मुख्य निर्वाचन आयुक्त का निष्कासन | 11 Mar 2026

स्रोत: द हिंदू

चर्चा में क्यों? 

विपक्षी दल पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण आचरण के आरोपों को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से किस प्रकार हटाया जा सकता है?

  • संवैधानिक सुरक्षा उपाय और प्रावधान: निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिये, संविधान मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यकाल की कड़ी सुरक्षा का प्रावधान करता है, जो एक महत्त्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा उपाय है।
    • संविधान का अनुच्छेद 324(5): अनुच्छेद संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन यह निर्दिष्ट करता है कि निर्वाचन आयुक्तों और क्षेत्रीय आयुक्तों की सेवा-शर्तें एवं कार्यकाल राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किये जाते हैं। 
      • मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल उसी प्रक्रिया और आधार पर हटाया जा सकता है, जिस तरह से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है तथा नियुक्ति के बाद उनकी सेवा-शर्तों में कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
      • अन्य चुनाव आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है।
    • इसके बाद संसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा-शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 पारित किया, जिसमें इस्तीफे और बर्खास्तगी की प्रक्रिया का प्रावधान है। यह संविधान में उल्लिखित प्रक्रिया का ही अनुसरण करता है।
  • पद से हटाने के आधार: संविधान द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों (तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्तों) को पद से हटाने के आधारों को सख्ती से ‘सिद्ध दुर्व्यवहार या अक्षमता’ तक सीमित किया गया है।
  • शब्दावली संबंधी टिप्पणी: राजनीतिक चर्चा में व्यापक रूप से 'महाभियोग' शब्द का प्रयोग किया जाता है। हालाँकि, संवैधानिक रूप से 'महाभियोग' शब्द विशेषरूप से भारत के राष्ट्रपति के लिये ही प्रयोग किया जाता है, जिसका उल्लेख अनुच्छेद 61 में है।
    • न्यायाधीशों और मुख्य निर्वाचन आयोग के लिये, औपचारिक संवैधानिक शब्द निष्कासन (रिमूवल) है।

निष्कासन प्रक्रिया

  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया अर्द्ध-न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जाती है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है तथा न्यायाधीश जाँच अधिनियम, 1968 द्वारा शासित है।
  • निष्कासन प्रस्ताव की शुरुआत: निष्कासन के आधारों को बताते हुए निष्कासन प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है।
    • इस पर लोकसभा के 100 सदस्यों या राज्यसभा के 50 सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहियें।
    • इसके बाद हस्ताक्षरित प्रस्ताव संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी (लोकसभा में अध्यक्ष या राज्यसभा में सभापति) को प्रस्तुत किया जाता है।
  • स्वीकृति एवं जाँच: अध्यक्ष/सभापति प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। 
    • आरोपों की स्वीकृति की स्थिति में, उनकी जाँच हेतु एक त्रिसदस्यीय समिति (जिसमें उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद्  शामिल होते हैं) का गठन किया जाता है।
  • रिपोर्ट प्रस्तुतीकरण: समिति जाँच करती है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को अपना बचाव करने का अधिकार है। 
    • यदि समिति निष्कर्ष निकालती है कि आरोप साबित नहीं हुए, तो प्रस्ताव को छोड़ दिया जाता है और प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।
    • यदि समिति मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को कदाचार (Misbehaviour) या अक्षमता (Incapacity) का दोषी पाती है, तो रिपोर्ट उस सदन में प्रस्तुत की जाती है, जहाँ मूलरूप से प्रस्ताव पेश किया गया था।
  • संसद में मतदान: प्रस्ताव को पारित करने के लिये इसे दोनों सदनों में उसी सत्र के दौरान विशेष बहुमत से समर्थन प्राप्त होना आवश्यक है।
    • विशेष बहुमत का अर्थ है- उस सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित सदस्यों में से कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत, जो मतदान में हिस्सा ले रहे हों।
  • अध्यक्षीय आदेश द्वारा हटाना: यदि प्रस्ताव दोनों सदनों में सफलतापूर्वक पारित हो जाता है, तो भारत के राष्ट्रपति को एक औपचारिक संबोधन प्रस्तुत किया जाता है।
    • अंततः राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का आधिकारिक आदेश जारी करते हैं।

और पढ़ें: भारत निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त के हटाने को कौन-सा संवैधानिक प्रावधान नियंत्रित करता है?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को हटाने का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत नियंत्रित होता है, जो यह कहता है कि CEC को केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के समान प्रक्रिया और समान आधारों पर ही हटाया जा सकता है।

2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को किन आधारों पर हटाया जा सकता है?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को केवल साबित कदाचार या असक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है, जो कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिये लागू होने वाले समान आधार हैं।

3. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को हटाने के लिये जाँच प्रक्रिया को कौन-सा कानून नियंत्रित करता है?
जाँच प्रक्रिया न्यायाधीश (जाँच) अधिनियम, 1968 के प्रावधानों के अनुसार होती है, जो संवैधानिक अधिकारियों के खिलाफ आरोपों की जाँच की प्रक्रिया को निर्दिष्ट करता है।

4. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिये संसद में कौन-सा बहुमत आवश्यक है?
हटाने के प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित किया जाना चाहिये, अर्थात कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों में से दो-तिहाई बहुमत।

5. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने का अंतिम आदेश कौन जारी करते हैं।
जब संसद प्रस्ताव पारित कर देती है, तो मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का अंतिम आदेश भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी किया जाता है।


UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs) 

प्रिलिम्स

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये : (2017)

1- भारत निर्वाचन आयोग पाँच सदस्यीय निकाय है।

2- केंद्रीय गृह मंत्रालय आम चुनाव और उपचुनाव, दोनों के संचालन के लिये चुनाव कार्यक्रम तय करता है।

3- निर्वाचन आयोग मान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों के विभाजन/विलय से संबंधित विवादों को हल करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 और 2 

(b) केवल 2

(c) केवल 2 और 3  

(d) केवल 3  

उत्तर: (d)


मेन्स

प्रश्न: आदर्श आचार संहिता के विकास के आलोक में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर चर्चा कीजिये। (2022)