वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 | 22 May 2023

अंतर्राष्ट्रीय कदन्न वर्ष 2023 के उपलक्ष्य में भारत का खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय 'वर्ल्ड फूड इंडिया (World Food India) 2023' के दूसरे संस्करण का आयोजन करेगा, जिसका उद्देश्य भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति को प्रदर्शित करना एवं विविध खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में वैश्विक निवेश को आकर्षित करना है।

  • यह आयोजन 3-5 नवंबर, 2023 को नई दिल्ली में होगा। 

वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 

  • परिचय:  
    • वर्ल्ड फूड इंडिया 2023 भारतीय खाद्य अर्थव्यवस्था का प्रवेश द्वार है, जो भारतीय और विदेशी निवेशकों के बीच साझेदारी को सुगम बनाता है।
    • यह वैश्विक खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माताओं, उत्पादकों, खाद्य प्रसंस्करणकर्त्ताओं, निवेशकों, नीति निर्माताओं और संगठनों का अपनी तरह का अद्वितीय आयोजन होगा।
    • यह वैश्विक खाद्य मूल्य शृंखला के साथ खुदरा, प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, विनिर्माण और कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स को प्रदर्शन, जुड़ाव एवं सहयोग का मंच है।
      • यह बैकवर्ड लिंकेज, प्रसंस्करण उपकरण, अनुसंधान और विकास, कोल्ड चेन स्टोरेज, स्टार्ट-अप्स, लॉजिस्टिक्स तथा रिटेल चेन में निवेश के अवसरों को प्रदर्शित करेगा।
  • लक्षित क्षेत्र: 
    • श्री अन्न (मिलेट्स): विश्व के लिये भारत के सुपर फूड का लाभ उठाना मिलेट्स प्राचीन अनाज हैं जो सहस्राब्दियों से भारत की समृद्ध विरासत का हिस्सा रहे हैं।
      • वे सुपर खाद्य पदार्थ हैं जो उच्च पोषण, लस मुक्त, जलवायु लचीलापन और इको-फ्रेंडली वातावरण प्रदान करते हैं। 
      • मिलेट्स जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या वृद्धि और कुपोषण जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिये खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा तथा स्थिरता को बढ़ा सकता है।
    • संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर में मिलेट्स के उत्पादन और खपत को बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष (IYM 2023) घोषित किया है। 
    • एक्सपोनेंशियल फूड प्रोसेसिंग: पोज़िशनिंग इंडिया एज़ द ग्लोबल हब
      • भारत के पास खाद्य प्रसंस्करण का वैश्विक केंद्र बनने और विश्व खाद्य बाज़ार में प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ अर्जित करने का विज़न है।
      • इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिये भारत अपने ऐसे समर्थकों को बढ़ावा देना चाहता है जो इसके खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का समर्थन और उसे गति प्रदान कर सकें।
      • प्रमुख प्रवर्तकों में से एक कृषि खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं का वित्तपोषण है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को पर्याप्त और वहनीय ऋण प्रदान करना, जो उद्योग का एक बड़ा हिस्सा है, भारत के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक है। 
    • सामरिक खंड: विकास के लिये संभावनाओं को खोलना
      • भारत में एक गतिशील और विविध खाद्य प्रसंस्करण उद्योग है जिसमें कई उप-क्षेत्र शामिल हैं जैसे कि समुद्री उत्पाद, फल एवं सब्जियाँ उत्पाद, मांस और पोल्ट्री उत्पाद, RTE/RTC (पैक्ड खाद्य पदार्थ) तथा डेयरी उत्पाद।
        • इन उप-क्षेत्रों में उत्पादन, खपत, निर्यात और मूल्यवर्द्धन के मामले में विकास की अपार संभावनाएँ हैं।
      • भारत विश्व के सबसे बड़े खाद्य उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है।
        • भारत दूध, केला, आम, पपीता, अमरूद, अदरक, भिंडी और भैंस के मांस के उत्पादन में विश्व में अग्रणी है, चावल, गेहूँ, आलू, लहसुन, काजू के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। 
    • कुशल पारिस्थितिकी तंत्र: समावेशन के साथ अवसरों का दोहन
      • एक कुशल तथा सर्वव्यापी पारिस्थितिकी तंत्र बाधाओं को दूर करने और एक समन्वित एवं एकीकृत ढाँचे की स्थापना की आवश्यकता है। समावेशी अवसर उत्पन्न करने के लिये मूल्य शृंखलाओं का निर्माण और ज्ञान साझा करने को बढ़ावा देना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
      • विदेशी निवेश को लुभाने हेतु सरकार ने 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये दरवाज़े खोल दिये हैं और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस इंडेक्स में अपनी स्थिति मज़बूत करने का प्रयास कर रही है। 
    • सतत् विकास: समृद्धि के लिये प्रसंस्करण
      • सतत् विकास समृद्धि के लिये प्रसंस्करण की प्राप्ति में एक मौलिक घटक है।
    • नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों एवं सतत् कृषि और खाद्य प्रसंस्करण प्रथाओं को शामिल करने वाली ये प्रौद्योगिकियाँ प्रमुख तथा आशाजनक रुझान बन गई हैं, जो अधिक धारणीय भविष्य की दिशा में हुए वैश्विक दृष्टिकोण में परिवर्तन को दर्शाती हैं।

वर्ल्ड फूड इंडिया 2017:

  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने खाद्य अर्थव्यवस्था में परिवर्तन (Transforming the Food Economy) थीम के साथ वर्ष 2017 में वर्ल्ड फूड इंडिया का पहला संस्करण लॉन्च किया।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य विश्व को भारत की विविध और समृद्ध खाद्य संस्कृति से परिचित कराना है

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स: 

प्रश्न. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का एक लक्ष्य धारणीय रीति से  देश के चुनिंदा ज़िलों में खेतिगत ज़मीन में बढ़ोतरी और उत्पादकता बढ़ाकर कुछ फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करना है। वे फसलें कौन -कौन सी हैं? (2010)

(a) केवल चावल और गेहूँ
(b) केवल चावल गेहूँ और दालें
(c) केवल चावल, गेहूँ, दालें और तिलहन
(d) चावल, गेहूँ, दालें, तिलहन और सब्जियाँ

उत्तर: (b)


प्रश्न. निम्नलिखित में से कौन-सा देश पिछले पाँच वर्षों में विश्व में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक रहा है? (2019)

(a) चीन
(b) भारत
(c) म्याँमार
(d) वियतनाम

उत्तर: (b) 


मेन्स:

प्रश्न. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) द्वारा कीमत सहायिकी का प्रतिस्थापन भारत में सहायिकीयों के परिदृश्य का किस प्रकार परिवर्तन कर सकता है? चर्चा कीजिये। (2015)

स्रोत: पी.आई.बी.