करतारपुर कॉरिडोर का पुन:संचालन | 16 Nov 2021

भारत सरकार करीब 20 महीने बाद पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा कॉरिडोर (Kartarpur Sahib Gurudwara corridor) को फिर से खोलने पर विचार कर रही है ताकि सिख तीर्थयात्रियों को वहाँ से गुज़रने की अनुमति मिल सके। इसे कोविड -19 महामारी के कारण बंद कर दिया गया था।

  • भारत सरकार 19 नवंबर (2021), सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी की जयंती (जिसे गुरपुरब/गुरु पर्व या "प्रकाश पर्व" के नाम से जाना जाता है) तक मार्ग खोलने पर विचार कर रही है।

Kartarpur

प्रमुख बिंदु

  • परिचय:
    • यह कॉरिडोर भारत और पाकिस्तान के बीच उन दुर्लभ नई पहलों में से एक है जो वर्ष 2019 में पुलवामा हमले, बालाकोट हमले और जम्मू-कश्मीर पर अनुच्छेद 370 में संशोधन के निर्णय के बाद तनावपूर्ण स्थिति के कारण दोनों पक्षों के राजनयिकों को वापस बुला लिया गया और सभी व्यापार संबंधों को रद्द कर दिया गया।
    • यह एक अनूठी परियोजना है क्योंकि इस तरह के वीज़ा-मुक्त "मानव कॉरिडोर" का उपयोग आम तौर पर आपातकालीन स्थितियों के लिये किया जाता है अर्थात् शरणार्थी हिंसा या मानवीय आपदाओं से विस्थापन हेतु उपयोग किया जाता है न कि तीर्थयात्रा के लिये।
  • करतारपुर कॉरिडोर:
    • करतारपुर कॉरिडोर पाकिस्तान के नारोवाल ज़िले में दरबार साहिब गुरुद्वारा को भारत के पंजाब प्रांत के गुरदासपुर ज़िले में डेरा बाबा नानक साहिब से जोड़ता है।.
    • यह कॉरिडोर 12 नवंबर, 2019 को सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की 550वीं जयंती समारोह के अवसर पर बनाया गया था।

गुरु नानक

  • गुरु नानक देव (1469-1539) के जन्म अवसर पर कार्तिक महीने में पूर्णिमा के दिन गुरु नानक देव जयंती मनाई जाती है।
  • उन्होंने भक्ति के 'निर्गुण' रूप की शिक्षा दी। उन्होंने बलिदान, अनुष्ठान स्नान, छवि पूजा, तपस्या और हिंदुओं और मुसलमानों दोनों के ग्रंथों को अस्वीकृत किया।
  • उन्होंने सामूहिक पूजा (संगत) के लिये सामूहिक पाठ से जुड़े नियम स्थापित किये।
  • उन्होंने अपने शिष्यों में से एक गुरु अंगद (Preceptor) को उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किया और इस प्रथा का लगभग 200 वर्षों तक पालन किया गया।
  • सिख धर्म के पाँचवें गुरु अर्जुन देव ने आदि ग्रंथ साहिब में बाबा गुरु नानक के भजनों को उनके चार उत्तराधिकारियों और बाबा फरीद, रविदास (जिन्हें रैदास के नाम से भी जाना जाता है) और कबीर जैसे अन्य धार्मिक कवियों के साथ संकलित किया।
    • 'गुरबानी' कहे जाने वाले इन स्तोत्रों की रचना अनेक भाषाओं में हुई है।
  • भारतीय सीमा के उस पार लगभग 4 किमी. दूर करतारपुर गुरुद्वारा सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल स्थित है। जहाँ गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए थे।