गंगा-यमुना जल मार्ग परिवर्तन योजना | 05 Dec 2025

चर्चा में क्यों?

दिल्ली में नदी का प्रवाह में वृद्धि और प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से गंगा के जल को यमुना में प्रवाहित करने की योजना को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए किसान और इंजीनियरिंग व्यवहार्यता संबंधी मुद्दों के कारण अवरोध का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य बिंदु

योजना के बारे में:

  • ऊपरी गंगा नहर (UGC) से लगभग 500 क्यूसेक गंगा जल को दिल्ली में यमुना नदी के प्रवाह में छोड़ा जाना है।
  • इस योजना का प्रमुख लक्ष्य यमुना नदी के प्रवाह में वृद्धि करते हुए उसके प्रदूषण स्तर में कमी लाना है, जिससे यमुना की स्वच्छता से जुड़े व्यापक प्रयासों को सुदृढ़ आधार मिल सके।

प्रस्तावित मार्ग: 

  • चूँकि ऊपरी गंगा नहर (UGC) सीधे यमुना नदी से नहीं जुड़ी है, इसलिये योजना के अनुसार ऊपरी गंगा नहर के जल को एक चैनल के द्वारा पूर्वी यमुना नहर (EYC) में प्रवाहित किया जाएगा तथा वहाँ से आगे इसे यमुना नदी में प्रविष्ट कराया जाएगा।
  • इस मार्ग से परिवर्तित जल उत्तर प्रदेश के तीन ज़िलों से होकर प्रवाहित होगा।

गंगा-यमुना नदी तंत्र

  • उद्गम: यह नदी तंत्र उत्तराखंड हिमालय से प्रारंभ होता है, जहाँ गंगा नदी गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है और इसकी सबसे लंबी सहायक नदी यमुना नदी यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है।
  • मार्ग एवं संगम: ये नदियाँ उत्तर भारत में समानांतर बहती हैं तथा प्रयागराज में पवित्र त्रिवेणी संगम पर विलीन होने से पहले, अत्यधिक उपजाऊ गंगा-यमुना दोआब का निर्माण करती हैं।
  • महत्त्व: गंगा और यमुना मिलकर सिंधु-गंगा के मैदान को संरक्षित करती हैं, कृषि गतिविधियों के माध्यम से लाखों लोगों की जीविकोपार्जन सुनिश्चित करती हैं और भारतीय सभ्यता की आध्यात्मिक जीवन रेखा के रूप में कार्य करती हैं।