IMD का 151वाँ स्थापना दिवस और ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन | 16 Jan 2026
भारत ने शहरी मौसम पूर्वानुमान में बड़े सुधार की घोषणा की है, जिसके तहत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 151वें स्थापना दिवस (15 जनवरी 1875–2026) के अवसर पर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और पुणे में 200 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (AWS) स्थापित किये जाएंगे, ताकि आपदा तैयारी मज़बूत हो एवं स्थानीय स्तर पर सटीक पूर्वानुमान सुनिश्चित किया जा सके।
- ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (AWS): यह मौसम संबंधी स्टेशन है, जो मौसम के आँकड़ों को स्वचालित रूप से रिकॉर्ड और प्रसारित करता है।
- AWS सतही मौसम के अवलोकनों का घनत्व, विश्वसनीयता और आवृत्ति को बढ़ाता है, विशेषतः दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्रों में।
- ये उन्नत डिजिटल सेंसर और स्वचालित रिपोर्टिंग के माध्यम से निरंतर, हाई-रिज़ॉल्यूशन डेटा प्रदान करते हैं, मानवीय त्रुटि एवं परिचालन लागत को कम करते हैं तथा नेटवर्क से परे मापन को मानकीकृत करते हैं।
- AWS कृषि, विमानन, शहरी नियोजन, सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में सहायता करता है।
- IMD: यह मौसम विज्ञान संबंधी अवलोकनों, मौसम के पूर्वानुमान और भूकंप विज्ञान के लिये भारत की प्रमुख एजेंसी है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत कार्य करती है।
- नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में यह विभाग कृषि, विमानन, शिपिंग और आपदा प्रबंधन के लिये महत्त्वपूर्ण पूर्वानुमान एवं मौसम संबंधी चेतावनियाँ प्रदान करता है।
- IMD की उपलब्धियाँ: पिछले एक दशक में IMD ने उल्लेखनीय तकनीकी प्रगति की है – मौसम पूर्वानुमानों की सटीकता में 40–50% की वृद्धि हुई है, चक्रवात पथ के पूर्वानुमान की परिशुद्धता 35–40% तक बढ़ी है और मौसमी पूर्वानुमान की त्रुटि लगभग 7.5% से घटकर करीब 2.5% रह गई है।
- इसका मौसम रडार नेटवर्क अब भारत के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 87% को कवर करता है।
- IMD ने डॉप्लर वेदर रडार, एरोसोल मॉनिटरिंग सिस्टम और अति-अल्पकालिक पूर्वानुमानों (3 घंटे तक) का विस्तार किया है, साथ ही एक मॉडल वेधशाला, 3D-प्रिंटेड AWS तथा कृषि-स्वचालित मौसम केंद्र का उद्घाटन किया है, जो स्वदेशी, लागत-प्रभावी मौसम विज्ञान प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करता है।
- IMD के नेतृत्व में मिशन मौसम, उन्नत मौसम विज्ञान, जलवायु अनुकूल और सार्वजनिक कल्याण पर दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- भारत अब बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को मौसम तथा आपदा संबंधी उपग्रह सहायता प्रदान करता है, जिससे दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग मज़बूत हो रहा है।
- इसका मौसम रडार नेटवर्क अब भारत के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 87% को कवर करता है।