सीमा-पार संरक्षण के लिये भारत-नेपाल समझौता ज्ञापन | 27 Feb 2026
भारत के केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने नेपाल के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के साथ वन, वन्यजीव, पर्यावरण, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिये एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये हैं।
- भूदृश्य स्तर पर संरक्षण: इस समझौता ज्ञापन में हाथियों, गंगा डॉल्फिन, गैंडों, हिम तेंदुओं, बाघ और गिद्ध जैसी प्रमुख प्रजातियों सहित भूभाग स्तर पर जैव विविधता संरक्षण रणनीतियों को तैयार करने में सहयोग की परिकल्पना की गई है।
- सीमा-पार पारिस्थितिक तंत्रों पर ध्यान केंद्रित करना: अपने साझा पारिस्थितिक तंत्रों और सीमा-पार वन्यजीव पर्यावासों को पहचानते हुए, दोनों देशों ने वन्यजीव गलियारों को बहाल करने और क्षेत्रों को आपस में जोड़ने पर विशेष ध्यान देने के साथ समन्वय को मज़बूत करने पर सहमति व्यक्त की।
- उदाहरण के तौर पर, खाता कॉरिडोर (नेपाल के बर्दिया राष्ट्रीय उद्यान को भारत के कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य से जोड़ता है।
- वाल्मीकि-चितवन लिंकेज (भारत के बिहार में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व, जो नेपाल के चितवन नेशनल पार्क और पर्सा वन्यजीव अभयारण्य के निकट स्थित है।)
- वन्यजीव अपराध: समझौते का एक महत्त्वपूर्ण पहलू वन और वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाना है। इसके तहत, जैव विविधता संरक्षण के खतरों से निपटा जाएगा और प्रवर्तन एजेंसियों के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के क्षमता निर्माण को मज़बूत किया जाएगा।
- उदाहरण के लिये, गैंडे के सींगों के लिये अवैध शिकार पर अंकुश लगाना, बाघ की खाल, हड्डियों, पंजों, दाँतों और अन्य अंगों के लिये अवैध शिकार पर अंकुश लगाना, हाथी के दाँतों (हाथीदाँत) के लिये अवैध शिकार पर अंकुश लगाना आदि।
- बहुपक्षीय समझौतों के प्रति प्रतिबद्धता: भारत और नेपाल दोनों बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों और सम्मेलनों पर सहयोग करने के लिये सहमत हुए हैं क्योंकि वे अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA), जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD, 1992), वन्य जीवों एवं वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES, 1973) आदि के पक्षकार हैं।
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