तरलता प्रबंधन के लिये परिवर्तनीय रेपो दर | 23 Mar 2026

स्रोत : बिज़नेस लाइन

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने तीन दिवसीय परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) नीलामी के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की तरलता प्रवाहित की है।

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जनवरी 2026 से सरकारी प्रतिभूतियों के खुला बाज़ार परिचालन (OMO) क्रय के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में 3.50 लाख करोड़ रुपये की तरलता प्रवाहित की है। 

परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) क्या है?

  • परिचय: परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) एक बाज़ार-प्रेरित मौद्रिक नीति उपकरण है, जिसका उपयोग भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकिंग प्रणाली में अल्पकालिक तरलता प्रदान करने के लिये किया जाता है।
    • सामान्य ‘स्थिर रेपो दर’ से भिन्न, जहाँ ब्याज दर आरबीआई द्वारा पूर्वनिर्धारित होती है (वर्तमान में 5.25%), VRR में ब्याज दर नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित की जाती है। 
  • नीलामी तंत्र: परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) एक तरलता प्रवाह उपकरण है, जो चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के तहत संचालित होता है। इसमें बैंक प्रतिस्पर्द्धात्मक रूप से धन के लिये बोली लगाते हैं और कट-ऑफ रेट उस उच्चतम स्वीकृत बोली द्वारा निर्धारित होती है, जो वास्तविक समय में बाज़ार की मांग को दर्शाती है।
    • RBI धन आवंटन प्रक्रिया में सबसे उच्च बोली से आरंभ करता है और अधिसूचित राशि समाप्त होने तक आवंटन करता है।
  • अवधि एवं संपार्श्विक: नीलामी आमतौर पर 1 से 14 दिनों के बीच होती है और इसमें बैंकों को उधार ली गई धनराशि के बदले उपयुक्त सरकारी प्रतिभूतियाँ संपार्श्विक के रूप में प्रस्तुत करनी होती हैं।
  • वीआरआर का महत्त्व: जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बैंकिंग प्रणाली में तरलता की कमी देखता है (जैसे- अग्रिम कर भुगतान या त्योहारों के अवसर पर नकदी निकासी के कारण), तब वह VRR नीलामी की घोषणा करता है। यह निम्नलिखित में सहायक होती है:
    • तरलता प्रबंधन: यह सुनिश्चित करने में सहायता करती है कि भारित औसत कॉल दर (WACR), जो मौद्रिक नीति का संचालनात्मक लक्ष्य है, रेपो दर के अनुरूप बनी रहे।
    • बाज़ार खोज (Market Discovery): यह आरबीआई को सही ब्याज दर का अनुमान लगाने से रोकती है, जिससे बैंकों को अपनी तत्काल आवश्यकताओं के आधार पर धन की वास्तविक लागत को संकेतित करने का अवसर प्राप्त होता है।

परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) और स्थिर रेपो दर के बीच अंतर:

विशेषता

परिवर्तनीय रेपो दर (VRR)

स्थिर रेपो दर

ब्याज दर

नीलामी के माध्यम से बाज़ार का निर्धारण किया जाता है ।

आरबीआई द्वारा निर्धारित (नीति दर)।

उद्देश्य

अल्पकालिक तरलता को बेहतर बनाना ।

दीर्घकालिक नीतिगत रुख का संकेत देना ।

लचीलापन

अत्यधिक लचीला, वास्तविक समय की मांग को दर्शाता है।

कम लचीला, सभी के लिये एक ही दर।

नोट: जिस प्रकार VRR धन की आपूर्ति करती है, उसी प्रकार VRRR (परिवर्तनीय रिवर्स रेपो रेट) का उपयोग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने के लिये किया जाता है।

चलनिधि समायोजन सुविधा क्या है?

  • परिचय: LAF (चलनिधि समायोजन सुविधा) एक प्रमुख मौद्रिक नीति का ढाँचा है, जिसका उपयोग भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बैंकिंग सिस्टम में दिन-प्रतिदिन की तरलता असमानताओं के प्रबंधन के लिये करता है।
    • नरसिम्हम समिति (1998) की सिफारिशों के बाद वर्ष 2000 में शुरू की गई यह सुविधा बैंकों को प्रतिभूति पुनर्खरीद समझौतों (रेपो) के माध्यम से धन उधार लेने या अतिरिक्त निधि RBI के पास जमा करने की अनुमति देती है।
  • LAF के मूल घटक: LAF मुख्यतः दो प्रकार के लेन-देन के माध्यम से संचालित होता है:
    • रेपो दर: वह ब्याज दर, जिस पर RBI सरकारी प्रतिभूतियों (G-सेक) की प्रतिभूति के विरुद्ध वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक धन उधार देता है। 
      • यह नीतिगत दर है और अर्थव्यवस्था में तरलता की आपूर्ति के लिये एक उपकरण के रूप में कार्य करती है।
    • रिवर्स रेपो दर: वह ब्याज दर, जिस पर RBI बैंकों से धन उधार लेता है। यह बाज़ार से अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करने का एक उपकरण है।
      • अप्रैल 2022 से, स्थायी जमा सुविधा (SDF) ने LAF कॉरिडोर के निचले सिरे पर तरलता अवशोषण के लिये प्राथमिक उपकरण के रूप में निर्धारित रिवर्स रेपो दर को प्रभावी रूप से बदल दिया है।
  • LAF कॉरिडोर: RBI अल्पकालिक ब्याज दरों को स्थिर रखने के लिये एक ‘कॉरिडोर’ बनाए रखता है। यह कॉरिडोर सुनिश्चित करता है कि भारित औसत कॉल दर (WACR), वह दर जिस पर बैंक एक-दूसरे को शीघतिशीघ्र ऋण देते हैं, पॉलिसी रेपो रेट के करीब बनी रहे।
    • सीमा (ऊपरी सीमा): सीमांत स्थायी सुविधा (MSF)। यह एक ‘पेनल रेट’ (आमतौर पर रेपो से 25 आधार अंक ऊपर) है, जिस पर बैंक अपने वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) कोटा में से आपातकालीन निधि ऋण के रूप में ले सकते हैं।
    • केंद्र: पॉलिसी रेपो रेट
    • फ्लोर (निचली सीमा): स्थायी जमा सुविधा (SDF)। यह बैंकों को बिना किसी प्रतिभूति के अतिरिक्त धन RBI के पास जमा करने की अनुमति प्रदान करती है (आमतौर पर रेपो से 25 आधार अंक नीचे)।

खुला बाज़ार परिचालन (OMO)

  • परिचय: OMO मौद्रिक नीति का एक मात्रात्मक उपकरण है, जिसमें सरकारी प्रतिभूतियों (G-सेक), जिसमें दिनांकित प्रतिभूतियाँ और ट्रेजरी बिल शामिल हैं, की खरीद और बिक्री समाहित है।
  • कार्य: प्रतिभूतियों की क्रय बैंकिंग प्रणाली में तरलता की आपूर्ति करता है (विस्तारात्मक प्रभाव), हालाँकि प्रतिभूतियों की बिक्री तरलता को अवशोषित करती है (संकुचनात्मक प्रभाव), जिससे मुद्रा आपूर्ति प्रभावित होती है।
  • भारत में क्रियान्वयन: RBI बैंकों और प्राथमिक डीलरों के साथ या तो नीलामी या प्रत्यक्ष लेन-देन का उपयोग करके खुला बाज़ार परिचालन (OMO) करता है। इन गतिविधियों को RBI के कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म ई-कुबेर सिस्टम के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रबंधित किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. स्थिर रेपो दर और परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) के बीच मुख्य अंतर क्या है?
स्थिर रेपो दर में पूर्व-निर्धारित नीति दर का उपयोग किया जाता है, ताकि दीर्घकालिक नीति रुख का संकेत दिया जा सके, जबकि परिवर्तनीय रेपो दर (VRR) में बाज़ार-निर्धारित नीलामी दरों का उपयोग करके अल्पकालिक तरलता को सूक्ष्म रूप से समायोजित किया जाता है।

2. स्थायी जमा सुविधा (SDF)  LAF कॉरिडोर में किस प्रकार कार्य करती है?
स्थायी जमा सुविधा (SDF) चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) कॉरिडोर की निचली सीमा (Floor) निर्धारित करती है। इसके माध्यम से बैंक अपनी अतिरिक्त तरलता (Excess Liquidity) को बिना किसी संपार्श्विक (Collateral) के RBI के पास जमा कर सकते हैं, जिस पर उन्हें सामान्यतः रेपो दर से 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) कम ब्याज मिलता है।

3. भारित औसत कॉल दर (WACR) को मौद्रिक नीति का परिचालन लक्ष्य क्यों माना जाता है?
भारित औसत कॉल दर (WACR) इंटरबैंक बाज़ार में ओवरनाइट फंड्स की वास्तविक कीमत को दर्शाती है, RBI अपनी चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के विभिन्न उपकरणों का सक्रिय रूप से उपयोग करता है, ताकि भारित औसत कॉल दर (WACR) को पॉलिसी रेपो दर के यथासंभव समीप बनाए रखा जा सके।

4. वाणिज्यिक बैंकों के लिये सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) का क्या महत्त्व है?
यह LAF कॉरिडोर की ऊपरी सीमा (सीलिंग) के रूप में कार्य करती है और एक ‘सेफ्टी वॉल्व’ प्रदान करती  है, जहाँ बैंक अपने वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) में से आपातकालीन फंड उधार ले सकते हैं।

        



UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रश्न. यदि भारतीय रिज़र्व बैंक एक विस्तारवादी मौद्रिक नीति अपनाने का निर्णय लेता है, तो वह निम्नलिखित में से क्या नहीं करेगा? (2020)

1. वैधानिक तरलता अनुपात में कटौती और अनुकूलन

2. सीमांत स्थायी सुविधा दर में बढ़ोतरी

3. बैंक रेट और रेपो रेट में कटौती

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


प्रश्न. मौद्रिक नीति समिति (MPC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2017)

1. यह आरबीआई की बेंचमार्क ब्याज दरों को तय करती है।

2. यह आरबीआई के गवर्नर सहित 12 सदस्यीय निकाय है, जिसका प्रतिवर्ष पुनर्गठन किया जाता है।

3. यह केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कार्य करती है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 1 और 2

(c) केवल 3

(d) केवल 2 और 3

उत्तर: (a)