भारत के डेयरी क्षेत्र का डिजिटल रूपांतरण | 15 Jan 2026

प्रिलिम्स के लिये: राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), पशु आधार, आधारभूत पशुपालन सांख्यिकी, श्वेत क्रांति, ऑपरेशन फ्लड, अमूल, श्वेत क्रांति 2.0, कुपोषण, लंपी स्किन डिज़ीज़, मीथेन, स्वच्छता एवं पादप-स्वास्थ्य उपाय (SPS)

मेन्स के लिये: भारत के डेयरी क्षेत्र के डिजिटलीकरण के लिये उठाए गए कदम, भारत में डेयरी क्षेत्र की स्थिति, भारत के डेयरी उद्योग के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ तथा आगे की राह।

स्रोत: पीआईबी

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने एकीकृत प्लेटफॉर्म और नवोन्मेषी उपकरणों को लागू करके भारत के डेयरी क्षेत्र के डिजिटल रूपांतरण का नेतृत्व किया है, जिससे दक्षता, पारदर्शिता, ट्रेसिबिलिटी (नज़र रखने की क्षमता) तथा किसानों के कल्याण में सुधार हुआ है।

भारत के डेयरी सेक्टर को डिजिटल बनाने हेतु क्या कदम उठाए गए हैं?

  • राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन डेटाबेस: राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM) के अंतर्गत ‘भारत पशुधन’ नामक एकीकृत इकोसिस्टम तंत्र की स्थापना की गई है। इसके तहत सभी पशुओं को एक विशिष्ट 12-अंकीय ‘पशु आधार प्रदान किया जाता है। अब तक 35.68 करोड़ से अधिक टैग जारी किये जा चुके हैं, जो पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादकता से जुड़े लेन-देन के लिये विशिष्ट कोड (Primary Key) के रूप में कार्य करते हैं।
  • स्वचालित दूध संग्रह प्रणाली (AMCS): यह दैनिक दूध संग्रह को डिजिटाइज़ करती है, जिसमें मात्रा, गुणवत्ता और फैट कंटेंट दर्ज किया जाता है, किसानों को भुगतान स्वचालित करती है और किसानों को रियल-टाइम SMS अलर्ट तथा सहकारी समितियों को डेटा इनसाइट्स प्रदान करती है। 26,000 से अधिक डेयरी सहकारी समितियों को कवर करते हुए यह 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 17.3 लाख दूध उत्पादकों को लाभ पहुँचाती है।
  • NDDB डेयरी ERP (NDERP): यह व्यापक एंटरप्राइज़ रिसोर्स प्लानिंग (ERP) प्लेटफॉर्म डेयरी संचालन के लिये वित्त, इन्वेंटरी, बिक्री, निर्माण, मानव संसाधन और पेरोल को कवर करता है और इसे वेब और मोबाइल ऐप (mINDERP) के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। AMCS के साथ एकीकृत यह गाय से लेकर उपभोक्ता तक एक संपूर्ण डिजिटल समाधान प्रदान करता है, जिसमें उत्पादन में सामंजस्य (Mass-Balancing) शामिल है ताकि प्रसंस्करण में होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
  • पशु उत्पादकता एवं स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क (INAPH): यह नेटवर्क प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का रियल-टाइम डेटा सीधे किसानों के द्वार तक एकत्र करता है, जिससे पशुधन विकास कार्यक्रमों की निगरानी और मूल्यांकन संभव हो पाता है।
  • सीमेन स्टेशन प्रबंधन प्रणाली (SSMS): यह प्रणाली संपूर्ण बैल की लाइफसाइकिल, सीमेन प्रोडक्शन, क्वालिटी कंट्रोल, बायोसिक्योरिटी एवं फार्म/चारे के प्रबंधन को सँभालती है, साथ ही फ्रोज़न सीमेन डोज़ (FSD) के वितरण का भी प्रबंधन करती है। इसे इन्फॉर्मेशन नेटवर्क फॉर सीमेन प्रोडक्शन एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (INSPRM) और INAPH से जोड़ा गया है ताकि रियल-टाइम डेटा साझा करना, ट्रेसिबिलिटी (नज़र रखने की क्षमता) तथा 38 सीमेन स्टेशनों में मानकीकृत संचालन सुनिश्चित हो सके।
  • इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS): यह एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच है, जो दूध संघों, महासंघों और अन्य संबद्ध इकाइयों के बीच डेटा संग्रह, साझा करने और विश्लेषण को व्यवस्थित रूप से सक्षम बनाता है। यह प्रणाली खरीद, बिक्री, उत्पादन, वितरण और तकनीकी इनपुट आपूर्ति जैसी गतिविधियों को ट्रैक करती है, जिससे राष्ट्रीय सहकारी डेयरी उद्योग का एक समग्र डेटाबेस तैयार किया जा सके।
  • मिल्क रूट ऑप्टिमाइज़ेशन (GIS के माध्यम से): यह एक मुफ्त, वेब-आधारित डायनेमिक GIS टूल है, जो दूध संग्रह और वितरण के लिये मार्ग योजना और अनुकूलन प्रदान करता है। इसके माध्यम से परिवहन दूरी, ईंधन लागत एवं समय में कमी आती है, जिससे सहकारी समितियों के लिये संचालनात्मक दक्षता में सुधार होता है।

भारत में डेयरी क्षेत्र की स्थिति क्या है?

  • वैश्विक स्थिति: भारत 1998 से लगातार विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है (इसके बाद अमेरिका और पाकिस्तान का स्थान है) तथा यह वैश्विक दूध उत्पादन का लगभग 25% योगदान देता है।
    • कुल दूध उत्पादन वर्ष 2024-25 में 247.87 मिलियन टन पहुँच गया, जो वर्ष 2023-24 के 239.30 मिलियन टन की तुलना में 3.58% की वृद्धि है।
    • भारत दूध निर्यात में 49वें स्थान पर है। न्यूज़ीलैंड विश्व का सबसे बड़ा दूध और डेयरी उत्पादों का निर्यातक है, जबकि चीन वैश्विक स्तर पर डेयरी सामान का सबसे बड़ा आयातक है।
  • प्रति व्यक्ति उपलब्धता: वर्ष 2014-15 के 319 ग्राम/दिन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 485 ग्राम/दिन हो गई है, जो पोषण सुरक्षा और डेयरी उत्पादकता में सुधार को दर्शाती है।
  • शीर्ष दूध उत्पादक राज्य: आधारभूत पशुपालन सांख्यिकी, 2025 के अनुसार, शीर्ष दूध उत्पादक राज्य हैं: उत्तर प्रदेश (15.66%), राजस्थान (14.82%), मध्य प्रदेश (9.12%), गुजरात (7.78%) और महाराष्ट्र (6.71%)। ये पाँचों राज्य संपूर्ण भारत के दूध उत्पादन में 54.09% का योगदान करते हैं।
  • पशु वर्ग अनुसार वृद्धि: सभी प्रमुख वर्गों में उत्पादन में वृद्धि हुई है, जिसमें विदेशी/संकर गायों में सबसे अधिक 4.97% की वृद्धि हुई, इसके बाद देशी/अज्ञात जाति की गायों में 3.51% और भैंसों में 2.45% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • मवेशी श्रेणी के अनुसार वृद्धि: सभी प्रमुख श्रेणियों में उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विदेशी/क्रॉसब्रेड गायों में सबसे अधिक 4.97% की वृद्धि हुई, इसके बाद स्वदेशी/गैर-वर्णित गायों में 3.51% और भैंसों में 2.45% की वृद्धि देखी गई।
  • कृषि GDP में डेयरी का योगदान: दूध समूह (दूध, घी, मक्खन और लस्सी) का हिस्सा 2022–23 में कृषि, पशुपालन, वानिकी और मत्स्य से प्राप्त कुल उत्पादन मूल्य का लगभग 40% रहा।

श्वेत क्रांति और ऑपरेशन फ्लड

  • परिचय: श्वेत क्रांति भारत में दुग्ध उत्पादन में हुई अभूतपूर्व वृद्धि को दर्शाती है और यह ऑपरेशन फ्लड के समानार्थी है, जो विश्व का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम रहा है।
  • कार्यान्वयन एवं उद्देश्य: यह योजना तीन चरणों (1970–1980, 1981–1985 और 1985–1996) में लागू की गई, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और ग्रामीण उत्पादकों को 700 से अधिक शहरी केंद्रों से जोड़ने वाला राष्ट्रीय दुग्ध ग्रिड विकसित करना था।
    • इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करने हेतु मध्यस्थों की भूमिका को समाप्त करना और अमूल के सफल आनंद मॉडल पर आधारित सहकारी समितियों के माध्यम से डेयरी अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना था।
  • सामाजिक–आर्थिक प्रभाव: इस पहल ने भारत को दुग्ध की कमी और आयात-निर्भर देश से विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बना दिया, जिसने वर्ष 1998 में संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ दिया। इसने ग्रामीण आजीविकाओं में उल्लेखनीय सुधार किया, लाखों छोटे और सीमांत किसानों (जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ शामिल हैं) को सशक्त बनाया और एक सतत सहकारी पारिस्थितिक तंत्र का निर्माण किया।

श्वेत क्रांति 2.0

  • श्वेत क्रांति 2.0 श्वेत क्रांति की विरासत को आगे बढ़ाने वाली एक आधुनिक पहल है, जिसे 19 सितंबर, 2024 को सहकारिता मंत्रालय द्वारा आरंभ किया गया। इसका उद्देश्य दुग्ध क्षेत्र में उत्पादकता में वृद्धि, महिला सशक्तीकरण तथा पोषण सुरक्षा और कुपोषण की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटना है, ताकि दुग्ध सहकारी तंत्र को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप सुदृढ़ बनाया जा सके।
  • मुख्य लक्ष्य एवं उद्देश्य: श्वेत क्रांति 2.0 के प्रमुख उद्देश्यों में दुग्ध सहकारिताओं द्वारा दैनिक दूध संग्रहण को लगभग 50% तक बढ़ाना (660 लाख किग्रा./दिन से बढ़ाकर 2028–29 तक 1,007 लाख किग्रा./दिन करना), अविकसित/अवच्छादित गाँवों में सहकारी नेटवर्क का विस्तार तथा आनुवंशिक सुधार, भ्रूण प्रत्यारोपण (Embryo Transfer) और इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) प्रौद्योगिकी के माध्यम से पशुधन उत्पादकता में वृद्धि शामिल है।

भारत के डेयरी उद्योग के सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

  • जलवायु एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलताएँ: दुग्ध उत्पादन में गंभीर गिरावट देखी जा रही है—विशेषकर उत्तरी राज्यों में 10–30% तक दूध की पैदावार घट गई है, जिससे राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन के लगभग 30% हिस्से पर खतरा उत्पन्न हो गया है। यह प्रवृत्ति बढ़ती हीटवेव से जुड़ी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार वर्ष 2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा, जिसमें वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.55°C अधिक दर्ज किया गया।
    • गाँठदार त्वचा रोग (LSD) जैसे रोगों के प्रकोप के कारण 2022–23 में दुग्ध उत्पादन में लगभग 10% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं मैस्टाइटिस रोग के चलते देश को हर वर्ष लगभग ₹14,000 करोड़ का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, जो दुग्ध क्षेत्र की उत्पादकता और किसानों की आय पर गंभीर प्रभाव डालता है।
  • आर्थिक व्यवहार्यता और बढ़ती लागत: पिछले 30 वर्षों में पशु आहार की कीमतों में 246% वृद्धि हुई है, जो प्रमुख घटकों (जैसे– ऑयलसीड केक) की बढ़ती लागत के कारण है और इसने किसानों के फायदे को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। बढ़ती लागत के कारण मांग में कमी का खतरा उत्पन्न हो रहा है, क्योंकि दूध अब प्रमुख खाद्य व्यय वस्तु बन गया है, जिसकी लागत ग्रामीण भारत में लगभग ₹314/महीना और शहरी भारत में लगभग ₹466/महीना है।
  • संरचनात्मक और उत्पादकता संबंधी घाटे: औसत दूध उत्पादन विदेशी/क्रॉसब्रेड पशुओं में 8.55 किग्रा./दिन और स्वदेशी पशुओं में 3.44 किग्रा./दिन है, जिसमें क्षेत्रीय असमानताएँ भी स्पष्ट हैं, जैसे– पंजाब में 13.49 किग्रा./दिन बनाम पश्चिम बंगाल में 6.30 किग्रा./दिन। इसके अलावा, 70% से अधिक विपणन योग्य दूध असंगठित क्षेत्र द्वारा सँभाला जाता है, जिससे गुणवत्ता नियंत्रण में कमी, अपर्याप्त शीत शृंखला और सीमित क्रेडिट सुविधा जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  • प्रजनन और आनुवंशिक स्थिरता की चिंताएँ: क्रॉसब्रीडिंग पर अत्यधिक निर्भरता—देश में औसत 30% जबकि केरल में 96% तक—स्वदेशी नस्लों के क्षरण का खतरा पैदा करती है, जो जैव विविधता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिये महत्त्वपूर्ण हैं। सेक्स-सॉर्टेड सीमेन का उपयोग, जिसका लक्ष्य 90% मादा बछड़े प्राप्त करना है, अप्रयुक्त मादा पशुओं के निपटान को लेकर भी चिंताएँ उत्पन्न करता है और यह समस्या एंटी-स्लॉटर कानून के कारण और जटिल हो जाती है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव: पशुपालन मानवजनित मीथेन उत्सर्जन में लगभग 32% योगदान देता है, जो जलवायु संकट के दृष्टिकोण से एक महत्त्वपूर्ण चुनौती है।

भारत के डेयरी उद्योग को कैसे सुधारा जा सकता है?

  • आनुवंशिक सुधार और प्रजनन प्रौद्योगिकियाँ: उच्च दुग्ध उत्पादक देशी नस्लों, जैसे– कांकरेज और गिर से अधिक संख्या में बछियों के जन्म के लिये सेक्स‑सॉर्टेड (SS) सीमेन का उपयोग किया जाना चाहिये, जिससे भविष्य में दुग्ध देने वाली गायों की आबादी बढ़ाई जा सके।
    • उच्च आनुवंशिक गुण वाली एक गाय से प्रतिवर्ष लगभग 12 बछड़े प्राप्त करने के लिये एंब्रियो  ट्रांसफर (ET) तकनीक को अपनाया जा सकता है, जबकि इन‑विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) के विस्तार से एक दाता गाय से प्रतिवर्ष 33-35 बछड़े प्राप्त किये जा सकते हैं, जिससे उत्कृष्ट आनुवंशिकी का तेज़ी से विस्तार होगा।
  • पोषण संबंधी सुधार और पर्यावरणीय प्रभाव में कमी: आसानी से पचने वाली चारा फसलों, जैसे– दलहनी चारे और अनाज‑आधारित चारे को बढ़ावा दिया जाना चाहिये और ऐसे स्पेशल फीड एडिटिव्स का उपयोग करना चाहिये जो जठर में किण्वन की अवधि को कम करके और मीथेन उत्पादक सूक्ष्मजीवों को रोककर मीथेन उत्सर्जन कम करने में सहायक हों।
    • इसके अतिरिक्त गुजरात में अमूल जैसे टोटल मिक्स्ड रेशन (TMR) प्लांट का विस्तार किया जाना, ताकि मक्का, ज्वार और ओट ग्रास से रेडी-टू-ईट, न्यूट्रीएंट‑रिच चारा मिश्रण उत्पादित किये जा सकें और उत्सर्जित मीथेन से बायोगैस उत्पादन के लिये एकीकृत चक्रीय अर्थव्यवस्था का विकास हो।
  • डिजिटल एवं प्रिसिजन प्रौद्योगिकी: मास्टिटिस जैसे रोगों की शीघ्र पहचान के लिये IoT कॉलर और AI‑आधारित थन स्कैनर लगाए जाने चाहिये, हालाँकि स्वचालित मिल्किंग मशीनें संदूषण और श्रम लागत को कम करती हैं। 12-अंकों वाले पशु‑पहचान नंबरों के साथ भारत पशुधन डेटाबेस को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिये, ताकि प्रत्येक पशु के स्वास्थ्य, प्रजनन और दुग्ध‑गुणवत्ता की निगरानी हो सके।
  • अवसंरचना एवं बाज़ार पहुँच को सुदृढ़ करना: ग्रामीण स्तर पर सौर ऊर्जा से चलने वाली दुग्ध शीतलन इकाइयों की स्थापना से औपचारिक दुग्ध प्रसंस्करण में वृद्धि होगी और उसकी बर्बादी कम होगी, हालाँकि संग्रह केंद्रों को गुणवत्ता‑जाँच उपकरणों से सुसज्जित करना और उन्नत सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी (SPS) मानकों को अपनाना प्रीमियम वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच के लिये आवश्यक है।

निष्कर्ष

श्वेत क्रांति की सहकारी विरासत पर निर्मित भारत का डेयरी क्षेत्र एक तकनीक-संचालित, किसान-केंद्रित पारिस्थितिक तंत्र में बदल रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्मों, आनुवंशिक प्रौद्योगिकियों और सतत प्रथाओं का पूरी तरह से लाभ उठाकर भारत यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका वैश्विक नेतृत्व लचीले विकास, किसानों की अधिक न्यायसंगत आय और सभी के लिये बेहतर पोषण सुरक्षा में परिवर्तित हो।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. भारत के डेयरी क्षेत्र में दक्षता और पारदर्शिता सुधारने में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की भूमिका की जाँच कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. भारत पशुधन क्या है?
भारत पशुधन NDLM के अंतर्गत भारत का एकीकृत डिजिटल पशुधन पारिस्थितिक तंत्र है, जो पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और उत्पादकता की निगरानी के लिये 12-अंकों वाला पशु आधार ID जारी करता है।

2. भारत में दुग्ध उत्पादन करने वाले शीर्ष राज्य कौन-से हैं?
उत्तर प्रदेश (15.66%), राजस्थान (14.82%), मध्य प्रदेश (9.12%), गुजरात (7.78%) और महाराष्ट्र (6.71%) सामूहिक रूप से राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में 54.09% का योगदान करते हैं।

3. डेयरी क्षेत्र ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में किस प्रकार योगदान देता है?
पशुधन मीथेन का एक प्रमुख स्रोत है, जो आँतों में होने वाले किण्वन और गोबर प्रबंधन के माध्यम से भारत में मानवजनित मीथेन उत्सर्जन का लगभग 32% हिस्सा है।



UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

मेन्स

प्रश्न. एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) किस सीमा तक कृषि उत्पादन को संधारित करने में सहायक है? (2019) 

प्रश्न. भारत में स्वतंत्रता के बाद कृषि में आई विभिन्न प्रकार की क्रांतियों को स्पष्ट कीजिये। इन क्रांतियों ने भारत में गरीबी उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा में किस प्रकार सहायता प्रदान की है? (2017)

प्रश्न. ग्रामीण क्षेत्रों में कृषीतर रोज़गार और आय का प्रबंध करने में पशुधन पालन की बड़ी संभाव्यता है। भारत में इस क्षेत्रक की प्रोन्नति करने के उपयुक्त उपाय सुझाते हुए चर्चा कीजिये। (2015)