अल्प सूचना प्रश्न

इस प्रकार के प्रश्नों के अंतर्गत सार्वजनिक महत्त्व और अत्यावश्यक प्रकृति के मामलों पर विचार किया जाता है।

सदस्य द्वारा मौखिक उत्तर के लिये सामान्य न्यूनतम अवधि से कम, अर्थात 10 दिनों से कम नोटिस पर पूछा जा सकने वाला प्रश्न।

निजी सदस्यों द्वारा पूछा जाने वाला प्रश्न:

किसी ऐसे सदस्य को संबोधित, जो मंत्री नहीं है।

विषय-वस्तु उसी विधेयक या प्रस्ताव से संबंधित होना चाहिये, जिसके लिये वह विशिष्ट सदस्य उत्तरदायी हो।

  • प्रश्नों की स्वीकृति: सदस्य द्वारा प्रस्तुत प्रत्येक प्रश्न स्वीकार नहीं किया जाता। लोकसभा अध्यक्ष को प्रश्नों की स्वीकृति पर अंतिम अधिकार प्राप्त है। यह निर्णय कार्य-संचालन एवं व्यवहार नियमावली के नियम 41 से 44, अध्यक्ष द्वारा जारी निर्देश 10A, पूर्व उदाहरणों, पीठ के निर्णयों तथा स्थापित संसदीय परंपराओं के आधार पर लिया जाता है।
    • स्वीकृति की शर्तें: किसी प्रश्न को स्वीकार किये जाने के लिये उसे कुछ कठोर मानदंडों को पूरा करना होता है, जिनमें शामिल हैं:
      • सार्वजनिक महत्त्व: प्रश्न उस विषय से संबंधित होना चाहिये, जो मंत्री के विशेष क्षेत्राधिकार में सार्वजनिक महत्त्व का हो।
      • व्यंग्य या मानहानि नहीं: इसमें तर्क, व्यंग्यात्मक अभिव्यक्तियाँ या मानहानिकारक बयान नहीं हो सकते।
      • पुनरावृत्ति नहीं: पहले से उत्तर दिये जा चुके प्रश्नों को दोहराना नहीं चाहिये।
      • गोपनीय मामले नहीं: यह सचिवालय की गोपनीय बैठकों या राष्ट्रपति को दी गई सलाह से संबंधित जानकारी नहीं मांग सकता।
      • न्यायालयीन विवाद नहीं: यह उन मामलों के बारे में प्रश्न नहीं कर सकता, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं।
    • अस्वीकृत किये जाने के कारण (निर्देश 10A): किसी प्रश्न को निम्नलिखित परिस्थितियों में अस्वीकार किया जा सकता है:
      • ऐसा प्रश्न जो राष्ट्रीय एकता को प्रभावित करने वाली विभाजनकारी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता हो।
      • जो केवल दिन-प्रतिदिन के प्रशासन या व्यक्तिगत हितों से संबंधित हो।
      • जो अन्य निकायों के क्षेत्राधिकार में आता हो, जैसे– मुख्य निर्वाचन आयुक्त या न्यायालय।

क्या कोई सरकारी संस्था पूर्वसंज्ञा के आधार पर प्रश्नों को अवरुद्ध कर सकती है?

संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार, PMO का समग्र निर्देश प्रक्रिया की दृष्टि से अत्यंत असामान्य है।

  • प्रति-प्रकरण आधार: स्वीकृति के निर्णय पारंपरिक रूप से प्रत्येक प्रश्न की विशिष्टता और गुणों के आधार पर लिये जाते हैं, न कि किसी पूरे विषय (जैसे– किसी विशेष कोष) को पूर्वसंज्ञा के आधार पर प्रतिबंधित करके।
  • मानक प्रक्रिया: सामान्यतः, यदि कोई मंत्रालय किसी विशेष प्रश्न को समस्याजनक पाता है (जैसे– राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण), तो वह सचिवालय से केवल उस विशेष प्रश्न को अस्वीकृत करने का अनुरोध करता है, न कि किसी पूरे विषय के खिलाफ सामान्य निर्देश जारी करता है।
  • आलोचना: आलोचक यह तर्क देते हैं कि PMO की इस स्थिति से संसदीय निरीक्षण और पारदर्शिता कमज़ोर होती है, यह लोकसभा के कार्य-संचालन में कार्यपालिका का हस्तक्षेप माना जा सकता है, और प्रधानमंत्री तथा सार्वजनिक दान से जुड़े कोषों के लिये सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने में संसद की भूमिका कमज़ोर होती है।

पीएम-केयर्स फंड, PMNRF और NDF क्या हैं?

पीएम-केयर्स फंड

  • परिचय: यह एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है। इसे विशेष रूप से राष्ट्रीय आपदाओं, जैसे कि कोविड-19 महामारी, से निपटने के लिये धन जुटाने और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया था।
  • वित्तपोषण: यह पूरी तरह से जनता के स्वैच्छिक योगदानों से निर्मित है और इसे भारत के संयुक्त कोष से कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती।
  • पारदर्शिता की स्थिति: सरकार का मानना है कि यह सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत सार्वजनिक प्राधिकारी नहीं है। इसके RTI अधिनियम के तहत दर्जे को चुनौती दी गई है और यह वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF)

  • परिचय: इसकी स्थापना वर्ष 1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई थी। इसका प्रारंभिक उद्देश्य भारत विभाजन के दौरान पाकिस्तान से आए विस्थापित लोगों (शरणार्थियों) की सहायता करना था।
  • वर्तमान में इसके संसाधनों का उपयोग मुख्यतः प्राकृतिक आपदाओं (जैसे- बाढ़, चक्रवात, भूकंप), बड़े हादसों और दंगों में मृतकों के परिवारों को तात्कालिक सहायता प्रदान करने के लिये किया जाता है।
  • वित्तपोषण: PM CARES की तरह यह केवल स्वैच्छिक सार्वजनिक योगदान स्वीकार करता है।
  • पारदर्शिता की स्थिति: सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत इसकी स्थिति विवादित है और वर्तमान में मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF)

  • परिचय: इस कोष का उपयोग विशेष रूप से सशस्त्र बलों (थलसेना, नौसेना, वायुसेना) के सदस्यों और उनके आश्रितों के कल्याण हेतु किया जाता है (अर्द्धसैनिक बलों को भी प्रायः इसमें शामिल किया जाता है)।
  • प्रशासन: इसका प्रशासन एक कार्यकारी समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें प्रधानमंत्री अध्यक्ष होते हैं।
  • वित्तपोषण: यह जनता से प्राप्त स्वैच्छिक योगदान पर निर्भर करता है।
  • पारदर्शिता की स्थिति: राष्ट्रीय रक्षा कोष सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत आता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. लोकसभा में प्रश्नकाल क्या होता है?
प्रश्नकाल लोकसभा की बैठक का पहला घंटा होता है, जिसके दौरान सदस्य सरकार से जानकारी प्राप्त करने और उसे जवाबदेह ठहराने के लिये प्रश्न पूछते हैं।

2. संसद में प्रश्नों के मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
संसदीय प्रश्नों में शामिल हैं- तारांकित प्रश्न (मौखिक उत्तर), अतारांकित प्रश्न (लिखित उत्तर), अल्प सूचना प्रश्न (तत्काल महत्त्व के विषय), निजी सदस्यों से संबंधित प्रश्न।

3. लोकसभा में प्रश्नों की ग्राह्यता कौन तय करता है?
लोकसभा अध्यक्ष नियम 41-44, निर्देश 10A, पूर्व दृष्टांतों तथा संसदीय परंपराओं के आधार पर प्रश्नों की ग्राह्यता तय करते हैं।

4. किसी प्रश्न के स्वीकार किये जाने की मुख्य शर्तें क्या हैं?
किसी प्रश्न का सार्वजनिक महत्त्व से संबंधित होना, किसी मंत्री के कार्यक्षेत्र में आना, स्पष्ट और संक्षिप्त होना तथा न्यायालय में लंबित मामलों, गोपनीय सूचनाओं या मानहानिकारक विषयों से मुक्त होना आवश्यक है।

5. निर्देश 10A के अंतर्गत किन आधारों पर प्रश्न अस्वीकार किया जा सकता है?
यदि कोई प्रश्न राष्ट्रीय एकता को प्रभावित करता हो, दैनिक प्रशासन से जुड़ा हो या संवैधानिक प्राधिकरणों अथवा न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आता हो, तो उसे अस्वीकार किया जा सकता है।

6. क्या PM CARES और PMNRF RTI अधिनियम के अंतर्गत आते हैं?
RTI अधिनियम के अंतर्गत उनकी स्थिति विवादित है और वर्तमान में मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जबकि सरकार का मत है कि वे सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्न. भारत की संसद् किसके/ किनके द्वारा मंत्रिपरिषद के कृत्यों के ऊपर नियंत्रण रखती है? (2017)

  1. स्थगन प्रस्ताव
  2. प्रश्न काल
  3. अनुपूरक प्रश्न

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1,2 और 3

उत्तर: (d)


भारत-नीदरलैंड ग्रीन हाइड्रोजन साझेदारी

स्रोत: पीआईबी 

भारत और नीदरलैंड ने 'भारत-नीदरलैंड हाइड्रोजन फेलोशिप प्रोग्राम' शुरू करके और ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान तथा शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करके स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को और मज़बूत किया है।

  • हाइड्रोजन फेलोशिप प्रोग्राम: यह फेलोशिप प्रोग्राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा लॉन्च किया गया है, जिसके साथ योजना दिशा-निर्देश और प्रस्ताव आमंत्रण भी जारी किये गए हैं। यह एक राष्ट्रीय क्षमता निर्माण पहल है, जो भारतीय डॉक्टोरल, पोस्टडॉक्टोरल और फैकल्टी शोधकर्त्ताओं के लिये खुला है।
  • उद्देश्य: भारत की हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों में तैनाती की तत्परता बढ़ाना, विशेष रूप से सिस्टम इंटीग्रेशन, सुरक्षा, तकनीकी-आर्थिक विश्लेषण, जीवन चक्र मूल्यांकन और स्वदेशीकरण मार्गों पर ध्यान केंद्रित करना, खासकर उन क्षेत्रों के लिये जहाँ उत्सर्जन कम करना कठिन है।
  • MoU ढाँचा: ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और 19 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs) के बीच यह समझौता संकाय तथा छात्रों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान एवं ग्रीन एनर्जी एवं हाइड्रोजन में ज्ञान साझा करने की सुविधा प्रदान करता है, जिसमें स्वचालित वित्तीय प्रतिबद्धताएँ शामिल नहीं हैं।
  • नीति समन्वय: यह पहल भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, ऊर्जा स्वतंत्रता 2047 विज़न और नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्यों के साथ संगत है, जो वैश्विक हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था के लिये अनुसंधान सहयोग, नवाचार तथा मानव संसाधन को मज़बूत करती है।

और पढ़ें: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन


P-8I पनडुब्बी रोधी युद्धकविमान

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड (DPB) ने भारतीय नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी एवं युद्धक क्षमताओं को सुदृढ़ करने हेतु अमेरिका से छह अतिरिक्त बोइंग P-8I पोसाइडन विमान अधिग्रहण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।

  • ऑफसेट प्रावधान का अभाव: यह सौदा भारत–अमेरिका अंतर-सरकारी समझौता (IGA) ढाँचे के अंतर्गत किया जा रहा है।
    • यह खरीद रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP), 2020 के तहत संसाधित की जा रही है, जिसमें अंतर-सरकारी समझौतों के लिये ऑफसेट संबंधी आवश्यकताओं को समाप्त कर दिया गया था। परिणामस्वरूप, इस समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अथवा सह-उत्पादन के प्रावधान शामिल नहीं होंगे।
    • मेक इन इंडिया’ के अनुरूप कई अन्य अधिग्रहणों के विपरीत, यह खरीद घरेलू औद्योगिक भागीदारी की अपेक्षा रणनीतिक और तात्कालिक परिचालन को प्राथमिकता देती है।
  • बोइंग P-8I: यह एक बहु-मिशन, लंबी-दूरी तक समुद्र में गश्त करने वाला विमान है, जिसे पनडुब्बी-रोधी युद्धक विमान (ASW), एंटी-सरफेस वॉरफेयर, खुफिया, निगरानी एवं टोही (ISR), समुद्री क्षेत्र में जागरूकता तथा खोज एवं बचाव अभियानों के लिये अभिकल्पित किया गया है।
    • भारतीय नौसेना में 12 P-8I विमान शामिल हैं, जिसमें INS राजाली (INAS 312) और INS हंसा (INAS 316) वर्तमान में सेवारत हैं।
  • अन्य अमेरिकी रक्षा समझौते: अमेरिका के साथ रक्षा सहभागिता में M982A1 एक्सकैलिबर प्रक्षेपास्त्र, जैवलिन मिसाइलें तथा MH-60R हेलीकॉप्टरों के लिये अनुरक्षण समर्थन की खरीद भी सम्मिलित है।

और पढ़ें: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया


पृथ्वी की गति का गुरुत्वीय नियंत्रण

स्रोत: द हिंदू

एक वैज्ञानिक विवेचन बताता है कि गुरुत्वाकर्षण किस प्रकार पृथ्वी की गति को नियंत्रित करता है तथा ग्रहों की गति और अभिकेंद्रीय बल (Centripetal Force) की प्रमुख अवधारणाओं पर पुनर्विचार करता है।

  • बंधनकारी बल: गुरुत्वाकर्षण एक मूलभूत बंधनकारी बल (Fundamental Binding Force) के रूप में कार्य करता है, जो पृथ्वी के अंतरिक्ष में निरंतर गति करने के बावजूद मनुष्यों, महासागरों, वायुमंडल और समस्त जीवन को उससे आबद्ध रखता है।
  • अभिकेंद्रीय क्रिया: वस्तुओं को नीचे आकर्षित करने के अतिरिक्त गुरुत्वाकर्षण अभिकेंद्रीय बल के रूप में कार्य करता है, जो चंद्रमा को पृथ्वी की कक्षा में तथा पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करते रहने में बनाए रखता है।
  • ग्रहों की गति: गुरुत्वीय आकर्षण के कारण पृथ्वी प्रत्येक वर्ष सूर्य की परिक्रमा पूर्ण करती है और अपने कक्षीय पथ में लगभग 1 अरब किमी. की यात्रा करती है।
    • पृथ्वी लगभग 1,07,000 किमी. प्रति घंटा की औसत गति से चलती है, जो ग्रहों की गति की गतिशील प्रकृति को दर्शाता है।
  • घर्षण का अभाव: पृथ्वी पर गति के विपरीत, जहाँ घर्षण वस्तुओं को धीमा करता है, ग्रह अंतरिक्ष के लगभग निर्वात में गति करते हैं, जहाँ नगण्य प्रतिरोध होने के कारण बिना अतिरिक्त ऊर्जा के निरंतर गति संभव होती है।
  • ईथर (Aether) का निषेध: मिशेलसन-मॉर्ले प्रयोग (1887) ने ‘ईथर’ नामक एक अदृश्य माध्यम के अस्तित्व को खंडित कर दिया, जिससे यह पुष्टि हुई कि पृथ्वी किसी प्रतिरोधी पदार्थ के बजाय लगभग रिक्त अंतरिक्ष में गति करती है।

और पढ़ें: गुरुत्वाकर्षण तरंगों के नए स्रोत


थ्वाइट्स ग्लेशियर

स्रोत: द हिंदू

हालिया अध्ययनों से पश्चिमी अंटार्कटिका स्थित थ्वाइट्स ग्लेशियर के तीव्र क्षीणन और पश्चगमन प्रवृत्ति सामने आई है, जिससे दीर्घकालिक वैश्विक समुद्र-स्तर वृद्धि को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं।

थ्वाइट्स ग्लेशियर

  • स्थिति एवं आकार: इसे सामान्यतः ‘डूम्सडे ग्लेशियर’ कहा जाता है। यह लगभग 120 किमी. चौड़ा तीव्रगामी हिम-पिंड है और लगभग 1.9 लाख वर्ग किमी. क्षेत्र में विस्तृत है, जिससे यह अंटार्कटिका के सबसे बड़े और महत्त्वपूर्ण ग्लेशियरों में से एक बनता है।
  • समुद्र-स्तर जोखिम: यदि यह पूर्णतः ध्वस्त हो जाए, तो इसमें संचित हिम वैश्विक समुद्र-स्तर को 0.5 मीटर से अधिक बढ़ा सकती है। साथ ही, इसका वर्तमान पिघलन ही वार्षिक वैश्विक समुद्र-स्तर वृद्धि में लगभग 4% का योगदान कर रहा है।
    • पिछले तीन दशकों में इस ग्लेशियर से हिम प्रवाह (Ice Discharge) लगभग दोगुना हो चुका है और वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार अगले 200-900 वर्षों में इसके बड़े पैमाने पर ध्वस्त होने की संभावना व्यक्त की है।
  • भौगोलिक संवेदनशीलता: यह ग्लेशियर उस बेस रॉक पर स्थित है, जो भीतर की ओर समुद्र स्तर से नीचे की ओर ढलान रखती है, जिससे गर्म महासागरीय जल इसके तैरते आइस शेल्फ के नीचे प्रवाहित होकर इसे आधार से पिघलाता है और उसकी संरचनात्मक स्थिरता को प्रभावित कर देता है।
  • आइस शेल्फ की भूमिका: आइस शेल्फ ग्लेशियर के महासागर में बहाव को नियंत्रित करने वाले एक संरक्षक की भूमिका निभाता है; जब यह क्षीण या खंडित हो जाता है, तो ग्लेशियर की गति तेज़ हो जाती है और यह अधिक मात्रा में बर्फ को संकुचित या क्षीणित करने लगता है।
  • वैश्विक प्रभाव: इसके अस्थिर होने से तटीय क्षेत्रों में बाढ़, अपरदन और तूफानी लहरों की तीव्रता बढ़ सकती है, जिससे विश्व भर के कम ऊँचाई वाले शहरों, द्वीपों और बंदरगाहों को खतरा उत्पन्न हो सकता है।

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और पढ़ें: अंटार्कटिका का डूम्सडे ग्लेशियर


केरल में ड्रैगनफ्लाई की नई प्रजाति की खोज

स्रोत: द हिंदू 

शोधकर्त्ताओं ने केरल में ड्रैगनफ्लाई की एक नई प्रजाति, लिरियोथेमिस केरलेंसिस (Lyriothemis keralensis) की पहचान की है, जिससे इसकी ज्ञात भौगोलिक सीमा पूर्वोत्तर भारत से आगे बढ़ गई है, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता को रेखांकित करती है।

  • परिचय: इसकी उपस्थिति वर्ष 2013 से केरल में देखी गई थी, लेकिन इसे एक दशक से अधिक समय तक लिरियोथेमिस एशिगास्ट्रा के रूप में गलत पहचान की गई, जब तक कि सूक्ष्मदर्शी परीक्षण और संग्रहालय में रखे नमूनों की तुलना ने इसकी अलग पहचान की पुष्टि नहीं कर दी।
  • विशेषताएँ: यह प्रजाति स्पष्ट यौन द्विरूपता को प्रदर्शित करती है, जिसमें मेल ड्रैगनफ्लाई चमकीले गहरे लाल रंग के होते हैं जिन पर काले निशान होते हैं, जबकि मादा ड्रैगनफ्लाई पीले रंग की होती हैं जिन पर काले निशान पाए जाते हैं।
  • मौसमी उपलब्धता: ड्रैगनफ्लाई को मौसमी रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून (मई के अंत से अगस्त तक) के दौरान देखा जाता  है हालाँकि शेष वर्ष के दौरान ये जलीय लार्वा के रूप में रहती हैं।
  • चिंताएँ: यह प्रजाति अनन्नास और रबर के बागानों तथा छायादार नहरों जैसे मानव-निर्मित सिंचाई परिदृश्यों में जन्म लेती है। चूँकि इसकी अधिकांश आबादी संरक्षित क्षेत्रों से बाहर रहती है, अतः यह बागान-प्रधान क्षेत्रों में जैव विविधता के प्रति संवेदनशील भूमि-अनुकूल प्रथाओं की आवश्यकता पर बल देती है।

और पढ़ें: ड्रैगनफ्लाई उत्सव