भारत में आय गतिशीलता | 07 Mar 2026

प्रिलिम्स के लिये: आय गतिशीलता, विश्व असमानता रिपोर्ट, 2026, K-शेप्ड इकाॅनमिक रिकवरी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना 

मेन्स के लिये: भारत में समावेशी विकास और आय असमानता, मानव पूंजी निर्माण

स्रोत:द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

भारत में आय गतिशीलता की प्रवृत्तियाँ (2014–25) एक चिंताजनक परिवर्तन प्रदर्शित करती हैं, जिसमें आय-स्तर से ऊर्ध्वगामी गति करने वाले परिवारों की अपेक्षा निम्न आय स्तर की ओर निम्नगामी गति करने वाले  परिवारों की संख्या अधिक दिखाई देती है।

  • यह प्रवृत्ति समावेशी संवृद्धि संबंधी दावों को चुनौती देती है तथा ग्रामीण क्षेत्रों, जाति-समूहों एवं धार्मिक समुदायों में बढ़ती आर्थिक असुरक्षा को रेखांकित करती है, साथ ही यह गतिशीलता को असमानता के एक प्रमुख मापदंड के रूप में रेखांकित करती है।

सारांश

  • भारत में आय गतिशीलता की प्रवृत्तियाँ (2014–25) दर्शाती हैं कि आय-स्तर से ऊपर उठने की तुलना में अधिक परिवार नीचे की ओर अवनत हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, अनुसूचित जातियाँ, अन्य पिछड़े वर्ग तथा संवेदनशील धार्मिक समुदायों में असमानता, अनौपचारिक क्षेत्र के संकट और कोविड-पश्चात असमान पुनर्प्राप्ति के कारण यह गिरावट अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
  • ग्रामीण आजीविका, MSME, शिक्षा तथा सामाजिक समावेशन को सुदृढ़ करने के साथ PM-KUSUM, MUDRA, PLI, स्किल इंडिया तथा स्टैंड अप इंडिया जैसी पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन द्वारा इस निम्नगामी प्रवृत्ति को उलटना आवश्यक है, ताकि आर्थिक संवृद्धि का लाभ व्यापक रूप से समग्र समाज तक पहुँचे।

भारत में आय गतिशीलता की प्रवृत्तियाँ क्या संदर्भित करती हैं?

  • निम्नगामी गतिशीलता का दोगुना होना: निम्नगामी आय गतिशीलता का अनुभव करने वाले परिवारों का अनुपात लगभग दोगुना हो गया, जो वर्ष 2015 में 14% से बढ़कर वर्ष 2025 में 26.8% हो गया।
    • वर्ष 2025 के अंत तक भारत में प्रत्येक चार में से एक से अधिक परिवार वर्ष 2014 की तुलना में आर्थिक रूप से अधिक कमज़ोर स्थिति में पहुँच गए हैं।
  • धीमी ऊर्ध्वगामी गतिशीलता: यद्यपि ऊर्ध्वगामी आय गतिशीलता में वृद्धि हुई (14.1% से बढ़कर 23.5%), तद्यपि यह लगातार निम्नगामी गतिशीलता की दर से पीछे रही।
  • संकुचित होता मध्य वर्ग: अपने मूल आय-स्तर पर बने रहने वाले परिवारों का अनुपात तीव्रता से घटकर 70% से अधिक से 50% से कम रह गया।
  • ग्रामीण संवेदनशीलता: वर्ष 2025 में लगभग 29% ग्रामीण परिवारों ने वर्ष 2014 की तुलना में आय-स्तर से निम्नगामी गतिशीलता प्रदर्शित की है।
    •  ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्ध्वगामी गतिशीलता की तुलना में निम्नगामी प्रवृत्ति अधिक तीव्र रही।
  • शहरी क्षेत्रों में लाभ का संकेंद्रण: शहरी भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में ऊर्ध्वगामी गतिशीलता की प्रवृत्ति अधिक रही है। 
    • हालाँकि, शहरी केंद्रों में भी निम्नगामी गतिशीलता में वृद्धि देखी गई, जो व्यापक आर्थिक असुरक्षा को दर्शाती है।
  • आर्थिक गतिशीलता के निर्धारण में जाति की भूमिका: आर्थिक गतिशीलता को निर्धारित करने में जाति अभी भी एक महत्त्वपूर्ण कारक बनी हुई है, जो दीर्घकालिक संरचनात्मक असमानताओं तथा अवसरों तक असमान पहुँच को प्रतिबिंबित करती है। 
    • सभी सामाजिक समूहों में निम्नगामी गतिशीलता बढ़ी है, विशेषतः अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा अनुसूचित जनजाति (SC) परिवारों में यह वृद्धि अधिक स्पष्ट रही।
    • अनुसूचित जनजाति (SC) की स्थिति: SC परिवारों में 2014–25 की पूरी अवधि के दौरान ऊर्ध्वगामी गतिशीलता अपेक्षाकृत सीमित तथा असमान रही, जो अवसरों के विस्तार संबंधी दावों को चुनौती देती है।
    • अनुसूचित जनजाति की प्रवृत्ति (ST): ST समुदायों में तुलनात्मक रूप से निम्नगामी गतिशीलता कम रही तथा कुछ अवसरों पर ऊर्ध्वगामी प्रगति अधिक देखी गई, जिसका कारण क्षेत्रीय विकास प्रयासों तथा लक्षित हस्तक्षेपों का प्रभाव माना जा सकता है।
  • धार्मिक समुदायों में प्रवृत्ति: सभी धार्मिक समूहों में निम्नगामी गतिशीलता में वृद्धि हुई, हालाँकि यह वृद्धि विशेष रूप से हिंदू तथा मुस्लिम परिवारों में अधिक स्पष्ट रही।
    • दशक के प्रारंभिक वर्षों में सिख तथा ईसाई परिवारों में अपेक्षाकृत सशक्त ऊर्ध्वगामी गतिशीलता देखी गई, किंतु दशक के उत्तरार्द्ध में यह गति उल्लेखनीय रूप से मंद पड़ गई।

नोट: आय गतिशीलता से आशय समय के साथ परिवारों के विभिन्न आय वर्गों के बीच होने वाले परिवर्तन से है। यह ऊर्ध्वगामी गतिशीलता (उच्च आय वर्ग की ओर गति), निम्नगामी गतिशीलता (निम्न आय वर्ग की ओर गति) अथवा यथास्थिति (कोई परिवर्तन न होना) के रूप में प्रकट हो सकती है।

  • यह अवधारणा महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थिर निर्धनता के बजाय गतिशील असमानता को परिलक्षित करती है, यह संकेत देती है कि आर्थिक संवृद्धि अवसरों का सृजन कर रही है या नई संवेदनशीलताओं को जन्म दे रही है तथा समाज के समग्र स्वास्थ्य, धारणीयता और अनुकूलन को भी प्रतिबिंबित करती है।

भारत में आय गतिशीलता में निम्नगामी परिवर्तन के कारण क्या हैं?

  • बढ़ती आय असमानता: विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 के अनुसार शीर्ष 10% आय अर्जक राष्ट्रीय आय का असमान रूप से 58% हिस्सा प्राप्त करते हैं, जबकि निचले 50% लोगों को केवल 15% आय प्राप्त होती है।
    • देश की कुल संपत्ति का लगभग 65% शीर्ष 10% के पास केंद्रित है, जबकि केवल 1% सर्वाधिक समृद्ध वर्ग के पास लगभग 40% संपत्ति है। 
    • ऐसी उच्च असमानता पूंजी, नेटवर्क तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच को सीमित कर आय गतिशीलता को बाधित करती है।
  • कोविड-19 का दीर्घकालिक प्रभाव: महामारी के पश्चात भारत की आर्थिक पुनर्प्राप्ति असमान रही है, परिणामस्वरूप संवृद्धि मुख्यतः प्रौद्योगिकी तथा वित्तीय क्षेत्र में केंद्रित रही, जबकि पर्यटन, खुदरा व्यापार तथा आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों को स्थायी आय हानि का सामना करना पड़ा। 
    • इस प्रकार की K-शेप्ड इकाॅनमिक रिकवरी ने असमानता को बढ़ाया तथा निम्न आय वर्गों में निम्नगामी गतिशीलता को तीव्र किया।
  • अनौपचारिक क्षेत्र तथा MSME पर कम फोकस: भारत का श्रमबल अभी भी अत्यधिक अनौपचारिक (लगभग 80–85%) है, किंतु कृषि, लघु उद्योगों तथा छोटे उद्यमों के लिये नीतिगत समर्थन विखंडित रहा है।
    • MSME क्षेत्र, जो GDP में लगभग 30% योगदान देता है तथा 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार प्रदान करता है, कोविड-19 के पश्चात ऋण सीमाएँ, भुगतान में विलंब तथा कमज़ोर मांग जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। 
    • परिणामस्वरूप गरिमापूर्ण आय और रोज़गार की स्थिरता में कमी आई है, जिससे अर्द्ध-कुशल श्रमिकों में निम्नगामी आय गतिशीलता बढ़ी है।
  • शैक्षिक असमानता: गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक असमान पहुँच उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्रों में प्रवेश को सीमित करती है। 
    • टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 के अनुसार विश्व के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में भारत के केवल 4 विश्वविद्यालय शामिल हैं। साथ ही राज्य विश्वविद्यालयों में संविदात्मक संकाय पर बढ़ती निर्भरता के कारण गैर-विशिष्ट पृष्ठभूमि के छात्रों के लिये शिक्षण गुणवत्ता कमज़ोर हुई है, जिससे कौशल अंतराल बढ़ा तथा ऊर्ध्वगामी गतिशीलता सीमित हुई है।
  • जाति-आधारित वंचना: ऐतिहासिक सामाजिक पदानुक्रम आज भी आर्थिक परिणामों को प्रभावित करते हैं। 
    • व्यावसायिक विभाजन संपत्तियों तक असमान पहुँच तथा गहरे सामाजिक भेदभाव के कारण हाशिये पर स्थित समूहों, विशेषतः SCs तथा OBCs, में निम्नगामी गतिशीलता अधिक देखी गई।
  • शहरी क्षेत्रों में केंद्रित संवृद्धि: आर्थिक विस्तार मुख्यतः बंगलूरू, हैदराबाद तथा गुरुग्राम जैसे महानगरीय केंद्रों में केंद्रित है, जिसे रियल एस्टेट, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) तथा उच्च-स्तरीय सेवाओं द्वारा प्रेरित किया जा रहा है। 
    • इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि क्षेत्र में आय स्थिरता, जलवायु संबंधी आघात तथा फसल मूल्यों की अस्थिरता जैसी चुनौतियाँ विद्यमान हैं, जिससे क्षेत्रीय असमानता बढ़ रही है तथा ग्रामीण परिवार निम्नगामी आय गतिशीलता की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

भारत में ऊर्ध्वगामी आय गतिशीलता को तीव्र करने हेतु कौन-से उपाय किये जा सकते हैं?

  • ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के संसाधनों को सुदृढ़ करना: पीएम-कुसुम जैसी योजनाओं का विस्तार, किसान उत्पादक संगठनों को प्रोत्साहन तथा कृषि अवसंरचना कोष के माध्यम से निवेश, कृषि आय को स्थिर बनाने एवं ग्रामीण आजीविकाओं के विविधीकरण में सहायक हो सकते हैं।
    • ये उपाय आय की अस्थिरता को कम करते हैं तथा ग्रामीण परिवारों को निर्धनता की ओर जाने से रोकते हैं।
  • MSME क्षेत्र को प्रोत्साहन एवं अनौपचारिक क्षेत्र का औपचारिकीकरण: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना तथा आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना के माध्यम से ऋण उपलब्धता में सुधार, साथ ही उद्यम पंजीकरण के ज़रिये औपचारिकीकरण लघु उद्यमों को सुदृढ़ कर सकता है। 
    • एक सुदृढ़ MSME क्षेत्र स्थिर रोज़गार सृजित करता है तथा ऊर्ध्वगामी आय गतिशीलता को प्रोत्साहित करता है।
  • श्रम-प्रधान विनिर्माण के माध्यम से रोज़गार सृजन: उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना मेक इन इंडिया तथा पीएम मित्र पार्क के माध्यम से वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली जैसे रोज़गार-प्रधान क्षेत्रों का विस्तार किया जा सकता है। 
    • रोज़गार-केंद्रित आर्थिक संवृद्धि यह सुनिश्चित करती है कि विकास का लाभ व्यापक जनसमूह तक पहुँचे।
  • शिक्षा की गुणवत्ता एवं कौशल विकास में सुधार:  स्किल इंडिया मिशन का विस्तार तथा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) को सुदृढ़ करने से कौशल अंतराल को कम किया जा सकता है।
    • साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा उद्योग-संबद्ध प्रशिक्षण से वंचित वर्गों को उच्च उत्पादकता वाले रोज़गारों तक पहुँच प्राप्त हो सकती है।
  • समावेशी वृद्धि को प्रोत्साहन: उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत छात्रवृत्तियाँ तथा स्टैंड-अप इंडिया और नेशनल एससी/एसटी हब के माध्यम से उद्यमिता समर्थन, संरचनात्मक बाधाओं को कम करने में सहायक हैं। 
    • ऐसी समावेशी नीतियाँ अवसरों का विस्तार करती हैं तथा ऐतिहासिक रूप से वंचित समूहों में गतिशीलता को बढ़ाती हैं।
  • महिलाओं की श्रमबल भागीदारी में वृद्धि: दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसे कार्यक्रम महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं। 
    • महिलाओं की श्रमबल भागीदारी में वृद्धि से पारिवारिक आय में उल्लेखनीय सुधार होता है तथा ऊर्ध्वगामी सामाजिक गतिशीलता को बढ़ावा मिलता है।   
    • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से भारत की GDP में लगभग 27% तक वृद्धि संभव है, जो इसके महत्त्वपूर्ण आर्थिक तथा सामाजिक लाभों को रेखांकित करता है।

निष्कर्ष

जैसा कि चार्ल्स डिकेंस ने कहा था, "यह सबसे अच्छा समय था; यह सबसे बुरा समय था।" भारत की विकास गाथा इस द्वंद्वता (उल्लेखनीय प्रगति के साथ-साथ गहरी असमानता) को दर्शाती है और आगे की राह यह सुनिश्चित करने में निहित है कि अवसर भेद्यता की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़े।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न: भारत में निरंतर GDP वृद्धि के बावज़ूद निम्नगामी गतिशीलता के लिये उत्तरदायी संरचनात्मक कारकों की जाँच कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. आय गतिशीलता क्या है और यह महत्त्वपूर्ण क्यों है?
आय गतिशीलता समय के साथ आय समूहों के बीच आवागमन को संदर्भित करती है; यह गतिशील असमानता को मापती है और यह इंगित करती है कि विकास अवसर पैदा करता है या भेद्यता।

2. निम्नगामी गतिशीलता भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में क्या संकेत देती है?
यह बढ़ती असमानता, ग्रामीण संकट और कमज़ोर रोज़गार सृजन का संकेत देती है, जो दर्शाता है कि विकास व्यापक समृद्धि में परिवर्तित नहीं हुआ है।

3. MSME भारत में आय गतिशीलता को कैसे प्रभावित करते हैं?
MSME 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार देते हैं जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में ~30% का योगदान करते हैं; संकट के समय इनमें स्थिर नौकरियाँ कम होती हैं और निम्नगामी गतिशीलता बढ़ती है।

4. शैक्षिक असमानता ऊर्ध्वगामी गतिशीलता में बाधा क्यों है?
गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण तक सीमित पहुँच उच्च-उत्पादकता क्षेत्रों में प्रवेश को रोकती है, जिससे आय अंतराल गहरा होता है।

5. कौन-सी योजनाएँ भारत में ऊर्ध्वगामी आय गतिशीलता का समर्थन करती हैं?
PM-कुसुम, मुद्रा योजना, PLI योजना, NEP 2020, कौशल भारत मिशन, स्टैंड-अप इंडिया और दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) रोज़गार, कौशल और समावेशी विकास को बढ़ावा देते हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स

प्रश्न. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में प्रतिपादित समावेशी विकास में निम्नलिखित में से एक शामिल नहीं है: (2010) 

(a) गरीबी में कमी

(b) रोज़गार के अवसरों का विस्तार

(c) पूंजी बाज़ार का सुदृढीकरण 

(d) लैंगिक असमानता में कमी

उत्तर: (c) 


मेन्स 

प्रश्न. संसाधनों के स्वामित्व पैटर्न में असमानता गरीबी का एक प्रमुख कारण है। 'गरीबी के विरोधाभास' के संदर्भ में चर्चा कीजिये।  (2025)

प्रश्न. कोविड-19 महामारी ने भारत में वर्ग असमानताओं एवं गरीबी को गति दे दी है। टिप्पणी कीजिये। (2020)