डब्ल्यू उर्से मेजोरिस और स्टेलर इवोल्यूशन | 10 Jan 2026
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) के खगोलविदों द्वारा किये गए एक अध्ययन से डब्ल्यू उर्से मेजोरिस-प्रकार के कांटेक्ट बाइनरी स्टार के संदर्भ में नई अंतर्दृष्टि मिली है।
- डब्ल्यू उर्से मेजोरिस (W UMa) स्टार: ये लघु अवधि वाले, डंबल आकार के कांटेक्ट बाइनरी स्टार हैं, जिनमें दो तारे एक-दूसरे की परिक्रमा करते हुए एक सामान्य बाह्य वातावरण साझा करते हैं जिससे वे तारकीय विकास सिद्धांतों के परीक्षण के लिये तारकीय द्रव्यमान, त्रिज्या और तापमान के सटीक मापन के क्रम में प्राकृतिक प्रयोगशाला बन जाते हैं।
- बाइनरी स्टार: यह दो तारों की एक प्रणाली है जो गुरुत्वीय रूप से जुड़े होते हैं और एक सामान्य द्रव्यमान केंद्र (बैरीसेंटर) की परिक्रमा करते हैं।
- दोनों तारे द्रव्यमान, आकार और चमक में भिन्न हो सकते हैं जिसमें बड़े तारे को प्राइमरी स्टार और छोटे तारे को द्वितीयक या सहचारी तारा कहा जाता है।
एक तारे का जीवन-चक्र
- उत्पत्ति: स्टार आणविक मेघों (शीतल, विशाल गैस एवं धूम्र मेघ जिनका द्रव्यमान 1,000 से 10 मिलियन सौर द्रव्यमान तक होता है और सैकड़ों प्रकाश वर्ष तक विस्तारित होते हैं) में निर्मित होते हैं।
- आणविक मेघ शीतल होते हैं जिससे गैस उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में संकेंद्रित हो जाती है, जिसमें टकराव और संचयन के माध्यम से वृद्धि होती है। जैसे-जैसे गुरुत्वाकर्षण तीव्र होता है ये समूह कोलैप्स हो जाते हैं और गर्म हो जाते हैं, जिससे एक प्रोटोस्टार का निर्माण होता है।
- नवगठित तारों के समूहों को तारकीय समूह (स्टेलर क्लस्टर) कहा जाता है और ऐसे क्षेत्रों को तारकीय नर्सरी (स्टेलर नर्सरी) के रूप में जाना जाता है।
- आणविक मेघ शीतल होते हैं जिससे गैस उच्च घनत्व वाले क्षेत्रों में संकेंद्रित हो जाती है, जिसमें टकराव और संचयन के माध्यम से वृद्धि होती है। जैसे-जैसे गुरुत्वाकर्षण तीव्र होता है ये समूह कोलैप्स हो जाते हैं और गर्म हो जाते हैं, जिससे एक प्रोटोस्टार का निर्माण होता है।
- मुख्य अनुक्रम चरण: एक प्रोटोस्टार प्रारंभ में गुरुत्वीय पतन (Gravitational Collapse) से मुक्त हुई ऊष्मा से चमकता है। लाखों वर्षों बाद इसके कोर में अत्यधिक दाब और तापमान नाभिकीय संलयन को प्रेरित करता है, जो हाइड्रोजन को हीलियम में बदलता है और ऊर्जा को विमुक्त करता है जिससे गुरुत्वाकर्षण संतुलित होता है।
- इस प्रक्रिया से स्थिर रूप से गमन करने वाले तारों को मेन सीक्वेंस स्टार कहा जाता है, जो तारकीय चक्र का सबसे लंबा चरण है जिसके दौरान चमक, आकार और तापमान में धीरे-धीरे बदलाव होते हैं।
- तारे का द्रव्यमान उसकी अवधि को नियंत्रित करता है- कम द्रव्यमान वाले तारे बहुत लंबे समय तक बने रहते हैं, जबकि विशाल तारे तेज़ी से जलते हैं और उनका कम अवधि में ही विघटन हो जाता है।
- विघटन: जब किसी तारे के केंद्र में हाइड्रोजन समाप्त हो जाती है तो संलयन दाब कम हो जाता है और केंद्र का क्षय प्रारंभ हो जाता है, जिससे तारा विस्तारित होता है और गर्म होता है।
- कम द्रव्यमान वाले तारों में जब तारा विशालकाय आकार ले लेता है तो हीलियम, कार्बन में संलयित होती है और अंततः यह अपनी बाहरी परतों को हटाकर एक ग्रहीय नीहारिका का निर्माण करता है।
- अपनी बाहरी परतों को हटाने के बाद, कम द्रव्यमान वाला तारा एक सघन श्वेत वामन (व्हाइट ड्वार्फ) उत्सर्जित करता है जिसे शीत होने में अरबों वर्ष लग जाते हैं।
- उच्च द्रव्यमान वाले तारों में संलयन से आयरन जैसे भारी तत्त्व का निर्माण जारी रहता है। एक बार आयरन बन जाने पर ऊर्जा उत्पादन रुक जाता है।
- जब किसी तारे का आयरन कोर कोलैप्स और रीबाउंड होता है, तो यह एक विशाल सुपरनोवा विस्फोट को कारण बनता है। कोर एक न्यूट्रॉन स्टार या ब्लैक होल के रूप में होता है जबकि निष्कासित पदार्थ भविष्य के आणविक मेघों को समृद्ध करता है, जिससे नए स्टार के निर्माण में सहायता मिलती है।