भारत के ग्रामीण क्षेत्र के विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्रांति | 28 Feb 2026
प्रिलिम्स के लिये: इंडियाAI मिशन, डिजिटल इंडिया, नीति आयोग, पंचायती राज संस्थान, भाषिणी, भू-प्रहरी, विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G), भारतजेन, अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन, भारतनेट, राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन 2.0 (2025-30)
मेन्स के लिये: भारत में AI के लिये नीतिगत ढाँचा, ग्रामीण विकास के रूपांतरण में AI की भूमिका, संबद्ध जोखिम तथा आगे की राह
चर्चा में क्यों?
इंडिया-AI इंपैक्ट समिट 2026 ने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, शासन, ग्रामीण आजीविका, सामाजिक समावेशन तथा सेवा प्रदाय तंत्र जैसे विविध क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की परिवर्तनकारी क्षमता को प्रमुखता से रेखांकित किया है।
- इंडियाAI मिशन तथा डिजिटल इंडिया द्वारा संस्थागत समन्वय को गति प्रदान किये जाने के साथ, यह समिट पायलट प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर न्यायसंगत एवं सतत ग्रामीण विकास हेतु समग्र प्रणाली-स्तरीय क्रियान्वयन की दिशा में एक निर्णायक संक्रमण का संकेत देती है।
ग्रामीण विकास में AI किस प्रकार परिवर्तन ला रहा है?
- ग्राम पंचायत तथा स्थानीय शासन हेतु AI संसाधन: विकेंद्रीकृत शासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से AI को प्रत्यक्ष रूप से पंचायती राज संस्थानों में एकीकृत किया जा रहा है:
- ग्राम पंचायत तथा स्थानीय शासन हेतु AI संसाधन: विकेंद्रीकृत शासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से AI को प्रत्यक्ष रूप से पंचायती राज संस्थानों में एकीकृत किया जा रहा है:
- ई-ग्राम स्वराज: ई-पंचायत मिशन मोड परियोजना के अंतर्गत विकसित यह प्लेटफॉर्म योजना-निर्माण, बजट-निर्धारण, लेखांकन, निगरानी, परिसंपत्ति प्रबंधन तथा भुगतान सहित पंचायत के प्रमुख कार्यों को एकीकृत डिजिटल प्रणाली के रूप में समावेशित करता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस प्लेटफॉर्म पर 2.53 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों के साथ 6,409 प्रखंड पंचायतों तथा 650 ज़िला पंचायतों को जोड़ा गया।
- ग्राम मानचित्र: यह पंचायतों को परिसंपत्तियों का मानचित्रण करने, परियोजनाओं की निगरानी करने तथा ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (GPDPs) में स्थानिक आँकड़ों को समेकित करने में सक्षम बनाता है। यह आधारभूत संरचनाओं हेतु योजना निर्माण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा आपदा शमन में साक्ष्य-आधारित निर्णयन को सुगम बनाता है। वित्तीय वर्ष 2024–25 तक 2.44 लाख ग्राम पंचायतों ने GPDP तैयार कर अपलोड की हैं।
- भू-प्रहरी: भू-प्रहरी AI तथा भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों का एकीकरण कर मनरेगा के अंतर्गत सृजित परिसंपत्तियों की निगरानी करता है। अब इसका उपयोग विकसित भारत–रोज़गार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) के अंतर्गत सृजित परिसंपत्तियों की निगरानी हेतु भी किया जाएगा।
- कृषि क्षेत्र में AI अवसंरचना: कृषि क्षेत्र में AI निर्णय-सहायक प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिससे आँकड़ा-आधारित प्रबंधन पद्धतियाँ सुदृढ़ होती हैं।
- किसान ई-मित्र: एक आभासी सहायक, जो आय-सहायता कार्यक्रमों सहित सरकारी योजनाओं संबंधी जानकारी प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली एवं फसल स्वास्थ्य निगरानी: यह प्रणाली उपग्रह चित्रों, मौसम संबंधी आँकड़ों तथा मृदा संबंधित सूचनाओं का एकीकरण कर वास्तविक समय में परामर्श जारी करती है।
- AI कोश: AI कोश सार्वजनिक क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु AI डेटासेट एवं मॉडलों का राष्ट्रीय भंडार है। यह शासकीय तथा अशासकीय स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों का समेकन करता है तथा विभिन्न क्षेत्रों में त्वरित उपयोग हेतु AI मॉडल उपलब्ध कराता है।
- 7,500 से अधिक डेटासेट तथा 20 उद्योगों में विस्तृत 273 AI मॉडलों के साथ यह प्लेटफॉर्म शासन एवं सेवा प्रदाय अनुप्रयोग विकसित करने वाले डेवलपर्स हेतु प्रवेश अवरोधों को न्यून करता है।
- शिक्षा एवं कौशल-विकास हेतु AI अवसंरचना:
- दीक्षा प्लेटफॉर्म: यह प्लेटफॉर्म कीवर्ड-आधारित वीडियो खोज तथा रीड-अलाउड टूल जैसी AI-सक्षम विशेषताओं को समाहित करता है, जिससे अभिगम्यता सुदृढ़ होती है तथा विशेष रूप से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों एवं विविध शैक्षणिक आवश्यकताओं वाले शिक्षार्थियों हेतु समावेशी अधिगम को प्रोत्साहन मिलता है।
- AI के साथ उन्नति और विकास के लिये युवा (YUVAI): यह पहल कक्षा VIII–XII के विद्यार्थियों को अनुभवात्मक अधिगम के माध्यम से आधारभूत AI एवं सामाजिक-तकनीकी कौशल प्रदान करती है, जिससे कृषि, स्वास्थ्य तथा ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित होती है।
- ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा हेतु AI: सुमन शखी व्हाट्सएप चैटबॉट वर्ष 2013 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश में प्रारंभ यह AI-सक्षम संवादात्मक उपकरण महिलाओं एवं परिवारों को मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संबंधी सुलभ जानकारी प्रदान करता है।
- बहुभाषीय शासन:
- भाषिणी: यह टूल AI-सक्षम अनुवाद, स्पीच-टू-टेक्स्ट तथा वॉयस इंटरफेस जैसी सुविधाएँ प्रदान कर डिजिटल अभिगम्यता के अवरोधों को न्यून करता है। अक्तूबर 2025 तक यह 23 से अधिक सरकारी सेवाओं के साथ एकीकृत है, 350 से अधिक AI मॉडलों का समर्थन करता है तथा एक मिलियन से अधिक डाउनलोड का आँकड़ा पार कर चुका है।
- आदिवाणी: यह पहल आदि कर्मयोगी ढाँचे के अंतर्गत दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय जनजातीय भाषाओं में शासन, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराती है, जिससे संप्रेषण अवरोधों का समाधान होता है।
- भारतजेन: भारतजेन भारत का प्रथम शासकीय वित्तपोषित, संप्रभु, बहुभाषीय एवं बहु-मॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल है। अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत विकसित तथा इंडियाAI मिशन के माध्यम से उन्नत यह मॉडल 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है तथा पाठ, वाक् एवं दस्तावेज़-दृष्टि क्षमताओं का एकीकरण करता है।
- डिजिटल श्रम सेतु मिशन: यह मिशन असंगठित क्षेत्र में AI एवं उदीयमान प्रौद्योगिकियों का प्रयोग कर ग्रामीण श्रमिकों हेतु सेवा प्रदाय एवं आजीविका समर्थन को सुदृढ़ करता है, जिससे समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा मिलता है।
समावेशी ग्रामीण विकास हेतु भारत का नीतिगत AI ढाँचा
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता हेतु राष्ट्रीय रणनीति: जून 2018 में नीति आयोग द्वारा पेश की गई यह रणनीति आवश्यक सेवाओं तक पहुँच, सामर्थ्य और गुणवत्ता हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भारत की विकास चुनौतियों का समाधान करने के लिये एक परिवर्तनकारी उपकरण के रूप में रेखांकित करती है।
- यह ढाँचा मानव श्रम के विस्थापन की बजाय उसके संवर्द्धन पर ज़ोर देता है और AI को किसानों, स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों एवं प्रशासकों के लिये एक सहायक प्रणाली के रूप में स्थापित करता है।
- यह विकेंद्रीकृत कौशल विकास, डिजिटल कार्य अवसरों और प्रौद्योगिकी-अनुकूल प्रशिक्षण के माध्यम से समावेशी आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देने में AI की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है।
- भारत AI गवर्नेंस दिशा-निर्देश: इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा जारी किये गए ये दिशा-निर्देश निष्पक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता जैसे जन-केंद्रित सिद्धांतों को स्थापित करते हैं, ताकि पूर्वाग्रह, बहिष्कार एवं अपारदर्शी निर्णयन के जोखिमों को कम किया जा सके।
- यह दिशा-निर्देश भारत-विशिष्ट जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षा उपायों की वकालत करते हैं, विशेषरूप से कल्याणकारी वितरण प्रणालियों में, जहाँ स्वचालित उपकरण लक्ष्यीकरण और सेवा प्रावधान को प्रभावित करते हैं। इस ढाँचे में निम्नलिखित शामिल हैं:
- नैतिक और ज़िम्मेदार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिये सात मार्गदर्शक सिद्धांत (सूत्र)।
- AI गवर्नेंस के छह स्तंभों पर आधारित प्रमुख सिफारिशें।
- एक कार्य योजना, जिसे अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक समय-सीमा के अनुसार तैयार किया गया है।
- उद्योग, विकासकर्त्ताओं और नियामकों के लिये व्यावहारिक दिशा-निर्देश।
- यह दिशा-निर्देश भारत-विशिष्ट जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षा उपायों की वकालत करते हैं, विशेषरूप से कल्याणकारी वितरण प्रणालियों में, जहाँ स्वचालित उपकरण लक्ष्यीकरण और सेवा प्रावधान को प्रभावित करते हैं। इस ढाँचे में निम्नलिखित शामिल हैं:
ग्रामीण विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से जुड़े प्रमुख जोखिम क्या हैं?
- अपर्याप्त डिजिटल अवसंरचना: ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च-गति इंटरनेट तथा निर्बाध विद्युत आपूर्ति का अभाव एक मूलभूत बाधा बना हुआ है, जिससे एआई-सक्षम शासन, कल्याणकारी सेवा-प्रदाय एवं डिजिटल सेवाओं तक प्रभावी पहुँच सीमित रहती है।
- व्यक्तिगत डिजिटल उपकरणों तक सीमित पहुँच इस बहिष्करण को और गहन करती है, क्योंकि कंप्यूटर तक पहुँच शहरी परिवारों (21.6%) में ग्रामीण परिवारों (4.2%) की तुलना में अधिक है, जिससे एक संरचनात्मक अभाव की स्थिति उत्पन्न होती है, जो AI के लाभों को ग्रामीण समुदायों तक पहुँचने से प्रतिबंधित करती है।
- अपर्याप्त डेटा एवं एल्गोरिद्म संबंधी चिंताएँ: ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर 'डेटा की कमी' होती है, क्योंकि ऐतिहासिक अभिलेख अल्प या गैर-डिजिटल प्रारूप में होते हैं। शहरी डेटा पर प्रशिक्षित AI मॉडल में एल्गोरिद्मिक भेदभाव की आशंका रहती है, जिससे पात्रता निर्धारण में पक्षपातपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं। यह स्थिति ग्रामीण आबादी के लिये प्रणालीगत प्रतिकूलता को जन्म देती है।
- ‘ब्लैक बॉक्स’ समस्या: अनेक एआई मॉडलों की अपारदर्शी प्रकृति ‘ब्लैक बॉक्स’ समस्या उत्पन्न करती है, जिसके कारण नागरिकों के लिये यह समझना लगभग असंभव हो जाता है कि कोई निर्णय (उदाहरणार्थ- सब्सिडी अस्वीकृति) किस आधार पर लिया गया। पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व का अभाव संस्थानों में विश्वास को कम करता है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार विस्थापन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वचालन से कृषि (AI आधारित ट्रैक्टर) और सरकारी सेवाओं (लिपिकीय स्वचालन) जैसे प्रमुख ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों के विस्थापन का खतरा है और यदि सावधानीपूर्वक प्रबंधन नहीं किया गया तो यह आर्थिक अंतराल को और बढ़ा सकता है।
- सांस्कृतिक और भाषाई बाधाएँ: अधिकांश AI इंटरफेस प्रमुख भाषाओं में डिज़ाइन किये जाते हैं, जो स्थानीय बोलियों का समर्थन नहीं करते हैं। इससे तात्कालिक अभिगम्यता संबंधी बाधाएँ उत्पन्न होती है तथा सांस्कृतिक असंवेदनशीलता का जोखिम भी रहता है, जहाँ AI अनुशंसाएँ स्थानीय परंपराओं एवं सामाजिक मानकों के विपरीत हो सकती हैं।
- बुनियादी ढाँचे और साइबर सुरक्षा संबंधी चुनौतियाँ: ग्रामीण निकायों में पर्याप्त तकनीकी कौशल की कमी है, जिसके कारण उन्हें अपनी तकनीकी ज़रूरतों के लिये बाहरी विक्रेताओं पर अत्यधिक निर्भर रहना पड़ता है। नागरिकों के डेटा को केंद्रीकृत करने से गंभीर साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता संबंधी चिंताएँ उत्पन्न होती हैं। यह केंद्रीकृत सिस्टम साइबर हमलों के लिये एक आकर्षक और आसान लक्ष्य बन जाता है।
- स्वदेशी ज्ञान का विस्थापन: FAO (2023) के अनुसार, डिजिटल कृषि उपकरणों को स्थानीय कृषि-पारिस्थितिक ज्ञान को शामिल करना चाहिये। इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि AI-जनित सलाह पर अत्यधिक निर्भरता पारंपरिक कृषि पद्धतियों और समुदाय-आधारित ज्ञान प्रणालियों को कमज़ोर कर सकती है, जिससे स्वदेशी ज्ञान का विस्थापन हो सकता है।
ग्रामीण विकास में समावेशी एवं सतत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अपनाने को सुनिश्चित करने हेतु किन चरणों की आवश्यकता है?
- सार्वभौमिक डिजिटल संयोजकता: ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय उच्च-गति इंटरनेट तथा विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सुदृढ़ डिजिटल अवसंरचना में निवेश को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिये। भारतनेट तथा नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन 2.0 (2025–30) जैसे कार्यक्रम इस दिशा में महत्त्वपूर्ण हैं। साथ ही, अनुदान अथवा साझा मॉडल के माध्यम से उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिये, जिससे डिजिटल विभाजन न्यूनतम हो।
- प्रतिनिधिक आँकड़ा-संग्रह (Datasets): एल्गोरिद्मिक पक्षपात को कम करने हेतु उच्च-गुणवत्ता वाले, स्थानीयकृत तथा ग्रामीण विविधता को प्रतिबिंबित करने वाले आँकड़ा-संग्रह विकसित करना अनिवार्य है। इसे सुदृढ़ आँकड़ा संरक्षण ढाँचे के साथ संतुलित किया जाना चाहिये, जिससे आँकड़ा संप्रभुता एवं निजता सुनिश्चित हो सके। तद्नुसार, ‘डेटा डेजर्ट’ को न्यायसंगत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उर्वर आधार में रूपांतरित किया जा सकता है।
- पारदर्शी एवं व्याख्येय कृत्रिम बुद्धिमत्ता: कल्याणकारी योजनाओं एवं भू-अभिलेख जैसे उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में पारदर्शिता तथा उत्तरदायित्व बनाए रखने के लिये ‘मानव-पर्यवेक्षण’ आवश्यक है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल निर्णय-सहायक भूमिका निभाए। ‘डिज़ाइन द्वारा समझने योग्य’ व्याख्या मॉडल अपनाना तथा स्पष्ट उत्तरदायित्व शृंखला स्थापित करना ‘ब्लैक बॉक्स’ समस्या के समाधान एवं नागरिक विश्वास के निर्माण के लिये अनिवार्य है।
- भविष्य-उन्मुख ग्रामीण आजीविकाओं का सृजन: स्वचालन से संभावित रोज़गार-विस्थापन की चुनौती का सक्रिय समाधान आवश्यक है। इंडिया-AI फ्यूचरस्किल्स जैसे पुनःकौशल कार्यक्रमों में निवेश, सामाजिक सुरक्षा तंत्र की स्थापना तथा ग्रामीण डिजिटल अर्थव्यवस्था में हरित रोज़गार सृजन के माध्यम से व्यवधान को सतत आजीविका के अवसरों में परिवर्तित किया जा सकता है।
- नैतिक क्रय-प्रक्रिया एवं शिकायत निवारण: सरकारी खरीद-प्रक्रिया में नैतिक विक्रेताओं तथा मुक्त-स्रोत मंचों को प्राथमिकता दी जानी चाहिये, जिससे ‘विक्रेता-निर्भरता’ की समस्या से बचा जा सके। साथ ही, सरल एवं सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाना चाहिये, जिससे नागरिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-प्रभावित निर्णयों को चुनौती दे सकें और प्रौद्योगिकी जन-केंद्रित बनी रहे।
- संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Sovereign AI): भारत की अपनी अवसंरचना एवं आँकड़ों के आधार पर संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास किया जाना चाहिये, जिससे आँकड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित हो एवं तथाकथित ‘पश्चिमी मतिभ्रम’ (Western Hallucinations) की प्रवृत्ति को समाप्त किया जा सके। सर्वम विज़न जैसे सांस्कृतिक रूप से संदर्भित मॉडल इस दिशा में सहायक हो सकते हैं। साथ ही, बुलबुल V3 जैसे वॉइस-आधारित उपकरण स्थानीय बोलियों में अशिक्षित जनसंख्या के लिये डिजिटल समावेशन को प्रोत्साहित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अधिक किफायती तथा ऊर्जा-कुशल बना सकते हैं।
निष्कर्ष
जैसे-जैसे भारत विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ग्रामीण विकास में एक महान समताकारी शक्ति के रूप में उभरने की क्षमता रखती है—यह मानवीय भूमिका का प्रतिस्थापन नहीं करती, बल्कि उसका सशक्तीकरण करती है। नैतिक सुरक्षा उपायों का समावेशन, डिजिटल अवसंरचना में निवेश तथा समावेशी अभिकल्पना को प्राथमिकता देकर भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बहिष्करण के संभावित स्रोत से परिवर्तित कर सहभागी शासन, सतत आजीविका और अंतिम बिंदु तक सेवा वितरण के एक प्रभावी उत्प्रेरक में रूपांतरित कर सकता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न: "कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भारत के ग्रामीण शासन को बदलने की क्षमता है, लेकिन इसमें बहिष्कार और पूर्वाग्रह के महत्त्वपूर्ण जोखिम भी हैं।" चर्चा कीजिये। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता संबंधी राष्ट्रीय रणनीति का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सेवाओं की पहुँच, सामर्थ्य और गुणवत्ता में सुधार करते हुए समावेशी विकास के लिये AI का लाभ उठाना है।
2. AI पंचायती राज संस्थाओं को कैसे मज़बूत करता है ?
सभासार, ई-ग्रामस्वराज और ग्राम मानचित्र जैसे उपकरण प्रलेखन, योजना, परिसंपत्ति निगरानी एवं साक्ष्य-आधारित निर्णयन में सहायता प्रदान करते हैं।
3. AI प्रशासन में 'ब्लैक बॉक्स' समस्या क्या है?
इसका तात्पर्य AI द्वारा लिये गए निर्णयों में पारदर्शिता की कमी से है, जिससे स्वचालित परिणामों को समझना अथवा चुनौती देना कठिन हो जाता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न. विकास की वर्तमान स्थिति में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता निम्नलिखित में से किस कार्य को प्रभावी रूप से कर सकती है?
- औद्योगिक इकाइयों में विद्युत की खपत कम करना
- सार्थक लघु कहानियों और गीतों की रचना
- रोगों का निदान
- टेक्स्ट से स्पीच (Text-to-Speech) में परिवर्तन
- विद्युत ऊर्जा का बेतार संचरण
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1,2, 3 और 5
(b) केवल 1,3 और 4
(c) केवल 2,4 और 5
(d) 1,2,3,4 और 5
उत्तर: (b)
प्रश्न. 'वानाक्राई, पेट्या और इटरनलब्लू', जो हाल ही में समाचारों में उल्लिखित थे, निम्नलिखित में से किससे संबंधित हैं? (2018)
(a) एक्सोप्लैनेट्स
(b) क्रिप्टोकरेंसी
(c) साइबर आक्रमण
(d) लघु उपग्रह
उत्तर: (c)
मेन्स:
प्रश्न. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की अवधारणा का परिचय दीजिये। एआई क्लिनिकल निदान में कैसे मदद करता है? क्या आप स्वास्थ्य सेवा में एआई के उपयोग में व्यक्ति की निजता को कोई खतरा महसूस करते हैं? (2023)
प्रश्न. भारत के प्रमुख शहरों में आईटी उद्योगों के विकास से उत्पन्न होने वाले मुख्य सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या हैं ? (2022)