अंडमान सागर | 15 Apr 2026

स्रोत: ऑल इंडिया रेडियो

शरणार्थियों के लिये संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (UNHCR) के अनुसार, लगभग 250 लोगों को ले जा रही एक नाव, जिसमें मुख्य रूप से रोहिंग्या शरणार्थी और बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे, के अंडमान सागर में डूबने की आशंका है।

  • अंडमान सागर विश्व के अत्यंत जोखिमपूर्ण समुद्री प्रवासन मार्गों में से एक बन चुका है। हज़ारों रोहिंग्या शरणार्थी (म्याँमार के रखाइन राज्य से संबंधित राज्यविहीन मुस्लिम अल्पसंख्यक समूह) नियमित रूप से बांग्लादेश या म्याँमार से अंडमान सागर के पार जोखिमपूर्ण यात्राएँ करते हैं।
    • ये प्रायः नवंबर से अप्रैल के मध्य (जब समुद्र अपेक्षाकृत शांत होता है) जर्जर नौकाओं के माध्यम से इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे मुस्लिम-बहुल देशों में शरण और बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में यात्राएँ करते हैं।

अंडमान सागर  

  • अंडमान सागर उत्तर-पूर्वी हिंद महासागर का एक सीमांत सागर है, जिसके उत्तर-पूर्व में म्याँमार और थाईलैंड, दक्षिण में मलय प्रायद्वीप तथा सुमात्रा एवं पश्चिम में भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह स्थित हैं जो इसे बंगाल की खाड़ी से पृथक् करते हैं।
  • इसका दक्षिणी भाग सँकरा होकर मलक्का जलडमरूमध्य में मिलता है, जो हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण वैश्विक व्यापार गलियारा है। 
  • भौगोलिक दृष्टि से इसके उत्तरी भाग में मरतबन की खाड़ी सम्मिलित है तथा इसमें इरावदी, सालवीन और सितांग जैसी प्रमुख नदियाँ मिलती हैं, जबकि इसका तल बर्मा-सुंडा प्लेट सीमा के साथ विवर्तनिक रूप से सक्रिय रहता है।
  • रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से यह क्षेत्र वैश्विक नौवहन के लिये महत्त्वपूर्ण है तथा अंडमान और निकोबार कमान के माध्यम से भारत को समुद्री सामरिक बढ़त प्रदान करता है। साथ ही, यह क्षेत्र समृद्ध समुद्री जैव विविधता एवं मत्स्य संसाधनों से युक्त है, किंतु इस पर बढ़ते पर्यावरणीय दबाव गंभीर चुनौती प्रस्तुत कर रहे हैं।

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