वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह: भारत का पहला डिजिटल ट्विन बंदरगाह | 14 Mar 2026
वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह (तमिलनाडु) भारत का पहला बंदरगाह बन गया, जिसने बंदरगाह प्रबंधन के लिये डिजिटल ट्विन पहल शुरू की, जो मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और अमृत काल विज़न 2047 के अनुरूप है।
- डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म: यह बंदरगाह की अवसंरचना, संचालनात्मक संसाधनों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का वास्तविक समय में आभासी प्रतिरूप (Virtual Replica) तैयार करता है, जिसे IoT सेंसर, GPS ट्रैकिंग, LiDAR मैपिंग, ड्रोन इमेजिंग और CCTV नेटवर्क जैसी उन्नत तकनीकों के समाकलन द्वारा संचालित किया जाता है।
- मुख्य तकनीकी विशेषताएँ: यह बर्थ की उपलब्धता, जहाजों की गतिविधियों, क्रेन उपयोग और यार्ड क्षमता की वास्तविक समय में संचालनात्मक निगरानी को सक्षम बनाता है। यह AI-आधारित संपत्ति निगरानी के माध्यम से माल परिवहन उपकरण के पूर्वानुमानात्मक रखरखाव का समर्थन करता है, जिससे डाउनटाइम कम होता है और विश्वसनीयता में सुधार होता है।
- अपेक्षित परिणाम और लाभ: जहाजों के टर्नअराउंड समय में 25% तक कमी
- उपकरण की उपलब्धता और परिचालनात्मक विश्वसनीयता में सुधार
- पूर्वानुमानात्मक चेतावनी के माध्यम से सुरक्षा में वृद्धि
- ऊर्जा उपयोग का अनुकूलन, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी
वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह
- परिचय: वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह (पूर्व में तूतुकुड़ी बंदरगाह) भारत के 13 प्रमुख बंदरगाहों में से एक है, जो कोरोमंडल तट पर एक कृत्रिम, सभी मौसमों में काम करने वाला गहरे समुद्री बंदरगाह के रूप में कार्य करता है।
- ऐतिहासिक महत्त्व: मूलरूप से तूतुकुड़ी बंदरगाह के रूप में स्थापित। इसे जुलाई 1974 में प्रमुख बंदरगाह घोषित किया गया और वर्ष 2011 में इसे वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै (V.O.C.) के सम्मान में पुनर्नामित किया गया, जो स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी की स्थापना (वर्ष 1906 में) करके ब्रिटिश समुद्री एकाधिकार को चुनौती देने वाले स्वतंत्रता सेनानी और उद्यमी थे।
- रणनीतिक भौगोलिक स्थिति: तमिलनाडु के तूतुकुड़ी में, मन्नार की खाड़ी में स्थित, यह बंदरगाह पूर्व-पश्चिम अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों के निकट सामरिक स्थिति से लाभान्वित है।
- परिचालन महत्त्व और रैंकिंग: यह तमिलनाडु का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह (चेन्नई बंदरगाह के बाद) और भारत का तीसरा सबसे बड़ा कंटेनर टर्मिनल है, जो भूमध्यसागर, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ व्यापार के लिये एक महत्त्वपूर्ण प्रवेशद्वार के रूप में कार्य करता है तथा कंटेनर, कोयला, नमक और उर्वरक सहित विविध पण्य को प्रबंधित करता है।