राजस्थान में ई-स्वास्थ्य संवाद पहल | राजस्थान | 29 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
राजस्थान सरकार ने 'ई-स्वास्थ्य संवाद' नामक एक डिजिटल स्वास्थ्य संचार पहल शुरू की।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: राज्य की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में शासन, पारदर्शिता तथा समन्वय को सुदृढ़ करना।
- नेतृत्व: यह पहल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार आरंभ की गई।
- संचालन विधि: संवाद सत्र सप्ताह में दो बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किये जाएंगे।
- सत्र दो चरणों में आयोजित होंगे- पहला वरिष्ठ अधिकारियों और विभाग प्रमुखों के साथ तथा दूसरा विस्तृत हितधारकों एवं जनता के साथ।
- जवाबदेही: अधिकारियों को 72 घंटों के भीतर किये गए कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
गुरुग्राम में धूल प्रदूषण पर NGT याचिका | हरियाणा | 29 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
हरियाणा के गुरुग्राम में धूल के अनियंत्रित संचय को लेकर पर्यावरणीय प्रभावों के संदर्भ में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) के समक्ष गंभीर चिंताएँ प्रस्तुत की गई हैं।
मुख्य बिंदु
- धूल प्रदूषण: गुरुग्राम की सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थलों पर धूल का अत्यधिक संचय देखा गया है। इसमें मुख्यतः PM₁₀ तथा PM₂.₅ कण शामिल हैं, जो शहरी वायु गुणवत्ता में गिरावट के प्रमुख कारक हैं।
- पर्यावरणीय जोखिम: इस अत्यधिक धूल संचय के कारण परिवेशी वायु की गुणवत्ता प्रभावित होती है और कण पदार्थ की सांद्रता बढ़ जाती है, जिससे स्वास्थ्य तथा पर्यावरणीय जोखिम उत्पन्न होते हैं।
- विनियमन तंत्र: भारत में धूल प्रदूषण को मुख्यतः वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और राष्ट्रीय मानक वायु गुणवत्ता सर्वेक्षण (NAAQS) के अंतर्गत विनियमित किया जाता है, जिसमें PM₁₀ तथा PM₂.₅ कणों के नियंत्रण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
- प्रदूषण बोर्डों की भूमिका: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) धूल नियंत्रण उपायों की निगरानी तथा उनके प्रभावी कार्यान्वयन के लिये उत्तरदायी हैं।
- CPCB:
- यह एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत की गई थी।
- राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT):
- राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित यह वैधानिक निकाय पर्यावरण संरक्षण से संबंधित मामलों के शीघ्र और प्रभावी समाधान के लिये उत्तरदायी है।

डिजिटल संचालन हेतु पलामू जनगणना प्रकोष्ठ | झारखंड | 29 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
झारखंड के पलामू ज़िले में डिजिटल जनगणना संचालन को सुदृढ़ करने के लिये एक समर्पित जनगणना प्रकोष्ठ की स्थापना की गई है।
मुख्य बिंदु
- नोडल अधिकारी: जनगणना प्रकोष्ठ का नेतृत्व एक अतिरिक्त कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में करेंगे।
- दो चरणीय प्रक्रिया: जनगणना कार्य दो चरणों में संपन्न किया जाएगा, पहले घरों की सूची बनाना और फिर उनकी गिनती करना, दोनों चरण डिजिटल माध्यम से किये जाएंगे ताकि सटीकता तथा समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।
- डिजिटल उपकरणों का उपयोग: यह प्रकोष्ठ जनगणना कार्यों के वास्तविक समय डेटा प्रविष्टि, निगरानी और प्रबंधन के लिये मोबाइल तथा वेब-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को सुगम बनाएगा।
- आदर्श ज़िला: पलामू द्वारा स्थापित डिजिटल-मोड जनगणना प्रकोष्ठ अन्य ज़िलों के लिये, विशेषकर झारखंड और उसके बाहर, एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य करेगा।
- जनगणना:
- यह जनसंख्या की आधिकारिक और आवधिक गणना है, जिसमें जनसांख्यिकीय, सामाजिक तथा आर्थिक विशेषताओं का डेटा एकत्र किया जाता है। इसे भारत सरकार द्वारा जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत आयोजित किया जाता है।
- पहली डिजिटल जनगणना: आगामी भारत की जनगणना पहली बार पूरी तरह से डिजिटल मोड में आयोजित की जाएगी, जिसमें मोबाइल एप्लिकेशन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा।
खड़गपुर झील में नौका विहार सुविधा | बिहार | 29 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुंगेर ज़िले में स्थित खड़गपुर झील में नौका विहार सुविधा का उद्घाटन किया।
मुख्य बिंदु
- पर्यटन विकास: इस पहल का उद्देश्य झील को क्षेत्र के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करना है।
- आर्थिक और रोज़गार पर प्रभाव: इस सुविधा से स्थानीय रोज़गार को बढ़ावा मिलने तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को समर्थन मिलने की संभावना है।
- प्राकृतिक आकर्षण: खड़गपुर झील अपने प्राकृतिक संसाधनों, गर्म झरनों, घने वनों और समृद्ध जैव विविधता के लिये जानी जाती है, जो इसे एक संभावित पर्यावरण-पर्यटन तथा मनोरंजक स्थल बनाती है।
- झीलें स्थानीय पारिस्थितिकी, भूजल पुनर्भरण और मनोरंजन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ।
- मुंगेर में गर्म पानी के झरने: भीमबांध, ऋषिकुंड, लक्ष्मण कुंड, रामेश्वर कुंड, सीता कुंड, भरारी कुंड, पंचतर कुंड आदि।
मध्य प्रदेश ने उज्जैन भूमि संचय योजना निरस्त | मध्य प्रदेश | 29 Dec 2025
चर्चा में क्यों?
किसानों संगठनों के लगातार विरोध प्रदर्शनों और आंदोलन के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन सिंहस्थ (कुंभ) क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण योजना को निरस्त कर दिया।
मुख्य बिंदु
- पृष्ठभूमि: राज्य सरकार ने वर्ष 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत स्थायी अवसंरचना के निर्माण के उद्देश्य से उज्जैन के सिंहस्थ क्षेत्र में कृषि भूमि अधिग्रहण हेतु भूमि अधिग्रहण नीति शुरू की थी।
- किसान विरोध: भारतीय किसान संघ (BKS) के नेतृत्व में किसानों ने इस नीति का कड़ा विरोध किया।
- सरकार का निर्णय: बढ़ते विरोध और निरंतर प्रतिरोध की स्थितियों को देखते हुए, मध्य प्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण आदेश को निरस्त कर दिया।
- सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण योजना को निरस्त करने के निर्णय के बाद, किसानों ने अपने प्रस्तावित आंदोलन को रद्द कर दिया।