भ्रष्टाचार बोध सूचकांक 2025 | 16 Feb 2026
प्रिलिम्स के लिये: भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI), भ्रष्टाचार, राजनीतिक वित्तपोषण, गैर-सरकारी संगठन (NGO), विधि का शासन, संसद, प्रगतिशील कर, संसदीय निगरानी, धन शोधन।
मेन्स के लिये: भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) 2025 के प्रमुख निष्कर्ष, भ्रष्टाचार के कारण एवं परिणाम और CPI 2025 में सुझाए गए भ्रष्टाचार नियंत्रण के उपाय।
चर्चा में क्यों?
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) 2025 जारी किया, जिसमें 182 देशों का मूल्यांकन उनके सार्वजनिक क्षेत्र में कथित भ्रष्टाचार के आधार पर किया गया। इस सूचकांक में 0 का अर्थ अत्यधिक भ्रष्ट और 100 का अर्थ अत्यंत स्वच्छ माना गया है।
- यह रिपोर्ट वैश्विक भ्रष्टाचार प्रवृत्तियों, उनके अंतर्निहित कारणों, सामाजिक प्रभावों और व्यावहारिक सुधारात्मक सुझावों का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करती है।
सारांश
- वैश्विक औसत CPI 42 पर पहुँच गया, जिसमें 182 देशों में से 122 देशों का स्कोर 50 से नीचे है, जो व्यापक भ्रष्टाचार को दर्शाता है।
- लोकतंत्रों का औसत स्कोर 71 है, जबकि सत्तावादी शासन का औसत 32, जो यह दर्शाता है कि संस्थागत दृढ़ता भ्रष्टाचार नियंत्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- अनुशंसाएँ स्वतंत्र न्यायपालिका, राजनीतिक पारदर्शिता, नागरिक क्षेत्र की सुरक्षा और अवैध वित्तीय प्रवाह के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर केंद्रित हैं।
भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) 2025 के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?
- वैश्विक औसत में गिरावट: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के अनुसार, 182 देशों के समावेश वाले CPI 2025 में वैश्विक औसत स्कोर 42/100 पर आ गया है, जो पिछले दशक में सबसे निचला स्तर है और यह व्यापक भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है। इस सूचकांक में 122 देशों का स्कोर 50 से नीचे है, जो भ्रष्टाचार की गंभीरता को दर्शाता है।
- उच्च प्रदर्शन करने वाले देशों की कमी: 80 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले देशों की संख्या एक दशक पहले 12 थी, जो इस वर्ष घटकर केवल 5 देशों तक रह गई है (डेनमार्क, फिनलैंड, सिंगापुर, न्यूज़ीलैंड, नॉर्वे)।
- शीर्ष एवं निचले प्रदर्शन करने वाले देश: 2025 के भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) में डेनमार्क 89 स्कोर के साथ आठवीं बार लगातार शीर्ष पर रहा। वहीं सूडान और सोमालिया का सबसे कम स्कोर 9 है। इसके अलावा, वेनेज़ुएला (10) जैसे संघर्षग्रस्त और प्रतिबंधात्मक शासन वाले देश भी सूचकांक के निचले हिस्से में शामिल हैं।
- भारत की स्थिति: वर्ष 2025 में भारत भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) में 91वें स्थान पर रहा, जिसका स्कोर 39/100 था, जो वर्ष 2024 में 96वें स्थान से थोड़ा सुधार दर्शाता है।
- भारत (स्कोर 39, 91वाँ स्थान) अधिकांश दक्षिण एशियाई पड़ोसियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता है, लेकिन भूटान (71, 18) और चीन (43, 76) से पीछे है।
- भारत मालदीव (39, 91) के साथ बराबर है। अन्य की रैंकिंग कम है: श्रीलंका (35, 107), नेपाल (34, 109), पाकिस्तान (28, 136), बांग्लादेश (24, 150), अफगानिस्तान और म्याँमार (16, 169)।
- क्षेत्रीय औसत: पूर्ण लोकतंत्र का औसत 71 है, त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र का औसत 47 है तथा तानाशाही शासन का औसत केवल 32 है, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं और भ्रष्टाचार नियंत्रण के बीच दृढ़ संबंध को दर्शाता है।
रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के क्या कारण बताए गए हैं?
- न्याय और कानून का कमज़ोर होना: न्यायिक नियुक्तियों का राजनीतीकरण, अभियोजन में हस्तक्षेप, अपर्याप्त संसाधन और स्वतंत्रता की कमी सज़ा से बचाव की स्थिति उत्पन्न करती है। जब न्याय प्रणाली किसी विशेष समूह के नियंत्रण में होती है, तो कानून आम जनता की बजाय शक्तिशाली वर्ग की रक्षा करते हैं।
- राजनीतिक निर्णय-निर्माण पर अनुचित प्रभाव: अस्पष्ट राजनीतिक वित्तपोषण, अनियंत्रित लॉबिंग, हितों का टकराव और धनी दानदाताओं या समीपस्थ सहयोगियों का प्रभाव निजी हितों को सार्वजनिक सत्ता पर कब्ज़ा करने की अनुमति देता है। इससे “महाभ्रष्टाचार” और राज्य के कब्ज़े की स्थिति उत्पन्न होती है, जहाँ संस्थाएँ सामान्य जनता की बजाय अभिजात वर्ग के हितों की सेवा करती हैं।
- नागरिक क्षेत्र और मीडिया स्वतंत्रता में कमी: प्रतिबंधात्मक NGO कानून, बदनाम करने के अभियान, निगरानी, सेंसरशिप और पत्रकारों के खिलाफ हिंसा (2012 से वैश्विक स्तर पर 829 पत्रकार मारे गए, जिनमें कई भ्रष्टाचार की जाँच करते समय) निगरानी संस्थाओं को चुप कर देती है। पारदर्शिता और जवाबदेही में कमी भ्रष्टाचार को पनपने का अवसर देती है।
- सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में विफलताएँ: बजट बनाने, खरीद और ऋण प्रबंधन में निगरानी की कमी, साथ ही यह संरक्षण नेटवर्क और सार्वजनिक धन के प्रवाह को बदल देता है एवं रिश्वतखोरी तथा पक्षपात के अवसर उत्पन्न करते हैं।
भ्रष्टाचार के परिणाम क्या हैं?
- न्याय एवं मानव अधिकारों का क्षरण: अपराधों पर सज़ा न मिलने से कानून की शासन प्रणाली कमज़ोर होती है, पीड़ितों (विशेषकर हाशिये पर रहने वाले समुदायों) को उपचार से वंचित किया जाता है तथा न्याय तक पहुँचने में बाधाएँ बढ़ती हैं, जिससे और अधिक भ्रष्टाचार का दुश्चक्र उत्पन्न होता है।
- लोकतांत्रिक पतन और राज्य पर नियंत्रण: भ्रष्टाचार चुनावों, संसदों तथा निगरानी संस्थाओं को कमज़ोर करता है, जिससे नीतियों पर कब्ज़ा, सार्वजनिक विश्वास में कमी एवं राजनीतिक ध्रुवीकरण होता है। यह तानाशाही प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है व लोकतांत्रिक पलटाव को कठिन बनाता है।
- नागरिक स्थान और मीडिया का दमन: पत्रकारों और नागरिक समाज पर हमले जवाबदेही को कम करते हैं, आत्म-नियंत्रण को बढ़ावा देते हैं और भ्रष्टाचार को छिपे रहने की अनुमति देते हैं। यह उच्च-स्तरीय भ्रष्टाचार पर खोजी पत्रकारिता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।
- सार्वजनिक सेवाओं का पतन और असमानता में वृद्धि: डाइवर्ट फंड के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की गुणवत्ता खराब हो जाती है। अनौपचारिक भुगतान गरीबों पर प्रतिगामी कर के रूप में असर डालते हैं, कमज़ोर समूहों को बाहर रखते हैं एवं गरीबी, वित्तीय संकट व सामाजिक अशांति [उदाहरण के लिये वर्ष 2025 में नेपाल और मेडागास्कर में सरकारों को गिराने वाले जेन-ज़ेड (Gen-Z) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन] को बढ़ावा देते हैं।
- विस्तृत सामाजिक और आर्थिक प्रभाव: भ्रष्टाचार आर्थिक अस्थिरता में योगदान देता है, निवेश को रोकता है, जलवायु संवेदनशीलता को बढ़ाता है (जैसे– हड़पे गए अनुकूलन फंड) तथा जनता में असंतोष को बढ़ावा देता है। गंभीर मामलों में यह राज्य को कमज़ोर स्थिति और संघर्ष तक ले जा सकता है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल
- परिचय: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (TI) एक प्रमुख वैश्विक नागरिक समाज संगठन है, जो भ्रष्टाचार से लड़ने के लिये समर्पित है। यह सरकार, व्यवसाय और नागरिक समाज में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं ईमानदारी को बढ़ावा देता है।
- इसकी स्थापना वर्ष 1993 में हुई थी और इसका मुख्यालय बर्लिन, जर्मनी में स्थित है।
- मुख्य मिशन: यह संगठन एक ऐसे विश्व की कल्पना करता है जो भ्रष्टाचार-मुक्त हो, जिसे यह "सौंपे गए अधिकार का निजी लाभ के लिये दुरुपयोग" के रूप में परिभाषित करता है। इसका कार्यक्षेत्र सरकार, व्यवसाय, नागरिक समाज एवं रोज़मर्रा के जीवन तक विस्तृत है।
- मुख्य प्रकाशन: यह संगठन अपने वार्षिक भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) के लिये सबसे अधिक जाना जाता है। यह वैश्विक भ्रष्टाचार बैरोमीटर भी प्रकाशित करता है।
भ्रष्टाचार को रोकने के लिये CPI 2025 में क्या सुझाव दिये गए हैं?
- स्वतंत्र और पारदर्शी न्याय संस्थान: न्यायिक नियुक्तियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना, न्याय प्रणाली को पर्याप्त संसाधन प्रदान करना और भ्रष्टाचार के पीड़ितों (सहित समुदायों) को नागरिक समाज के माध्यम से न्याय पाने की सुविधा देना।
- राजनीतिक निर्णय लेने पर अनुचित प्रभाव से निपटना: राजनीतिक वित्तपोषण को पूरी पारदर्शिता के साथ और डोनेशन पर सीमा लगाकर नियंत्रित करना, लॉबिंग गतिविधियों का खुलासा करना तथा हितों के टकराव को प्रबंधित करना ताकि नीतियों पर नियंत्रण किया जा सके एवं सार्वजनिक हित की रक्षा हो सके।
- न्याय तक सुगम पहुँच: भ्रष्टाचार से प्रभावित व्यक्तियों और समुदायों के लिये प्रत्यक्ष कानूनी मार्ग उपलब्ध कराना, सीमांत समूहों के लिये समर्थन सुनिश्चित करना।
- नागरिक स्थान और भ्रष्टाचार-विरोधी रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना: अभिव्यक्ति, संघ और सूचना की स्वतंत्रता की रक्षा करना; पत्रकारों, मुखबिरों और गैर-सरकारी संगठनों की सुरक्षा करना तथा नागरिक समाज के लिये घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय वित्तपोषण में आने वाली बाधाओं को दूर करना।
- वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और निरीक्षण: सार्वजनिक व्यय, उधार और खरीद के संसदीय पर्यवेक्षण, स्वतंत्र लेखापरीक्षा एवं विनियामक निगरानी को सुदृढ़ बनाना। निरीक्षण तंत्रों में समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करना।
- भ्रष्टाचार की रोकथाम, पहचान और दंड: सुदृढ़ राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रवर्तन लागू करना, अपहृत संपत्तियों को ज़ब्त करना, सीमापार मनी लॉन्ड्रिंग चैनलों को बंद करना तथा सीमापार भ्रष्टाचार से निपटने हेतु बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना।
निष्कर्ष
CPI 2025 ने एक चिंताजनक वैश्विक भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति का खुलासा किया है, जिसमें औसत स्कोर एक दशक में पहली बार गिरकर 42 हो गया है। लोकतांत्रिक प्रतिगमन, प्रतिबंधित नागरिक स्थान और कमज़ोर संस्थान इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं। इस प्रवृत्ति को उलटने के लिये पारदर्शी शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका और संरक्षित नागरिक समाज का तत्काल कार्यान्वयन आवश्यक है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न. लोक सेवा प्रदायगी और असमानता पर भ्रष्टाचार के सामाजिक-आर्थिक परिणाम क्या हैं? |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) क्या है?
CPI ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा प्रकाशित एक वार्षिक सूचकांक है, जो देशों को सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के कथित स्तरों के आधार पर 0 (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (बहुत स्वच्छ) के पैमाने पर रैंक प्रदान करता है।
2. CPI 2025 में भारत का रैंक और स्कोर क्या था?
भारत 39 अंकों के साथ 100 में से 91वें स्थान पर रहा, जो वर्ष 2024 में 96वें स्थान से मामूली सुधार को दर्शाता है।
3. CPI 2025 में कौन-से देश शीर्ष पर और सबसे नीचे रहे?
डेनमार्क (89) लगातार आठवें वर्ष सूचकांक में शीर्ष पर रहा, जबकि सोमालिया और दक्षिण सूडान (9) सबसे निचले रैंक वाले देश थे।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न
प्रिलिम्स
प्रश्न 1. 'बेनामी संपत्ति लेन-देन का निषेध अधिनियम, 1988' (PBPT अधिनियम) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2017)
- किसी संपत्ति का लेन-देन बेनामी लेन-देन नहीं समझा जाएगा यदि संपत्ति का मालिक उस लेन-देन के बारे में अवगत नहीं है।
- बेनामी पाई गई संपत्तियाँ सरकार द्वारा ज़ब्त किये जाने के लिये दायी होंगी।
- यह अधिनियम जाँच के लिये तीन प्राधिकारियों का उपबंध करता है किंतु यह किसी अपीलीय क्रियाविधि का उपबंध नहीं करता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 2 और 3
उत्तर: (b)
मेन्स
प्रश्न. चर्चा कीजिये कि किस प्रकार उभरती प्रौद्योगिकियाँ और वैश्वीकरण मनी लॉन्ड्रिंग में योगदान करते हैं? राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर मनी लॉन्ड्रिंग की समस्या से निपटने के लिये किये जाने वाले उपायों को विस्तार से समझाइये। (2021)
प्रश्न. "आर्थिक प्रदर्शन के लिये संस्थागत गुणवत्ता एक निर्णायक चालक है।" इस संदर्भ में लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिये सिविल सेवा में सुधारों के सुझाव दीजिये। (2020)


