भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते में कृषि सुरक्षा प्रावधान | 10 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा की घोषणा की है, यह घोषणा अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर पारस्परिक शुल्क घटाकर 18% करने के निर्णय के बाद की गई।
- इसे पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते की प्रस्तावना के रूप में देखा जा रहा है। यह रूपरेखा भारत को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के अमेरिकी बाज़ार तक वरीयतापूर्ण पहुँच प्रदान करती है। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करना है, साथ ही भारतीय किसानों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, भले ही इसके तहत भारत के पशु आहार बाज़ार को सीमित रूप से अमेरिका के लिये खोला गया हो।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (2026) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
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भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत भारतीय किसान कैसे सुरक्षित हैं?
- वर्जित वस्तुएँ: कृषि व्यापार में भारत अमेरिका के साथ 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष बनाए हुए है, जहाँ वर्ष 2024 में भारत का निर्यात 3.4 अरब डॉलर और आयात 2.1 अरब डॉलर रहा।
- अमेरिका 1.36 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाएगा।
- इसके अतिरिक्त एक सख्त “नेगेटिव लिस्ट” बनाए रखी गई है। इसके तहत अमेरिका को निम्नलिखित संवेदनशील कृषि उत्पादों पर कोई भी शुल्क रियायत नहीं दी गई है, जिनमें शामिल हैं:
- माँस, पोल्ट्री और डेयरी उत्पाद
- मुख्य अनाज (गेहूँ, चावल, मक्का, मोटे अनाज/मिलेट्स)
- फल और सब्ज़ियाँ (केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, साइट्रस फल, हरी मटर)
- अन्य वस्तुएँ, जैसे– सोयाबीन, चीनी, तिलहन, एथेनॉल और तंबाकू
- GM प्रतिबंध जारी: भारत ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) उत्पादों के लिये अपने बाज़ार खोलने से स्पष्ट रूप से इनकार किया है और विशेष रूप से अमेरिकी GM मक्का और सोयाबीन के प्रवेश को रोका है।
- भारतीय किसानों को बढ़ावा: भारत ने कई क्षेत्रों के लिये अमेरिकी बाज़ार में शुल्क-मुक्त प्रवेश सुनिश्चित किया है, जहाँ अनेक मामलों में शुल्क 50% से घटकर 0% हो गया है।
- कृषि निर्यात: भारतीय मसालों, चाय, कॉफी, काजू, ब्राज़ील नट्स और नारियल (तेल व कोपरा सहित) को शून्य शुल्क के साथ अमेरिकी बाज़ार तक पहुँच प्रदान की गई है।
- फल एवं सब्ज़ियाँ: आम, अमरूद, पपीता, एवोकाडो, केला तथा मशरूम के निर्यात को शुल्क उन्मूलन से लाभ प्राप्त होगा।
- प्रसंस्कृत वस्तुएँ: कुछ प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और जौ जैसे चुनिंदा अनाज भी शून्य शुल्क (ड्यूटी‑फ्री) के तहत आयात किये जाएंगे, जिससे भारत में निर्यात‑पूर्व मूल्य संवर्द्धन को प्रोत्साहन मिलेगा।
- पशु आहार का बाज़ार: भारत में मक्का और सोयाबीन का घरेलू उत्पादन, पोल्ट्री और पशुधन क्षेत्रों से बढ़ती मांग के अनुरूप नहीं रह पाया है। इस परिप्रेक्ष्य में, यह समझौता GM अनाजों पर प्रतिबंध को बनाए रखते हुए पशु आहार के आयात के लिये कुछ विशिष्ट अवसर प्रदान करता है।
- इस समझौते से संयुक्त राज्य अमेरिका भारत को ज्वार (लाल ज्वार) का निर्यात कर सकता है। इसे भारतीय पोल्ट्री उद्योग के लिये मक्का का एक महत्त्वपूर्ण गैर-जीएम विकल्प माना जा रहा है।
- डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेंस विद सॉल्युबल (DDGS): यह एथेनॉल उत्पादन का एक उप-उत्पाद है। यद्यपि यह GM मक्का से प्राप्त हो सकता है, भारत इसे केवल प्रसंस्कृत पशु आहार आगतों के रूप में ही अनुमति दे रहा है।
- यह पशुधन और पोल्ट्री के लिये प्रोटीन की आवश्यकताओं को पूरा करता है, बिना GM अनाजों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त किये।
संरक्षण संबंधी सुदृढ़ उपायों के साथ संतुलित बाज़ार का उदारीकरण
- जिन वस्तुओं के लिये बाज़ार खोला गया, उनके संदर्भ में भारत ने डंपिंग को रोकने हेतु प्रभावी उपाय अपनाए हैं—
- टैरिफ दर कोटा (TRQ): सेब और बादाम जैसी वस्तुओं पर लागू, जिनमें केवल निर्धारित मात्रा तक ही कम शुल्क दरों पर आयात की अनुमति होगी।
- चरणबद्ध कार्यान्वयन: कुछ शुल्कों में धीरे-धीरे कटौती की जाएगी (अधिकतम 10 वर्षों की अवधि पर), ताकि घरेलू उद्योगों को समायोजन का पर्याप्त समय मिल सके।
- न्यूनतम आयात मूल्य (MIP): वाइन और स्पिरिट पर लागू, जिससे केवल उच्च-मूल्य के प्रीमियम उत्पादों का ही आयात सुनिश्चित हो तथा घरेलू जन-उपभोग आधारित उद्योग को संरक्षण प्राप्त हो।
भारत का पशु आहार बाज़ार
- वर्तमान उत्पादन: संयुक्त राज्य कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, वर्ष 2025–26 में भारत का वार्षिक मक्का उत्पादन लगभग 43 मिलियन टन (mt) रहने का अनुमान है, जिसमें से लगभग 24 मिलियन टन विशेष रूप से पशु आहार उपयोग हेतु निर्धारित है। वहीं सोयाबीन उत्पादन लगभग 12.5 मिलियन टन के स्तर पर है।
- संयुक्त पशु आहार उद्योग: कुल संयुक्त पशु आहार उत्पादन लगभग 60 मिलियन टन आँका गया है, जिसमें 40 मिलियन टन पोल्ट्री, 18 मिलियन टन पशुधन तथा 2 मिलियन टन एक्वा/झींगा आहार शामिल है।
- घरेलू DDGS आपूर्ति: भारत में अनाज-आधारित एथेनॉल डिस्टिलरी वर्तमान में पशु आहार उद्योग को 3 मिलियन टन से अधिक DDGS की आपूर्ति कर रही हैं, जिसका अनुमान वर्ष 2025–26 में बढ़कर 4.2 मिलियन टन तक पहुँचना है।
- उपज संबंधी चुनौतियाँ: घरेलू उत्पादन निम्न उपज की समस्या से जूझ रहा है। मक्का की औसत उपज लगभग 3.75 टन प्रति हेक्टेयर है (जबकि अमेरिका में यह 11.25 टन प्रति हेक्टेयर है), सोयाबीन की उपज 1 टन प्रति हेक्टेयर से भी कम है (जबकि अमेरिका में लगभग 3.4 टन प्रति हेक्टेयर)।
मांग संचालक
- संचालक: बढ़ती आय, शहरीकरण, वर्ष 2050 तक 1.5 अरब तक पहुँचने की अपेक्षित जनसंख्या, प्रोटीन (दूध, अंडे, माँस) की ओर आहारिक बदलाव ला रही है, जिससे पशु आहार की मांग बढ़ रही है।
- उपभोग प्रक्षेपण (USDA रिपोर्ट):
- मक्का: मध्यम वृद्धि परिदृश्य में 34.7 मिलियन टन (2022-23) से 93 मिलियन टन (2050) तक अथवा तीव्र वृद्धि परिदृश्य में 200.2 मिलियन टन तक।
- सोयाबीन मील: मध्यम वृद्धि परिदृश्य में 6.2 मिलियन टन (2022-23) से 28.3 मिलियन टन (2050) तक अथवा तीव्र वृद्धि परिदृश्य में 68.3 मिलियन टन तक।
- आहार संरचना: मक्का एक महत्त्वपूर्ण घटक है, जो ब्रोयलर आहार का 55-65%, एग-लेयर आहार का 50-60% तथा पशु आहार का 15-20% है।
अमेरिका की भूमिका
- भारत की उत्पादन क्षमता मांग के अनुरूप नहीं बढ़ पाने के कारण अमेरिका इस कमी को पूरा करने में सक्षम है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) का अनुमान है कि तीव्र विकास परिदृश्यों के अनुसार वर्ष 2040 तक भारत को लगभग 46 मिलियन टन मक्का और 19 मिलियन टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ सकता है।
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दृष्टि मेन्स प्रश्न: प्रश्न: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता किस प्रकार निर्यात संवर्द्धन और घरेलू किसानों की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है? |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता महत्त्वपूर्ण क्यों है?
यह भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18% करता है, भारत को अमेरिकी बाज़ार में तरजीही पहुँच देता है और एक पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा तैयार करता है।
2. समझौते के तहत भारतीय किसानों की सुरक्षा कैसे की गई है?
अनाज, दुग्ध उत्पाद, माँस, दलहन, तिलहन, फल, इथेनॉल और तंबाकू जैसे संवेदनशील उत्पादों को बिना किसी टैरिफ रियायत के सख्त नकारात्मक सूची में रखा गया है।
3. किन कृषि निर्यातों को अमेरिका में शून्य-शुल्क (Zero-Duty) प्रवेश मिलेगा?
मसाले, चाय, कॉफी, काजू, नारियल, आम, अमरूद, पपीता, मशरूम और जौ जैसे उत्पादों को शून्य-शुल्क पहुँच प्रदान की गई है।
4. क्या यह समझौता भारत में GM फसलों के आयात की अनुमति देता है?
नहीं, GM मक्का और GM सोयाबीन पर प्रतिबंध बना रहेगा; केवल गैर-GM ज्वार और DDGS जैसे प्रसंस्कृत पशु-आहार इनपुट्स की अनुमति दी गई है।
5. इस समझौते में पशु-आहार बाज़ार क्यों महत्त्वपूर्ण है?
आय में वृद्धि और आहार संबंधी बदलावों के कारण पोल्ट्री और पशुधन चारे की मांग तेज़ी से बढ़ी है, जो घरेलू उत्पादन से आगे निकल गई है; इसलिये नियंत्रित आयात की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
मेन्स
प्रश्न. 'भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच संबंधों में खटास के प्रवेश का कारण वाशिंगटन का अपनी वैश्विक रणनीति में अभी तक भी भारत के लिये किसी ऐसे स्थान की खोज करने में विफलता है, जो भारत के आत्म-समादर और महत्त्वाकांक्षा को संतुष्ट कर सके।' उपयुक्त उदाहरणों के साथ स्पष्ट कीजिये।
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