PMMSY के अंतर्गत सिरसा में खारे जल का मत्स्यपालन क्लस्टर | हरियाणा | 09 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
मत्स्य पालन विभाग के सचिव अभिलक्ष लिखी ने ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) के अंतर्गत विकसित खारे जल के मत्स्यपालन क्लस्टर की प्रगति का आकलन किया।
मुख्य बिंदु:
- क्लस्टर विकास: सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और रोहतक में विकसित खारे जल के मत्स्यपालन क्लस्टर, लवणीय प्रभावित क्षेत्रों में झींगा, स्कैम्पी तथा सीबास जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को बढ़ावा देता है।
- मत्स्य पालन विभाग ने पूरे भारत में 34 मत्स्य उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्लस्टरों को अधिसूचित किया है।
- अंतर्देशीय मत्स्य पालन भारत के कुल मत्स्य उत्पादन का लगभग 75% योगदान देता है।
- एकीकृत एक्वापार्क: सिरसा में ₹110 करोड़ की लागत से एक एकीकृत एक्वापार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें कोल्ड-चेन अवसंरचना भी शामिल है, ताकि कटाई के बाद प्रबंधन और मूल्य संवर्द्धन को मज़बूत किया जा सके।
- चुनौतियाँ: उच्च विद्युत लागत, अनियमित विद्युत आपूर्ति, गुणवत्तापूर्ण बीज के लिये अन्य राज्यों पर निर्भरता तथा मत्स्यपालन के लिये अपर्याप्त जल आपूर्ति जैसी समस्याएँ मौजूद हैं।
- प्रौद्योगिकी अपनाना: मत्स्यपालन में RAS (रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम) और बायोफ्लॉक प्रणाली जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
- निवेश: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत हरियाणा में लगभग ₹760.88 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY):
- इस योजना की शुरुआत सितंबर 2020 में की गई थी।
- यह योजना मत्स्य पालन विभाग द्वारा, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत लागू की जाती है।
मेनका गुरुस्वामी भारत की पहली खुले तौर पर क्वीर सांसद बनीं | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 09 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने राज्यसभा में शपथ लेकर भारत की पहली घोषित क्वीर सांसद बनकर इतिहास रच दिया है, जो भारतीय राजनीति में LGBTQ+ प्रतिनिधित्व के लिये एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- ऐतिहासिक उपलब्धि: मेनका गुरुस्वामी राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद भारत की पहली घोषित क्वीर सांसद बन गई हैं।
- उन्हें पश्चिम बंगाल राज्य से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के लिये चुना गया था।
- कानूनी पृष्ठभूमि: वह एक प्रसिद्ध संवैधानिक कानून विशेषज्ञ और भारत के सर्वोच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।
- वह भारत में नागरिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और LGBTQ+ समानता के लिये एक प्रमुख आवाज़ रही हैं।
- ऐतिहासिक मामला: वह ऐतिहासिक 'नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ' मामले में शामिल वकीलों में से एक थीं।
- इस मामले के परिणामस्वरूप वर्ष 2018 में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को निरस्त कर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था।
- महत्त्व: संसद में उनके प्रवेश को शासन में LGBTQ+ प्रतिनिधित्व के लिये एक उपलब्धि माना जा रहा है और यह भारतीय राजनीति में क्वीर आवाज़ों की बढ़ती दृश्यता और स्वीकार्यता को दर्शाता है।