पूर्ण चंद्र ग्रहण | 28 Feb 2026
3 मार्च, 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जो भारत के अधिकांश हिस्सों, पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा।
चंद्रग्रहण(Lunar Eclipse)
- परिचय: चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है, जब पूर्णिमा के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा (सिजिगी) में आ जाते हैं और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुज़रता है। पृथ्वी की छाया की संरचना में निम्नलिखित शामिल हैं:
- अम्ब्रा: वह गहरा, आंतरिक शंकु, जहाँ सीधी धूप पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती है ।
- पेनुम्ब्रा: सूर्य की रोशनी से रहित बाह्य क्षेत्र, जहाँ सूर्य की रोशनी आंशिक रूप से ही बाधित होती है।
- चंद्र ग्रहण के प्रकार:
- उपछायीय (Penumbral): चंद्रमा केवल पृथ्वी की उपछाया (पेनुम्ब्रा) से होकर गुज़रता है, जिससे उसकी चमक में हल्की कमी आती है, जो प्रायः स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर नहीं होती।
- आंशिक (Partial): चंद्रमा का केवल एक भाग पृथ्वी की गहन छाया (अम्ब्रा) में प्रवेश करता है, जिसके परिणामस्वरूप चंद्र डिस्क का कुछ हिस्सा अंधकारमय हो जाता है।
- पूर्ण (Total): जब संपूर्ण चंद्रमा पृथ्वी की गहन छाया (अम्ब्रा) में प्रवेश करता है, तब यह सर्वाधिक प्रभावशाली दृश्य उत्पन्न करता है।
- प्रेक्षणीय विशेषताएँ: यह पृथ्वी के रात्रि-पक्ष में किसी भी स्थान से देखा जा सकता है, बशर्ते उस समय चंद्रमा क्षितिज के ऊपर स्थित हो। सूर्य ग्रहण के विपरीत, इसे नग्न नेत्रों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।
- ब्लड मून घटना: पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा प्रायः लालिमा लिये हुए या ताम्रवर्णी दिखाई देता है। इसका कारण रेले प्रकीर्णन (Rayleigh Scattering) है—पृथ्वी का वायुमंडल कम तरंगदैर्ध्य वाली नीली किरणों का प्रकीर्णन कर देता है, जबकि अधिक तरंगदैर्ध्य वाली लाल किरणों का अपवर्तन कर उन्हें चंद्रमा की ओर प्रेषित करता है। परिणामस्वरूप, चंद्रमा पृथ्वी पर एक साथ घटित हो रहे सूर्योदयों एवं सूर्यास्तों के अप्रत्यक्ष प्रकाश से आलोकित होता है।
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