भारत-मलेशिया संबंध | 09 Feb 2026

प्रिलिम्स के लिये: भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, दक्षिण चीन सागर

मेन्स के लिये: सभ्यतागत संबंधों से रणनीतिक साझेदारी तक भारत-मलेशिया संबंधों का विकास, भारत की एक्ट ईस्ट नीति तथा ASEAN की केंद्रीयता

स्रोत: पीआईबी 

चर्चा में क्यों?

भारत के प्रधानमंत्री ने मलेशिया की आधिकारिक यात्रा की। इस यात्रा ने भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership- CSP) की पुनः पुष्टि की तथा उसे क्रियान्वित रूप प्रदान किया। इस दौरान व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े व्यापक समझौते किये गए, जो बदलते क्षेत्रीय एवं वैश्विक परिदृश्य के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और दृढ़ करने के स्पष्ट आशय को दर्शाते हैं।

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प्रधानमंत्री की मलेशिया यात्रा के प्रमुख परिणाम क्या रहे?

  • डिजिटल एवं फिनटेक: नेताओं ने फिनटेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, ई-गवर्नेंस तथा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग को बढ़ावा देने के लिये मलेशिया-भारत डिजिटल परिषद (Malaysia-India Digital Council- MIDC) को औपचारिक रूप प्रदान किया।
    • उन्होंने कम लागत वाले सीमा-पार डिजिटल भुगतान को सक्षम बनाने, व्यापार सुगमता बढ़ाने तथा आपसी संबंधों (People-to-people ties) को सुदृढ़ करने हेतु NPCI इंटरनेशनल लिमिटेड (NIPL) - PayNet साझेदारी का भी स्वागत किया। साथ ही, इनके बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किये गए।
  • व्यापार एवं वित्त: भारतीय रिज़र्व बैंक और बैंक नेगारा मलेशिया के बीच सहयोग के माध्यम से स्थानीय मुद्रा (INR-MYR) में व्यापार निपटान को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
  • ऊर्जा एवं सेमीकंडक्टर सहयोग: नवीकरणीय ऊर्जा तथा हरित हाइड्रोजन में सहयोग का विस्तार करने और अनुसंधान एवं विकास (R&D), कौशल विकास तथा आपूर्ति-शृंखला लचीलापन (Supply-chain Resilience) पर केंद्रित सेमीकंडक्टर मूल्य-शृंखला सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमति हुई।
  • लोक प्रशासन: भारत के केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और मलेशियाई भ्रष्टाचार-निरोधक आयोग (MACC) के बीच भ्रष्टाचार की रोकथाम एवं उससे निपटने पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए।
  • आपदा प्रबंधन: भारत और मलेशिया के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग पर एक MoU पर हस्ताक्षर किये गए।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान: संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सहयोग के नवीनीकरण पर सहमति हुई।
  • शिक्षा एवं कौशल विकास: भारत और मलेशिया ने मलेशिया टेक्निकल कोऑपरेशन प्रोग्राम (MTCP) तथा इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम (ITEC) के अंतर्गत छात्र और संकाय आदान-प्रदान का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की, साथ ही भारत ने मलेशियाई छात्रों को स्टडी इन इंडिया कार्यक्रम में आमंत्रित किया।
    • उन्होंने भविष्य की आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल कार्यबल विकसित करने तथा रोज़गार-योग्यता बढ़ाने के लिये तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (Technical and Vocational Education and Training–TVET) में सहयोग को सुदृढ़ करने की भी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
  • स्वास्थ्य सेवा: स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग की पुनः पुष्टि की गई, जिसमें ITEC कार्यक्रम के तहत पारंपरिक भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञों को तैनात करने की योजना भी शामिल है।
    • होम्योपैथी में अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने हेतु भारत के केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद और साइबरजया विश्वविद्यालय के बीच MoU का स्वागत किया गया।
  • सामाजिक सुरक्षा: मलेशिया में भारतीय श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करने हेतु भारत के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और मलेशिया के सोशल सिक्योरिटी ऑर्गनाइज़ेशन के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए।
  • सांस्कृतिक संबंध: तमिल अध्ययन को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु यूनिवर्सिटी ऑफ मलाया में तिरुवल्लुवर चेयर एंड सेंटर के क्रियान्वयन का स्वागत किया गया।
    • तमिल अध्ययन को बढ़ावा देने के लिये, मलेशियाई नागरिकों हेतु तिरुवल्लुवर छात्रवृत्ति (Thiruvalluvar Scholarships) शुरू की गई, जिससे सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंध सुदृढ़ होंगे।
    • नेताओं ने मलेशिया में तमिल सिनेमा की लोकप्रियता को स्वीकार किया, विशेष रूप से एम.जी. रामचंद्रन (MGR) की विरासत का उल्लेख करते हुए।
  • कूटनीतिक विस्तार: भारत ने वाणिज्यिक पहुँच और व्यापार को बढ़ावा देने के लिये मलेशिया में नया कांसुलेट जनरल स्थापित करने का निर्णय घोषित किया।
  • वैश्विक गठबंधन: मलेशिया ने औपचारिक रूप से भारत द्वारा नेतृत्वित पहल, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) में प्रवेश किया।
    • मलेशिया ने भारत की वर्ष 2026 में BRICS अध्यक्षता का स्वागत किया, जबकि भारत ने मलेशिया की BRICS के सहयोगी देश की भूमिका और उसकी सदस्यता की आकांक्षा का समर्थन किया, इस सहयोग को अधिक संतुलित एवं प्रतिनिधिमूलक वैश्विक व्यवस्था की दिशा में उठाया गया एक महत्त्वपूर्ण कदम माना।
    • दोनों नेताओं ने ASEAN की एकता और केंद्रीयता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसमें भारत ने वर्ष 2025 में मलेशिया की ASEAN अध्यक्षता की सराहना की।
  • आतंकवाद से सामना: दोनों नेताओं ने सीमापार आतंकवाद सहित आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता दोहराई और इसे रोकने हेतु स्थायी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
    • उन्होंने वर्ष 2024-27 की अवधि के लिये आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM)-प्लस विशेषज्ञ कार्य समूह की बैठक (EWG) की भारत-मलेशिया सह-अध्यक्षता का भी स्वागत किया।

भारत-मलेशिया के द्विपक्षीय संबंध कैसे हैं?

  • ऐतिहासिक संबंध: भारत-मलेशिया के संबंध हज़ारों वर्ष पुराने हैं, जो चोल काल (9वीं–13वीं शताब्दी) से संबंध रखते हैं, जब दक्षिण भारत और मलय प्रायद्वीप के बीच व्यापक सामुद्रिक व्यापार हुआ करता था।
    • शासकों जैसे राजराज चोल प्रथम और राजेंद्र चोल द्वितीय के शासनकाल में चोल नौसैन्य शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया तक विस्तृत रही, जिसमें वर्तमान मलेशिया के कुछ हिस्से भी शामिल थे, जिसने भारत–दक्षिण-पूर्व एशिया पारस्परिक संपर्क की प्रारंभिक नींव रखी।
  • आर्थिक साझेदारी: मलेशिया ASEAN में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2024–25 में USD 19.86 बिलियन तक पहुँच गया।
    • दोनों देश स्थानीय मुद्राओं (INR और रिंगित) में व्यापार को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि US डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके।
    • आर्थिक संबंधों का मार्गदर्शन मलेशिया–भारत समग्र आर्थिक सहयोग समझौता (MICECA) और ASEAN–भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) द्वारा किया जाता है।
  • रक्षा और सुरक्षा: भारत और मलेशिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों में हरिमौ शक्ति (थलसेना), समुद्र लक्ष्मण (नौसेना) और उदारशक्ति (वायुसेना) शामिल हैं।
    • मलेशिया–भारत सुरक्षा संवाद सुरक्षा मामलों में सहयोग और पारस्परिक सहायता पर चर्चा करने का एक मंच है।
    • मलेशिया भारतीय रक्षा प्लेटफॉर्म, जैसे– तेजस LCA और ब्रह्मोस मिसाइल के लिये एक महत्त्वपूर्ण संभावित बाज़ार है।
  • रणनीतिक संगम: मलेशिया भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का एक स्तंभ और इंडो-पैसिफिक ढाँचे में एक महत्त्वपूर्ण सहयोगी है। मलेशिया ASEAN–भारत संबंधों को मार्गदर्शित करने में प्रमुख भूमिका निभाता है।
    • मलेशिया जैसे प्रमुख ASEAN देशों के साथ संबंध मज़बूत करना दक्षिण चीन सागर में नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिये महत्त्वपूर्ण है।
  • प्रवासी समुदाय: मलेशिया में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) का समुदाय निवास करता है (लगभग 27 लाख), जो मुख्यतः तमिलनाडु से संबंधित है; इसके बाद अमेरिका का स्थान है।

भारत-मलेशिया संबंधों में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

  • स्थायी व्यापार घाटा: वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग USD 20 बिलियन रहा, किंतु यह मलेशिया के पक्ष में असंतुलित था।
    • भारत मुख्यतः उच्च-मूल्य की वस्तुएँ, जैसे– पाम ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक्स, क्रूड ऑयल का आयात करता है, जबकि इसके निर्यात (माँस, एल्यूमिनियम, पेट्रोलियम उत्पाद) उस गति से नहीं बढ़ पाए हैं।
  • “पाम ऑयल” की कूटनीति और अस्थिरता: मलेशिया भारत का पाम ऑयल का प्रमुख आपूर्तिकर्त्ता है।
    • इस निर्भरता का कभी-कभी हथियार के रूप में उपयोग भी हुआ है; उदाहरण के लिये, वर्ष 2019–20 में राजनीतिक मतभेदों के कारण भारत ने मलेशियाई पाम ऑयल के आयातों को सीमित किया, जिससे व्यापारिक स्थिरता पर प्रभाव पड़ा।
    • सतत पाम ऑयल उत्पादन पर वैश्विक निगरानी बढ़ने (जैसे– वनों की कटाई के मुद्दे) से भविष्य के व्यापार में जटिलता बढ़ सकती है और भारतीय आयातकों के लिये लागत में वृद्धि हो सकती है।
  • राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियाँ: पूर्व मलेशियाई नेताओं की अनुच्छेद 370 और नागरिकता संशोधन अधिनियम पर टिप्पणियों ने द्विपक्षीय संबंधों में तनाव उत्पन्न किया और वर्तमान नेतृत्व के अधिक रचनात्मक रुख के बावजूद संवेदनशीलताएँ बनी हुई हैं।
    • 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में मलेशिया ने भारत पर कश्मीर पर 'आक्रमण करने और कब्ज़ा करने' का आरोप लगाया था।
  • “चीन कारक” और भू-राजनीति: चीन मलेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार तथा उसकी अवसंरचना (जैसे-'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत 'ईस्ट कोस्ट रेल लिंक' परियोजना) में एक प्रमुख निवेशक है।
    • दोनों देश नौसैनिक मार्गों की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं, लेकिन मलेशिया दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता के प्रति शांतिपूर्ण और कूटनीतिक रुख अपनाता है, जबकि भारत (क्वाड के साथ) बीजिंग के विस्तारवादी कदमों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की समर्थन करता है।

भारत-मलेशिया संबंधों को बेहतर बनाने हेतु क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

  • रक्षा को एक स्तंभ के रूप में: सैन्य से सैन्य सहयोग को गहरा करना और मलेशिया के लिये विश्वसनीय रक्षा आपूर्तिकर्त्ता बनना क्षेत्र में चीन के प्रभाव के खिलाफ एक रणनीतिक संतुलन के रूप में काम कर सकता है।
  • सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर: तमिल भाषा के प्रति “साझा स्नेह” और नए तिरुवल्लुवर सेंटर का उपयोग करके राज्य स्तर की कूटनीति से परे जन-संपर्क को मज़बूत किया जा सकता है।
  • समुद्री क्षेत्र जागरूकता (MDA): मलेशिया का स्थान महत्त्वपूर्ण मलक्का जलडमरूमध्य के पास होने के कारण (जहाँ से भारत के 60% व्यापार का मार्ग गुज़रता है), भारत को मलेशिया को अपने IFC-IOR (सूचना संलयन केंद्र) नेटवर्क में शामिल करना चाहिये ताकि शत्रुतापूर्ण नौसैनिक गतिविधियों पर वास्तविक समय की खुफिया जानकारी साझा की जा सके।
  • AITIGA समीक्षा को गति देना: वर्तमान व्यापार घाटा एक संरचनात्मक बाधा है। भारत को वर्ष 2026–27 तक आसियान–भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) की समीक्षा को तेज़ी से पूरा करने के लिये प्रयास करना चाहिये, ताकि उत्क्रमी शुल्क संरचनाओं को ठीक किया जा सके, जो भारतीय विनिर्माण को प्रभावित करती हैं।
  • दीर्घकालिक अनुबंध: दोनों देशों को पाम ऑयल के लिये दीर्घकालिक G2G (सरकार-से-सरकार) आयात अनुबंध स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिये, जिससे भारत में मूल्य स्थिरता और मलेशिया में मांग की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष

भारत–मलेशिया संबंधों का भविष्य केवल लेन-देन (तेल की खरीद) तक सीमित रहने के बजाय रणनीतिक साझेदारी (साथ में चिप्स और जेट बनाना) की ओर बढ़ने में है, जिससे दोनों देश अस्थिर इंडो-पैसिफिक शताब्दी में अपनी स्वायत्तता सुरक्षित कर सकते हैं।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. मज़बूत सभ्यतागत और रणनीतिक संबंधों के बावजूद, भारत-मलेशिया संबंधों को संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विश्लेषण कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

1. भारत–मलेशिया समग्र रणनीतिक साझेदारी (CSP) क्या है?
यह एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय ढाँचा है, जिसे वर्ष 2024 में उन्नत किया गया और यह रक्षा, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा तथा क्षेत्रीय सहयोग को शामिल करता है।

2. भारत की एक्ट ईस्ट नीति में मलेशिया क्यों महत्त्वपूर्ण है?
मलेशिया एक प्रमुख ASEAN साझेदार है, रणनीतिक रूप से मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित है और ASEAN–भारत जुड़ाव में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

3. मलेशिया–भारत डिजिटल काउंसिल (MIDC) का महत्त्व क्या है?
MIDC फिनटेक, एआई, साइबर सुरक्षा और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग को संस्थागत रूप देता है, जिससे आर्थिक और जन-संपर्क संबंध मज़बूत होते हैं।

4. भारत–मलेशिया संबंधों में प्रमुख आर्थिक चुनौतियाँ क्या हैं?
स्थायी व्यापार घाटा, पाम ऑयल आयात पर अत्यधिक निर्भरता और भारतीय निर्यातकों के सामने मौजूद गैर-शुल्कीय बाधाएँ।

5. निरंतर बना रहने वाला व्यापार घाटा, पाम ऑयल (ताड़ के तेल) के आयात पर अत्यधिक निर्भरता और भारतीय निर्यातकों द्वारा सामना की जाने वाली गैर-शुल्क बाधाएं (non-tariff barriers)।"

6. चीन कारक भारत–मलेशिया संबंधों को कैसे प्रभावित करता है?
मलेशिया के चीन के साथ गहरे आर्थिक संबंध और दक्षिण चीन सागर में सतर्क रुख भारत के अधिक सशक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के साथ रणनीतिक असमानता उत्पन्न करते हैं।

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