डेली न्यूज़ (03 Jan, 2026)



ग्रामीण विकास विभाग: वर्षांत समीक्षा, 2025

स्रोत: PIB

चर्चा में क्यों?

ग्रामीण विकास विभाग द्वारा वर्ष 2025 की रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें ग्रामीण संपर्क, आवास, आजीविका, रोज़गार, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा में हुई प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है, साथ ही एक नए रोज़गार गारंटी कानून के अधिनियमन का भी उल्लेख किया गया है- जो समावेशी और अनुकूल ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

वर्ष 2025 में भारत के ग्रामीण विकास प्रयासों के प्रमुख परिणाम क्या थे?

  • ग्रामीण संपर्क और भौतिक अवसंरचना: वर्ष 2000 में अपनी स्थापना के बाद से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत स्वीकृत ग्रामीण सड़कों (7.87 लाख किमी) का लगभग 95% निर्माण पूरा हो चुका है, जिससे आर्थिक एकीकरण, सीमा संपर्क और हर मौसम में आवागमन मज़बूत हुआ है।
    • वर्ष 2025 में तमिलनाडु (सबसे अधिक सड़कों का निर्माण), हिमाचल प्रदेश (सबसे अधिक सड़क की लंबाई) और बिहार (सबसे अधिक पुलों का निर्माण) जैसे उच्च प्रदर्शन करने वाले राज्य क्षेत्र-विशिष्ट लाभों को प्रदर्शित करते हैं, जबकि सीमावर्ती, पहाड़ी, वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में केंद्रित निवेश ने आर्थिक एकीकरण और रणनीतिक पहुँच दोनों को मज़बूत किया है। 
    • ई-बैंक गारंटी और स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट (SBD) जैसे डिजिटल सुधारों से पारदर्शिता और काम करने की क्षमता में सुधार हुआ है।
  • महिला-केंद्रित आजीविका परिवर्तन: दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) ने 10.05 करोड़ महिलाओं को 90.9 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHG) में संगठित करके समावेशी विकास की आधारशिला के रूप में उभरकर अपनी पहचान बनाई।
    • गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में 9.58% (2014) से 1.76% (2025) तक की तीव्र गिरावट संस्थागत परिपक्वता को दर्शाती है, जो इस धारणा को गलत साबित करती है कि गरीब परिवार ‘उच्च जोखिम वाले उधारकर्त्ता’ हैं।
    • 2 करोड़ लखपति दीदियों का सृजन निर्वाह से स्थायी आय सृजन की ओर एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है। अध्ययन के अनुसार, उनकी आय में 19% और बचत में 28% की वृद्धि इस आर्थिक सशक्तीकरण की पुष्टि करती है।
  • आवास सुरक्षा और मानव विकास: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) ने ग्रामीण बुनियादी ढाँचे में अभूतपूर्व प्रगति की है। योजना के तहत अब तक 3.86 करोड़ आवासों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनमें से दिसंबर 2025 तक 2.92 करोड़ घरों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि केवल वर्ष 2025 में ही 23.4 लाख परिवारों को उनके अपने घर सौंपे गए हैं।
    • प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM JANMAN) के तहत PVTG (विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह) परिवारों के लिये 4.71 लाख आवास स्वीकृत किये गए और 2.42 लाख आवास पूरे किये गए, जिससे ऐतिहासिक वंचना का प्रत्यक्ष रूप से समाधान हुआ।
    • आवाससॉफ्ट, आवास+, पहल (प्रत्यक्ष हस्तांतरित लाभ) और आधार-आधारित e-KYC जैसी डिजिटल पहलों ने लाभार्थियों की पहचान को अधिक सटीक बनाया, पारदर्शिता बढ़ाई तथा आपदा-प्रतिरोधी आवास डिज़ाइन को सुदृढ़ किया।
  • कौशल विकास और रोज़गार से जुड़ाव: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) ने प्लेसमेंट-आधारित कौशल विकास को सुदृढ़ किया। वर्ष 2025 में इसके तहत लगभग 82,000 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि कुल मिलाकर प्लेसमेंट 11.64 लाख तक पहुँचे।
    • इसके पूरक के रूप में, ग्रामीण स्व-रोज़गार प्रशिक्षण संस्थानों (RSETIs) ने 59 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया और 43 लाख आजीविका स्थापितियाँ (सेटलमेंट) हासिल कीं। RSETI 2.0 के तहत ऋण-जुड़ाव लक्ष्यों को बढ़ाकर 50% किया गया।
    • इन योजनाओं ने मिलकर रोज़गार-क्षमता, उद्यमिता और गैर-कृषि आय के विविधीकरण में सुधार किया।
  • रोज़गार सुरक्षा और परिसंपत्ति सृजन: वित्त वर्ष 2025–26 में MGNREGS के तहत 161.6 करोड़ मानव-दिवस का सृजन हुआ, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 56.73% रही।
    • उत्पादकता पर दिया गया ज़ोर 49.62 लाख पूर्ण कार्यों से स्पष्ट है, जिनमें से 60.59% श्रेणी-B परिसंपत्तियाँ थीं (सामुदायिक परिसंपत्तियाँ या संवेदनशील वर्गों के लिये व्यक्तिगत परिसंपत्तियाँ), जो कृषि और आजीविका से जुड़ी थीं।
    • राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (95% उपस्थिति दर्ज), GeoMGNREGA (6.44 करोड़ परिसंपत्तियों का जियो-टैगिंग) और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से 99% मज़दूरी भुगतान जैसी डिजिटल पहलों ने पारदर्शिता बढ़ाई तथा लीकेज को कम किया।
    • विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025 ने वैधानिक रोज़गार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिनों तक करने तथा विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPP) के माध्यम से ग्राम सभा-नेतृत्व वाली, निचले स्तर से ऊपर योजना प्रक्रिया को अंतर्निहित करके एक महत्त्वपूर्ण प्रतिमान परिवर्तन को चिह्नित किया।
      • इन योजनाओं को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक (VBNRIS) में समेकित किया जाता है, जो ज़िला और राज्य स्तर पर ग्राम पंचायत प्रस्तावों को एकीकृत करता है।
      • यह अधिनियम रोज़गार सृजन को टिकाऊ परिसंपत्ति निर्माण और विकसित भारत @ 2047 के दृष्टिकोण के साथ संरेखित करता है।
  • सामाजिक सुरक्षा और कल्याण वितरण: राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) ने वर्ष 2025–26 में 3.01 करोड़ लाभार्थियों को सहायता प्रदान कर संविधान के अनुच्छेद 41 को क्रियान्वित किया।
    • लगभग सार्वभौमिक डिजिटलीकरण, 91.45% आधार सीडिंग और 44 लाख डिजिटल जीवन प्रमाणपत्रों ने समावेशन तथा दक्षता में सुधार किया, जबकि राज्यों द्वारा किये गए अतिरिक्त योगदान से पेंशन की पर्याप्तता बढ़ी।
  • शासन और सहकारी संघवाद: न्याय तक समग्र पहुँच के लिये अभिनव समाधान तैयार करना (DISHA) पहल ने ज़िला-स्तरीय बैठकों के माध्यम से स्थानीय स्तर शासन को सुदृढ़ किया तथा 35 मंत्रालयों की 100 योजनाओं को एक रियल-टाइम डैशबोर्ड पर एकीकृत किया।
    • सांसदों की अध्यक्षता वाली ज़िला समितियों और मुख्यमंत्रियों के नेतृत्व वाली राज्य-स्तरीय समितियों के साथ DISHA ने अभिसरण, जवाबदेही और सहकारी संघवाद को संस्थागत रूप दिया, जिससे ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के समन्वय तथा स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन में सुधार हुआ।

निष्कर्ष

वर्ष 2025 में ग्रामीण विकास के परिणाम विखंडित कल्याणकारी वितरण से एक एकीकृत, प्रौद्योगिकी-सक्षम और संस्थागत रूप से संचालित विकास मॉडल की ओर एक निर्णायक बदलाव को दर्शाते हैं। भारत ग्रामीण लचीलापन, समावेशिता तथा राज्य क्षमता को सुदृढ़ कर रहा है और ज़मीनी स्तर के रूपांतरण को विकसित भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ संरेखित कर रहा है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. "भारत में ग्रामीण विकास अब केवल कल्याणकारी योजनाओं के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्था-निर्माण और लचीलेपन विकसित करने के बारे में है।" चर्चा कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. VB–G RAM G अधिनियम, 2025 का क्या महत्त्व है?
इसने वैधानिक ग्रामीण रोज़गार गारंटी को 125 दिनों तक विस्तारित किया है, ग्राम सभाओं के माध्यम से निचले स्तर से ऊपर की ओर योजना बनाने को एकीकृत किया है तथा रोज़गार को टिकाऊ अवसंरचना के निर्माण से जोड़ा है।

2. PMGSY ने वर्ष 2025 तक ग्रामीण संपर्क में कैसे योगदान दिया?
संपूर्ण देश में अनुमोदित ग्रामीण सड़कों (7.87 लाख किमी) का लगभग 95% निर्माण पूरा हो चुका है, जिससे आर्थिक एकीकरण, सीमा क्षेत्रों की संपर्कता तथा सभी मौसमों में पहुँच मज़बूत हुई है।

3. DAY-NRLM को ग्रामीण महिलाओं के लिये परिवर्तनकारी क्यों माना जाता है?
इसने 10.05 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों में संगठित किया, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों को घटाकर 1.76% किया तथा 2 करोड़ लखपति दीदियों को सक्षम बनाया, जो स्थायी आय सृजन का संकेत है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स

प्रश्न1. ग्रामीण परिवारों को निम्नलिखित में से कौन सीधी ऋण सुविधा प्रदान करता है/करते हैं? (2013)

  1. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
  2. कृषि और ग्रामीण विकास के लिये राष्ट्रीय बैंक
  3. भूमि विकास बैंक

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये।

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (c)


प्रश्न2. 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' ग्रामीण क्षेत्रीय निर्धनों के आजीविका विकल्पों को सुधारने का किस प्रकार प्रयास करता है? (2012)

  1. ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नए विनिर्माण उद्योग तथा कृषि व्यापर केंद्र स्थापित करके
  2. 'स्वयं सहायता समूहों' को सशक्त बनाकर और कौशल विकास की सुबिधाएँ प्रदान करके
  3. कृषकों को निःशुल्क बीज़, उर्वरक, डीजल पम्प-सेट तथा लघु-सिंचाई संयंत्र देकर

निम्नलिखित कूटों के आधार पर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2.

(c) केवल और. 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


मेन्स

प्रश्न.: लगातार उच्च विकास के बावजूद मानव विकास सूचकांक में भारत अभी भी सबसे कम अंकों के साथ है। उन मुद्दों की पहचान कीजिये जो संतुलित और समावेशी विकास को सुनिश्चित करते हैं। (2016) 


भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति एवं प्रगति रिपोर्ट 2024-25

स्रोत: इकॉनोमिक टाइम्स

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति एवं प्रगति रिपोर्ट 2024-25 जारी की है, जिसमें भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के प्रमुख रुझानों को रेखांकित किया गया है।

भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति 2024-25 रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?

  • सुदृढ़ बैंकिंग क्षेत्र: सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात मार्च 2025 में घटकर 2.2% के बहु-दशकीय न्यूनतम स्तर पर आ गया और सितंबर 2025 में घटकर 2.1% हो गया।
  • बैंकिंग धोखाधड़ी: यद्यपि धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में कमी आई, परंतु वर्ष 2024–25 में इसमें शामिल कुल राशि तिगुनी होकर 34,771 करोड़ रुपये हो गई।
    • कार्ड/इंटरनेट से संबंधित धोखाधड़ी सबसे अधिक हुई और कुल मामलों का 66.8% रही, जबकि अग्रिमों, अर्थात ऋण से संबंधित धोखाधड़ी मूल्य के आधार पर सबसे अधिक रही और कुल राशि का 33.1% थी।
    • निजी बैंकों ने संख्या के हिसाब से सबसे अधिक धोखाधड़ी (59.3%) की सूचना दी, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर सबसे अधिक वित्तीय प्रभाव (कुल शामिल राशि का 70.7%) पड़ा।
  • NBFC का सशक्त प्रदर्शन: गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) ने 19.4% की सुदृढ़ ऋण वृद्धि दर्ज की और वे अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल ऋण का लगभग एक चौथाई हिस्सा है।
    • NBFC क्षेत्र ने 25.9% के पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) के साथ सुदृढ़ वित्तीय स्थिति प्रदर्शित की है, साथ ही उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
  • सहकारी बैंक: शहरी सहकारी बैंकों (UCB) ने अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार किया है (GNPA में 6.2% तक की गिरावट)। इसके साथ ही विकास दर और लाभप्रदता के मापदंडों पर भी इन बैंकों के प्रदर्शन में निरंतर प्रगति दर्ज की गई है।
    • शहरी सहकारी बैंकों की प्रगति के विपरीत, ग्रामीण दीर्घकालिक सहकारी समितियाँ (जैसे SCARDBs) निरंतर संकटपूर्ण स्थिति में बनी हुई हैं। उनकी वित्तीय स्थिरता के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती परिसंपत्ति की गुणवत्ता है, जहाँ सकल GNPA का अनुपात 38% के चिंताजनक स्तर को पार कर गया है।
    • सकारात्मक व्यापक आर्थिक संदर्भ: भारत का वर्तमान समष्टि आर्थिक परिदृश्य अत्यंत सुदृढ़ बना हुआ है। कई वर्षों के न्यूनतम स्तर पर मौजूद मुद्रास्फीति और 8% से अधिक की विकास दर का यह दुर्लभ संयोग वित्तीय स्थिरता के लिये एक आदर्श वातावरण तैयार करता है। वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए निरंतर सतर्कता एवं नीतिगत दूरदर्शिता की आवश्यकता बनी हुई है।
  • नियामक संबंधी चिंताएँ और प्राथमिकताएँ: RBI ने कई उभरते जोखिमों को उजागर किया और अपने नियामक फोकस की रूपरेखा प्रस्तुत की:
    • जलवायु जोखिम: रिपोर्ट में इस बात पर बल दिया गया है कि भौतिक और संक्रमणकालीन जलवायु जोखिम वित्तीय स्थिरता के लिये गंभीर व्यवस्थागत खतरा उत्पन्न करते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में जलवायु वित्त को अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक 'राष्ट्रीय अनिवार्यता' के रूप में प्राथमिकता दी जानी चाहिये।
    • उपभोक्ता संरक्षण: नियामक ने वित्तीय उत्पादों की 'भ्रामक बिक्री' (Misselling) पर चिंता व्यक्त की है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिये, विज्ञापनों की पारदर्शिता और ऋण वसूली की प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने हेतु 'सामंजस्यपूर्ण दिशा-निर्देश' तैयार करने की योजना बनाई गई है, ताकि बैंकिंग व्यवहार में नैतिकता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
    • तकनीकी चुनौतियाँ: डिजिटल युग की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए, नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

निष्कर्ष:

रिपोर्ट मज़बूत बुनियादी आधारों वाले बैंकिंग क्षेत्र को रेखांकित करती है, लेकिन उच्च मूल्य वाले धोखाधड़ी मामलों, जलवायु जोखिमों और तकनीकी व्यवधानों से उभरते खतरों के प्रति आगाह करती है, जिनसे निपटने के लिये सतर्क और अनुकूलनशील नियमन की आवश्यकता है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वित्तीय स्थिरता ढाँचे में जलवायु जोखिम को एकीकृत करने के महत्त्व पर चर्चा कीजिये। इसके कार्यान्वयन में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. वर्ष 2024-25 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात क्या था?
GNPA घटकर बहु-दशकीय न्यूनतम स्तर 2.2% (मार्च 2025) पर आ गया और आगे घटकर 2.1% (सितंबर 2025) हो गया।

2. वर्ष 2024-25 के दौरान NBFC का प्रदर्शन कैसा रहा?
NBFC ने 19.4% की ऋण वृद्धि दर्ज की, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल ऋण में लगभग 25% का योगदान दिया, 25.9% का पूंजी पर्याप्तता जोखिम-भारित अनुपात (CRAR) बनाए रखा और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार किया।

3. RBI ने किस प्रमुख उभरते जोखिम को ‘राष्ट्रीय अनिवार्यता’ कहा?
RBI ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिमों (भौतिक तथा संक्रमण—दोनों) से निपटना वित्तीय स्थिरता के लिये एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है, जिसके लिये समन्वित कार्रवाई आवश्यक है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्न. भारत में ‘शहरी सहकारी बैंकों’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)

  1. राज्य सरकारों द्वारा स्थापित स्थानीय मंडलों द्वारा उनका पर्यवेक्षण एवं विनियमन किया जाता है।
  2.  वे इक्विटी शेयर और अधिमान शेयर जारी कर सकते हैं।
  3.  उन्हें वर्ष 1966 में एक संशोधन द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के कार्य-क्षेत्र में लाया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1                    
(b)  केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर:(b)


प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन भारत में सभी ATM को जोड़ता है? (2018)

(a) भारतीय बैंक संघ
(b) नेशनल सिक्योरिटीज़ डिपॉज़िटरी लिमिटेड
(c) भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम
(d) भारतीय रिज़र्व बैंक

उत्तर: (c)


मेन्स

प्रश्न. प्रधानमंत्री जन धन योजना (पी.एम.जे.डी.वाई.) बैंकरहितों को संस्थागत वित्त में लाने के लिये आवश्यक है। क्या आप सहमत हैं कि इससे भारतीय समाज के गरीब तबके के लोगों का वित्तीय समावेश होगा? अपने मत की पुष्टि करने के लिये तर्क प्रस्तुत कीजिये। (2016)