भारत का भूजल संकट
प्रिलिम्स के लिये: भूजल, सतत विकास लक्ष्य, यूनेस्को, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), दक्षिण-पश्चिम मानसून, भारी धातु, जल जीवन मिशन, केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), PMKSY, अटल भूजल योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), VB-G RAM G.
मेन्स के लिये: भूजल से संबंधित प्रमुख तथ्य और इसके दोहन के कारण, भूजल संरक्षण हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदम।
चर्चा में क्यों?
भूजल भारत की जल सुरक्षा का प्रमुख स्रोत है, जो कृषि और पेयजल संबंधी आवश्यकताओं की आपूर्ति करता है, हालाँकि बढ़ते दोहन एवं गुणवत्ता में कमी तत्काल तथा सतत प्रबंधन की मांग करती है।
सारांश
- भूजल 62% सिंचाई, 85% ग्रामीण और 50% शहरी जल आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, फिर भी इसके स्तर में क्षरण एवं प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।
- इसके प्रमुख कारणों में मुफ्त बिजली, जल-अनुकूल फसल पद्धति, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और कमज़ोर कानूनी ढाँचा शामिल हैं।
- सरकारी उपायों में मॉडल भूजल विधेयक, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन, जल शक्त्त अभियान - जल संचयन अभियान, राष्ट्रीय भूजल प्रबंधन सुधार कार्यक्रम (NAQUIM) 2.0, अटल भूजल योजना और मिशन अमृत सरोवर शामिल हैं।
भूजल से संबंधित प्रमुख तथ्य क्या हैं?
- परिचय: भूजल मीठा जल का स्रोत है, जो भूमिगत स्तरों (जलभृतों) में संग्रहित होता है और पृथ्वी के लगभग 99% तरल मीठे जल का प्रतिनिधित्व करता है। यह ज़मीन में रिस सकता है, कुओं के माध्यम से निकाला जा सकता है और प्राकृतिक रूप से सतह पर आ सकता है।
- भूजल पर निर्भरता: भारत में, भूजल कृषि गतिविधि और पेयजल आपूर्ति की प्राथमिक आधारशिला के रूप में कार्य करता है, जो लगभग 62% सिंचाई की आवश्यकताओं, 85% ग्रामीण उपभोग एवं 50% शहरी मांग को पूरा करता है।
- भारत के भूजल उपयोग की स्थिति: वार्षिक भूजल दोहन 245.64 BCM (बिलियन क्यूबिक मीटर) है, जो राष्ट्रीय स्तर पर 60.47% दोहन दर का प्रतिनिधित्व करता है और इंगित करता है कि कुल उपयोग वार्षिक पुनर्भरण क्षमता के भीतर बना हुआ है।
- कुल वार्षिक पुनर्भरण 446.90 BCM है और संरक्षण प्रयासों के कारण 2017 से इसमें लगातार वृद्धि का रुझान देखा गया है।
- शासन एवं प्रबंधन: जल शासन मुख्य रूप से राज्य सरकारों के पास है, हालाँकि केंद्र सरकार तकनीकी और वित्तीय योजनाओं के माध्यम से सुविधाकारी समर्थन प्रदान करती है।
- यह सहयोग सतत विकास लक्ष्यों, विशेष रूप से लक्ष्य 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता), 11 (सतत शहर और समुदाय) और 12 (ज़िम्मेदार उपभोग और उत्पादन) को आगे बढ़ाने के लिये आवश्यक है।
- भूजल प्रबंधन की मूल आधारशिला भूजल (जलभृतों) के कार्य और उपयोग, समस्या एवं दबाव (संकट), प्रबंधन उपायों के प्रभाव हैं।
- यूनेस्को के अनुसार, प्रभावी भूजल प्रबंधन के लिये चार प्रमुख प्राथमिकताओं की आवश्यकता है, जो इस प्रकार हैं:
भारत में भूजल की कमी के प्रमुख कारक क्या हैं?
- आर्थिक एवं नीतिगत प्रोत्साहन में कमी: कृषि के लिये मुफ्त बिजली अनियमित भूजल दोहन को प्रोत्साहित करती है, हालाँकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली धान और गन्ने जैसी जल-अनुकूल फसलों को लाभ देती है। इससे कृषि के लिये जलभृतों को समाप्त करने का एक नीतिगत प्रोत्साहन उत्पन्न होता है।
- जनसंख्या एवं शहरी दबाव: तीव्र शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि (2016-2023 के बीच 1.29 से 1.45 बिलियन) प्राकृतिक पुनर्भरण क्षेत्रों को अभेद्य सतहों में परिवर्तित कर देते हैं। यह "कंक्रीट सीलिंग" वर्षा जल के रिसाव को भारी रूप से कम कर देती है, जबकि केंद्रित शहरी और औद्योगिक दोहन गंभीर अवनति शंकु (Cones of Depression) का निर्माण करता है, जिससे चेन्नई तथा दिल्ली जैसे शहरों में भूमि धँसाव देखने को मिल रहा है।
- जलवायु परिवर्तन और जलवैज्ञानिक व्यवधान: जलवायु परिवर्तन दक्षिण-पश्चिम मानसून को बदल रहा है, जो भारत के लगभग 60% भूजल पुनर्भरण के लिये ज़िम्मेदार है, क्योंकि इससे वर्षा की अनिश्चितता बढ़ रही है और जलभृत (एक्विफर) का पुनर्भरण घट रहा है। साथ ही, बढ़ता तापमान वाष्पीकरण और फसलों की जल-मांग को बढ़ाता है, जिससे एक दुष्चक्र बनता है जिसमें जलवायु अनुकूलन के प्रयास भूजल क्षय को और तेज़ कर देते हैं।
- व्यापक प्रदूषण: उर्वरकों के बहाव और औद्योगिक अपशिष्ट जैसे कानपुर की टैनरियों से निकलने वाले प्रवाह भूजल को नाइट्रेट, भारी धातुओं (जैसे- क्रोमियम, यूरेनियम और सीसा) तथा फ्लोराइड से दूषित कर रहे हैं, जिससे कई क्षेत्रों में पानी असुरक्षित हो गया है। तटीय गुजरात में, अत्यधिक पंपिंग और समुद्र-स्तर में वृद्धि के कारण लवणीय जल का प्रवेश होता है, जिसने 33 में से 28 ज़िलों में स्वच्छ जल के जलभृतों को प्रदूषित कर दिया है।
- पुरातन कानूनी ढाँचा: शासन विफलता की जड़ भारतीय ईज़मेंट्स अधिनियम, 1882 में निहित है, जो भूजल को सामुदायिक संसाधन के बजाय भूमि-स्वामी का निजी अधिकार मानता है। इससे सामूहिक और प्रभावी प्रबंधन में बाधा उत्पन्न होती है।
- संस्थागत विखंडन: CGWB, CPCB, SPCB और जल शक्ति मंत्रालय जैसी एजेंसियाँ अलग-अलग साइलो में काम करती हैं, जिससे भूजल प्रबंधन के प्रति खंडित एवं असमन्वित दृष्टिकोण बनता है।
- जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत भूजल से संबंधित अपर्याप्त प्रावधान, अप्रभावी प्रवर्तन और नियामक कमियाँ प्रदूषण को बढ़ावा देती हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
भूजल प्रबंधन हेतु प्रमुख सरकारी पहलें और उनकी उपलब्धियाँ क्या हैं?
- नियामक ढाँचा: मॉडल भूजल विधेयक, 2017 राज्यों को दोहन को विनियमित करने के लिये एक ढाँचा प्रदान करता है। बिहार, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश सहित 21 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने इसे अपनाया है। समन्वय राष्ट्रीय अंतर-विभागीय संचालन समिति (NISC) के माध्यम से किया जाता है।
राष्ट्रीय स्तर के संरक्षण अभियान:
- जल शक्ति अभियान- कैच द रेन (JSA: CTR): यह जल संरक्षण, जल निकायों की जियो-टैगिंग, जल शक्ति केंद्रों की स्थापना और परित्यक्त बोरवेलों के पुनर्जीवन पर केंद्रित है।
- जल संचय जन भागीदारी (JSJB): जनवरी 2026 तक, इसने स्थानीय भूजल पुनर्भरण के लिये स्केलेबल मॉडलों का उपयोग करते हुए 39,60,333 कृत्रिम पुनर्भरण कार्य पूरे किये हैं।
- वैज्ञानिक मूल्यांकन और योजना: राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण और प्रबंधन कार्यक्रम (NAQUIM & NAQUIM 2.0): इसका उद्देश्य जलभृतों का वर्गीकरण करना, उपलब्धता/गुणवत्ता का आकलन करना और प्रबंधन योजनाओं के लिये जलभृत मानचित्र तैयार करना है, जो अब पंचायत स्तर के डेटा भी प्रदान कर रहा है।
- कृत्रिम भूजल पुनर्भरण के लिये मास्टर प्लान-2020: यह 1.42 करोड़ संरचनाओं के माध्यम से 185 BCM अतिरिक्त पुनर्भरण सुनिश्चित करने की योजना बनाता है, जो क्षेत्र-विशिष्ट तकनीकों का उपयोग करता है।
- सामुदायिक नेतृत्व वाली और लक्षित योजनाएँ:
- अटल भूजल योजना (अटल जल): यह 7 जल-संकटग्रस्त राज्यों में सामुदायिक नेतृत्व वाली भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देती है और जल जीवन मिशन तथा किसानों की आय को दोगुना करने के लिये परिणामों से जुड़ी प्रोत्साहन व्यवस्था प्रदान करती है।
- मिशन अमृत सरोवर: इसका उद्देश्य सभी ज़िलों में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण बढ़ाने के लिये कम-से-कम 1 एकड़ तथा 10,000 क्यूबिक मीटर क्षमता वाले तालाब बनाना है।
- निगरानी अवसंरचना: भारत में केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) द्वारा संचालित 43,228 भूजल निगरानी स्टेशन हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करते हैं।
भारत में प्रभावी भूजल प्रबंधन प्राप्त करने हेतु प्रमुख रणनीतियाँ क्या हैं?
- जल-सजग कृषि प्रथाएँ: ड्रिप इरिगेशन, सूक्ष्म-सिंचाई, शून्य जुताई और प्रिसिज़न फार्मिंग को बढ़ावा देने से कृषि में भूजल निकासी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में इसका तेज़ी से पालन सुनिश्चित करने के लिये PMKSY को अटल भूजल योजना के साथ समेकित किया जा सकता है।
- संस्थागत पुनःअभियांत्रण: प्रभावी भूजल प्रबंधन के लिये राजनीतिक सीमाओं से हटकर हाइड्रोजियोलॉजिकल सीमाओं पर ध्यान देना आवश्यक है और राज्य को अभिभारी मानने वाले सार्वजनिक ट्रस्ट सिद्धांत को अपनाना चाहिये। विकेंद्रीकृत जलभृत प्रबंधन समितियों (AMC) को कानूनी अधिकार दिया जाना चाहिये ताकि वे स्थानीय दोहन सीमाएँ तय करने और लागू करने के लिये NAQUIM 2.0 डेटा का उपयोग कर सकें।
- डिजिटल जल कमांड सिस्टम: एक राष्ट्रीय IoT सेंसर नेटवर्क स्थापित किया जाए जो भूजल स्तर, गुणवत्ता और दोहन का वास्तविक समय में निगरानी करे तथा इसे 'भू-नीर' जैसी केंद्रीय AI प्लेटफॅार्म से जोड़ा जाए। इससे जलभृत तनाव एवं अवैध दोहन पर पूर्वानुमान आधारित विश्लेषण संभव होगा व शासन प्रणाली को स्थैतिक से सक्रिय दृष्टिकोण में बदला जा सकेगा।
- संरक्षण को प्रोत्साहित करने हेतु वित्तीय पुनर्गठन: बिजली सब्सिडी को भूजल दोहन से अलग करें और कृषि के लिये स्मार्ट मीटरिंग के साथ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) मॉडल लागू करें। औद्योगिक उपयोगकर्त्ताओं पर भूजल सुरक्षा कर लगाया जाए और इससे एक अक्विफर रिचार्ज फंड बनाया जाए, जो सामुदायिक नेतृत्व वाली जल संरक्षण पहलों हेतु प्रोत्साहन प्रदान करे।
- प्राकृतिक और उन्नत रिचार्ज समाधान का विस्तार: मैनेज्ड अक्विफर रिचार्ज (MAR) को विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों के अनुसार लागू करें, जैसे तटीय क्षेत्रों में सौर शोधन के साथ MAR और कृषि अपवाह के लिए बायोचार फिल्टरेशन का उपयोग। शहरी क्षेत्रों में उपचारित अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण अनिवार्य करें और वर्षा जल संचयन (RWH) नियमों को लागू करके बहु-स्तरीय रिचार्ज प्रणाली विकसित करें।
- जलवायु अनुकूलन बढ़ाना: समुदायों को हाइड्रोजियोलॉजी साक्षरता में निवेश करके और सरल जल बजट उपकरण प्रदान करके सशक्त बनाना। जलवायु-सहिष्णु फसलों (जैसे- बाजरा, दालें) को खरीद नीतियों में शामिल करना तथा VB-G RAM-G कार्यों को अक्विफर रिचार्ज से जोड़कर स्थानीय ज़िम्मेदारी बढ़ाना।
निषकर्ष
भारत में भूजल की स्थिरता प्राप्त करने के लिये नीति सुधार (सब्सिडी का पुनर्संतुलन, कानूनी सुधार), प्रौद्योगिकी अपनाना (प्रबंधन हेतु AI, IoT) और सामुदायिक नेतृत्व वाली गतिविधियाँ (रिचार्ज, संरक्षण) को एकीकृत दृष्टिकोण में शामिल करना आवश्यक है, जो मज़बूत अक्विफर-स्तरीय शासन तथा जलवायु-सहिष्णु रणनीतियों पर आधारित हो।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. भारत में भूजल की कमी के मुख्य कारणों पर चर्चा कीजिये और भारत के लिये अनुकूल भूजल प्रबंधन रणनीतियों का सुझाव दीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. भारत में भूजल निकालने की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारत में वार्षिक भूजल दोहन 245.64 BCM है और राष्ट्रीय दोहन दर 60.47% है, जो दर्शाती है कि कुल दोहन अभी भी वार्षिक पुनर्भरण क्षमता के भीतर है।
2. सतत विकास लक्ष्यों के लिये भूजल प्रबंधन इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है?
भूजल प्रबंधन SDG 6, SDG 11 और SDG 12 का समर्थन करता है, जिससे स्वच्छ पानी तक पहुँच, सतत शहरीकरण तथा ज़िम्मेदार संसाधन उपयोग सुनिश्चित होता है।
3. NAQUIM 2.0 भूजल स्थिरता को किस प्रकार सहयोग करता है?
NAQUIM 2.0 उच्च-सटीक अक्विफर डेटा प्रदान करता है, जिससे पंचायत स्तर पर योजना निर्माण संभव होता है और यह जल-संकट, तटीय, शहरी तथा औद्योगिक क्षेत्रों को प्रभावी प्रबंधन के लिये लक्षित करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राचीन नगर अपने उन्नत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिये सुप्रसिद्ध है, जहाँ बाँधों की शृंखला का निर्माण किया गया था तथा संबद्ध जलाशर्यों में नहर के माध्यम से जल को प्रवाहित किया जाता था? ( 2021)
(a) धोलावीरा
(b) कालीबंगन
(c) राखीगढ़ी
(d) रोपड़
उत्तर: (a)
प्रश्न. 'वाटर क्रेडिट' (WaterCredit) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (वर्ष 2021)
- यह जल और स्वच्छता क्षेत्र में कार्य करने के लिये माइक्रोफाइनेंस टूल का इस्तेमाल करता है।
- यह विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व बैंक के तत्त्वावधान में शुरू की गई एक वैश्विक पहल है।
- इसका उद्देश्य गरीब लोगों को सब्सिडी पर निर्भर हुए बिना उनकी जल की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (c)
प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-से भारत के कुछ भागों में पीने के जल में प्रदूषक के रूप में पाए जाते हैं? (2013)
- आर्सेनिक
- सारबिटॉल
- फ्लुओराइड
- फार्मेल्डिहाइड
- यूरेनियम
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2, 4 और 5
(c) केवल 1, 3 और 5
(d) 1, 2, 3, 4 और 5
उत्तर: C
मेन्स
प्रश्न 1. जल संरक्षण और जल सुरक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा प्रवर्तित जल शक्ति अभियान की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? (2020)
प्रश्न 2. रिक्तीकरण परिदृश्य में विवेकी जल उपयोग के लिये जल भंडारण और सिंचाई प्रणाली में सुधार के उपायों को सुझाइये। (2020)
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