झारखंड ने वनाग्नि से निपटने के लिये ‘फायर वॉरियर’ अभियान शुरू किया | झारखंड | 25 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
झारखंड वन विभाग ने स्थानीय समुदाय की भागीदारी को सुदृढ़ करने और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत करने के उद्देश्य से ‘फायर वॉरियर’ अभियान नामक एक समुदाय-आधारित पहल शुरू की है, जिसका लक्ष्य वनाग्नि की घटनाओं को शून्य तक लाना है।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: फायर वॉरियर अभियान का मुख्य लक्ष्य उच्च जोखिम वाले मौसम (फरवरी से मानसून के आगमन तक) के दौरान सामुदायिक भागीदारी और त्वरित प्रतिक्रिया के माध्यम से वनाग्नि की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाना है।
- लगभग 28,000 ग्रामीणों को, जो वनाग्नि-प्रवण क्षेत्रों से हैं, फायर वॉरियर्स के रूप में नामांकित किया गया है। इन्हें व्हाट्सऐप समूहों के माध्यम से जोड़ा गया है, ताकि आग लगने की घटनाओं की शीघ्र सूचना दी जा सके और समन्वित अग्निशमन कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
- क्षमता निर्माण: ग्रामीणों को अग्नि-निवारण और अग्निशमन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। चयनित सदस्यों को मास्टर ट्रेनर के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि अभियान का दायरा बढ़ाया जा सके और स्थानीय स्तर पर तैयारी को मज़बूत किया जा सके।
- समन्वय: वन अधिकारी भारत सरकार, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर आग-प्रवण महीनों में विशेष सतर्कता बनाए रखेंगे।
- ज़िला-स्तरीय कार्ययोजनाओं और ग्रामीणों के साथ प्रत्यक्ष क्षेत्रीय संपर्क को प्राथमिकता दी जा रही है।
- जागरूकता गतिविधियाँ: स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और जनप्रतिनिधियों को भी इस पहल में शामिल किया गया है।
- वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को आग से बचाव के बारे में शिक्षित करने के लिये नुक्कड़ नाटक और छात्रों द्वारा संचालित प्रभात फेरियाँ आयोजित की जा रही हैं।
- महत्त्व: झारखंड में फायर वॉरियर अभियान सामुदायिक सहभागिता, प्रशिक्षण, जागरूकता एवं समन्वित कार्रवाई को प्रमुख रणनीतियों के रूप में रेखांकित करता है, ताकि वनाग्नि की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके और वन संसाधनों तथा जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
पलामू टाइगर रिज़र्व ने ‘वनजीवी दीदी’ पहल शुरू की | झारखंड | 25 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
पलामू टाइगर रिज़र्व ने रिज़र्व के भीतर और उसके आसपास स्थित 17 चिन्हित गाँवों में ‘वनजीवी दीदी’ नामक एक नई समुदाय-आधारित पहल शुरू की है, जिसके तहत स्थानीय महिलाओं को पर्यावरण शिक्षिका और संरक्षण सहायक के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- ‘वनजीवी दीदी’ पहल: ‘वनजीवी’ का अर्थ है वनवासी अथवा वन का जीवन, जबकि ‘दीदी’ महिलाओं को समुदाय की नेतृत्वकर्त्ता के रूप में दर्शाता है।
- लक्षित समूह: इस कार्यक्रम के अंतर्गत 17 गाँवों (जिनमें हेनार, सुरकुमी और कोटम शामिल हैं) से प्रत्येक गाँव की 18 शिक्षित महिलाओं का चयन किया गया है। अधिकांश प्रतिभागी या तो कॉलेज स्नातक हैं या उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।
- मुख्य उद्देश्य: ये ‘वनजीवी दीदियाँ’ वन विभाग एवं स्थानीय समुदाय के बीच सेतु के रूप में कार्य करेंगी, ताकि शिकार और अवैध लकड़ी कटाई जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों को हतोत्साहित किया जा सके।
- इस कार्यक्रम के तहत, वन क्षेत्र से सटे गाँवों की चयनित महिलाओं को निम्नलिखित कार्यों के लिये प्रशिक्षित किया जाता है:
- वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना
- मानव–वन्यजीव संघर्ष के शमन के बारे में समुदाय को शिक्षित करना
- वन विभाग और स्थानीय निवासियों के बीच सेतु की भूमिका निभाना
- सतत आजीविका और ज़िम्मेदार वन उपयोग को बढ़ावा देना
- प्रोत्साहन: प्रत्येक प्रतिभागी को ₹3,000 का मासिक मानदेय दिया जाता है। यह पहल वर्तमान में 17 फरवरी, 2026 से प्रारंभ हुआ दो माह का पायलट प्रोजेक्ट है, जिसके बाद प्रदर्शन-आधारित समीक्षा के आधार पर इसके विस्तार की योजना है।
झारखंड बजट 2026-27 | झारखंड | 25 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये अपना बजट, जिसे ‘अबुआ दिशोम’ बजट नाम दिया गया है, राज्य विधानसभा में प्रस्तुत किया। इस बजट का कुल प्रावधान ₹1.58 लाख करोड़ है। यह बजट वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें समावेशी विकास, सामाजिक न्याय और आधारभूत संरचना के विकास पर विशेष ज़ोर दिया गया।
मुख्य बिंदु:
- बजट का संक्षिप्त विवरण: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये कुल बजट आकार ₹1,58,560 करोड़ है, जो पिछले वर्ष के ₹1.45 लाख करोड़ के बजट की तुलना में लगभग 9% की वृद्धि को दर्शाता है।
- थीम: ‘अबुआ दिशोम’ (हमारा अपना) थीम सरकार के उस दृष्टिकोण को रेखांकित करता है, जिसके तहत विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने पर ज़ोर दिया गया है।
- राजकोषीय ढाँचा (₹ करोड़ में):
- कुल राजस्व प्राप्तियाँ: 1,36,210.04
- कुल राजस्व व्यय: 1,20,851.90
- पूंजी प्राप्तियाँ: 22,349.96
- पूंजी व्यय: 37,708.10
- राजस्व घाटा: 15,358.14 (GSDP का 2.46%)
- प्रभावी राजस्व घाटा: 28,102.28 (GSDP का 4.50%)
- राजकोषीय घाटा: 13,595.79 (GSDP का 2.18%)
- प्राथमिक घाटा: 7,075.83 (GSDP का 1.13%)
- ऋण–GSDP अनुपात: 25.3%
- कुल प्राप्तियाँ: 1,58,560
- कुल व्यय: 1,58,560
- क्षेत्रवार आवंटन (₹ करोड़ में):
- सामाजिक क्षेत्र: ₹67,459.54 करोड़
- सामान्य क्षेत्र: ₹32,055.83 करोड़
- आर्थिक क्षेत्र: ₹59,044.63 करोड़
- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र: ₹4,884.20 करोड़
- महिला एवं बाल विकास: ₹22,995.69 करोड़
- जेंडर बजट: ₹34,211.27 करोड़
- कुल स्वास्थ्य बजट: ₹7,990.30 करोड़
- ऊर्जा क्षेत्र: ₹11,197.89 करोड़
- मुख्य आवंटन (₹ करोड़ में):
- बिरसा बीज उत्पादन योजना: ₹145 करोड़
- मृदा एवं जल संरक्षण: ₹475.50 करोड़
- सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई: ₹75 करोड़
- कृषि यंत्र वितरण: ₹80 करोड़
- झारखंड मिलेट मिशन: ₹25 करोड़
- फसल बीमा: ₹400 करोड़
- भंडारण एवं कोल्ड चेन अवसंरचना: ₹322 करोड़
- ग्रामीण विकास: ₹12,346.90 करोड़
- सिंचाई परियोजनाएँ: ₹1,137.10 करोड़
- जल संसाधन विभाग: ₹2,714.71 करोड़
- अबुआ आवास योजना: आवास परियोजनाओं हेतु ₹4,100 करोड़
- मैया सम्मान योजना (महिलाओं के लिये मासिक सहायता): ₹14,065.57 करोड़
- सार्वभौमिक पेंशन योजना: ₹3,517.23 करोड़
- राष्ट्रीय पेंशन योजनाएँ: ₹1,463.58 करोड़
- स्कूली शिक्षा: ₹16,251.43 करोड़
- उच्च एवं तकनीकी शिक्षा: ₹2,564.45 करोड़
- सामाजिक कल्याण एवं महिला सशक्तीकरण: झारखंड मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना के अंतर्गत 18 से 50 वर्ष आयु की महिलाओं को राज्य की महिला-केंद्रित वित्तीय सहायता योजना के तहत प्रतिमाह ₹2,500 की राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है।
- कृषि एवं ग्रामीण विकास: कृषि क्षेत्र राज्य की प्राथमिकता बना हुआ है। बीज उत्पादन, मृदा एवं जल संरक्षण, सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई, कृषि यंत्र सहायता तथा मिलेट मिशन के लिये आवंटन में वृद्धि की गई है। ग्रामीण विकास मद में आवास, सिंचाई एवं जल संसाधन परियोजनाओं हेतु पर्याप्त प्रावधान किये गए हैं।
- शिक्षा एवं कौशल विकास: शिक्षा क्षेत्र पर विशेष बल दिया गया है। प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा के लिये बड़े पैमाने पर बजटीय आवंटन, तकनीकी शिक्षा का विस्तार, नए विश्वविद्यालयों की स्थापना तथा शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल लर्निंग पहलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है।
- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: स्वास्थ्य बजट में कैंसर उपचार जैसी विशेष योजनाओं, उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विकास तथा पूरे राज्य में 750 अबुआ दवाखाना क्लीनिकों की स्थापना के प्रावधान शामिल हैं।
- अवसंरचना एवं ऊर्जा: सड़क निर्माण, ग्रामीण कार्यों तथा ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिये बड़े पैमाने पर आवंटन प्रस्तावित किये गए हैं। इसमें विद्युत संयंत्रों का विस्तार, पात्र परिवारों को निशुल्क विद्युत इकाइयाँ तथा नवीकरणीय ऊर्जा पर सब्सिडी जैसी पहलें शामिल हैं।
- औद्योगिक विकास एवं निवेश: झारखंड ने ₹1.24 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों के साथ महत्त्वपूर्ण निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन की संभावना है। राज्य की विश्व आर्थिक मंच में पहली भागीदारी सतत विकास, विशेषकर हरित ऊर्जा एवं खनिज क्षेत्रों में, स्वयं को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने के प्रयासों को दर्शाती है।
- PESA का क्रियान्वयन: पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, PESA को 2 जनवरी 2026 से लागू किया गया। इसके तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को स्थानीय संसाधनों पर अधिक नियंत्रण तथा सामुदायिक निर्णय-निर्माण की सशक्त शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।
- महत्त्व: ‘अबुआ दिशोम’ बजट समावेशी एवं सतत विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह बजट कल्याणकारी व्यय और शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसंरचना तथा कृषि में पूंजीगत निवेश के बीच संतुलन स्थापित करता है।
- इसका उद्देश्य हाशिये पर रहने वाले समुदायों का उत्थान करना, ग्रामीण आजीविकाओं को सुदृढ़ करना तथा झारखंड की आर्थिक संभावनाओं को मज़बूत बनाना है।
केंद्रीय कैबिनेट ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की स्वीकृति दी | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 25 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम (Keralam)’ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है, जिससे राज्य का आधिकारिक नाम मलयालम भाषा में प्रचलित नाम के अनुरूप हो जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- पृष्ठभूमि: ‘केरलम (Keralam)’ राज्य का मूल मलयालम नाम है, जिसका सांस्कृतिक और भाषायी प्रयोग सदियों से निरंतर होता रहा है।
- प्राचीन संदर्भ: इस शब्द का उल्लेख सम्राट अशोक के द्वितीय शिलालेख (257 ईसा पूर्व) में ‘केरलपुत्र’ के रूप में मिलता है, जो चेर वंश को संदर्भित करता है।
- भाषायी पुनर्गठन: मलयालम भाषी समुदायों के लिये एकीकृत ‘केरलम’ की मांग राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही उठती रही है।
- औपनिवेशिक नाम: अंग्रेज़ी नाम ‘केरल’ औपनिवेशिक प्रशासन के दौरान प्रचलन में आया और स्वतंत्रता के बाद भी बनाए रखा गया।
- प्रस्ताव: केरल विधानसभा ने पहले सर्वसम्मति से नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित कर इसे केंद्र सरकार को अनुमोदन हेतु भेजा था।
- संवैधानिक और कानूनी आधार: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्यों के गठन तथा मौजूदा राज्यों के नाम, क्षेत्रफल या सीमाओं में परिवर्तन करने का अधिकार देता है।
- प्रक्रिया: इस प्रक्रिया हेतु आवश्यक है:
- राष्ट्रपति की अनुशंसा पर संसद में विधेयक प्रस्तुत किया जाता है।
- विधेयक को संबंधित राज्य विधानसभा के विचार हेतु भेजा जाता है (हालाँकि ये विचार बाध्यकारी नहीं होते)।
- मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद, परिवर्तन को औपचारिक रूप देने हेतु विधेयक संसद में पेश किया जाता है।
- संसदीय स्वीकृति: विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से पारित होना आवश्यक है।
- राष्ट्रपति की स्वीकृति: पारित होने के बाद विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति हेतु भेजा जाता है।
- अनुसूचियों में संशोधन: अधिनियम के अधिसूचित होने पर संविधान की प्रथम अनुसूची (राज्यों के नामों की सूची) और चतुर्थ अनुसूची (राज्यसभा में सीटों के आवंटन से संबंधित) को तद्नुसार अद्यतन किया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026 | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 25 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
पूरे विश्व में 21 फरवरी, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया। यह दिन भाषायी विविधता का उत्सव मनाने, मातृभाषाओं के संरक्षण को बढ़ावा देने तथा शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान में मातृभाषाओं की भूमिका को रेखांकित करने के लिये समर्पित है।
मुख्य बिंदु:
- उत्पत्ति: UNESCO ने इस दिवस की घोषणा भाषायी विविधता की रक्षा और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी, ताकि मातृभाषाओं के सांस्कृतिक तथा शैक्षिक महत्त्व को उजागर किया जा सके।
- यह प्रतिवर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है, जो बांग्लादेश के ऐतिहासिक भाषा आंदोलन की स्मृति में है, जहाँ वर्ष 1952 में छात्रों ने अपनी मातृभाषा बांग्ला को मान्यता दिलाने के लिये अपने प्राणों का बलिदान दिया था।
- वर्ष 2026 की थीम: ‘बहुभाषी शिक्षा पर युवाओं की आवाज़’ (Youth Voices on Multilingual Education)— यह मातृभाषाओं में समावेशी और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने में युवाओं की भूमिका पर ज़ोर देती है।
- स्वदेशी अस्मिता का संवर्द्धन: यह स्वदेशी समुदायों को सशक्त बनाने के प्रयासों को रेखांकित करता है, जिसमें मातृभाषाओं को संस्कृति, ज्ञान और पहचान के संवाहक के रूप में प्रोत्साहित किया जाता है।
- वैश्विक आयोजन: ढाका के शहीद मीनार पर श्रद्धांजलि, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पैनल चर्चाएँ तथा शैक्षणिक संस्थानों द्वारा आयोजित विविध कार्यक्रमों के माध्यम से भाषायी विविधता का उत्सव मनाया जाता है।
- महत्त्व: मातृभाषाएँ शिक्षा, पहचान निर्माण और संज्ञानात्मक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस, भाषायी विविधता के संरक्षण, समावेशी शिक्षा के प्रसार और वैश्विक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्त्व को सुदृढ़ करता है।
ज़िम्बाब्वे ने लंबे समय तक असर करने वाला HIV-निरोधक इंजेक्शन लेनाकापैविर लॉन्च किया | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 25 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
ज़िम्बाब्वे HIV की रोकथाम के लिये लंबे समय तक असर करने वाली इंजेक्टेबल दवा लेनाकापैविर (Lenacapavir) लॉन्च करने वाले अफ्रीका के पहले देशों में से एक बन गया है। यह कदम महाद्वीप में HIV/AIDS के खिलाफ लड़ाई में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- लेनाकापैविर: लेनाकापैविर एक दीर्घकालिक प्रभाव वाली एंटीरेट्रोवायरल दवा है, जिसका उपयोग HIV की रोकथाम के लिये प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PrEP) में किया जाता है।
- क्रिया-विधि: गिलियड साइंसेज़ द्वारा विकसित लेनाकापैविर एक कैप्सिड इनहिबिटर है। यह HIV-1 के वायरल कैप्सिड (जो वायरस की आनुवंशिक सामग्री की रक्षा करने वाला प्रोटीन आवरण है) में उसके जीवन-चक्र के कई चरणों पर हस्तक्षेप करता है, जिससे वायरस निष्क्रिय हो जाता है।
- छह-महीने का संरक्षण: लेनाकापैविर नगेपोन की पहली ऐसी PrEP दवा है, जिसे वर्ष में केवल दो बार (हर छह महीने में) इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है।
- WHO पूर्व-अर्हता: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अक्तूबर 2025 में इस दवा को पूर्व-अर्हता प्रदान की और जुलाई 2025 में इसके कार्यान्वयन संबंधी दिशानिर्देश जारी किये।
- क्षेत्रीय नेतृत्व: ज़िम्बाब्वे ने ज़ाम्बिया और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिलकर WHO की सहयोगी पंजीकरण प्रक्रिया के माध्यम से इस तकनीक को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे रिकॉर्ड समय में अनुमोदन संभव हुआ।
- लक्षित आबादी: प्रारंभिक चरण में पूरे देश के 24 केंद्रों पर लगभग 46,500 उच्च-जोखिम वाले व्यक्तियों को लक्षित किया गया है, जिनमें किशोरियाँ, युवा महिलाएँ, यौन कर्मी तथा गर्भवती या स्तनपान कराने वाली माताएँ शामिल हैं।
- वित्तपोषण और समर्थन: यह कार्यक्रम संयुक्त राज्य अमेरिका सरकार और ग्लोबल फंड के सहयोग से संचालित है, जिसके तहत कमज़ोर वर्गों को यह दवा निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
- प्रभावकारिता: नैदानिक परीक्षणों में HIV संक्रमण की रोकथाम में लगभग 100% प्रभावशीलता पाई गई, जो दैनिक मौखिक PrEP गोलियों की तुलना में कहीं अधिक है।