ईरान व्यापार पर अमेरिका के द्वितीयक टैरिफ | 21 Jan 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है। हालाँकि, भारत-ईरान के बीच पहले से ही घटे हुए द्विपक्षीय व्यापार के कारण इसका भारत पर सीधा आर्थिक प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।
भारत-ईरान आर्थिक संबंध
- न्यूनतम व्यापार: भारत-ईरान व्यापार 2020 से पहले लगभग 15 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। इससे ईरान भारत के शीर्ष 50 व्यापारिक साझेदारों में शामिल नहीं है और प्रत्यक्ष टैरिफ प्रभाव सीमित हो जाता है।
- प्रभावित प्रमुख क्षेत्र: कम व्यापार मात्रा के बावजूद भारत के कुछ लक्षित निर्यात, जैसे– अनाज, चाय, कॉफी, मसाले, पशु आहार तथा फल एवं मेवे पर दबाव पड़ सकता है।
- चाबहार बंदरगाह में निवेश: व्यापार से इतर भारत का ईरान के चाबहार बंदरगाह में महत्त्वपूर्ण रणनीतिक निवेश है, जो अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिये एक प्रवेश द्वार है। इसमें 10 वर्ष का संचालन अनुबंध, 120 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान तथा 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा (Line of Credit) शामिल है।
- ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: भारत वर्ष 2018 तक ईरान के कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक था। ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह आयात रोकना पड़ा, जिससे अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंधों के प्रति भारत की पूर्व संवेदनशीलता स्पष्ट होती है।
- वैश्विक निहितार्थ: प्रस्तावित टैरिफ का मुख्य प्रभाव चीन पर पड़ेगा, जो ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। चीन ने वर्ष 2025 में ईरान के निर्यातित तेल का 80% से अधिक खरीदा और वर्ष 2022 में ईरान के कुल निर्यात (USD 22 बिलियन) में इसकी प्रमुख हिस्सेदारी रही। ईरान के अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्किये और यूरोपीय संघ (EU) शामिल हैं।
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