वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान 2019

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization-WHO) ने वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान (Global Health Estimates) 2019 जारी किया है।

  • WHO का वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान दुनिया के सभी क्षेत्रों में बीमारियों और चोटों के कारण होने वाली मौतों तथा स्वास्थ्य की हानि का व्यापक व तुलनात्मक मूल्यांकन करता है।
  • वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान का नवीनतम आँकड़ा वर्ष 2000 से 2019 के बीच की अवधि का है।
  • यह अनुमान WHO के टेन थ्रेट्स टू ग्लोबल हेल्थ (Ten Threats to Global Health) रिपोर्ट 2019 के अनुरूप है।

प्रमुख बिंदु

वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान 2019 के प्रमुख बिंदु:

  • मृत्यु के शीर्ष दस कारण: इसमें इस्केमिक (Ischaemic) हृदय रोग, आघात, चिरकालिक अवरोधी फुप्फुस (Chronic Obstructive Pulmonary) रोग, निचला श्वसन तंत्र संक्रमण (Lower Respiratory Tract Infection), नवजात में होने वाला पीलिया, श्वास नलिका, श्वसन और फेफड़ों का कैंसर, अल्ज़ाइमर रोग और मनोभ्रंश (Dementias), डायरिया, डायबिटीज़ मेलिटस (Mellitus) और किडनी संबंधी रोग शामिल हैं।
  • गैर-संचारी रोग: विश्व में शीर्ष 10 में से 7 मौतें इसके कारण होती हैं। इसने वर्ष 2000 की अवधि में मौजूद 10 प्रमुख कारणों में से 4 कारणों की वृद्धि की है।
    • हृदय रोग: यह अब सभी कारणों से होने वाली कुल मौतों का 16% हो गया है और हृदय रोग से होने वाली मौतों की संख्या वर्ष 2000 के बाद से 2 मिलियन से अधिक बढ़कर 2019 में लगभग 9 मिलियन हो गई है।
    • अल्ज़ाइमर रोग और मनोभ्रंश के अन्य रूप: इस मामले में अमेरिका और यूरोप दोनों सयुंक्त रूप से वर्ष 2019 में तीसरे स्थान पर रहे।
      • महिलाओं पर प्रभाव: विश्व स्तर पर अल्ज़ाइमर और मनोभ्रंश के विविध रूपों से लगभग 65% महिलाएँ प्रभावित हैं।
    • डायबिटीज़: वर्ष 2000 - 2019 के बीच वैश्विक स्तर पर डायबिटीज़ से होने वाली मौतों में 70% की वृद्धि हुई, जिसमें 80% मौत का आँकड़ा पुरुषों का है।
      • पूर्वी भूमध्य सागरीय देशों में मधुमेह से होने वाली मौतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं जो WHO द्वारा कवर किये जाने वाले सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक वृद्धि को दर्शाता है।
  • संचारी रोग:  निम्न आय वाले देशों में मृत्यु के शीर्ष 10 कारणों में से 6 का कारण अभी भी संचारी रोग हैं, जिनमें मलेरिया (6वाँ), तपेदिक (8वाँ) और एड्स (9वाँ) शामिल हैं।
    • निमोनिया और निचला श्वसन तंत्र संक्रमण: ये संचारी रोगों के सबसे घातक समूह में से एक थे और दोनों ही एक साथ मृत्यु के प्रमुख कारण के रूप में चौथे स्थान पर सूचीबद्ध थे।
      • हालाँकि वर्ष 2000 की तुलना में निचला श्वसन तंत्र संक्रमण के करण होने वाली मौतों के मामलों में गिरावट (वैश्विक स्तर पर मौतों की संख्या में लगभग 5 लाख की कमी) देखी गई।   
      • यह कमी संचारी रोगों से होने वाली मौतों के प्रतिशत में सामान्य वैश्विक गिरावट के अनुरूप है।
    • एड्स (AIDS): यह वर्ष 2000 में मृत्यु का 8वाँ प्रमुख कारण था जो 2019 में 19वें स्थान पर पहुँच गया, यह पिछले दो दशकों में इसके संक्रमण को रोकने, वायरस के परीक्षण और इस बीमारी के उपचार के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
      • यह अफ्रीका में मृत्यु का चौथा प्रमुख कारण है, हालाँकि इससे होने वाली मौतों की संख्या में आधे से अधिक की कमी आई है, जो कि अफ्रीका में वर्ष 2000 में 1 मिलियन से अधिक थी परंतु यह आँकड़ा वर्ष  2019 में घटाकर 4,35,000 हो गया है।
    • तपेदिक: तपेदिक वर्तमान में विश्व की शीर्ष 10 बीमारियों में शामिल नहीं है। तपेदिक से होने वाली मौतों के मामलों में 30% की गिरावट के साथ यह वर्ष 2000 के 7वें स्थान से गिरकर 2019 में 13वें स्थान पर पहुँच गई।
      • हालाँकि अफ्रीका और दक्षिण-पूर्वी एशिया में मृत्यु के शीर्ष 10 कारकों में अभी भी इसका क्रमशः 8वाँ और 5वाँ स्थान है। 
  • वर्तमान में  गैर-संचारी रोग विश्व भर में अधिक मौतों का कारण बन रहे हैं, जबकि संचारी रोगों से होने वाली मौत के आँकड़ों में वैश्विक स्तर पर गिरावट आई है, हालाँकि संचारी रोग अभी भी निम्न और मध्यम आय वाले देशों में एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
  • जीवन प्रत्याशा में वृद्धि:  कई अनुमान वर्ष 2019 में दीर्घायु (वर्ष 2000 की तुलना में 6 वर्ष अधिक) की बढ़ती प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं।
    • वर्ष 2000 में दीर्घायु का वैश्विक औसत 67 वर्ष था जबकि यह वर्ष 2019 में यह 73 वर्ष देखा गया। 
    • नए अनुमानों से यह स्पष्ट है कि लोग अधिक वर्षों तक जीवित रह रहे हैं परंतु दिव्यांगता के मामलों में वृद्धि हुई है। 

सुझाव:

  • वर्तमान में हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और श्वास संबंधी बीमारियों की रोकथाम और उपचार के लिये सामूहिक रूप से और गहनता के साथ वैश्विक स्तर पर ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।  
  • सतत् विकास लक्ष्यों के एजेंडे के अनुरूप विश्व के सभी हिस्सों में बीमारियों और चोट (Injury) का उपचार और नियंत्रण सुनिश्चित करना। 
  • विश्व को गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, निदान और उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाने की ज़रूरत है।
  • साथ ही वर्तमान में तात्कालिक रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में भी समान और समग्र रूप से सुधार की आवश्यकता है। 
    • स्पष्ट है कि मज़बूत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल वह आधार है जिसके सहारे ही गैर-संचारी रोगों का मुकाबला करने से लेकर वैश्विक महामारी के प्रबंधन तक के प्रयासों को दिशा दी जा सकती है   
  • समय पर और प्रभावी निर्णय लेने में सहायता के लिये सरकार एवं अन्य हितधारकों द्वारा शीघ्र ही स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े डेटा और सूचना प्रणालियों में निवेश किया जाना चाहिये।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार हेतु भारतीय पहल:

  • आयुष्मान भारत: यह केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई स्वास्थ्य क्षेत्र की एक प्रमुख योजना है, यह योजना सेवा वितरण के क्षेत्रीय और विभिन्न दृष्टिकोणों से हटकर ज़रूरत-आधारित व्यापक स्वास्थ्य देखभाल सेवा उपलब्ध कराने का प्रयास करती है।
    • लक्ष्य: इस योजना को सरकार द्वारा देश में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के उद्देश्य के साथ शुरू किया गया है।
  • पोषण अभियान: इसका उद्देश्य तकनीकी के उपयोग के माध्यम से सेवाओं की आपूर्ति और अन्य आवश्यक हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है। साथ ही इसके तहत अलग-अलग निगरानी मापदंडों के अंतर्गत प्राप्त किये जाने वाले विशिष्ट लक्ष्यों को रेखांकित किया गया है।
  • राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन: यह एक पूर्ण डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र है। इसे चार प्रमुख विशेषताओं- हेल्थ आईडी, व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड, डिजी डॉक्टर और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री के साथ लॉन्च किया जाएगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस