डेली न्यूज़ (24 Dec, 2020)



गैस इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिये निवेश

चर्चा में क्यों?

सरकार वर्ष 2024 तक देश में गैस क्षेत्र के बुनियादी ढाँचे को विकसित करने और वर्ष 2030 तक ऊर्जा क्षेत्र में गैस की हिस्सेदारी 15% तक बढ़ाने के उद्देश्य से लगभग 60 बिलियन अमरीकी डॉलर का निवेश करेगी।

  • वर्तमान में देश के कुल ऊर्जा मिश्रण गैस की हिस्सेदारी केवल 6% है

प्रमुख बिंदु

प्रस्तावित अवसंरचना योजना:

  • इसमें पाइपलाइन, LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) टर्मिनल और CGD (सिटी गैस वितरण) नेटवर्क शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय गैस ग्रिड को पूरा करने के लिये लगभग 14,300 किलोमीटर अतरिक्त पाइपलाइनों को विकसित करने की परिकल्पना की गई है जो कि विकास के विभिन्न चरणों में हैं।
  • वर्तमान में, देश में 6 LNG पुनः गैसीकरण टर्मिनल परिचालित हैं।
    • सरकार आगे भी देश भर में 1,000 LNG ईंधन स्टेशनों के निर्माण की योजना बना रही है।
  • 400 ज़िलों में फैले 232 भौगोलिक क्षेत्रों में CGD परियोजनाओं के कवरेज का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 53% और कुल जनसंख्या के 70% को कवर करने की क्षमता है।

राष्ट्रीय गैस ग्रिड: 

  • वर्ष 2000 में जब एक राष्ट्रीय गैस ग्रिड (National Gas Grid- NGG) की अवधारणा की संकल्पना की गई थी, तब से भारत ने 16,000 किमी. से अधिक गैस नेटवर्क का निर्माण किया है। हाल की पहलों में शामिल हैं:
    • प्रधानमंत्री उर्जा गंगा परियोजना: यह उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती है।
    • उत्तर-पूर्व क्षेत्र (NER) गैस ग्रिड: यह असम, सिक्किम, मिज़ोरम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय से होकर गुज़रेगी।

सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क:

  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) अधिनियम, 2006 के तहत, PNGRB देश के एक निर्दिष्ट भौगोलिक क्षेत्र (GA) में एक सिटी गैस वितरण (City Gas Distribution-CGD नेटवर्क विकसित करने के लिये संस्थाओं को प्राधिकार देता है।
  • CGD सेक्टर के चार अलग-अलग खंड हैं, कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) को मुख्य रूप से वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और पाइप्ड नेचुरल गैस (Piped Natural Gas- PNG) का उपयोग घरेलू, वाणिज्यिक तथा औद्योगिक क्षेत्र में किया जाता है।

संबंधित सरकारी नवाचार:

  • प्राकृतिक गैस विपणन सुधार: हाल ही में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने तेल और गैस के घरेलू अन्वेषण एवं उत्पादन को बढ़ाने के लिये अन्वेषण तथा लाइसेंसिंग क्षेत्र में सुधारों पर नीतिगत ढाँचे को मंज़ूरी दी है।
  • इंडियन गैस एक्सचेंज: देश में एक कुशल एवं मज़बूत गैस बाज़ार और गैस के कारोबार को बढ़ावा देने के लिये जून 2020 में भारत के पहले राष्ट्रीय स्तर के स्वचालित गैस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का अनावरण किया गया था।
  • प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: इसका उद्देश्य गरीब परिवारों को निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन प्रदान करना है।
  • Gas4India कैंपेन: यह लोगों को ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस का उपयोग करने के राष्ट्रीय, सामाजिक, आर्थिक एवं पारिस्थितिक लाभों से अवगत कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया एक मल्टीमीडिया, मल्टी-इवेंट अभियान है।
  • हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (Hydrocarbon Exploration and Licensing Policy- HELP): यह हाइड्रोकार्बन के अन्वेषण और उत्पादन के क्षेत्र में एक संविदात्मक और राजकोषीय मॉडल है। यह संपूर्ण अनुबंध क्षेत्र से सभी पारंपरिक और गैर-परंपरागत हाइड्रोकार्बन की खोज और उत्पादन के लिये एकल या सार्वभौमिक लाइसेंस प्रदान करता है।
  • इसके तहत संपीडित प्राकृतिक गैस आधारित सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन दिया जाता है।

पारदेशीय गैस पाइपलाइन:

  • तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (TAPI) पाइपलाइन।
  • मध्य पूर्व से इंडिया डीप-वाटर पाइपलाइन तक।

प्राकृतिक गैस

  • प्राकृतिक गैस मुख्य रूप से पृथ्वी के नीचे जमा पेट्रोलियमसे निकाली जाती है। यह कच्चे तेल की परत के ठीक ऊपर स्थित होती है, क्योंकि गैसें तेल की तुलना में हल्की होती हैं।
  • उच्च तापमान और दबाव से पेट्रोलियम और कोयले के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से पृथ्वी के नीचे दबे पौधों और जानवरों के अवशेषों का रुपांतरण होता है।
  • भारत में, जैसलमेर, कृष्णा गोदावरी डेल्टा, त्रिपुरा और मुंबई के कुछ अपतटीय क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस संसाधन मौजूद हैं।
  • गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1984 में प्राकृतिक गैस के परिवहन और बाज़ार के लिये एक सार्वजनिक क्षेत्र के रूप में की गई थी।

गैस आधारित अर्थव्यवस्था की आवश्यकता:

ऊर्जा से युक्त:

  • प्राकृतिक गैस कैलोरी मान के संदर्भ में किसी भी जीवाश्म ईंधन से अधिक ऊर्जा का उत्पादन करती है।

स्वच्छ ईंधन:

  • पर्यावरण के अनुकूल, सुरक्षित और सस्ता ईंधन होने के कारण प्राकृतिक गैस कोयला एवं अन्य तरल ईंधनों की तुलना में एक बेहतर ईंधन है।

उत्सर्जन प्रतिबद्धताएँ:

  • भारत ने दिसंबर 2015 में COP-21 में पेरिस समझौते के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की, इसके अनुसार भारत वर्ष 2030 तक वर्ष 2005 के स्तर के 33% -35% तक कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा।

विविध अनुप्रयोग:

  • प्राकृतिक गैस का उपयोग घरेलू रसोई ईंधन, परिवहन क्षेत्र के ईंधन के साथ-साथ उर्वरक उद्योगों और वाणिज्यिक इकाइयों के लिये ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

प्रगति का सूचक:

  •  वैश्विक मोर्चे पर, प्राकृतिक गैस के प्रयोग से सराहनीय परिणाम सामने आ रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया भर में पहली बार प्राकृतिक गैस द्वारा उत्पादित विद्युत की मात्रा कोयले की तुलना में अधिक थी।

स्रोत-इंडियन एक्सप्रेस


कैच द रेन: राष्ट्रीय जल मिशन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में राष्ट्रीय जल मिशन (National Water Mission-NWM), जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) ने नेहरू युवा केंद्र संगठन (Nehru Yuva Kendra Sangathan-NYKS), युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (Ministry of Youth Affairs and Sports) के सहयोग से “कैच द रेन” (Catch the Rain) नामक जागरूकता अभियान की शुरुआत की है।

प्रमुख बिंदु

  • टैग लाइन : "बारिश के पानी का संरक्षण, जहाँ भी संभव हो, जैसे भी संभव हो"।

उद्देश्य:

  • सभी स्थितियों के आधार पर जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल बारिश के पानी को संग्रहीत करने के लिये वर्षा जल संचयन संरचना (Rain Water Harvesting Structures- RWHS) का निर्माण करना।
  • अभियान के कार्यान्वयन के लिये प्रभावी प्रचार और सूचना, शिक्षा, संचार (Information, Education and Communication- IEC) गतिविधियों के माध्यम से ज़मीनी स्तर पर लोगों को शामिल करना।

गतिविधियाँ:

  • वाटर हार्वेस्टिंग हेतु गड्ढे बनाना, छत पर RWHS का निर्माण करना और चैकडैम बनाने के लिये प्रोत्साहित करना। 
  • संचयन की भंडारण क्षमता को बढ़ाने के लिये अतिक्रमणों और टैंकों की सिल्ट को हटाना।
  • पानी के उन चैनलों में से अवरोधों को हटाना जो जलग्रहण क्षेत्रों से पानी की आपूर्ति करते हैं।
  • जल को वापस लाने के लिये पारंपरिक जल संचयन संरचनाओं जैसेकि, छोटे कुएँ और गहरे बड़े कुओं की मरम्मत करना।
  • जल शक्ति अभियान-II की तैयारी के एक हिस्से के रूप में नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS) दिसंबर 2020 से मार्च 2021 तक देश के 623 ज़िलों में विभिन्न IEC गतिविधियों के माध्यम से 'कैच द रेन' जागरूकता अभियान का आयोजन करेगा।
    • IEC गतिविधियों में शैक्षिक और प्रेरणादायक कार्यक्रम, जन जागरूकता अभियान, दीवार लेखन, बैनर और ई-बैनर निर्माण सहित अनेक गतिविधियाँ शामिल होंगी।
  • राज्यों से प्रत्येक ज़िले में रेन सेंटर खोलने का अनुरोध किया गया है, जो सभी के लिये एक तकनीकी मार्गदर्शन केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

महत्त्व:

  • जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर ध्यान देने की आवश्यकता पर ज़ोर देने से युवा जल के महत्त्व को समझ सकेंगे। 
  • जल संरक्षण के मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता जल प्रबंधन के लिये एक एकीकृत दृष्टिकोण को अपनाने की और अग्रसारित करेगी। 
  • "शून्य अथवा केवल सीमित पानी को परिसर से बाहर निकालने" का विचार मिट्टी की नमी और भूजल स्तर में सुधार करने में मदद करेगा।
  • शहरी क्षेत्रों में यह सड़कों पर होने वाले जल भराव जोकि सडकों को छति पहुँचाता है को कम करेगा तथा शहरी बाढ़ को रोकने में सहायक होगा।

जल संरक्षण हेतु उठाए गए कदम

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA):

  • इसका उद्देश्य भूजल संचयन में सुधार, जल संरक्षण और भंडारण तंत्र का निर्माण करना है तथा इसने सरकार को अधिनियम के तहत परियोजना के रूप में जल संरक्षण की शुरुआत करने में सक्षम बनाया है।

जल क्रांति अभियान:

  • यह ब्लॉक-स्तरीय जल संरक्षण योजनाओं के माध्यम से गाँवों और शहरों में क्रांति लाने के लिये किया गया एक सक्रिय प्रयास है।
  • उदाहरण के लिये इसके तहत शुरू की गई जल ग्राम योजना का उद्देश्य जल संरक्षण और परिरक्षण हेतु जल की कमी वाले क्षेत्रों में दो मॉडल गाँवों को विकसित करना है।

राष्ट्रीय जल मिशन:

  • इसका उद्देश्य एकीकृत जल संसाधन विकास और प्रबंधन के माध्यम से जल का संरक्षण करना, अपव्यय को कम करना और राज्यों के बाहर तथा भीतर जल का अधिक समान वितरण सुनिश्चित करना है।

नीति आयोग का समग्र जल प्रबंधन सूचकांक:

  • इसका उद्देश्य जल के प्रभावी उपयोग के लक्ष्य को प्राप्त करना है।

जल शक्ति मंत्रालय तथा जल जीवन मिशन:

  • जल शक्ति मंत्रालय का गठन जल के मुद्दों से समग्र रूप से निपटने के लिये किया गया था।
  • जल जीवन मिशन का लक्ष्य वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में पाइप द्वारा जलापूर्ति सुनिश्चित है।

अटल भूजल योजना:

  • यह जल उपयोगकर्त्ता संघों, जल बजट, ग्राम-पंचायत-वार जल सुरक्षा योजनाओं की तैयारी और कार्यान्वयन के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी के साथ भूजल के स्थायी प्रबंधन हेतु केंद्रीय क्षेत्र की योजना है।

जल शक्ति अभियान:

  • इसकी शुरुआत जुलाई 2019 में देश में जल संरक्षण और जल सुरक्षा के लिये एक अभियान के रूप में की गई।

राष्ट्रीय जल पुरस्कार:

  • इस पुरस्कार का आयोजन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प विभाग, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
  • यह देश भर में व्यक्तियों और संगठनों द्वारा किये गए अच्छे कार्यों एवं प्रयासों तथा जल समृद्ध भारत के लिये सरकार के दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करता है।

स्रोत: पी.आई.बी


ग्रेट इंडियन बस्टर्ड हेतु ‘फायरफ्लाई बर्ड डाइवर्टर’

चर्चा में क्यों:

पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने वाइल्डलाइफ़ कंज़र्वेशन सोसाइटी (Wildlife Conservation Society- WCS), भारत के साथ मिलकर ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (Great Indian Bustard- GIB) की घनी आबादी वाले स्थानों पर एक अनूठी पहल के माध्यम से उन क्षेत्रों में ओवरहेड बिजली लाइनों पर “फायरफ्लाई बर्ड डायवर्टर” नामक युक्ति का प्रयोग किया है।

  • वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन सोसाइटी न्यूयॉर्क स्थित एक गैर-सरकारी संगठन है, जिसका उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े जंगली स्थानों को 14 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संरक्षित करना है।

Indian-Bustard

प्रमुख बिंदु:

“फायरफ्लाई बर्ड डायवर्टर” 

  • “फायरफ्लाई बर्ड डायवर्टर” विद्युत लाइनों पर स्थापित फ्लैप हैं। वे ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ जैसी पक्षी प्रजातियों के लिये परावर्तक के रूप में काम करते हैं। पक्षी उन्हें लगभग 50 मीटर की दूरी से पहचान सकते हैं और बिजली की लाइनों से टकराव से बचने के लिये अपनी उड़ान का मार्ग बदल सकते हैं।
  • छोटे पक्षी उड़ते समय अपनी दिशा बदल सकते हैं लेकिन बड़ी पक्षी प्रजातियों के लिये उनके शरीर के वजन और अन्य कारकों के कारण यह मुश्किल है।
  • चूंकि ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ न्यूनतम दृश्य क्षमता, अधिक वजन वाले पक्षी होते हैं, इसलिये उन्हें अपनी उड़ान मार्ग को तेज़ी से बदलना मुश्किल होता है, भले ही वे एक जीवित तार (Live Wire) के सामने आ जाएँ।
  • डायवर्टर को फायरफ्लाइज़ कहा जाता है क्योंकि वे रात में बिजली लाइनों पर चमकते हुए जुगनू की तरह दिखते हैं।

पृष्ठभूमि:

  • MoEFCC की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में थार क्षेत्र में कई ओवरहेड तारों के साथ बिजली लाइनें (विशेष रूप से उच्च-वोल्टेज संचरण लाइनें), ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के लिये सबसे बड़ा खतरा हैं और लगातार उच्च मृत्यु दर का कारण बन रही हैं।
  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हालिया सुनवाई में निर्देश दिया कि ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की आबादी वाले क्षेत्रों में बिजली लाइनों को भूमिगत रखा जाए।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB):

  • यह दुनिया के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है।
  • वैज्ञानिक नाम: आर्डियोटिस निग्रिसेप्स (Ardeotis Nigriceps)

पर्यावास:

  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड आमतौर पर न्यूनतम दृश्य क्षमता और शांति के साथ समतल खुले मैदानों में रहना पसंद करते हैं, इसलिये घास के मैदानों में अच्छी तरह से अनुकूलन करते हैं।
  • इसकी ज्यादातर आबादी राजस्थान और गुजरात तक ही सीमित है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में ये कम संख्या में पाए जाते हैं।

सुरक्षा की स्थिति:

खतरे:

  • विद्युत् लाइनों के साथ टकराव,
  • शिकार (अभी भी पाकिस्तान में प्रचलित),
  • सिंचाई और खेती की तकनीक

खनन

  • पवन टर्बाइन और सौर फार्म (फोटोवोल्टिक पावर स्टेशन)
  • वनों और घास के मैदानों में वनों की कटाई के नाम पर विदेशी वृक्षों/वृक्ष प्रजातियों का रोपण

स्रोत- द हिंदू


‘मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल’ का आर्मी संस्करण

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय सेना के लिये ‘मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल’ (MRSAM) का पहला परीक्षण किया गया है।

प्रमुख बिंदु

MRSAM का आर्मी संस्करण

  • यह भारतीय सेना के उपयोग हेतु रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तथा इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ (IAI) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है।
  • इसमें एक कमांड और कंट्रोल पोस्ट, मल्टी-फंक्शन रडार और मोबाइल लॉन्चर सिस्टम शामिल हैं।

‘मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल’ (MRSAM)

  • यह एक त्वरित प्रतिक्रिया वाली सुपरसोनिक मिसाइल है, जिसे दुश्मन के हवाई खतरों, जैसे- मिसाइल, विमान, गाइडेड बम और लड़ाकू विमान आदि को बेअसर करने के लिये विकसित किया गया है।
    • सुपरसोनिक मिसाइल ध्वनि की गति (मैक 1) से अधिक तेज़ होती हैं, किंतु वह माइक-3 से तेज़ नहीं हो सकती हैं।
  • सेना, नौसेना और वायु सेना के लिये इसके अलग-अलग संस्करण विकसित किये गए हैं।
    • मई 2019 में भारतीय नौसेना, DRDO और IAI ने ‘मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल’ (MRSAM) के नौसैनिक संस्करण का पहला परीक्षण किया था।

भारत-इज़राइल रक्षा सहयोग

  • इज़राइल लगभग दो दशकों से भारत के शीर्ष चार हथियार आपूर्तिकर्त्ताओं में से एक रहा है, जो प्रतिवर्ष भारत को लगभग 1 बिलियन डॉलर मूल्य की सैन्य बिक्री करता है।
  • भारतीय सशस्त्र बल द्वारा 30,000 करोड़ रुपए से अधिक की तीन DRDO-IAI की संयुक्त परियोजनाओं के तहत विकसित अत्याधुनिक बराक-8 सरफेस टू एयर मिसाइल प्रणाली को शामिल किया जा रहा है।
  • बीते कुछ वर्षों में भारतीय सशस्त्र बलों में इज़राइली हथियार प्रणालियों की एक विस्तृत शृंखला को शामिल किया है, जिसमें ‘फाल्कन एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल’, हेरॉन ड्रोन, हारोप ड्रोन और बराक एंटी-एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम आदि शामिल हैं।

Strategic-ties

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


ई-सेवा केंद्र

चर्चा में क्यों?

हाल ही में त्रिपुरा के उच्च न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा एक ई-सेवा केंद्र का उद्घाटन किया गया।

प्रमुख बिंदु:

ई-सेवा केंद्र: (e-Seva Kendra) :

  • प्रायोगिक आधार पर प्रत्येक राज्य के उच्च न्यायालयों में और एक ज़िला न्यायालय में ई-सेवा केंद्र बनाए गए हैं।
  • ये केंद्र सभी प्रकार की कानूनी सहायता प्रदान करेंगे और आम वादियों तथा अधिवक्ताओं के लिये वन-स्टॉप सेंटर के रूप में सेवा करने के लिये समर्पित हैं।
  • यह मुकदमों की स्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त करने और निर्णय और आदेशों की प्रतियाँ प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
  • ये केंद्र मामलों के ई-फाइलिंग में सहायता करते हैं।
  • ये केंद्र आम आदमी के लिये एक महत्त्वपूर्ण कदम और न्याय तक उसकी पहुँच के अधिकार का प्रतिनिधित्त्व करते हैं।

कानूनी सेवाएँ प्रदान करने के लिये अन्य तकनीकी पहलें:

टेली लॉ कार्यक्रम:

  • मुकदमेबाजी पूर्व चरण में मामलों को संबोधित करने के लिये इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा टेली-लॉ कार्यक्रम शुरू किया गया था।
  • वकीलों को वादियों से संबंधित करना: यह एक ऐसी सेवा है जो वकीलों को सुनवाई के लिये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं और टेलीफोन सेवाओं की सुविधा प्रदान करती है। इस सेवा का उद्देश्य विशेष रूप से हाशिए और वंचितों वर्गों तक न्याय की पहुँच उपलब्ध कराना है।
  • कॉमन सर्विस सेंटर: इस कार्यक्रम के तहत, पंचायत स्तर पर कॉमन सर्विस सेंटरों के विशाल नेटवर्क पर उपलब्ध वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, टेलीफोन/इंस्टेंट कॉलिंग सुविधाओं की स्मार्ट तकनीक का उपयोग वंचित समूहों, कमज़ोर, अप्राप्य समूहों और समुदायों को न्याय व्यवस्था से जोड़ने के लिये किया जाता है।

ई-कोर्ट परियोजना:

  • ई-कोर्ट परियोजना की अवधारणा उच्चतम न्यायालय की ई-कमेटी द्वारा प्रस्तुत ‘भारतीय न्यायपालिका में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के कार्यान्वयन के लिये राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना - 2005’ {National Policy and Action Plan for Implementation of Information and Communication Technology (ICT) in the Indian Judiciary – 2005} नामक रिपोर्ट के आधार पर ली गई थी। यह अखिल भारतीय परियोजना है, जिसकी निगरानी और वित्त पोषण विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा किया जाता है।

परियोजना के उद्देश्य:

  • ई-कोर्ट प्रोजेक्ट वादी चार्टर के माध्यम से विस्तृत रूप से कुशल और समयबद्ध नागरिक-केंद्रित सेवाएँ प्रदान करना।
  • न्यायालयों में निर्णय समर्थन प्रणाली को विकसित और स्थापित करना।
  • अपने हितधारकों को सूचना की पारदर्शिता और पहुँच प्रदान करने के लिये प्रक्रियाओं को स्वचालित करना।
  • न्यायिक वितरण प्रणाली को सस्ती, सुलभ, लागत प्रभावी, पूर्वानुमेय, विश्वसनीय और पारदर्शी बनाकर गुणात्मक और मात्रात्मक दोनों रूप से न्यायिक उत्पादकता को बढ़ाना।

स्रोत- इंडियन एक्सप्रेस


जनगणना रजिस्टरों की अपडेटिंग

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General of India- RGI) ने सभी राज्य समन्वयकों को जनगणना रजिस्टर अपडेट करने का आदेश दिया है।

  • जनगणना किसी दी गई आबादी के सदस्यों की व्यवस्थित तरीके से गणना करने, उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने तथा उसे अभिलेखित/रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया है।

प्रमुख बिंदु:

  • आदेश के बारे में: RGI ने सभी राज्य समन्वयकों को "चार्ज रजिस्टर" में क्षेत्र, इलाके, कॉलोनी या एक इमारत के नाम को अपडेट करने का आदेश दिया है। 
  • चार्ज रजिस्टर: चार्ज रजिस्टर प्रगणकों के बीच काम के वितरण को दर्शाता है और प्रत्येक अधिकारी द्वारा निरीक्षण किये जाने वाले हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) को चिह्नित करता है।
    • HLB डेटा संग्रह की प्राथमिक इकाई है।
  • चार्ज रजिस्टर का उपयोग: 
    • यह जनगणना से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है जो गणनाकर्त्ताओं को प्रथम चरण के दौरान जनगणना के लिये घरों की सूची, आवास जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register-NPR) संबंधी विवरण एकत्र करने में मदद करेगा।
    • इस रजिस्टर का उपयोग NPR की अपडेटिंग से संबंधित फील्ड वर्क में किया जाएगा क्योंकि जनगणना तथा NPR की अपडेटिंग दोनों में समान कार्यकर्त्ता ही शामिल होंगे।

निहितार्थ

  • कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना के कार्य को अनिश्चित काल के लिये निलंबित कर दिया गया था। RGI का आदेश इस बात का एक संकेत हो सकता है कि निकट भविष्य में जनगणना प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

भारत का महापंजीयक

(Registrar General of India)

  • वर्ष 1951 की जनगणना तक जनगणना संगठन की स्थापना प्रत्येक जनगणना के लिये तदर्थ आधार (Ad-hoc Basis) पर की गई थी।
  • भारत सरकार ने वर्ष 1949 महापंजीयक और पदेन जनगणना आयुक्त के तहत गृह मंत्रालय में एक ऐसे संगठन की स्थापना की जो जनसंख्या के आकार तथा उसके विकास आदि पर आँकड़ों का व्यवस्थित संग्रह विकसित करे।
  • बाद में, इस कार्यालय को देश में जन्म और मृत्यु अधिनियम, 1969 के पंजीकरण के कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी भी सौंपी गई।
  • यह भारत की जनगणना और भारत के भाषाई सर्वेक्षण सहित भारत के जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण के परिणामों की व्यवस्था, संचालन और विश्लेषण करता है।
    • भारत की जनगणना: यह देश की जनसंख्या के आकार, वितरण एवं सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जनसांख्यिकी तथा अन्य विशेषताओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
      • वर्ष 2011 तक भारत में प्रत्येक 10 वर्ष के अंतराल पर आयोजित की जाने वाली जनगणना का आयोजन 15 बार किया गया है।
      • भारत में वर्ष 1872 में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत लाॅर्ड मेयो के कार्यकाल में पहली बार देशव्यापी जनगणना कराई गई। वर्ष 1881 में पहली बार जनगणना के लिये अलग विभाग बनाया गया।
      • इसकी ज़िम्मेदारी सेंसस कमिश्नर को सौंपी गई, भारत में यह पद वर्ष 1941 तक रहा।
      • वर्ष 1949 में इस पद का नाम बदलकर रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर यानी महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कर दिया गया।
      • वर्ष 1949 में भारत सरकार ने इस विभाग को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कर दिया तब से यह विभाग प्रत्येक 10 वर्ष पर जनगणना आयोजित करवाता है।
    • भारत का भाषाई सर्वेक्षण: भारत के वर्तमान भाषाई सर्वेक्षण का प्राथमिक उद्देश्य एक अद्यतन भाषाई परिदृश्य प्रस्तुत करना है।
      • इसका आयोजन प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर आयोजित होने वाले जनगणना अभ्यास के साथ ही किया जाता है।
      • यह संबंधित राज्यों में सामाजिक/शैक्षिक योजनाकारों द्वारा परिकल्पित लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु आवश्यक जानकारी भी प्रदान करता है।
      • भारत का पहला भाषाई सर्वेक्षण वर्ष 1928 में जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन द्वारा प्रकाशित किया गया था।
  • प्रायः एक सिविल सेवक को ही रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया जाता है जिसकी रैंक संयुक्त सचिव के पद के समान होती है।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR)

  • यह ‘देश के सामान्य निवासियों’ की एक सूची है जो नागरिकता अधिनियम 1955 तथा नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्‍ट्रीय पहचान-पत्र जारी करना) नियम 2003 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-ज़िला, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बनाई जाती है।
  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में पंजीकरण कराना भारत के प्रत्येक ‘सामान्य निवासी’ के लिये अनिवार्य है।
  • देश के नागरिकों की पहचान का डेटाबेस एकत्र करने के लिये वर्ष 2010 में इसकी शुरुआत की गई थी।
  • वर्ष 2015 में डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से इस डेटा को और अधिक अपडेट किया गया।

स्रोत: द हिंदू


अनुसूचित जातियों के लिये मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना में बदलाव

चर्चा में क्यों?

हाल ही में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने ‘अनुसूचित जाति से संबंधित छात्रों के लिये मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति’ (PMS-SC) में बदलाव को मंज़ूरी दी है।

  • केंद्र सरकार अनुसूचित जाति से संबंधित इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिये प्रतिबद्ध है, ताकि 5 वर्ष की अवधि के भीतर उच्च शिक्षा में अनुसूचित जाति के छात्रों का ‘सकल नामांकन अनुपात’ (GER) राष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सके।
    • सकल नामांकन अनुपात (GER) का आशय शिक्षा के किसी भी स्तर पर नामांकित छात्रों की संख्या से होता है, चाहे उनकी आयु कितनी भी हो। 
    • उच्च शिक्षा में वर्तमान सकल नामांकन अनुपात (GER) 26.3 प्रतिशत है।
  • मंत्रिमंडलीय समिति के हालिया निर्णय के मुताबिक मौजूदा केंद्रीय सहायता, जोकि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2019-20 के बीच प्रतिवर्ष तकरीबन 1100 करोड़ रुपए थी, को 5 गुना तक बढ़ा दिया जाएगा और वर्ष 2020-21 से 2025-26 के दौरान यह राशि प्रतिवर्ष 6000 करोड़ रुपए हो जाएगी।

प्रमुख बिंदु

अनुसूचित जातियों के लिये मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति

  • यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासन के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।
  • इसके तहत पोस्ट मैट्रिकुलेशन या पोस्ट-सेकेंड्री स्तर पर पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अपनी शिक्षा पूरी कर सकें और उन्हें वित्तीय बाधाओं का सामना न करना पड़े।
  • यह छात्रवृत्ति केवल भारत में अध्ययन के लिये उपलब्ध है और राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की सरकार द्वारा प्रदान की जाती है।
  • यह योजना गरीब छात्रों के नामांकन, समयबद्ध भुगतान, जवाबदेही, निरंतर निगरानी और पूर्ण पारदर्शिता पर केंद्रित है।
  • आय सीमा: यह छात्रवृत्ति उन छात्रों को प्रदान की जाती है, जिनके माता-पिता अथवा अभिभावक की सभी स्रोतों से आय 2,50,000 रुपए वार्षिक से अधिक नहीं है।

नए परिवर्तन

  • नामांकन अभियान
    • 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले अनुसूचित जाति के गरीब छात्रों को उनकी पसंद के उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने में सहायता करने हेतु एक अभियान शुरू किया जा रहा है।
    • अनुमान के मुताबिक, वर्तमान में लगभग 1.36 करोड़ गरीब छात्र आर्थिक बाधाओं के कारण 10वीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ पाते हैं, इस अभियान के माध्यम से उन्हें आगामी 5 वर्ष में उच्च शिक्षा प्रणाली में शामिल किया जाएगा।
  • सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफाॅर्म
    • यह स्कीम सुदृढ़ सुरक्षा उपायों के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर संचालित की जाएगी जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही, कार्य क्षमता तथा बिना विलंब के समयबद्ध सहायता सुनिश्चित होगी।
    • सभी राज्य, आवेदक की पात्रता, जातिगत स्थिति, आधार पहचान तथा बैंक खाते के ब्यौरे की ऑनलाइन पोर्टल पर ही जाँच करेंगे।
  • प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण 
    • इस योजना के अंतर्गत छात्रों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, साथ ही इसके तहत आधार सक्षम भुगतान प्रणाली भी प्रयोग में लाई जाएगी, जबकि पहले केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार के माध्यम से योजना का वित्तपोषण किया जाता था।
    • नई प्रणाली के तहत जैसे ही राज्य तय समय पर अपना हिस्सा हस्तांतरित करेगा, वैसे ही छात्रों को DBT के माध्यम से केंद्र का हिस्सा भी प्राप्त हो जाएगा।
  • वित्तपोषण
    • मंत्रिमंडलीय समिति ने केंद्र और राज्यों के लिये 60:40 के नए वित्तपोषण पैटर्न के साथ कुल 59,048 करोड़ रुपए के निवेश को मंज़ूरी दी है।
    • वित्तीय वर्ष 2021-22 से लागू हो रहे इन बदलावों के तहत केंद्र सरकार का हिस्सा यह सुनिश्चित करने के बाद ही जारी किया जाएगा कि संबंधित राज्य सरकार ने अपना हिस्सा जारी कर दिया है।
    • इन बदलावों से इस योजना में केंद्र सरकार की अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।
  • मज़बूत निगरानी तंत्र
    • सोशल ऑडिट, तीसरे पक्ष द्वारा वार्षिक मूल्यांकन और प्रत्येक संस्थान की अर्द्ध-वार्षिक स्वतः अंकेक्षित रिपोर्टों आदि के माध्यम से निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जाएगा।

स्रोत: पी.आई.बी.