ब्रिक्स STI सहयोग | 23 Mar 2026

प्रिलिम्स के लिये:  ब्रिक्स, ब्रिक्स+, आईब्रिक्स नेटवर्क, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, न्यू डेवलपमेंट बैंक 

मेन्स के लिये: वैश्विक शासन और बहुध्रुवीयता में ब्रिक्स की भूमिका, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) सहयोग, वैश्विक दक्षिण सहयोग और प्रौद्योगिकी कूटनीति

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

भारत ने "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिये निर्माण" विषय के तहत वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण की, जिससे विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) इस गुट के एजेंडे में सबसे आगे आ गए।

सारांश

  • ब्रिक्स प्रौद्योगिकी-बहुध्रुवीयता के लिये एक प्रमुख मंच के रूप में उभर रहा है, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में वैश्विक दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देता है, जिसमें AI, गहन-प्रौद्योगिकी और विकास-उन्मुख समाधानों पर बढ़ता ध्यान केंद्रित है।
  • हालाँकि इसकी प्रभावशीलता अनुसंधान एवं विकास असमानता, भू-राजनीतिक तनाव, कमज़ोर संस्थागत तंत्र और वित्तपोषण से सीमित है, जिससे गहन सहयोग के लिये संरचनात्मक और वित्तीय सुधारों की आवश्यकता होती है।

BRICS में STI सहयोग का विकास किस प्रकार हुआ है?

  • सान्या घोषणा (2011): वर्ष 2011 में चीन के सान्या में तीसरे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (S&T) सहयोग को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई और ब्रिक्स एजेंडे में शामिल किया गया, जो विकासात्मक चुनौतियों का समाधान करने के लिये संयुक्त अनुसंधान की आवश्यकता को दर्शाता है।
  • STI सहयोग पर समझौता ज्ञापन: विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) के क्षेत्र में सहयोग पर ब्रिक्स समझौता ज्ञापन (MoU) पर वर्ष 2015 में हस्ताक्षर किये गए थे।  
  • इसके अतिरिक्त युवा वैज्ञानिकों के बीच सहयोग और नेटवर्किंग को बढ़ावा देने के लिये वर्ष 2015 में ब्रिक्स युवा वैज्ञानिक मंच (YSF) की स्थापना की गई थी।
  • नवाचार सहयोग के लिये ब्रिक्स कार्ययोजना (2017-20): इसने विशुद्ध शैक्षणिक अनुसंधान से उद्यमिता और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की ओर विस्तार को चिह्नित किया।
  • ब्रिक्स प्रौद्योगिकी हस्तांतरण केंद्र (TTC) की स्थापना विज्ञान पार्क, इन्क्यूबेटर और स्टार्टअप्स को जोड़ने के लिये की गई थी, जिससे उभरती प्रौद्योगिकियों के क्रॉस-बॉर्डर व्यवसायीकरण की सुविधा हो सके।
  • ब्रिक्स विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रियों की बैठक: प्राथमिकताएँ निर्धारित करने के लिये प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है, जिसमें वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) (भारत) जैसी राष्ट्रीय एजेंसियाँ परियोजनाओं और प्रस्तावों का समन्वय करती हैं।
  • ब्रिक्स नवाचार कार्ययोजना (2021-24): भारत ने ब्रिक्स नवाचार कार्ययोजना (2021-24) का नेतृत्व किया।
  • महत्त्वपूर्ण रूप से ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन से डेटा साझा करने के लिये एक ऐतिहासिक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किये गए, जिससे भू-अवलोकन डेटा के लिये पश्चिमी अंतरिक्ष एजेंसियों पर निर्भरता समाप्त हो गई।
  • गहन-प्रौद्योगिकी नवाचार की ओर विस्तार: कज़ान और रियो घोषणाओं ने सीमा प्रौद्योगिकियों की ओर एक महत्त्वपूर्ण बदलाव को चिह्नित किया
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को एक उप-विषय से उठाकर एक केंद्रीय शासन स्तंभ बना दिया गया ताकि न्यायसंगत, विकास-उन्मुख AI मानक सुनिश्चित किये जा सकें।
  • साथ ही इस गुट का विस्तार ब्रिक्स+ में हुआ, जिससे नई पूंजी और विविध तकनीकी क्षमताएँ आईं।
  • भारत की अध्यक्षता (2026): भारत वर्ष 2026 में एक मज़बूत जनादेश के साथ अध्यक्षता ग्रहण करता है ताकि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का लाभ उठाया जा सके और विस्तारित वैश्विक दक्षिण में तकनीकी सहयोग को बढ़ाया जा सके।

ब्रिक्स का विस्तार - वैश्विक प्रभाव का एक नया चरण

  • ब्रिक्स: BRIC शब्द वर्ष 2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ'नील द्वारा उभरती अर्थव्यवस्थाओं–ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन–का प्रतिनिधित्व करने के लिये दिया गया था।
    • ब्रिक वर्ष 2006 में G8 आउटरीच शिखर सम्मेलन के मौके पर रूस, भारत और चीन के नेताओं की बैठक के बाद एक औपचारिक समूह के रूप में उभरा। उसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान पहली ब्रिक विदेश मंत्रियों की बैठक में इसे संस्थागत रूप दिया गया और उद्घाटन ब्रिक शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित किया गया था।
  • ब्रिक्स+: ब्रिक्स का विस्तार ब्रिक्स+ में हुआ है, जिसमें अब इसके पाँच मूल सदस्य ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ नए सदस्य: मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान शामिल हैं।
    • यह गुट वैश्विक जनसंख्या का लगभग 49.5%, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 40% और वैश्विक व्यापार के 26% का प्रतिनिधित्व करता है।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य वैश्विक शासन में सुधार करना और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसे पश्चिमी-प्रधान संस्थानों के विकल्प प्रदान करना है।
  • अध्यक्षता: ब्रिक्स (BRICS) का संचालन प्रतिवर्ष बदलने वाली 'घूर्णनशील अध्यक्षता' (Rotating Chairmanship) के माध्यम से होता है। इसकी कार्यप्रणाली मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर आधारित है: राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा जन-केंद्रित (People-to-People) सहयोग
    • इसका कोई स्थायी सचिवालय या औपचारिक चार्टर नहीं है। 
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): इसका मुख्यालय चीन के शंघाई में स्थित है, इसकी स्थापना 2015 में ब्रिक्स देशों द्वारा एक बहुपक्षीय विकास बैंक के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य बुनियादी ढाँचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिये संसाधन जुटाना है।

भारत BRICS में STI सहयोग के एक प्रमुख चालक के रूप में कैसे उभर सकता है?

  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) का लाभ उठाना: भारत ब्रिक्स में डिजिटल सहयोग के लिये स्केलेबल मॉडल के रूप में आधार, UPI, डिजिटल इंडिया में अपनी सफलता का प्रदर्शन कर सकता है।
    • भारत को ब्रिक्स में एक ओपन-सोर्स डिजिटल रिपॉजिटरी स्थापित करने का प्रस्ताव करना चाहिये, जिससे नए सदस्य (जैसे– इथियोपिया और मिस्र) बिना भारी अनुसंधान एवं विकास (R&D) लागत के डिजिटल पहचान, ई-गवर्नेंस और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के लिये मॉड्यूलर DPI आर्किटेक्चर को अपना और अनुकूलित कर सकें।
  • मेगा-साइंस परियोजनाओं को आगे बढ़ाना: ऐतिहासिक रूप से, बड़े पैमाने पर, पूंजी-गहन मेगा-साइंस सुविधाएँ (जैसे– CERN या ITER) पश्चिम में केंद्रित रही हैं, जिसके लिये अक्सर वैश्विक दक्षिण के शीर्ष-स्तरीय शोधकर्त्ताओं को उन तक पहुँचने के लिये प्रवास करना पड़ता है।
    • लिगो-इंडिया और स्क्वायर किलोमीटर ऐरे (SKA) जैसी वैश्विक परियोजनाओं के अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए, भारत को एक ब्रिक्स मेगा-साइंस कंसोर्टियम की स्थापना का समर्थन करना चाहिये।
  • जलवायु प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाना: भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) में अपने संस्थापक नेतृत्व का लाभ उठाकर एक ब्रिक्स स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान एवं विकास कंसोर्टियम स्थापित कर सकता है।
    • महंगी पश्चिमी बौद्धिक संपदा पर निर्भर रहने के बजाय, यह कंसोर्टियम महत्त्वपूर्ण जलवायु प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइज़र, यूटिलिटी-स्केल बैटरी भंडारण और जलवायु-अनुकूल कृषि जैव प्रौद्योगिकी के संयुक्त विकास और ओपन-सोर्स साझाकरण पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • "संयुग्मित लिंकेज" को बढ़ावा देना: भारत एक लक्षित मेंटरशिप या "संयुग्मित सहयोग" मॉडल पेश कर सकता है, जो विशिष्ट क्षेत्रों में उन्नत अनुसंधान एवं विकास वाले देशों (जैसे– फार्मास्यूटिकल्स/IT में भारत, जैव ईंधन में ब्राज़ील) को नए सदस्यों के साथ जोड़ता है ताकि उनके घरेलू राष्ट्रीय नवाचार प्रणाली (NIS) का तेज़ी से निर्माण किया जा सके।
  • स्वास्थ्य सेवा नवाचार: भारत "फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड" और जनसंख्या-स्तरीय डिजिटल स्वास्थ्य (कोविन और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसे प्लेटफॉर्मों के माध्यम से) में अग्रणी के रूप में अपनी दोहरी ताकत का लाभ उठा सकता है।
    • भारत को एक ब्रिक्स डिजिटल हेल्थ ग्रिड का प्रस्ताव करना चाहिये जो अंतर-संचालनीय स्वास्थ्य रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन के लिये हो।
  • AI और उभरती प्रौद्योगिकी शासन का समन्वय: जैसे-जैसे AI और क्वांटम कंप्यूटिंग विकसित हो रहे हैं, BRICS में एकीकृत नियामक अभाव में भी वृद्धि हो रही है।
    • नैतिक दिशानिर्देशों, डेटा संप्रभुता मानदंडों और साइबर सुरक्षा मानकों के प्रारूप तैयार करने के लिये एक संयुक्त कार्यसमूह की स्थापना ब्रिक्स को वैश्विक प्रौद्योगिकी शासन में नियम-निर्माता के रूप में कार्य करने की अनुमति देगी, न कि केवल नियम-अनुसरणकर्त्ता के रूप में।

ब्रिक्स STI सहयोग को कौन-सी चुनौतियाँ सीमित करती हैं?

  • क्षमता में असमानता: BRICS देशों के भीतर अनुसंधान एवं विकास पर सकल घरेलू व्यय (GERD) में भारी असमानता है।
    • चीन नवाचार परिदृश्य में भारी रूप से हावी है, जबकि कई नए सदस्य काफी पीछे हैं।
    • यह असमानता अक्सर ‘सहयोग’ को एकतरफा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में बदल देती है, जिससे वास्तविक बहुपक्षीय सह-निर्माण के बजाय बीजिंग पर तकनीकी निर्भरता को लेकर चिंताएँ बढ़ती हैं।
  • BRICS+ की विषमता: विभिन्न आर्थिक संरचनाओं और रणनीतिक प्राथमिकताओं वाले नए सदस्यों के शामिल होने से मेगा-विज्ञान परियोजनाओं पर सहमति बनाना अत्यंत जटिल हो गया है।
  • भू-राजनीतिक विश्वास की कमी: रणनीतिक मतभेद, विशेष रूप से भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय तनाव, दोहरे उपयोग वाली (Dual-use) और अग्रणी (Frontier) प्रौद्योगिकियों में सहयोग को गंभीर रूप से बाधित करते हैं।
    • राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएँ इन देशों के लिये 5G/6G, कृत्रिम बुद्धिमत्ता या सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे महत्त्वपूर्ण अवसंरचना क्षेत्रों में गहन सहयोग को अत्यंत असंभव बना देती हैं, भले ही BRICS के संयुक्त घोषणापत्र कुछ और संकेत दें।
  • संस्थागत रिक्तताएँ: यूरोपीय यूनियन के विपरीत, जिसके पास अपने होराइज़न अनुसंधान कार्यक्रमों के प्रबंधन के लिये मज़बूत और केंद्रीकृत संस्थागत ढाँचा है, BRICS एक तदर्थ (ad-hoc) और घूर्णन अध्यक्षता मॉडल पर कार्य करता है।
    • एक स्थायी, केंद्रीकृत STI सचिवालय की कमी के कारण निरंतरता का अभाव रहता है, एक मेज़बान देश द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं की गति अक्सर अध्यक्षता बदलने पर प्रभावित होती है।
  • विखंडित और सीमित वित्तपोषण: BRICS की STI पहलों के लिये वित्तीय प्रतिबद्धताएँ अभी भी सीमित हैं और अत्यधिक विकेंद्रीकृत बनी हुई हैं।
    • यद्यपि न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) मौजूद है, यह परंपरागत रूप से भौतिक अवसंरचना (जैसे– सड़कें, जल परियोजनाएँ) पर केंद्रित रहा है, न कि सीमा-पार मेगा-विज्ञान परियोजनाओं या डीप-टेक नवाचार केंद्रों के लिये समर्पित बड़े पैमाने के वित्तपोषण तंत्र स्थापित करने पर।
  • निजी क्षेत्र का कमज़ोर एकीकरण: BRICS की STI पहलें मुख्यतः राज्य-प्रेरित हैं और अधिकांशतः सरकारी मंत्रालयों तथा सार्वजनिक अनुसंधान संस्थानों (जैसे– भारत में CSIR) पर निर्भर करती हैं।
    • निजी क्षेत्र की प्रमुख टेक कंपनियों, वेंचर कैपिटल और ज़मीनी स्तर के स्टार्टअप ईकोसिस्टम के साथ गहन सहभागिता का स्पष्ट अभाव है, जबकि यही आधुनिक तकनीकी नवाचार के वास्तविक इंजन हैं।

BRICS STI सहयोग को मज़बूत करने हेतु किन सुधारों की आवश्यकता है?

  • संस्थागत सुदृढ़ीकरण और केंद्रीकरण: BRICS को एक स्थायी STI सचिवालय की आवश्यकता है ताकि घूर्णन अध्यक्षता से परे निरंतरता सुनिश्चित की जा सके तथा परियोजनाओं का प्रभावी प्रबंधन किया जा सके।
    • एक BRICS प्रौद्योगिकी गठबंधन सहयोग को और अधिक एकीकृत, निचले स्तर से ऊपर विकसित होने वाले नवाचार पारिस्थितिक तंत्र की ओर ले जा सकता है।
  • मेगा-साइंस संयुक्त मिशन: विखंडित परियोजनाओं के बजाय, ब्रिक्स को फ्लैगशिप मेगा-साइंस पहल में निवेश करना चाहिये। साझा उपग्रह बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान नेटवर्क जैसे बड़े मिशनों के माध्यम से एक गहरे तथा दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।
  • सक्रिय तकनीकी शासन: BRICS को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा शासन और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझा मानकों की ओर बढ़ना चाहिये, साथ ही निर्बाध नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिये बौद्धिक संपदा ढाँचे को मज़बूत करना चाहिये।
  • निजी क्षेत्र का एकीकरण: BRICS और B2B टेक कॉरिडोर जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्टार्टअप्स, वेंचर कैपिटल और उद्योग से जुड़े खिलाड़ियों की अधिक भागीदारी आवश्यक है, ताकि अनुसंधान को स्केलेबल तथा व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य परिणामों में बदला जा सके।
  • समर्पित अनुसंधान एवं विकास (R&D) वित्तीय संरचना: जबकि न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) भौतिक अवसंरचना के वित्तपोषण में उत्कृष्ट है, यह उच्च-जोखिम और प्रारंभिक चरण के वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये अनुकूलित नहीं है।
    • BRICS को एक समर्पित STI नवाचार कोष की आवश्यकता है, जो विशेष रूप से सीमा-पार अनुसंधान एवं विकास (R&D), डीप-टेक इनक्यूबेशन और संयुक्त पेटेंट के व्यवसायीकरण के लिये संसाधनों को एकत्रित करे।

निष्कर्ष

यद्यपि ब्रिक्स देशों के बीच वैज्ञानिक साझेदारी बढ़ी है, लेकिन इसकी सफलता के लिये सुदृढ़ संस्थागत आधार और अधिक निवेश की आवश्यकता है। वर्ष 2026 में भारत की अध्यक्षता इस समूह के ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) सहयोग को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने तथा इसे और अधिक प्रभावी बनाने का सुनहरा मौका प्रदान करती है।

दृष्टि मेन्स प्रश्न:

प्रश्न. BRICS तकनीकी-बहुध्रुवीयता के लिये एक मंच के रूप में उभर रहा है। इसके महत्त्व और सीमाओं की चर्चा कीजिये।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. BRICS क्या है?
BRICS 11 उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जिसका उद्देश्य बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देना, वैश्विक शासन में सुधार करना और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को सशक्त बनाना है।

2. वर्ष 2015 के BRICS STI MoU का क्या महत्त्व है?
इसने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) को एक प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित किया और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) सहयोग के लिये BRICS STI फ्रेमवर्क कार्यक्रम की शुरुआत की।

3. BRICS युवा वैज्ञानिक फोरम (YSF) क्या है?
यह एक मंच है जिसे वर्ष 2015 में युवा वैज्ञानिकों के बीच नेटवर्किंग और सहयोग को बढ़ावा देने के लिये शुरू किया गया था, जिसकी पहली बैठक वर्ष 2016 में बंगलुरु में आयोजित हुई थी।

4. BRICS STI सहयोग में प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
मुख्य समस्याओं में अनुसंधान एवं विकास (R&D) में असमानता, भू-राजनीतिक तनाव, संस्थागत ढाँचे की कमी, सीमित वित्तपोषण और निजी क्षेत्र की कमज़ोर भागीदारी शामिल हैं।

5. BRICS STI सहयोग को मज़बूत करने के लिये किन सुधारों की आवश्यकता है?
मुख्य उपायों में एक स्थायी STI सचिवालय की स्थापना, डीप-टेक फंड का निर्माण, मेगा-विज्ञान परियोजनाओं को बढ़ावा देना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को एकीकृत करना शामिल हैं।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)

प्रिलिम्स

प्रश्न: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)

  1. न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना APEC द्वारा की गई है। 
  2. न्यू डेवलपमेंट बैंक का मुख्यालय शंघाई में है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों 

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (b)


प्रश्न. हाल ही में चर्चा में रहा 'फोर्टालेजा डिक्लेरेशन' किससे संबंधित है? (2015) 

(a) आसियान

(b) ब्रिक्स

(c) ओईसीडी

(d) विश्व व्यापार संगठन

उत्तर: (b)


प्रश्न. BRICS के रूप में ज्ञात देशों के समूह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2014)

  1. BRICS का पहला शिखर सम्मेलन वर्ष 2009 में रिओ डी जेनेरियो में हुआ था।
  2. दक्षिण अफ्रीका BRICS समूह में शामिल होने वाला अंतिम देश था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c) 1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (b)

मेन्स

प्रश्न. भारत ने हाल ही में "नव विकास बैंक" (NDB) और साथ ही "एशियाई आधारिक संरचना निवेश बैंक" (AIIB) का संस्थापक सदस्य बनने के लिये हस्ताक्षर किये हैं। इन दो बैंकों की भूमिकाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न होंगी? भारत के लिये इन दो बैंकों के रणनीतिक महत्त्व पर चर्चा कीजिये। (2014)