विश्व हिंदी दिवस
CSIR-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान द्वारा तकनीकी हिंदी और समावेशी विज्ञान की पहुँच को बढ़ावा देने के लिये भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के सहयोग से तीसरी तकनीकी हिंदी संगोष्ठी "अभ्युदय-3" आयोजित की गई।
- अभ्युदय-3 ने भारतीय भाषाओं, विशेष रूप से हिंदी के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की पहुँच का विस्तार करने के भारतीय प्रयास को दर्शाया, जो हिंदी के वैश्विक और कार्यात्मक उपयोग को मज़बूत करने के विश्व हिंदी दिवस के लक्ष्य के साथ संरेखित है।
- विश्व हिंदी दिवस: 10 जनवरी को प्रतिवर्ष विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1975 में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में राष्ट्र भाषा प्रचार समिति, वर्द्धा (महात्मा गांधी द्वारा स्थापित संगठन) के तत्त्वावधान में आयोजित किया गया था।
- विश्व हिंदी दिवस का आधिकारिक आयोजन वर्ष 2006 से शुरू हुआ, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा इसकी घोषणा की गई, जो 14 सितंबर को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय हिंदी दिवस से अलग है।
- राष्ट्रीय हिंदी दिवस: यह वर्ष 1949 में संविधान सभा द्वारा देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की एक आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने की स्मृति में मनाया जाता है।
- हिंदी भाषा: ‘हिंदी’ शब्द की उत्पत्ति फारसी शब्द 'हिंद' से हुई है, जिसका अर्थ है 'सिंधु नदी की भूमि' और यह भाषा संस्कृत से विकसित हुई है, जिसका उपयोग 11वीं शताब्दी के प्रारंभ में तुर्क आक्रमणकारियों द्वारा क्षेत्रीय भाषा का वर्णन करने के लिये किया गया था।
- यह भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक है, जिसमें अंग्रेज़ी को दूसरा स्थान प्राप्त है, यह मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद एवं टोबैगो और नेपाल जैसे देशों में भी बोली जाती है।
- हिंदी संस्कृत से प्राकृत और अपभ्रंश के रूप में विकसित हुई, जिसमें खड़ी बोली इसका प्रत्यक्ष आधार बनी। बाद में इसमें फारसी और अरबी के शब्दों को शामिल किया गया।
- आधुनिक देवनागरी लिपि ने 11वीं शताब्दी में आकार लिया, जिसने हिंदी को इसकी वर्तमान लिखित संरचना प्रदान की।
- हिंदी विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, अंग्रेज़ी और चीनी भाषा के बाद, जिसे लगभग 600 मिलियन लोग बोलते हैं। UNESCO ने वर्ष 1948 में हिंदी को एक आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की, इसका सर्वप्रथम वर्ष 1949 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में उपयोग किया गया।
- हिंदी भाषा से संबंधित संवैधानिक प्रावधान:
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अनुच्छेद |
प्रावधान |
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अनुच्छेद 343 |
देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में घोषित करता है; आधिकारिक उद्देश्यों के लिये अंग्रेज़ी के निरंतर उपयोग की अनुमति देता है। |
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अनुच्छेद 344 |
एक भाषा आयोग और संसदीय समिति प्रदान करता है ताकि हिंदी के प्रगतिशील उपयोग की समीक्षा और अनुशंसा की जा सके। |
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अनुच्छेद 351 |
संघ को हिंदी के प्रसार और विकास को बढ़ावा देने, इसे संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं से समृद्ध करने का निर्देश देता है। |
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अनुच्छेद 120 |
संसद में हिंदी या अंग्रेज़ी के उपयोग की अनुमति देता है, अन्य भाषाओं की अनुमति अध्यक्ष की अनुमति से है। |
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अनुच्छेद 210 |
राज्य विधायिका कार्यवाह प्रक्रिया में हिंदी या अंग्रेज़ी या राज्य की आधिकारिक भाषा के उपयोग की अनुमति देता है। |
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निपाह वायरस
पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्यकर्मियों के बीच निपाह वायरस संक्रमण के दो संदिग्ध मामलों ने राज्य और केंद्र स्तर पर त्वरित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रिया को सक्रिय कर दिया है, जो उच्च-जोखिम वाले जूनोटिक रोगों के प्रति भारत की तैयारियों को उजागर करता है।
- निपाह वायरस (NiV): यह एक अत्यधिक संक्रामक जूनोटिक वायरस है, जिसे सबसे पहले वर्ष 1998-99 में मलेशिया के कंपुंग सुंगई निपाह में पहचाना गया था।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह वायरस पशुओं से मनुष्यों में संचरित होता है, जिसमें फलाहारी चमगादड़ (Pteropodidae) प्राकृतिक भंडार के रूप में कार्य करते हैं और सूअर मध्यस्थ मेज़बान होते हैं। यह वायरस पैरामाइक्सोविरिडे परिवार के हेनिपावायरस वंश से संबंधित है।
- इसमें मनुष्य से मनुष्य में संचरण की क्षमता होती है, जिससे यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम बन जाता है और इसके लिये त्वरित निगरानी और रोकथाम आवश्यक होती है।
- लक्षण और नैदानिक विशेषताएँ: निपाह संक्रमण आमतौर पर इन्फ्लूएंज़ा जैसे लक्षणों के साथ शुरू होता है, जैसे– बुखार, माँसपेशियों में दर्द, गले में खराश और श्वसन संबंधी कठिनाइयाँ।
- गंभीर मामलों में यह तीव्र मस्तिष्क शोथ (Acute Encephalitis) तक बढ़ सकता है, जिसके परिणामस्वरूप दौरे, मानसिक भ्रम, कोमा और यहाँ तक कि मृत्यु हो सकती है।
- महत्त्वपूर्ण रूप से, लक्षणहीन (Asymptomatic) संक्रमण की भी रिपोर्टें हैं, जो रोकथाम और नियंत्रण प्रयासों को जटिल बनाती हैं।
- निदान और परीक्षण: निपाह वायरस (NiV) को बायोसुरक्षा स्तर-4 (BSL-4) रोगजनक के रूप में वर्गीकृत किया गया है और इसके परीक्षण के लिये उच्च-सुरक्षा प्रयोगशालाओं की आवश्यकता होती है।
- निदान की पुष्टि रियल-टाइम पोलिमरेज़ चेन रिएक्शन (RT-PCR), ELISA, सीरम न्यूट्रलाइज़ेशन टेस्ट, हिस्टोपैथोलॉजी और वायरस पृथक्करण तकनीकों (Virus Isolation Techniques) के माध्यम से की जाती है।
- उपचार और रोकथाम: निपाह वायरस के लिये मानव या पशु दोनों में कोई अनुमोदित टीका उपलब्ध नहीं है।
- उपचार मुख्यतः गहन सहायक देखभाल (Intensive Supportive Care) और अलगाव (Isolation) पर आधारित होता है। भारत, विशेषकर केरल में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और एंटीवायरल दवाओं, जैसे– रेमडेसिविर (Remdesivir) के उपयोग से उपचार के परिणाम बेहतर हुए हैं, जिससे मृत्यु दर वर्ष 2018 के 91% से घटकर 2023-25 तक लगभग 33% तक पहुँच गई है।
- भारत और निपाह प्रकोप: भारत ने पश्चिम बंगाल (2007) तथा केरल (2018, 2023 एवं 2025) में निपाह प्रकोप देखे हैं, जिससे शीघ्र पहचान, संपर्क पता लगाना व त्वरित चिकित्सा प्रतिक्रिया सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारी के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाती है।
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आधार शुभंकर ‘उदय’
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार सेवाओं को आम नागरिकों के लिये अधिक सुलभ और सहज बनाने हेतु एक संचार उपकरण के रूप में 'उदय', जो कि एक नागरिक-अनुकूल आधार शुभंकर है, को प्रस्तुत किया है।
- इसका उद्देश्य अद्यतन, प्रमाणीकरण, ऑफलाइन सत्यापन, जानकारी के चयनात्मक साझाकरण और ज़िम्मेदार उपयोग को सरल बनाना है।
आधार
- परिचय: आधार UIDAI द्वारा जारी कीएक 12-अंकीय बायोमेट्रिक पहचान संख्या है, जो संपूर्ण भारत में निवासियों के लिये पहचान और पते का प्रमाण के रूप में कार्य करती है। यह नागरिकता या जन्म तिथि का प्रमाण नहीं है, राष्ट्रीयता स्थापित करने के लिये इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है।
- आधार आधार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत एक वैधानिक प्राधिकारी UIDAI द्वारा जारी किया जाता है।
- पात्रता: कोई भी व्यक्ति, जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिसने पंजीकरण आवेदन की तिथि से पूर्व विगत 12 माह में भारत में 182 दिन या उससे अधिक समय तक निवास किया है, तो वह पात्र होगा — बशर्ते कि वह अधिसूचित पहचान एवं पता संबंधी 18 दस्तावेज़ों में से किसी एक को प्रस्तुत करे।
- उपयोगिता: आधार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), बैंकिंग सेवाओं, मोबाइल कनेक्शन और विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी सेवाओं तक पहुँच की सुविधा प्रदान करता है।
- न्यायिक रुझान: न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामला 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा और स्पष्ट किया कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 के अंतर्गत, आधार संख्या स्व नागरिकता या अधिवास प्रदान या सिद्ध नहीं करती है।
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और पढ़ें: आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं |
बढ़ता FTA व्यापार घाटा
नीति आयोग की व्यापार निगरानी त्रैमासिक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि भारत का मुक्त व्यापार समझौता (FTA) साझेदार देशों के साथ व्यापार घाटा तेज़ी से बढ़ गया है, भले ही देश ने इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उभरते (Sunrise) क्षेत्रों में मज़बूत निर्यात वृद्धि दर्ज की हो।
नीति आयोग की रिपोर्ट से मुख्य निष्कर्ष
- घाटे में तेज़ वृद्धि: भारत का FTA साझेदार देशों के साथ व्यापार घाटा Q1 FY 26 (अप्रैल से जून) में 59.2% बढ़ गया। निर्यात 9% गिरकर 38.7 बिलियन USD हो गया, जबकि आयात 10% बढ़कर 65.3 बिलियन USD हो गया।
- निर्यात में संरचनात्मक परिवर्तन: इलेक्ट्रॉनिक्स ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, वर्ष-दर-वर्ष (YoY) 47% की वृद्धि दर्ज की और अब यह कुल निर्यात का 11% से अधिक हिस्सा बन गया है। इसके विपरीत, पेट्रोलियम निर्यात में भारी गिरावट देखी गई।
- घाटे के प्रमुख कारक के रूप में आसियान: कुल व्यापार घाटे में आसियान को निर्यात में 16.9% की गिरावट मुख्य कारण रही, जो कि भारत का सबसे बड़ा FTA निर्यात बाज़ार है। प्रमुख गिरावट मलेशिया (-39.7%) और सिंगापुर (-13.2%) में देखी गई।
- आयात में तेज़ी और विविधीकरण: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात 28.7% बढ़ा, जिसका कारण सोने के यौगिकों का नया आयात और पेट्रोलियम में वृद्धि था। वहीं, चीन से आयात 16.3% बढ़ा, जिसका नेतृत्व इलेक्ट्रॉनिक घटकों ने किया।
- भू-राजनीतिक और वार्त्ता संदर्भ: यह आँकड़ा इसलिये महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भारत सक्रिय रूप से FTA वार्त्ता कर रहा है (जैसे EU और US) और हाल ही में ओमान, न्यूज़ीलैंड और UK के साथ 2025 में समझौते संपन्न किये हैं। इसके साथ ही ASEAN FTA की पुनर्वार्त्ता की 2025 की समय सीमा भी चूक गई थी, जो इसे और प्रासंगिक बनाती है।
भारत का विदेश व्यापार पैटर्न
- भारत की निर्यात वृद्धि: भारत का कुल निर्यात 2023–24 में 778.21 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें माल निर्यात (Merchandise exports) 437.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर और सेवा निर्यात (Service exports) 341.11 बिलियन USD रहा।
- क्षेत्रीय वितरण: उत्तर अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बनकर उभरा, इसके बाद EU, पश्चिम एशिया और ASEAN में मज़बूत वृद्धि देखी गई।
- सबसे बड़े निर्यात गंतव्य: संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), चीन, नीदरलैंड आदि।
- सबसे बड़े आयात स्रोत: चीन, रूस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) आदि।
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