बाघों की संख्या में वैश्विक वृद्धि, दक्षिण-पूर्व एशिया में प्राकृतिक वास को खतरा | 15 Nov 2023

प्रिलिम्स के लिये:

बाघ, ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम (GTRP), लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES), अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस, विश्व बैंक, WWF, सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा, टाइगर रेंज देश (TRC), इंटरनेशनल टाइगर फोरम, ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव (GTI), टाइगर कंज़र्वेशन लैंडस्केप (TCL)।

मेन्स के लिये:

बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के संरक्षण में देशों के समक्ष विद्यमान मुद्दे, भारत में प्रोजेक्ट टाइगर की उपलब्धियाँ और संबंधित अधिगम, मानव-वन्यजीव संघर्ष।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

चर्चा में क्यों?

देशों ने ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम (GTRP) और GTRP 2.0 के तहत लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (CITES) में वर्ष 2010-2022 तक बाघों की आबादी/संख्या प्रस्तुत की, जिसका उद्देश्य वर्ष 2023-2034 तक बाघ संरक्षण का मार्ग प्रशस्त करना है।

  • वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा में 13 बाघ रेंज वाले देशों ने प्रजातियों की आबादी में गिरावट को रोकने  और वर्ष 2022 तक उनकी संख्या को दोगुना करने के लिये प्रतिबद्धता जताई।

विश्व में बाघ संरक्षण की स्थिति क्या है?

  • दक्षिण एशिया और रूस में जंगली बाघों की स्थिति अच्छी है, लेकिन दक्षिण-पूर्व एशिया में तस्वीर गंभीर है, जो वैश्विक स्तर पर बाघों की आबादी में सुधार के लिये चुनौतियाँ उत्पन्न करता है।
  • बाघों की आबादी में कुल 60% की वृद्धि हुई है, जिससे इनकी संख्या 5,870 हो गई है।
    • हालाँकि भूटान, म्याँमार, कंबोडिया, लाओ-पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (Lao-PDR) और वियतनाम जैसे देशों में बाघों की आबादी में गिरावट देखी गई, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के टाइगर रेंज देशों (TRC) में स्थिति "गंभीर" हो गई।
  • उत्तर-पूर्व एशिया में चीन तथा रूस सहित दक्षिण एशिया में बांग्लादेश, भूटान, भारत व नेपाल जैसे देशों की सफलता का श्रेय आवास संरक्षण और सुरक्षा के लिये उठाए गए प्रभावी उपायों को दिया जाता है।
    • वर्ष 2022 में भारत में जंगली बाघों की आबादी 3,167 देखी गई। नेपाल में बाघों की आबादी तीन गुना वृद्धि हुई है।

ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम 2.0 (2023-34) क्या है?

  • ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम (GTRP) 2.0 को 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस 2023 पर थिम्पू में भूटान की शाही सरकार के विदेश मंत्री द्वारा जारी किया गया था।
    • GTRP को टाइगर रेंज देशों (TRC) की प्रतिबद्धताओं के साथ वर्ष 2022 तक जंगली बाघों की आबादी को दोगुना करने के लिये ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव (GTI) के तहत वर्ष 2010 में विश्व बैंक द्वारा लॉन्च किया गया था।
    • ग्लोबल टाइगर फोरम (GTF) की स्थापना बाघ संरक्षण हेतु कार्यान्वयन निकाय के रूप में की गई थी।
  • GTRP 2.0 को वर्ल्ड वाइल्ड फंड फॉर नेचर (World Wildlife Fund for Nature- WWF) जैसे सहयोगियों के साथ ग्लोबल टाइगर फोरम के अंतर-सरकारी मंच के माध्यम से बाघ रेंज वाले देशों द्वारा मज़बूत किया गया है।
    • GTRP 2.0 मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी समकालीन चुनौतियों का समाधान करते हुए बाघों के लिये  प्रशासन प्रणाली को मज़बूत करने, संसाधनों और सुरक्षा को बढ़ाने पर ज़ोर देता है।
  • नए संस्करण में लुप्तप्राय जंगली बाघों के संरक्षण  के एक अलग दृष्टिकोण हेतु नए कार्यों के साथ-साथ संचालित कई आदर्श कार्रवाइयों को बरकरार रखा गया है।

विश्व में बाघों की आबादी के लिये खतरा:

  • बाघ का अवैध शिकार: बाघ के अवैध शिकार के साथ-साथ अपर्याप्त गश्त, वन्यजीव निगरानी की खराब स्थिति, वाणिज्यिक ज़रूरतों के लिये वनों को नुकसान पहुँचाना, वन्यजीव व्यापार केंद्रों से निकटता एवं बुनियादी ढाँचे के तेज़ी से विकास ने स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप विखंडन की स्थिति देखी जा रही है।
  • वन्यजीव संरक्षण में कम निवेश: निगरानी की खराब स्थिति और वन्यजीव संरक्षण में कम निवेश जैसे कारक बाघों की आबादी में गिरावट के अन्य कारण हैं।
  • पर्यावास की हानि और विखंडन: मानवजनित कारकों की वजह से जैवविविधता में कमी के साथ-साथ निवास स्थान की हानि और विखंडन, बाघ संरक्षण के लिये खतरा पैदा करने वाली एक और चिंता है।
    • रिपोर्ट में पाया गया कि दक्षिण-पूर्व एशिया में तेज़ी से गिरावट के साथ इसकी सीमाओं में वनों का नुकसान एक प्रमुख कारक है।
  • बाघों के आवास का क्षरण: वनों की कटाई, बुनियादी ढाँचे के विकास और गैरकानूनी लॉगिंग (वृक्षों को काटने, प्रसंस्करण और परिवहन के लिये किसी स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया) के कारण बाघों के आवास में गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट में कुछ हिस्सों में शिकार की आबादी बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।

रिपोर्ट में दिये गए सुझाव:

  • आनुवंशिक रूप से व्यवहार्य बाघ आबादी की आवश्यकता: रिपोर्ट में कहा गया है कि "जनसांख्यिकीय और आनुवंशिक रूप से व्यवहार्य बाघों की आबादी के लिये उनके निवास स्थान के नुकसान, शिकार की कमी तथा बाघ के अवैध शिकार की मौजूदा प्रवृत्ति में बदलाव लाने हेतु कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।"
    • यदि बाघों के संरक्षण हेतु उचित कदम नहीं उठाए गए, तो दक्षिण-पूर्व एशिया में बाघों की अधिकांश आबादी और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में छोटी आबादी नष्ट हो जाएगी।
  • बाघ परिदृश्य में मानव-पर्यावरणीय तनाव को संबोधित करना: टाइगर कंज़र्वेशन लैंडस्केप (TCL) को चल रहे मानव-पर्यावरणीय तनाव की निरंतरता के परिप्रेक्ष्य से देखने की ज़रूरत है।
    • कई TCL में कृषि-पशुपालन के साथ-साथ अन्य मानव-प्रेरित बदलाव भी किये जा रहे हैं। इस तरह के तनाव शाकाहारी प्रमुख जंगली जानवरों के कल्याण हेतु किये जा रहे कार्यों को प्रभावित करते हैं और इस तरह बाघ सहित प्रमुख मांसाहारी जानवरों की सापेक्ष बहुतायत को प्रभावित करते हैं।
  • मज़बूत नीतिगत कार्रवाई की आवश्यकता: गंभीर स्थिति राजनीतिक इच्छाशक्ति द्वारा समर्थित एक मज़बूत नीति ढाँचे की मांग करती है, बाघों की आबादी में कुल मिलाकर 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे इनकी संख्या 5,870 हो गई है।
    • हालाँकि रिपोर्ट बाघों के सामने आने वाली चुनौतियों और खतरों पर भी प्रकाश डालती है, खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया में, जहाँ स्थिति गंभीर है।

बाघ संरक्षण हेतु की गई पहल:

  • वैश्विक मंच पर:
    • बाघ संरक्षण पर सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा:
      • यह प्रस्ताव नवंबर 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में अंतर्राष्ट्रीय टाइगर फोरम में 13 बाघ रेंज वाले देशों (TRC) के नेताओं द्वारा अपनाया गया था।
        • 13 TRC हैं: बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, चीन, भारत, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्याँमार, नेपाल, रूस, थाईलैंड और वियतनाम।
      • इस पहल के कार्यान्वयन तंत्र को ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम कहा जाता है जिसका व्यापक लक्ष्य वर्ष 2022 तक जंगली बाघों की संख्या को लगभग 3,200 से दोगुना करके 7,000 से अधिक करना था।
    • ग्लोबल टाइगर फोरम:
      • GTF एकमात्र अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय निकाय है जिसकी स्थापना इच्छुक देशों के सदस्यों द्वारा बाघ की रक्षा के लिये एक वैश्विक अभियान शुरू करने हेतु की गई है। यह नई दिल्ली, भारत में स्थित है।
      • इसका गठन नई दिल्ली, भारत में बाघ संरक्षण पर एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की सिफारिशों के आधार पर किया गया था।
      • 13 बाघ रेंज वाले देशों में से सात वर्तमान में GTF के सदस्य हैं: बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, भारत, म्याँमार, नेपाल और वियतनाम के अलावा गैर-बाघ रेंज वाला देश यू.के.।
    • ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव (GTI):
      • GTI को वर्ष 2008 में विश्व बैंक, ग्लोबल एन्वायरनमेंट फैसिलिटी (GEF), स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन, सेव द टाइगर फंड तथा इंटरनेशनल टाइगर कोलिश्‌न (40 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्वकर्त्ता) के संस्थापक भागीदारों द्वारा लॉन्च किया गया था।
      • GTI का नेतृत्व 13 टाइगर रेंज वाले देशों द्वारा किया जाता है। यह सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, नागरिक समाज, संरक्षण तथा वैज्ञानिक समुदाय एवं निजी क्षेत्र का एक वैश्विक गठबंधन है जो जंगली बाघों को विलुप्त होने से बचाने के लिये एक साझा एजेंडे पर मिलकर कार्य करने के लिये प्रतिबद्ध हैं।
      • विश्व बैंक में स्थित GTI सचिवालय योजना, समन्वय एवं निरंतर संचार के माध्यम से 13 टाइगर रेंज वाले देशों को उनकी संरक्षण रणनीतियों को पूरा करने तथा वैश्विक बाघ संरक्षण एजेंडा चलाने में सहायता प्रदान करता है।
  • भारतीय पहलें:

आगे की राह 

  • बाघों की वैश्विक आबादी में वृद्धि आशाजनक है किंतु दक्षिण-पूर्व एशियाई बाघों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का व्यापक संरक्षण रणनीतियों के माध्यम से समाधान करने की आवश्यकता है।
  • इस अनूठी प्रजाति की निरंतर पुनर्प्राप्ति तथा कल्याण सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी नीतियों एवं निरंतर संसाधनों द्वारा निर्देशित राष्ट्रों का सहयोगात्मक प्रयास आवश्यक है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स: 

प्रश्न. निम्नलिखित बाघ आरक्षित क्षेत्रों में "क्रांतिक बाघ आवास (Critical Tiger Habitat)" के अंतर्गत सबसे बड़ा क्षेत्र किसके पास है? (2020) 

(a) कॉर्बेट
(b) रणथंभौर
(c) नागार्जुनसागर-श्रीशैलम
(d) सुंदरबन

उत्तर: (c) 

  • “क्रांतिक बाघ आवास (Critical Tiger Habitat), जिसे टाइगर रिज़र्व कोर क्षेत्र भी कहा जाता है, की पहचान वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत की गई है। वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अनुसूचित जनजाति या ऐसे अन्य वनवासियों के अधिकारों को प्रभावित किये बिना ऐसे क्षेत्रों को बाघ संरक्षण के लिये सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। 
  • CTH को राज्य सरकार द्वारा इस उद्देश्य के लिये गठित विशेषज्ञ समिति के परामर्श से अधिसूचित किया जाता है।
  • कोर/क्रांतिक बाघ आवास क्षेत्र:
  • कॉर्बेट (उत्तराखंड): 821.99 वर्ग किमी.
  • रणथंभौर (राजस्थान): 1113.36 वर्ग किमी.
  • सुंदरबन (पश्चिम बंगाल): 1699.62 वर्ग किमी.
  • नागार्जुनसागर श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश का हिस्सा): 2595.72 वर्ग किमी.

अतः विकल्प (c) सही है।