संसद टीवी संवाद

रणबीर सिंह समिति | 28 Jul 2020 | भारतीय राजनीति

संदर्भ:  

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा ‘वैवाहिक दुष्कर्म, इच्छामृत्यु, यौन अपराधों और राजद्रोह जैसे कई गंभीर तथा संवेदनशील अपराधों की परिभाषा पर पुनः विचार करने के लिये एक पाँच सदस्यीय राष्ट्रस्तरीय समिति का गठन किया है। गृह मंत्रालय द्वारा गठित इस समिति ने 49 तरह के अपराधों को पुनर्विचार के लिये चुना है। समिति हिंसक घटनाओं के लिए विशेष कानूनों की शुरुआत करने पर भी विचार कर रही है, जिसमें भीड़ के द्वारा की जाने वाली हिंसा और ऑनर किलिंग (सम्मान की रक्षा में हत्या) शामिल है।  

             

प्रमुख बिंदु:   

आपराधिक कानूनों में सुधारों के प्रयास: 

सुधार की आवश्यकता:

अन्य विवादित मुद्दे: 

समिति का उद्देश्य:

समिति के प्रमुख उद्देश्यों में से कुछ निम्नलिखित हैं-  

IPC से जुड़े सुधार:  

दंड प्रक्रिया संहिता से जुड़े सुधार: 

भारतीय साक्ष्य अधिनियम से जुड़े सुधार:  

दुष्कर्म से जुड़े मामले:

समिति द्वारा मांगे गए अन्य सुझाव:

लाभ:                       

चुनौतियाँ:

समाधान:

निष्कर्ष:

वर्तमान में देश में सक्रिय कई कानून बहुत ही पुराने हैं और कुछ कानून औपनिवेशक पृष्ठभूमि से भी संबंधित हैं। देश के विकास के लिये आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ समय-समय पर न्याय तंत्र में अपेक्षित सुधार बहुत ही आवश्यक हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त समिति के माध्यम से कई संवेदनशील मामलों से जुड़े कानूनों में सुधारों की आवश्यकता की समीक्षा की जा सकेगी, जिससे न्याय प्रणाली के प्रति जनता के विश्वास में वृद्धि होगी। हालाँकि सरकार को वर्तमान में समिति के सदस्यों में विविधता और प्रतिनिधित्व की कमी जैसे प्रश्नों पर भी ध्यान देते हुए इन कमियों को शीघ्र ही दूर करने का प्रयत्न करना चाहिये। 

अभ्यास प्रश्न: भारतीय न्याय प्रणाली को प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में पूर्व में स्थापित समितियों (कानून सुधार) के योगदान पर प्रकाश डालते हुए हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा स्थापित ‘रणबीर सिंह समिति’ के आवश्यकता और इसकी चुनौतियों की तर्क सहित समीक्षा कीजिये।