हेल्थकेयर में नैनोरोबोट्स | 12 Jan 2026

प्रिलिम्स के लिये: नैनोरोबोट्स, नैनोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम डॉट्स, सोलर सेल्स, पॉलिमर, स्टेम सेल्स, mRNA वैक्सीन, टी-सेल्स, बायोएक्यूमुलेशन, खाद्य शृंखला, आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।    

मेन्स के लिये: मैग्नेटिक नैनोरोबोट्स से संबंधित प्रमुख तथ्य, स्वास्थ्य देखभाल में नैनोप्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग,  इससे जुड़ी चिंताएँ और आगे की राह।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

चर्चा में क्यों?

IISc बंगलुरु के एक शोधकर्त्ता को मैग्नेटिक नैनोरोबोट विकसित करने के लिये प्रतिष्ठित न्यू यॉर्क एकेडमी ऑफ साइंसेज 2025 और टाटा संस ट्रांसफॉर्मेशन प्राइज़ से सम्मानित किया गया, जिससे सटीक, मिनिमम इनवेसिव और अधिक प्रभावी उपचारों के मार्ग प्रशस्त हुए।

  • उनका शोध वर्तमान कैंसर उपचार की एक बड़ी चुनौती को हल करने का प्रयास करता है, ताकि दवाओं को ट्यूमर के भीतर सुरक्षित रूप से पहुँचाया जा सके बिना स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुँचाए और इस तरह स्वास्थ्य देखभाल में नैनोटेक्नोलॉजी के नए अवसर सृजित हों।

सारांश

  • चुंबकीय नैनोरोबोट सटीक, मिनिमम इनवेसिव (ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया जिसमें शरीर में बहुत छोटा चीरा लगाना पड़ता है या बिल्कुल नहीं) दवा वितरण, हाइपरथर्मिया और संभावित इमेजिंग-निर्देशित उपचार को सक्षम बनाते हैं।
  • नैनोप्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग निदान, पुनर्योजी चिकित्सा, जीवाणुरोधी उपचार और वैक्सीन तक फैले हुए हैं।
  • चुनौतियों में नैनोटॉक्सिसिटी, नियामक अंतराल, नैतिक चिंताएँ और उच्च लागत शामिल हैं, इनके समाधान और इसे सर्वसुलभ बनाने के लिये नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials) और अनुकूल सरकारी नीतियों की अनिवार्यता है।

मैग्नेटिक नैनोरोबोट्स क्या होते हैं?

  • परिचय: मैग्नेटिक नैनोरोबोट्स सूक्ष्मदर्शी मशीनें हैं, जो आयरन ऑक्साइड जैसी मैग्नेटिक सामग्रियों से बनी या लेपित होती हैं। शरीर के बाहर से लगाए गए मैग्नेटिक/चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा इन्हें सटीक रूप से निर्देशित किया जा सकता है, ताकि ये रक्त वाहिकाओं या ऊतकों में बिना किसी अंतर्निहित ऊर्जा स्रोत के गतिशीलता प्राप्त कर सकें।
  • कार्यप्रणाली: ये बैक्टीरिया की कॉर्कस्क्रू (Corkscrew) जैसी गति का अनुकरण करते हैं, जिसमें एक छोटा, हेलिक्स-आकार का पूँछ प्रोपेलर की तरह कार्य करती है।
    • इस हेलिक्स (कुंडली) से जुड़े एक मैग्नेटिक के माध्यम से इसे बाहरी मैग्नेटिक क्षेत्रों द्वारा नियंत्रित और संचालित किया जा सकता है, जिससे यह जटिल जैविक वातावरण के भीतर आगे बढ़ने के लिये 'ड्रिलिंग' जैसी गति (Motion) करने में सक्षम हो जाता है।
    • इनकी संरचना बायोकंपैटिबल (Biocompatible) होती है, जो सिलिका और लोहे से बनी होती है और इन्हें कैंसर की दवाओं से कोट किया जा सकता है, जिससे ये प्रभावी रूप से लक्षित दवा वितरण वाहनों (Delivery Trucks) के रूप में कार्य कर सकें।

Magnetic_Nanorobot

  • प्रमुख अनुप्रयोग: ये मिनिमम इनवेसिव हेतु महत्त्वपूर्ण संभावनाएँ रखते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
    • उपचार प्रभाव को बढ़ाना: चिकित्सकीय पदार्थों को सीधे रोगस्थल, जैसे– ट्यूमर तक पहुँचाना, जिससे प्रभावकारिता बढ़े और शरीर में दुष्प्रभाव कम हों।
    • निदानात्मक उपकरण: बायोसेंसिंग, इमेजिंग में सुधार या बायोफिल्म हटाना।
    • दंत चिकित्सा: ये रूट कैनाल उपचार के लिये एक आशाजनक, बिना दर्द वाला विकल्प प्रदान करते हैं, जो प्रभावी रूप से एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया (E. faecalis) को लक्षित करते हैं बिना आसपास के ऊतक को नुकसान पहुँचाए।

नैनोटेक्नोलॉजी

  • परिचय: नैनोटेक्नोलॉजी विज्ञान और इंजीनियरिंग की उस शाखा को संदर्भित करती है जो नैनोस्केल अर्थात, एक या एक से अधिक आयाम 100 नैनोमीटर (मिलीमीटर का 100 मिलियनवाँ भाग) या उससे कम पर परमाणुओं और अणुओं में हेरफेर करके संरचनाओं, उपकरणों तथा प्रणालियों को डिज़ाइन करने, उत्पादन करने और उपयोग करने के लिये समर्पित है।
    • नैनोटेक्नोलॉजी के विकास के लिये आणविक सिमुलेशन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह वैज्ञानिकों को कंप्यूटर मॉडल का उपयोग करके विभिन्न परिस्थितियों में परमाणु, आणविक और नैनो संरचना व्यवहार का अनुकरण करने में सक्षम बनाता है
  • गुण:
    • यांत्रिक गुण: नैनो पदार्थों में दानों (ग्रेन्स) का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण उनकी यांत्रिक शक्ति अधिक होती है। इनका उपयोग ऐसे अनुप्रयोगों में किया जाता है जहाँ मज़बूत, हल्के पदार्थों की आवश्यकता होती है, जैसे कि एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव उद्योग
    • क्वांटम साइज़ इफेक्ट: कणों का आकार घटने पर क्वांटम मेकैनिकल इफेक्ट हावी हो जाते हैं, जो सेमीकंडक्टर, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स और गैर-रेखीय प्रकाशिकी के लिये एक महत्त्वपूर्ण गुण है। उदाहरण के लिये, क्वांटम डॉट्स को उनके आकार को समायोजित करके विशिष्ट प्रकाश तरंगदैर्घ्य उत्सर्जित या अवशोषित करने के लिये ट्यून किया जा सकता है, जिससे वे डिस्प्ले तकनीकों और सौर सेल के लिये महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं।
    • उत्प्रेरक क्षमता: नैनोमैटेरियल्स में उनके बढ़े हुए सतही क्षेत्र के कारण उन्नत उत्प्रेरक गुण होते हैं, जो उन्हें रासायनिक प्रतिक्रियाओं और पर्यावरणीय सुधार के लिये आदर्श बनाते हैं।
    • चुंबकीय विशेषताएँ: नैनोकण प्रायः एकल मैग्नेटिक डोमेन बनाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप सुपरपैरामैग्नेटिज़्म होता है, जो मैग्नेटिक रिकॉर्डिंग और सूचना भंडारण में उपयोगी गुण है।

अनुप्रयोग:

स्वास्थ्य सेवा में नैनोप्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग क्या हैं?

  • लक्षित दवा वितरण और चिकित्सा: लिपोसोम, पॉलिमर और डेंड्रिमर जैसे नैनोकण लक्षित वाहक या मैजिक बुलेट के रूप में कार्य करते हैं, जो दवाओं, जीनों या नैदानिकों को विशेष रूप से ट्यूमर जैसी रोगग्रस्त कोशिकाओं तक पहुँचाते हैं, जिससे प्रणालीगत दुष्प्रभाव कम होते हैं और उपचार दक्षता में सुधार होता है।
    • यह लक्षित दृष्टिकोण अल्ज़ाइमर जैसे तंत्रिका संबंधी विकारों के इलाज के लिये रक्त-मस्तिष्क (Blood-Brain) अवरोध जैसी कठिन बाधाओं के पार दवा वितरण को भी सक्षम बनाता है।
  • उन्नत निदान और इमेजिंग: नैनोप्रौद्योगिकी रोगजनकों, बायोमार्कर और ग्लूकोज़ स्तरों का त्वरित, संवेदनशील और पोर्टेबल डिटेक्टशन को संभव बनाती है, जो प्रारंभिक रोग निदान और महामारी प्रबंधन के लिये महत्त्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, गोल्ड नैनोपार्टिकल और क्वांटम डॉट्स MRI, CT स्कैन और फ्लोरोसेंस इमेजिंग के रिज़ॉल्यूशन और विशिष्टता को बढ़ाते हैं, जिससे अधिक सटीक रोग का पता लगाना संभव होता है।
  • पुनर्योजी चिकित्सा और ऊतक इंजीनियरिंग: नैनोप्रौद्योगिकी कोशिका वृद्धि और ऊतक पुनर्जनन का मार्गदर्शन करने के लिये आवश्यक संरचनात्मक और जैव रासायनिक संकेत प्रदान कर सकती है, जो हड्डियों, उपास्थि, तंत्रिकाओं और हृदय ऊतक की मरम्मत में सहायता करती है। इसके अतिरिक्त, नैनोपार्टिकल स्टेम सेल को उपचारात्मक जीनों को ट्रैक, विभेदित और वितरित कर सकते हैं, जो रीढ़ की हड्डी में चोट और अपकर्षी रोगों के उपचार को बढ़ाता है।
  • रोगाणुरोधी अनुप्रयोग: चिकित्सा उपकरणों (कैथेटर, इंप्लांट, सर्जिकल उपकरण) और अस्पताल की सतहों पर चांदी, तांबा या ज़िंक ऑक्साइड नैनोपार्टिकल की कोटिंग स्वास्थ्य सेवा से संबंधित संक्रमणों को रोकते हैं।
  • वैक्सीन डेवलपमेंट और इम्यूनोथेरैपी: mRNA वैक्सीन में नैनोपार्टिकल-आधारित वैक्सीन प्लेटफॉर्म एंटीजन स्थिरता में सुधार करते हैं, नियंत्रित रिलीज़ को सक्षम करते हैं और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त, नैनोपार्टिकल कैंसर कोशिकाओं के विरुद्ध T-सेल को सटीक रूप से सक्रिय करने के लिये इम्यूनोमोड्यूलेटर वितरित कर सकते हैं, जो ऑन्कोलॉजी में एक प्रमुख प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है।

स्वास्थ्य सेवा में नैनोप्रौद्योगिकी को अपनाने में प्रमुख बाधाएँ क्या हैं?

  • नैनोविषाक्तता: एक प्रमुख चुनौती मनुष्यों और पारिस्थितिक तंत्र में नैनोपार्टिकल जैवसंचयन, बायोडिग्रेडेबिलिटी और पुरानी विषाक्तता पर अपर्याप्त डेटा के कारण अज्ञात दीर्घकालिक प्रभाव हैं। उनकी पर्यावरणीय दृढ़ता मृदा, जल और खाद्य शृंखलाओं में स्थायी नैनोप्रदूषण पैदा करने का जोखिम उठाती है।
  • विनियामक और मानकीकरण संबंधी चुनौतियाँ: वर्तमान विनियम, जैसे कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से, नैनोसामग्री के नए गुणों के लिये अनुपयुक्त हैं, जिससे एक नियामक अंतर उत्पन्न होता है। इसके अतिरिक्त, नामकरण, अभिलक्षणीकरण और सुरक्षा परीक्षण के लिये सार्वभौमिक मानकों की कमी अस्थिरता का कारण बनती है व गुणवत्ता नियंत्रण में बाधा डालती है।
  • नैतिक, कानूनी और सामाजिक प्रभाव: प्रत्यारोपण योग्य नैनोसेंसर डेटा गोपनीयता, सुरक्षा और शारीरिक स्वायत्तता से संबंधित गंभीर चिंताएँ व्यक्त करते हैं, जबकि वे एक नैनो-विभाजन का जोखिम भी उठाते हैं जहाँ उन्नत चिकित्सा केवल धनाड्य वर्ग के लिये सुलभ होती है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं में वृद्धि देखने को मिलती है।
    • इसके अतिरिक्त, जागरूकता की कमी और भय, जैसे कि ग्रे गू (grey goo) परिदृश्य (अनियंत्रित स्व-प्रतिकृति) से सार्वजनिक विश्वास चुनौतीपूर्ण होता है, जो आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों के साथ प्रतिरोधात्मक प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर सकता है।
  • उच्च लागत और आर्थिक व्यवहार्यता: नैनोप्रौद्योगिकी अनुसंधान के लिये इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप जैसे महंगे, परिष्कृत उपकरणों की आवश्यकता होती है, जिससे मौलिक कार्य और प्रोटोटाइप लागत महंगी होती है। गुणवत्ता और लागत बनाए रखते हुए नैनोसामग्री उत्पादन को प्रयोगशाला-से-उद्योग तक बढ़ाना एक प्रमुख चुनौती है, जिससे एक निरंतर प्रयोगशाला-से-बाज़ार अंतर उत्पन्न होता है।

हेल्थकेयर में नैनोटेक्नोलॉजी को सतत और सुरक्षित तरीके से अपनाने हेतु कौन-से कदम ज़रूरी हैं?

  • अनुसंधान एवं विकास (R&D): नैनोमैटेरियल्स के जैव-संचयन, अपघटन मार्गों तथा दीर्घकालिक प्रभावों पर अनिवार्य और पर्याप्त रूप से वित्तपोषित अध्ययनों की व्यवस्था की जानी चाहिये। साथ ही सेफ्टी-बाय-डिज़ाइन सिद्धांत के तहत लिपिड्स और प्राकृतिक पॉलिमरों का उपयोग कर जैव-अपघटनीय एवं गैर-विषाक्त नैनोमैटेरियल्स के लिये ग्रीन नैनोटेक्नोलॉजी को प्रोत्साहन प्रदान करना चाहिये।
  • नैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक शासन: तकनीकी R&D के समानांतर गोपनीयता, स्वायत्तता, समानता और डेटा स्वामित्व जैसे मुद्दों को संबोधित करने हेतु सक्रिय ELSA अनुसंधान को वित्तपोषित किया जाना चाहिये। नैनो-डिवाइड को रोकने के लिये सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से समान सुलभता सुनिश्चित की जाए तथा विश्वास निर्माण हेतु पारदर्शी जन-सहभागिता शुरू की जाए।
  • क्लिनिकल ट्रांसलेशन एवं व्यवसायीकरण: क्लिनिकल ट्रांसलेशन अनुसंधान के लिये वित्तीय समर्थन प्रदान कर वैली ऑफ डेथ की खाई को पाटा जाए और किफायती, बड़े पैमाने पर उत्पादन हेतु स्केलेबल विनिर्माण प्रणालियाँ विकसित की जाएँ। सामग्री वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और अभियंताओं के बीच अंतरविषयक सहयोग को प्रोत्साहित किया जाए ताकि समाधान चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक और व्यवहार्य हों।
  • पर्यावरणीय संरक्षण: नैनोमैटेरियल्स के उत्पादन और निपटान के लिये पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) को अनिवार्य किया जाए तथा सुरक्षित निपटान और पुनर्चक्रण हेतु विशिष्ट प्रोटोकॉल विकसित किये जाएँ। साथ ही, जल, मृदा और वायु में अभियांत्रिक नैनोकणों की निगरानी हेतु पर्यावरणीय मॉनिटरिंग कार्यक्रम स्थापित किये जाएँ।

निष्कर्ष

मैग्नेटिक नैनोरोबोट्स नैनोमेडिसिन में एक महत्त्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करते हैं, क्योंकि ये सटीक और न्यूनतम आक्रामक उपचार को संभव बनाते हैं। हालाँकि, इनका क्लिनिकल अडॉप्शन नैनो-विषाक्तता, नियामकीय और नैतिक चुनौतियों के समाधान पर निर्भर करता है। इसके लिये सतत अनुसंधान एवं विकास, सुदृढ़ नैतिक शासन, समान पहुँच, प्रभावी क्लिनिकल ट्रांसलेशन तथा सुदृढ़ पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में इनका सुरक्षित, किफायती और ज़िम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

दृष्टि मुख्य परीक्षा प्रश्न:

प्रश्न. नैनोप्रौद्योगिकी स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की अपार क्षमता रखती है। इसके प्रमुख अनुप्रयोगों पर चर्चा कीजिये तथा भारत में इसके व्यापक अपनाव में बाधा बनने वाली प्रमुख नैतिक और नियामकीय चुनौतियों का विश्लेषण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. मैग्नेटिक नैनोरोबोट्स क्या हैं?
मैग्नेटिक नैनोरोबोट्स सूक्ष्म, हेलिक्स-आकार के उपकरण होते हैं, जिन्हें बाह्य चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा संचालित किया जाता है। ये ट्यूमर जैसे लक्षित ऊतकों तक दवाओं को सटीक रूप से पहुँचाने में सक्षम होते हैं।

2. मैग्नेटिक नैनोरोबोट्स मानव शरीर के भीतर कैसे संचालित होते हैं?
ये बाह्य चुंबकीय क्षेत्रों की सहायता से आगे बढ़ते और नियंत्रित होते हैं। इनकी कॉर्कस्क्रू जैसी हेलिकल संरचना बैक्टीरिया की गति की नकल करती है, जिससे ये ऊतकों और द्रवों के माध्यम से आगे बढ़ पाते हैं।

3. स्वास्थ्य क्षेत्र के संदर्भ में ‘नैनो-डिवाइड’ से क्या अभिप्राय है?
नैनो-डिवाइड से तात्पर्य असमान पहुँच के जोखिम से है, जिसमें उन्नत और उच्च लागत वाली नैनोमेडिसिन उपचार विधियाँ केवल समृद्ध व्यक्तियों या देशों तक सीमित रह जाती हैं, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य असमानताएँ और बढ़ जाती हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रिलिम्स 

प्रश्नः निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2022)

  1. परासूक्ष्मकण (नैनोपार्टिकल्स) मानव-निर्मित होने के सिवाय प्रकृति में अस्तित्व में नहीं है। 
  2. कुछ धात्विक ऑक्साइडों के परासूक्ष्मकण, प्रसाधन-सामग्री (कॉस्मेटिक्स) के निर्माण में काम आते हैं। 
  3. कुछ वाणिज्यिक उत्पादों के परासूक्ष्मकण, जो पर्यावरण में आ जाते हैं, मनुष्यों के लिये असुरक्षित हैं।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 3

(c) केवल 1 और 2

(d) केवल 2 और 3

उत्तर: (d)


प्रश्न: विभिन्न उत्पादों के विनिर्माण में उद्योग द्वारा प्रयुक्त होने वाले कुछ रासायनिक तत्त्वों के नैनो-कणों के बारे में कुछ चिंता है। क्यों? (2014)

  1. वे पर्यावरण में संचित हो सकते हैं तथा जल और मृदा को संदूषित कर सकते हैं। 
  2. वे खाद्य शृंखलाओं में प्रविष्ट हो सकते हैं। 
  3. वे मुक्त मूलकों के उत्पादन को विमोचित कर सकते हैं।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d)


मेन्स 

प्रश्नः नैनोटेक्नोलॉजी से आप क्या समझते हैं और यह स्वास्थ्य क्षेत्र में कैसे मदद कर रही है? (2020)

प्रश्नः अतिसूक्ष्म प्रौद्योगिकी (नैनोटेक्नोलॉजी) 21वीं शताब्दी की प्रमुख प्रौद्योगिकियों में से एक क्यों है? अतिसूक्ष्म विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर भारत सरकार के मिशन की प्रमुख विशेषताओं तथा देश के विकास के प्रक्रम में इसके प्रयोग के क्षेत्र का वर्णन कीजिये। (2016)