अमेरिका ने भारत में सेक्शन 301 जाँच शुरू की | 14 Mar 2026

स्रोत: इकॉनोमिक्स टाइम्स 

अमेरिका ने ट्रेड एक्ट, 1974 के तहत भारत सहित 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में विनिर्माण क्षेत्रों में कथित संरचनात्मक अधिशेष क्षमता को लेकर सेक्शन 301 जाँच शुरू की है।

  • जाँच की प्रेरणा: यह कदम उस समय उठाया गया जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन अधिकारों के तहत लगाए गए शुल्कों को रद्द कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन ने व्यापार पर दबाव बनाए रखने के लिये सेक्शन 301 का उपयोग करने का निर्णय लिया।
  • कानूनी आधार: यह जाँच US ट्रेड एक्ट, 1974 के सेक्शन 301 के अंतर्गत शुरू की गई है, जो अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) को विदेशी व्यापार प्रथाओं की जाँच करने का अधिकार देती है, जिन्हें ‘अनुचित’ या अमेरिकी वाणिज्य के लिये बोझिल माना जाता है।
  • जाँच का तर्क: USTR यह जाँच करेगा कि क्या ये देश विनिर्माण में ‘संरचनात्मक अधिशेष क्षमता’ बनाए रखते हैं, जैसे– सरकारी सब्सिडी, सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों की गतिविधियाँ, सब्सिडीयुक्त ऋण, मुद्रा नीतियाँ, कम वेतन या ढीले श्रम और पर्यावरण मानक। ऐसी नीतियाँ व्यापार को प्रभावित कर सकती हैं और अमेरिकी उद्योगों को हानि पहुँचा सकती हैं।
    • अमेरिका के 2025 के एक आधिकारिक आदेश में भारत के साथ अमेरिकी द्विपक्षीय व्यापार में 58 अरब डॉलर के अधिशेष को नोट किया गया, जिसमें टेक्सटाइल और ऑटोमोटिव जैसे अधिशेष वाले क्षेत्र प्रमुख रूप से उभारे गए।
    • इसमें सोलर मॉड्यूल निर्माण जैसे उद्योगों में संरचनात्मक अधिशेष क्षमता देखी गई, जो लगभग वार्षिक घरेलू मांग का तीन गुना है, साथ ही पेट्रोकेमिकल और स्टील में भी महत्त्वपूर्ण अधिशेष पाया गया।
  • संभावित परिणाम: यदि उल्लंघन पाए जाते हैं, तो अमेरिका शुल्क (टैरिफ), आयात प्रतिबंध या व्यापार रियायतें निलंबित कर सकता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में अमेरिका ने तकनीकी हस्तांतरण और बौद्धिक संपदा (IP) से संबंधित चिंताओं के कारण लगभग 370 अरब डॉलर के चीनी आयात पर 25% तक के टैरिफ लगाने के लिये सेक्शन 301 का उपयोग किया था।
  • WTO अनुकूलता पर चर्चा: सेक्शन 301 की वैधता पर विवाद है। 1998 में, यूरोपीय संघ (EU) ने इसे WTO में चुनौती दी, जिसमें भारत, ब्राज़ील, चीन और अन्य ने तीसरे पक्ष के रूप में भाग लिया। एक WTO पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि इस कानून के प्रमुख प्रावधान वैश्विक व्यापार प्रतिबद्धताओं के साथ विरोधाभास नहीं करते।

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