सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना | 11 Apr 2026

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

असम और मेघालय ने सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना (SLHEP) के अवितरित केंद्रीय पूल से अतिरिक्त बिजली खरीदने से मना कर दिया है, जिसका कारण उच्च बिजली खरीद लागत तथा सस्ते वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की उपलब्धता बताया गया है।

  • दीर्घकालिक निर्माण विलंब (वर्ष 2011-2019 के बीच कार्य निलंबित रहने) के कारण अनुमानित टैरिफ ₹2 प्रति यूनिट से बढ़कर ₹7.70 प्रति यूनिट से अधिक हो गया है, जो कि राष्ट्रीय औसत जलविद्युत टैरिफ ₹3.15 प्रति यूनिट से काफी अधिक है।

सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना

  • परिचय: SLHEP एक रन-ऑफ-द-रिवर (Run-of-the-River) परियोजना है, जिसे वर्ष 2003 में स्वीकृति प्रदान की गई थी। यह असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित सुबनसिरी नदी पर विकसित की जा रही है। इसे 2000 मेगावाट की कुल क्षमता के साथ भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना के रूप में परिकल्पित किया गया है।
    • वर्तमान में, कुल आठ 250 मेगावाट इकाइयों में से केवल तीन ने ही वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ किया है।
  • अवसंरचना का पैमाना एवं महत्त्व: इस परियोजना में 116 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रैविटी बाँध शामिल है, जो पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा बाँध है। यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण तथा ऊर्जा सुरक्षा के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

सुबनसिरी नदी

  • परिचय: सुबनसिरी नदी, जिसे प्रायः ‘स्वर्ण नदी’ (स्थानीय शब्द सुबर्णशिरी से व्युत्पन्न) कहा जाता है, एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय (सीमापार) नदी है, जो तिब्बत और भारत से होकर बहती है। यह ब्रह्मपुत्र नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
    • ऐतिहासिक रूप से, इस नदी के तल में पाए जाने वाले स्वर्ण कणों (Gold Dust) के कारण यह प्रसिद्ध रही, जिससे इसका यह नाम पड़ा।
  • पथ एवं भौगोलिक स्थिति: यह नदी चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में उद्गमित होती है और अरुणाचल प्रदेश में मिरी पहाड़ियों के माध्यम से भारत में प्रवेश करती है।
    • यह नदी अरुणाचल प्रदेश और असम से होकर प्रवाहित होती है तथा अंततः जामुरीघाट (असम) पर ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है।
  • रणनीतिक एवं पारिस्थितिक महत्त्व: हिमालय से तीव्र ढाल के साथ प्रवाहित होने के कारण इस नदी में जलविद्युत उत्पादन की प्रचुर एवं अपार संभावनाएँ निहित हैं।

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