पोलर सिल्क रोड | 20 Jan 2026

स्रोत: डीसी

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की हालिया टिप्पणियों ने आर्कटिक क्षेत्र में चीन की महत्त्वाकांक्षाओं पर चर्चा को पुनरुज्जीवित कर दिया है; हालाँकि, विशेषज्ञ आकलनों के अनुसार इस क्षेत्र में चीन की प्रत्यक्ष सैन्य उपस्थिति अभी भी सीमित बनी हुई है।

पोलर सिल्क रोड पहल

  • परिचय: यह चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का आर्कटिक क्षेत्र में विस्तार है, जिसका उद्देश्य आर्कटिक में उभरते समुद्री मार्गों का विकास करना, प्राकृतिक संसाधनों तक पहुँच सुनिश्चित करना तथा जलवायु परिवर्तन के कारण पिघलती आर्कटिक बर्फ का लाभ प्राप्त करते हुए अपने भू-राजनीतिक प्रभाव को सुदृढ़ करना है।
    • बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) एक वैश्विक अवसंरचना और कनेक्टिविटी कार्यक्रम है जिसे चीन ने वर्ष 2013 में शुरू किया था, जिसका उद्देश्य एशिया, यूरोप और अफ्रीका में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिये सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों, ऊर्जा पाइपलाइनों और डिजिटल लिंक का निर्माण करना है।
  • उद्भव एवं उद्देश्य: इसे वर्ष 2017 में चीन और रूस द्वारा संयुक्त रूप से घोषित किया गया था। चीन की 2018 की आर्कटिक नीति में चीन को एक ‘निकट-आर्कटिक राज्य’ (near-Arctic state) के रूप में परिभाषित किया गया तथा आर्कटिक क्षेत्र में नौवहन, संसाधनों और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को प्रोत्साहन प्रदान करने पर बल दिया गया।
    • चीन का वर्ष 2030 तक स्वयं को एक ‘ध्रुवीय महाशक्ति’ (Polar Great Power) के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य है, जो आर्कटिक क्षेत्र के बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक महत्त्व को दर्शाता है।
  • मार्ग: PSR मुख्य रूप से रूस के आर्कटिक तट के साथ उत्तरी समुद्री मार्ग पर केंद्रित है, जो एशिया-यूरोप की दूरी को काफी कम (लगभग 40%) करता है, जबकि उत्तर-पश्चिम मार्ग (कनाडा के तट के साथ) एक वैकल्पिक विकल्प के रूप में है।    
  • रणनीतिक औचित्य (Strategic Rationale): चीन का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना, स्वेज़ नहर जैसे पारंपरिक सामरिक अवरोध बिंदुओं (चोकपॉइंट) पर निर्भरता कम करना, विशेष रूप से रूस के साथ साझेदारियों के माध्यम से अपने भू-राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करना है।

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