RBI के लिये 4% मुद्रास्फीति लक्ष्य बरकरार | 27 Mar 2026

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों

भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक की अगली 5 वर्ष की अवधि के लिये 4% खुदरा मुद्रास्फीति (महँगाई) लक्ष्य (+/- 2% बैंड के साथ) को बरकरार रखा है। यह वर्ष 2016 में अपनाए गए लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढाँचे (फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टारगेटिंग- FIT) को और मज़बूती प्रदान करता है।

फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टारगेटिंग (FIT) क्या है?

  • परिचय: लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टारगेटिंग- FIT) मौद्रिक नीति का वह ढाँचा है, जिसमें केंद्रीय बैंक आर्थिक विकास और रोज़गार जैसे अन्य कारकों पर विचार करते हुए, मुख्य रूप से ब्याज दरों के माध्यम से मुद्रास्फीति दर को एक विशिष्ट, सार्वजनिक रूप से घोषित लक्ष्य सीमा के भीतर बनाए रखने के लिये अपने उपकरणों का उपयोग करता है।
    • ‘कठोर’ मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के विपरीत, जो केवल मूल्य स्थिरता पर केंद्रित होता है, वहीं ‘लचीली’ नीति केंद्रीय बैंक को वास्तविक अर्थव्यवस्था में अत्यधिक अस्थिरता (जैसे– बेरोज़गारी में तीव्र वृद्धि या सकल घरेलू उत्पाद में गिरावट) से बचने के लिये निर्धारित लक्ष्य से अल्पकालिक विचलन को सहन करने की अनुमति देती है।
  • कानूनी आधार: मौद्रिक नीति का प्राथमिक लक्ष्य विकास को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जैसा कि संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934  की धारा 45-ZA के तहत अनिवार्य किया गया है।
    • वैश्विक स्तर पर न्यूज़ीलैंड वर्ष 1990 में मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (Inflation Targeting - IT) को अपनाने वाला पहला देश था। इसके विपरीत, भारत ने उर्जित पटेल समिति की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 2016 में औपचारिक रूप से FIT (लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण) नीति को अपनाया।
  • भारत में FIT के घटक:
    • लक्ष्य: भारत सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के परामर्श से, मुद्रास्फीति के लिये एक संख्यात्मक लक्ष्य निर्धारित करती है। वर्तमान में यह लक्ष्य 4% है, जिसमें +/- 2% की सहनशीलता सीमा दी गई है। इसका अर्थ है कि मुद्रास्फीति की स्वीकार्य सीमा 2% से 6% के बीच होनी चाहिये।
    • एंकर (Anchor): यह ढाँचा मुद्रास्फीति को मापने के लिये प्राथमिक एंकर के रूप में हेडलाइन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का उपयोग करता है (जिसका आधार वर्ष 2024 है)।
    • निर्णयकर्त्ता: मौद्रिक नीति समिति (MPC) मुद्रास्फीति को प्रभावित करने के लिये रेपो रेट (Repo Rate) तय करने हेतु वर्ष में कम-से-कम 4 बार बैठक करती है। रेपो रेट वह दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है।
    • जवाबदेही: यदि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति के लक्ष्य को प्राप्त करने में विफल रहता है (अर्थात महंगाई लगातार 3 तिमाहियों तक 2% से 6% की सीमा से बाहर रहती है), तो उसे सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में विफलता के कारण, सुधारात्मक उपाय और लक्ष्य तक वापस पहुँचने के लिये एक अनुमानित समय-सीमा की जानकारी देनी अनिवार्य है।
  • प्रदर्शन की समीक्षा: पिछले 9 वर्षों (2016-25) के दौरान लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का प्रदर्शन एक 'हंप-आकार' (Hump-shaped) के समान रहा है। इसमें पहले और अंतिम तीन-वर्षीय खंड 4% के लक्ष्य के अनुरूप रहे। इसके विपरीत बीच के तीन वर्षों में कोविड-19 महामारी तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण मुद्रास्फीति 6% की ऊपरी सहनशीलता सीमा की ओर झुकी हुई देखी गई।
    • वर्ष 2016 में FIT को अपनाने के बाद से औसत मुद्रास्फीति घटकर 4.9% रह गई, जबकि FIT से पहले की अवधि में यह 6.8% थी।

मौद्रिक नीति

  • परिचय: यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी देश का केंद्रीय बैंक (भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक- RBI) विशिष्ट व्यापक आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये अर्थव्यवस्था में मुद्रा की आपूर्ति और ब्याज दरों का प्रबंधन करता है।
  • मुख्य उद्देश्य:
    • मूल्य स्थिरता: मुद्रास्फीति को एक निर्धारित दायरे (वर्तमान में 4% ± 2%) के भीतर बनाए रखना, ताकि नागरिकों की क्रय शक्ति सुरक्षित रह सके।
    • आर्थिक विकास: यह सुनिश्चित करना कि कृषि और उद्योग जैसे उत्पादक क्षेत्रों को सुलभ एवं किफायती ऋण उपलब्ध हो सके।
    • विनिमय दर स्थिरता: रुपये के मूल्य को डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं के मुकाबले संतुलित बनाए रखना, ताकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाया जा सके।

मुख्य उपकरण:

उपकरण

मुद्रास्फीति कम करने के उपाय

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

रेपो रेट 

वृद्धि

उधार लेना महंगा हो जाता है, उपभोग और निवेश धीमा पड़ जाता है।

नकद आरक्षित अनुपात (CRR)

वृद्धि

बैंकों को भारतीय रिज़र्व बैंक के पास अधिक नकद रखना पड़ता है, जिससे ऋण देने के लिये उनके पास कम धन बचता है।

खुला बाज़ार परिचालन (OMO)

सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचें

भारतीय रिज़र्व बैंक बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को बाहर निकालता है।

वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)

वृद्धि

बैंकों को सुरक्षित सरकारी परिसंपत्तियों में अधिक निवेश करना पड़ता है, जिससे निजी क्षेत्र को मिलने वाला ऋण कम हो जाता है।

  • मौद्रिक नीति के प्रकार: मौद्रिक नीति को आमतौर पर इसके उद्देश्य के आधार पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है अर्थात क्या केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधि को तेज़ करना चाहता है या धीमा करना चाहता है।
    • विस्तारवादी (डविश) मौद्रिक नीति: इस नीति का उपयोग आर्थिक मंदी के दौरान मांग को बढ़ावा देने और मुद्रा आपूर्ति को बढ़ाने के लिये किया जाता है। इसके तहत RBI आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिये नीतिगत दरों (जैसे– रेपो दर) को कम करता है।
    • संकुचनवादी (हॉकिश) मौद्रिक नीति: इस नीति का उपयोग तब किया जाता है जब अर्थव्यवस्था "ओवरहीटिंग" हो और मुद्रास्फीति की सहिष्णु सीमा से ऊपर हो। इसके तहत RBI नीतिगत दरों में वृद्धि करता है जो खर्च को कम करता है और प्रणाली से अतिरिक्त तरलता को "शक" कर लेता है।
  • भारत में मौद्रिक नीति के रुख: मौद्रिक नीति समिति (MPC) प्रायः बाज़ार को अपने भविष्य के इरादों को संप्रेषित करने के लिये विशिष्ट "रुख" का उपयोग करती है:
    • समायोजनात्मक: विकास का समर्थन करने के लिये दरों में कटौती करने या उन्हें कम रखने के लिये तैयार (विस्तारवादी)।
    • तटस्थ: दरें आगामी आँकड़ों के आधार पर किसी भी दिशा (ऊपर या नीचे) में जा सकती हैं।
    • हॉकिश: सख्ती से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने पर केंद्रित, दरों में वृद्धि की संभावना (संकुचनवादी)।
    • समायोजन वापस लेना: यह एक संक्रमणकालीन चरण है जिसमें RBI उस अतिरिक्त धन को सिस्टम से निकालना शुरू कर देता है जिसे उसने संकट के समय (जैसे कि महामारी के बाद की अवधि) में एकत्रित किया था।

Monetary Policy Committee

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. FIT फ्रेमवर्क के तहत RBI का वर्तमान मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?
यह लक्ष्य 4% है, जिसमें ±2% की सहनशीलता सीमा (अर्थात 2% से 6%) निर्धारित है। यह अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक के लिये लागू है।

2. भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण का वैधानिक आधार क्या है?
यह RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-ZA के तहत निर्धारित है, जिसके अनुसार सरकार RBI के साथ परामर्श करके प्रति पाँच वर्ष में मुद्रास्फीति लक्ष्य तय करती है।

3. यदि RBI मुद्रास्फीति को निर्धारित सीमा के भीतर बनाए रखने में विफल रहता है तो क्या होता है?
यदि मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों तक 2%-6% की सीमा से बाहर रहती है, तो RBI को सरकार को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है, जिसमें कारणों और सुधारात्मक उपायों का उल्लेख होता है।

4. MPC मुद्रास्फीति को कैसे प्रभावित करती है?
RBI गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय MPC रेपो दर निर्धारित करती है। इस नीतिगत दर में परिवर्तन करके MPC धन आपूर्ति और उधार लागत को नियंत्रित करती है, जिससे मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप रखा जा सके।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)

प्रश्न 1. भारत में, निम्नलिखित में कौन मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर कीमत स्थिरता बनाए रखने के लिये उत्तरदायी है ? (2022)

(a) उपभोक्ता मामले विभाग

(b) व्यय प्रबंधन आयोग

(c) वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद

(d) भारतीय रिज़र्व बैंक

उत्तर: (d)


प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2020)

  1. खाद्य वस्तुओं का ‘उपभोक्ता मूल्य सूचकांक’ (CPI) भार (Wegitage) उनके ‘थोक मूल्य सूचकांक’ (WPI) में दिये गए भार से अधिक है।
  2.  WPI सेवाओं के मूल्यों में होने वाले परिवर्तनों को शामिल नहीं करता है, जैसा कि CPI करता है।
  3.  भारतीय रिज़र्व बैंक ने अब मुद्रास्फीति के मुख्य मान तथा प्रमुख नीतिगत दरों के निर्धारण हेतु WPI को अपना लिया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a)


प्रश्न 3. यदि भारतीय रिज़र्व बैंक एक विस्तारवादी मौद्रिक नीति अपनाने का निर्णय लेता है, तो वह निम्नलिखित में से क्या नहीं करेगा? (2020)

1. वैधानिक तरलता अनुपात में कटौती और अनुकूलन

2. सीमांत स्थायी सुविधा दर में बढ़ोतरी

3. बैंक रेट और रेपो रेट में कटौती

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b)


प्रश्न 4. मौद्रिक नीति समिति (MPC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (2017)

1. यह आरबीआई की बेंचमार्क ब्याज दरों को तय करती है।

2. यह आरबीआई के गवर्नर सहित 12 सदस्यीय निकाय है, जिसका प्रतिवर्ष पुनर्गठन किया जाता है।

3. यह केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में कार्य करती है।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1

(b) केवल 1 और 2

(c) केवल 3

(d) केवल 2 और 3

उत्तर: (a)


प्रश्न 5. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा बैंक दर को कम करना _______की ओर जाता है: (2011)

(a) बाज़ार में अधिक तरलता

(b) बाज़ार में कम तरलता

(c) बाज़ार में तरलता में कोई बदलाव नहीं

(d) वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अधिक जमा जुटाना

उत्तर: (a)