आनुवंशिक विविधता हेतु बाघ का स्थानांतरण
स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स
हाल ही में ओडिशा सरकार द्वारा महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व से एक बाघिन को ओडिशा के सिमिलिपाल टाइगर रिज़र्व (STR) में स्थानांतरित किया, जिसका नाम जमुना है।
- इस स्थानांतरण का उद्देश्य सिमिलिपाल के बाघों की आनुवंशिकी में विविधता को बढ़ाना था, जहाँ बाघों की कम संख्या के कारण इनमें अंतःप्रजनन (अतिसंबद्ध जीवों का समागम) को लेकर चिंताएँ हैं ।
इस स्थानांतरण से संबंधित मुख्य तथ्य क्या हैं?
- पूर्व के स्थानांतरण प्रयास: वर्ष 2018 में, सुंदरी नामक एक बाघिन को ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिज़र्व में स्थानांतरित किया गया था ।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा स्थानांतरण परियोजना को स्वीकृति प्रदान की जाती है।
- काले बाघों का स्थानांतरण:
- बाघों की संख्या: वर्ष 2024 में किये गए ओडिशा बाघ आकलन के अनुसार सिमिलिपाल में कुल 24 वयस्क बाघ हैं, जिनमें स्यूडो मेलानिस्टिक बाघों की विशेष उपस्थिति दर्ज की गई थी।
- सिमिलिपाल टाइगर रिज़र्व ही एकमात्र ऐसा पर्यावास है जहाँ ये काले बाघ पाए जाते हैं।
- बाघों की संख्या: वर्ष 2024 में किये गए ओडिशा बाघ आकलन के अनुसार सिमिलिपाल में कुल 24 वयस्क बाघ हैं, जिनमें स्यूडो मेलानिस्टिक बाघों की विशेष उपस्थिति दर्ज की गई थी।
- अंतःप्रजनन संबंधी चिंताएँ: सर्वाधिक स्यूडो मेलानिस्टिक बाघ (24 वयस्कों में से 13) सिमिलिपाल में है जिसके कारण इनके बीच अंतःप्रजनन और आनुवंशिक विविधता को लेकर चिंताएँ हैं, जिसके फलस्वरूप बाह्य आनुवंशिक इनपुट की आवश्यकता होती है।
- आगामी पहल: सिमिलिपाल में एक मेलेनिस्टिक टाइगर सफारी स्थापित करने की योजना की जा रही है, जो विश्व में इस प्रकार की पहली सफारी होगी।
नोट:
- एक आनुवंशिक लक्षण के कारण ब्लैक अथवा स्यूडो मेलानिस्टिक बाघ अस्तित्व में आते हैं, जिससे एक अद्वितीय लक्षणप्ररूप का निर्माण होता है और यह उनकी आनुवंशिक विविधता की कमी को इंगित करता है।
- ये बाघ शरीर पर चौड़ी और मिश्रित धारियों से अभिलक्षित होते हैं।
सिमिलिपाल टाइगर रिज़र्व से संबंधित मुख्य तथ्य क्या हैं?
- अवस्थिति: सिमिलिपाल बाघ अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान ओडिशा के मयूरभंज ज़िले में अवस्थित है।
- इसे वर्ष 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत बाघ अभयारण्य के रूप में अभिहित किया गया था।
- वर्ष 2009 में UNESCO ने सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान को बायोस्फीयर रिज़र्व की सूची में शामिल किया।
- भूगोल: जोरंडा और बरेहिपानी जैसे जलप्रपात तथा खैरीबुरू एवं मेघाशिनी चोटियाँ सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान में स्थित हैं।
- बुरहाबलंगा, पलपला बंदन, सालंदी, खैरी और देव नदियाँ इससे होकर गुज़रती हैं।
- इसका नाम 'सिमुल' (रेशमी कपास) वृक्ष के नाम पर रखा गया है।
- जैवविविधता: यहाँ मुख्यतः उष्णकटिबंधीय आद्र पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
- स्तनधारी जीव: यहाँ बाघ, तेंदुए, सांभर हिरण, बार्किंग हिरण, गौर, वन्य बिल्लियाँ, जंगली सूअर, चार सींग वाले मृग, जायंट गिलहरी और सामान्य लंगूर पाए जाते हैं।
- पक्षी प्रजातियाँ: यहाँ ग्रे हॉर्नबिल, भारतीय पाइड हॉर्नबिल और मालाबार पाइड हॉर्नबिल जैसी विभिन्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- सरीसृप: मगर प्रजाति के मगरमच्छ खैरी और देव नदियों में पाए जाते हैं।
- मूल जनजातियाँ: यहाँ कोल्हा, संथाल, भूमिजा, बथुडी, गोंड, खड़िया, मांकड़िया और सहारा जैसी मूल जनजातियाँ निवास करती हैं।
- ये जनजातियाँ पवित्र उपवनों की उपासना करते हैं जिन्हें झरिया कहा जाता है।
ताडोबा अंधारी टाइगर रिज़र्व से संबंधित मुख्य तथ्य क्या हैं?
- अवस्थिति: यह महाराष्ट्र में स्थित है और राज्य का सबसे पुराना और सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।
- ताड़ोबा/तारु संबंद्ध क्षेत्र के जनजातीय समुदायों के स्थानीय देवता हैं जिनकी ये समुदाय उपासना करते हैं।
- अंधारी नाम अंधारी नदी से लिया गया है जो इस अभ्यारण्य से होकर बहती है।
- भूगोल: इसमें दो प्रमुख झीलें, ताडोबा झील और कोल्सा झील तथा ताडोबा नदी स्थित हैं।
- जैवविविधता:
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्नप्रिलिम्स:प्रश्न. निम्नलिखित बाघ आरक्षित क्षेत्रों में "क्रांतिक बाघ आवास (Critical Tiger Habitat)" के अंतर्गत सबसे बड़ा क्षेत्र किसके पास है? (2020) (a) कॉर्बेट उत्तर: (c) प्रश्न. निम्नलिखित संरक्षित क्षेत्रों पर विचार कीजिये: (2012)
उपर्युक्त में से किसे बाघ अभयारण्य घोषित किया गया है? (a) केवल 1 और 2 उत्तर: (b) |
भारत के आगामी अंतरिक्ष स्टेशन हेतु जैव प्रौद्योगिकी प्रयोग
स्रोत: द हिंदू
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation- ISRO) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology- DBT) ने प्रयोगों को डिज़ाइन करने और संचालित करने के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं, जिन्हें बाद में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station- BAS) के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिसका विकास वर्ष 2028 और 2035 के बीच किया जाना है।
नोट: इसरो-DBT सहयोग इस वर्ष जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा BIOE3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोज़गार हेतु जैव प्रौद्योगिकी) नीति नामक एक अन्य पहल से उपजा है जिसका उद्देश्य भारत में 'जैव-विनिर्माण' को प्रोत्साहित करना है। DBT के अधिकारियों ने कहा कि जैव-अर्थव्यवस्था 2030 तक 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर की होगी।
इसरो और DBT ने अंतरिक्ष प्रयोगों के लिये सहयोग क्यों किया है?
अंतरिक्ष मिशनों में मुख्य चुनौतियाँ पोषक तत्त्वों की निरंतर उपलब्धता, खाद्य संरक्षण, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण और विकिरण, कैंसर, मोतियाबिंद, हड्डियों तथा मांसपेशियों की क्षति जैसे स्वास्थ्य संबंधी खतरे आदि हैं। समझौता ज्ञापन जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग करके इन मुद्दों को हल करने में मदद करेगा।
संभावित प्रयोग:
- अंतरिक्ष यात्रियों में मांसपेशियों की हानि पर भारहीनता के प्रभावों की जाँच करना।
- उन शैवाल प्रजातियों की पहचान करना जो पोषक तत्त्वों के रूप में काम कर सकती हैं या खाद्य संरक्षण को बढ़ा सकती हैं।
- जेट ईंधन उत्पादन के लिये विशिष्ट शैवाल के प्रसंस्करण की खोज करना।
- अंतरिक्ष स्टेशनों पर व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर विकिरण के प्रभाव का आकलन करना।
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) क्या है?
- BAS भारत का प्रस्तावित स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये बनाया जाएगा। इसे तीन चरणों में बनाया जाएगा और इसमें पाँच मॉड्यूल होंगे।
- पहला मॉड्यूल, जिसे BAS-1 के नाम से जाना जाता है, भारत वर्ष 2028 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन प्रक्षेपित करेगा, भारत वर्ष 2035 तक इसे क्रियाशील करने की योजना बना रहा है तथा वर्ष 2040 तक मानवयुक्त चंद्र मिशन को पूरा करने की योजना बना रहा है।
- BAS के संबंध में मुख्य विवरण:
- कक्षा: BAS पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 400-450 किलोमीटर की ऊँचाई पर करेगा।
- वजन: स्टेशन का वजन लगभग 52 टन होगा।
- चालक दल: अंतरिक्ष यात्री 15-20 दिनों तक कक्षा में रह सकेंगे ।
- मॉड्यूल: BAS में क्रू कमांड मॉड्यूल, हैबिटेट मॉड्यूल, प्रोपल्शन मॉड्यूल और डॉकिंग पोर्ट होंगे।
- उद्देश्य: BAS का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये किया जाएगा, जिसमें सूक्ष्मगुरुत्व प्रयोग, पृथ्वी अवलोकन और नवाचार को बढ़ावा देना शामिल है।
- सहयोग: BAS अन्य देशों और अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा।
- कार्यक्रम: इसरो इस कार्यक्रम का नेतृत्व करेगा, जिसमें उद्योग, शिक्षा और अन्य राष्ट्रीय एजेंसियाँ भी शामिल होंगी।
अन्य अंतरिक्ष स्टेशन
- अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) संदर्भ:
- ISS वर्ष 1998 से अमेरिका, कनाडा, रूस और जापान सहित कई देशों के सहयोग से कार्यरत है।
- भू-राजनीतिक गतिशीलता और लागत कारकों में बदलाव के कारण, अनुमान है कि वर्ष 2030 तक ISS को बंद कर दिया जाएगा, जिससे देश अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशनों पर विचार करने के लिये प्रेरित होंगे।
- तियानगोंग:
- चीन ने सफलतापूर्वक अपना तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित कर लिया है, जो नवंबर 2022 से पूरी तरह से चालू हो जाएगा।
भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में हाल की प्रमुख उपलब्धियाँ
- हाल के प्रमुख सफल मिशन:
- प्रक्षेपण वाहनों में प्रगति:
- अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के लिये मिशन:
- अन्य प्रमुख घटनाक्रम:
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)प्रश्न. "यह प्रयोग तीन ऐसे अंतरिक्षयानों को काम में लाएगा जो एक समबाहु त्रिभुज की आकृति में उड़ान भरेंगे जिसमें प्रत्येक भुजा एक मिलियन किलोमीटर लंबी है और यानों के बीच लेज़र चमक रही होंगी।" कथित प्रयोग किसे संदर्भित करता है? (2020) (a) वॉयेजर-2 उत्तर: (d) प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? केवल 1 उत्तर: (c) |
महादेई वन्यजीव अभयारण्य
स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स
हाल ही में गोवा के महादेई वन्यजीव अभयारण्य (WLS) में वर्ष 2020 के बाद पहली बार एक वयस्क बाघिन और तीन शावकों को देखा गया।
अवस्थिति और भूगोल:
- WLS उत्तरी गोवा और बेलगावी के बीच स्थित चोरला घाट के पास स्थित है। इसकी सीमा महाराष्ट्र और कर्नाटक दोनों से लगती है।
- इस अभयारण्य से होकर महादेई नदी बहती है।
पारिस्थितिकी महत्त्व:
- गोवा में मोलेम राष्ट्रीय उद्यान जैसे अन्य संरक्षित क्षेत्रों के साथ-साथ महादेई WLS पश्चिमी घाट का हिस्सा है। यह क्षेत्र विश्व की सबसे बड़ी बाघ आबादी की मेज़बानी के लिये विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।
- यह अभयारण्य वन्यजीव गलियारों के नेटवर्क में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो सह्याद्री टाइगर रिज़र्व (महाराष्ट्र) और काली टाइगर रिज़र्व (कर्नाटक) में बाघों की आबादी को जोड़ता है।
अद्वितीय वनस्पति और जंतु:
- विशेष रूप से, महादेई WLS में वज़रा फॉल्स गंभीर रूप से लुप्तप्राय लंबी-चोंच वाले गिद्धों के लिये घोंसले के रूप में कार्य करता है, जो पक्षी संरक्षण के लिये अभयारण्य के महत्त्व को रेखांकित करता है।
संरक्षण स्थिति और सिफारिशें:
- गोवा भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसके पश्चिमी घाट का संपूर्ण भाग राज्य संरक्षण में है, तथा महादेई WLS इस क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।
- इससे पहले, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority- NTCA) ने इस अद्वितीय क्षेत्र में बाघों की आबादी के संरक्षण प्रयासों को बढ़ाने के लिये वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत महादेई WLS को टाइगर रिज़र्व के रूप में नामित करने की सिफारिश की थी।
और पढ़ें: महादेई वन्यजीव अभयारण्य
मनी लॉन्ड्रिंग के लिये म्यूल अकाउंट
स्रोत: बिजनेस स्टैंडर्ड
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के लिये म्यूल बैंक अकाउंट का उपयोग करके अंतर्राष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा स्थापित अवैध भुगतान गेटवे जैसे पीसपे, RTX पे आदि के बारे में अलर्ट जारी किया है।
- म्यूल अकाउंट एक बैंक खाता है जिसका उपयोग अवैध गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिये किया जाता है।
- मनी म्यूल वह व्यक्ति होता है जो किसी अन्य व्यक्ति की ओर से अवैध रूप से अर्जित धन को स्थानांतरित करता है।
- बहुराष्ट्रीय साइबर अपराधी शेल कंपनियों और व्यक्तियों के खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में करते हैं, तथा बैंकों द्वारा दी जाने वाली थोक भुगतान सुविधा का लाभ उठाते हैं।
- शेल कंपनी वह कंपनी होती है जिसका कोई सक्रिय व्यावसायिक परिचालन या महत्त्वपूर्ण परिसंपत्ति नहीं होती।
- ये सभी आवश्यक रूप से अवैध नहीं हैं, लेकिन इनका उपयोग कानून प्रवर्तन या जनता से व्यवसाय स्वामित्व को छिपाने के लिये अवैध रूप से किया जा सकता है।
- बैंकों द्वारा दी जाने वाली थोक भुगतान सुविधा व्यवसायों और संगठनों को एक ही लेनदेन में विभिन्न लाभार्थियों को कई भुगतान करने की अनुमति देती है।
और पढ़ें: मनी लॉन्ड्रिंग
समुद्री शैवाल के आयात हेतु नए दिशा-निर्देश
स्रोत: TH
हाल ही में केंद्र ने उच्च गुणवत्ता वाले बीज तत्त्व या जर्मप्लाज़्म के आयात का समर्थन करने हेतु 'भारत में जीवित समुद्री शैवाल के आयात के लिये दिशानिर्देश' जारी किये, जिसका उद्देश्य तटीय समुदायों के लिये आजीविका के अवसरों में वृद्धि करना है।
दिशानिर्देश:
- समुद्री शैवाल आयात के लिये रूपरेखा और प्रक्रियाएँ:
- भारत में जीवित समुद्री शैवाल के आयात हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ एक नियामक ढाँचा स्थापित किया गया है, जिसमें कीटों, बीमारियों और जैव सुरक्षा जोखिमों को रोकने के लिये संगरोध, जोखिम मूल्यांकन तथा आयात के बाद की निगरानी शामिल है।
- भारत के समुद्री शैवाल उद्योग को सीमित बीज उपलब्धता तथा गुणवत्ता संबंधी समस्याओं से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, विशेष रूप से व्यापक रूप से खेती की जाने वाली कप्पाफाइकस प्रजाति (Kappaphycus species) के संदर्भ में।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY):
- PMMSY का लक्ष्य वर्ष 2025 तक भारत के समुद्री शैवाल उत्पादन को 1.12 मिलियन टन से अधिक तक बढ़ाना है, जिसमें समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के लिये तमिलनाडु में बहुउद्देशीय समुद्री शैवाल पार्क जैसी प्रमुख पहल शामिल हैं।
- धारणीय तथा ज़िम्मेदारीपूर्ण संवर्द्धन हेतु प्रोत्साहन:
- ये दिशानिर्देश पर्यावरणीय दृष्टि से धारणीय एवं आर्थिक दृष्टि से लाभकारी समुद्री शैवाल की खेती को प्रोत्साहित करते हैं।
- नई प्रजातियों के आगमन से अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलता है तथा लाल, भूरे और हरे शैवाल सहित विविध समुद्री शैवाल प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।
और पढ़ें: समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने पर राष्ट्रीय सम्मेलन
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मेडिकल प्रवेश में दिव्यांगों के अधिकारों का विस्तार
स्रोत: HT
सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त दिव्यांगता मानदंडों के आधार पर व्यक्तियों को शिक्षा के अवसरों से वंचित करने के खिलाफ फैसला सुनाया है। इसने दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्डों को यह मूल्यांकन करने का निर्देश दिया कि क्या किसी व्यक्ति की दिव्यांगता वास्तव में उसे सफलतापूर्वक पाठ्यक्रम पूरा करने से रोकती है।
- यह निर्णय वर्ष 1997 के ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन को दी गई चुनौतियों के बीच आया है, जिसके तहत पहले 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को MBBS पाठ्यक्रमों से बाहर रखा गया था।
- सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि 40% या उससे अधिक की मानक दिव्यांगता (या दिव्यांगता के आधार पर अन्य निर्धारित प्रतिशत) होने मात्र से किसी अभ्यर्थी को आवेदित पाठ्यक्रम के लिये पात्र होने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
- यह व्यक्तिगत मूल्यांकन के महत्व पर बल देता है तथा दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत समावेशी नीतियों की वकालत करता है।
- वर्ष 2016 RPwD अधिनियम दिव्यांगता अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनों का समर्थन करता है, जिसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के पूर्ण अधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा देना और उनकी रक्षा करना है।
- यह व्यक्तिगत मूल्यांकन के महत्व पर बल देता है तथा दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत समावेशी नीतियों की वकालत करता है।
- दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिनियम के कार्यान्वयन की देखरेख करता है। दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड (DAB ) एक नामित पैनल है जो व्यक्तियों में दिव्यांगता की सीमा का मूल्यांकन और प्रमाणन करने के लिये स्थापित किया गया है।
- सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम निर्णय के अनुसार, DAB को यह सकारात्मक रूप से दर्ज करना चाहिये कि क्या अभ्यर्थी की दिव्यांगता, उसके संबंधित पाठ्यक्रम में आगे बढ़ने के मार्ग में बाधा बनेगी या नहीं, तथा यदि ऐसा प्रतीत होता है तो उसे कारण भी बताना चाहिये।
और पढ़ें: भारत में दिव्यांगजन, मेडिकल कॉलेज की सीटें और नए नियम


