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खाद्य असुरक्षा: समस्या और समाधान | 24 Aug 2020 | कृषि

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में खाद्य असुरक्षा व उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ

विश्व में खाद्य सुरक्षा और पोषण अवस्था (State of Food Security and Nutrition in the World) संबंधी रिपोर्ट के नवीनतम संस्करण के अनुसार, भारत सबसे बड़ी खाद्य असुरक्षित आबादी वाला देश है। खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization) तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से जारी की जाने वाली इस रिपोर्ट में प्रस्तुत अनुमान बताते हैं कि वर्ष 2014 से 2019 तक खाद्य असुरक्षा का दायरा 3.8 प्रतिशत तक बढ़ गया है। वर्ष 2014 के सापेक्ष वर्ष 2019 तक 6.2 करोड़ अन्य लोग भी खाद्य असुरक्षा के दायरे में आ गए हैं।

वस्तुतः खाद्य सुरक्षा के सामान्य सिद्धांत के अंतर्गत तीन प्रमुख आयामों यथा - पहुँच, उपलब्धता, और उपयोग को शामिल किया जाता है। सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणापत्र (Universal Declaration of Human Rights) और आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध (International Covenant on Economic, Social and Cultural Rights) के सदस्य के रूप में भारत पर भूख से मुक्त होने और पर्याप्त भोजन के अधिकार को सुनिश्चित करने का दायित्व है।

इस आलेख में रिपोर्ट के प्रमुख तथ्य, खाद्य असुरक्षा से तात्पर्य, उसके प्रकार, भारत में खाद्य संकट का ऐतिहासिक विवरण, खाद्य असुरक्षा के कारण, सरकार के द्वारा किये जा रहे प्रयास तथा अन्य वैकल्पिक समाधानों पर भी विमर्श किया जाएगा।

रिपोर्ट संबंधी अन्य तथ्य

खाद्य असुरक्षा से तात्पर्य

खाद्य असुरक्षा के प्रकार

भारत में खाद्य असुरक्षा का ऐतिहासिक विवरण

भारत में खाद्य असुरक्षा के कारण

COVID-19 और खाद्य संकट

खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की त्रिविमीय अवधारणा

खाद्य सुरक्षा की वैकल्पिक विधियाँ

निष्कर्ष

COVID-19 संक्रमण के दौरान भारत स्वास्थ्य चुनौतियों के अतिरिक्त जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें से खाद्य सुरक्षा की चुनौती सबसे प्रमुख चुनौतियों में से एक है। तेज़ी से बढ़ती हुई जनसंख्या, बढ़ते खाद्य मूल्य और जलवायु परिवर्तन का खतरा ऐसी चुनौतियाँ है जिनसे युद्ध स्तर पर निपटे जाने की आवश्यकता है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि ‘‘जो व्यक्ति अपना पेट भरने के लिये जूझ रहा हो उसे दर्शन नहीं समझाया जा सकता है।” यदि भारत को विकसित राष्ट्रों की सूची में शामिल होना है, तो उसे अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

प्रश्न- खाद्य असुरक्षा से आप क्या समझते हैं? भारत में खाद्य असुरक्षा के कारणों का उल्लेख करते हुए समाधान के वैकल्पिक साधनों पर चर्चा कीजिये।