उत्तर प्रदेश में सरदार वल्लभभाई पटेल रोज़गार और औद्योगिक क्षेत्र कार्यक्रम | उत्तर प्रदेश | 20 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में रोज़गार से जुड़े औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिये सरदार वल्लभभाई पटेल रोज़गार एवं औद्योगिक क्षेत्र कार्यक्रम शुरू करने जा रही है।
मुख्य बिंदु:
- प्राथमिक उद्देश्य: रोज़गार के अवसर सृजित करना, औद्योगिक विकास को सुगम बनाना तथा प्रशिक्षण, नियोजन और उद्यमिता को एक ही अवसंरचना के अंतर्गत जोड़ना।
- एकीकृत अवसंरचना मॉडल: इन क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयाँ, प्रशिक्षण केंद्र, रोज़गार कार्यालय, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) प्रदर्शन क्षेत्र, बैंकिंग सुविधाएँ और सेवा केंद्र एक ही स्थान पर स्थापित किये जाएंगे।
- कार्यान्वयन मॉडल: प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्षेत्र मॉडल, जिससे MSME विनिर्माण और सेवा इकाइयों की शीघ्र स्थापना संभव हो सकेगी।
- रोज़गार मॉडल: प्रशिक्षित मानव संसाधन को औद्योगिक मांग से जोड़ने वाला वन-स्टॉप हब।
- कौशल विकास पर फोकस: इसमें कौशल उन्नयन, व्यावसायिक प्रशिक्षण, रोज़गार मेलों और उद्यमिता विकास पर ज़ोर दिया जाएगा।
- नोडल समन्वय: राज्य सरकार के विभाग MSME और कौशल विकास एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करेंगे।
- राज्य योजनाओं के साथ अभिसरण: कार्यान्वयन को ODOP, MSME प्रोत्साहन नीतियों तथा उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के साथ समन्वित किया जाएगा।
होप आइलैंड पर सैटेलाइट लॉन्च फैसिलिटी | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 20 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने होप आइलैंड पर सैटेलाइट लॉन्चिंग सुविधा विकसित करने की योजना की घोषणा की है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: प्रस्तावित सैटेलाइट लॉन्चिंग सुविधा आंध्र प्रदेश के काकीनाडा खाड़ी में होप आइलैंड पर बनाई जाएगी।
- रणनीतिक दूरी: होप आइलैंड, सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से लगभग 600 किलोमीटर दूर स्थित है, जो भारत का प्रमुख अंतरिक्ष बंदरगाह है।
- सामुद्रिक लाभ: होप आइलैंड का तटीय स्थान बंगाल की खाड़ी पर लॉन्च मार्गों के लिये रणनीतिक लाभ प्रदान करता है और जनसंख्या पर न्यूनतम जोखिम सुनिश्चित करता है।
- परियोजना का नाम: यह स्पेस सिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एक अंतरिक्ष और एयरोस्पेस हब बनाना है।
- यह आंध्र प्रदेश के उच्च तकनीकी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी, नवाचार और औद्योगिक विकास पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है।
- सहयोग: ग्रीनको ग्रुप के साथ।
- स्पेस इकोसिस्टम विज़न: यह सुविधा आंध्र प्रदेश के विज़न के अनुरूप है, जो इसे एयरोस्पेस और वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियों के हब के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।
हैदराबाद में जनजातीय चिकित्सकों के लिये राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 20 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने हैदराबाद, तेलंगाना में राष्ट्रीय जनजातीय चिकित्सक निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की है।
मुख्य बिंदु:
- शुरुआत स्थल: जनजातीय चिकित्सक कार्यक्रम का आयोजन जनवरी 2026 में कान्हा शांति वनम, हैदराबाद में किया गया, ताकि जनजातीय स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जा सके।
- उद्घाटनकर्त्ता: इस कार्यक्रम को केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने संबोधित किया।
- उद्देश्य: इस कार्यक्रम का लक्ष्य है—
- जनजातीय चिकित्सक को सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान और जनजातीय स्वास्थ्य सुधार में सहयोगी भागीदार के रूप में पहचानना तथा शामिल करना।
- भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से अलग-थलग जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच तथा प्रभावशीलता को मज़बूत बनाना।
- जनजातीय क्षेत्रों में संक्रामक रोगों जैसे मलेरिया, तपेदिक और कुष्ठ रोग को समाप्त करना।
- राष्ट्रीय जनजातीय स्वास्थ्य वेधशाला: भारत के पहले भारत जनजातीय स्वास्थ्य वेधशाला (B-THO) की स्थापना के लिये ICMR-क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, भुवनेश्वर के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए। यह पहल प्रोजेक्ट DRISTI के अंतर्गत जनजाति-विशिष्ट स्वास्थ्य डेटा और अनुसंधान के लिये की गई है।
- प्रोजेक्ट DRISTI: यह केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय और ICMR के सहयोग से एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य जनजाति-विशिष्ट स्वास्थ्य सूचना प्रणाली तैयार करना है।
- इसका लक्ष्य जनजातीय आबादी के लिये स्वास्थ्य देखभाल योजना, रोग निगरानी और नीति निर्माण में सुधार करना है।
- भारत जनजातीय स्वास्थ्य वेधशाला (B‑THO): प्रोजेक्ट DRISTI के अंतर्गत स्थापित, यह अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय स्वास्थ्य वेधशाला है।
- जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य डेटा को एकत्रित करना, विश्लेषण करना और साझा करना, स्वास्थ्य प्रणाली में जनजातीय चिकित्सकों को शामिल करना तथा जनजातीय क्षेत्रों में रोग रोकथाम एवं अनुसंधान का समर्थन करना।
MSME मंत्रालय ने हिमाचल प्रदेश में टेक्नोलॉजी सेंटर को स्वीकृति दी | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 20 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
जनवरी 2026 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MoMSME) ने हिमाचल प्रदेश में दो नए MSME टेक्नोलॉजी सेंटरों की स्थापना को स्वीकृति दी।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: ये केंद्र ऊना ज़िले के पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र और सोलन ज़िले के परवाणू औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित किये जाएंगे।
- वित्तपोषण: प्रत्येक केंद्र की अनुमानित निर्माण लागत लगभग ₹10 करोड़ (₹100 मिलियन) है।
- राष्ट्रीय संदर्भ: ये दो केंद्र भारत में 13 नए प्रौद्योगिकी/एक्सटेंशन केंद्रों की स्थापना की व्यापक योजना का हिस्सा हैं।
- अवसंरचना: पंडोगा सुविधा को हारोली विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा कम्युनिटी सेंटर भवन में स्थित किया जाएगा, ताकि संचालन में तेज़ी लाई जा सके।
- उद्देश्य: ये केंद्र वर्तमान और नई औद्योगिक इकाइयों को उन्नत तकनीकी सहायता, नवाचार समर्थन तथा आधुनिक मशीनरी प्रदान करेंगे।
- कौशल विकास: प्राथमिक फोकस युवाओं के कौशल प्रशिक्षण को सुदृढ़ करना है, विशेषकर उच्च तकनीकी क्षेत्रों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोबोटिक्स में, जिनमें कुछ कार्यक्रम वर्चुअल मोड में भी उपलब्ध होंगे।
- औद्योगिक वृद्धि: इस पहल का उद्देश्य इंजीनियरिंग, प्लास्टिक और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाना तथा राज्य में नए औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार सृजन को प्रोत्साहित करना है।
- महत्त्व: ये नई सुविधाएँ बद्दी में मौजूदा MSME प्रौद्योगिकी केंद्र की पूरक होंगी, जो पहले ही क्षेत्र में उन्नत प्रशिक्षण और उत्पादन सहायता प्रदान कर रहा है।
त्रिपुरा में 48वाँ कोकबोरोक दिवस समारोह | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 20 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
त्रिपुरा ने 48वाँ कोकबोरोक दिवस (जिसे त्रिपुरी भाषा दिवस भी कहा जाता है) को राज्य-व्यापी सांस्कृतिक उत्साह और नई भाषायी मांगों के साथ मनाया। यह दिवस 19 जनवरी, 1979 को तत्कालीन राज्य सरकार के तहत कोकबोरोक को त्रिपुरा की आधिकारिक राज्य भाषा के रूप में मान्यता मिलने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है।
मुख्य बिंदु:
- आधिकारिक समारोह: मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने नई दिल्ली स्थित त्रिपुरा भवन में समारोहों का नेतृत्व किया, जहाँ उन्होंने कोकबोरोक को राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने वाली एक महत्त्वपूर्ण कड़ी बताया और इसके संवर्द्धन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
- सांस्कृतिक रैलियाँ: पूरे राज्य में प्रमुख रैलियों का आयोजन किया गया, जिनमें अगरतला में लगभग 3,000 प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ एक भव्य जुलूस भी शामिल था।
- सरकारी पहल: भाषायी विरासत के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर कोकबोरोक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की।
- सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने के लिये जनजातीय और गैर-जनजातीय समुदायों के एकीकरण के प्रयास किये।
- स्मरण: यह दिवस 19 जनवरी, 1979 की स्मृति में मनाया जाता है, जब कोकबोरोक को पहली बार बंगाली और अंग्रेज़ी के साथ आधिकारिक राज्य भाषा का दर्जा दिया गया था।
- भाषा: कोकबोरोक तिब्बती–बर्मी भाषा परिवार से संबंधित है और बोरोक (त्रिपुरी) समुदाय की मातृभाषा है।
- हालाँकि 1979 में मान्यता मिलने के बावजूद, इसे अभी तक संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है, जिससे इसे राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण सीमित है।
- क्षेत्र: कोकबोरोक मुख्य रूप से त्रिपुरा के स्वदेशी त्रिपुरी समुदायों द्वारा बोली जाती है और पड़ोसी बांग्लादेश में भी प्रचलित है।