राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य | 16 Mar 2026
उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के फ्रेजाइल लोटिक (बहते जल) ईकोसिस्टम को "रेत माफिया" द्वारा व्यापक और सुव्यवस्थित अवैध रेत खनन से बचाने के लिये स्वतः संज्ञान लिया है।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
- परिचय: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, जिसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य के रूप में भी जाना जाता है, भारत के पारिस्थितिक रूप से महत्त्वपूर्ण नदी तटीय संरक्षित क्षेत्रों में से एक है। यह देश का पहला और एकमात्र त्रि-राज्य संरक्षित क्षेत्र (राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश) है, जो चंबल नदी (960 किमी.) के 600 किमी. लंबे हिस्से के साथ लगभग 5,400 वर्ग किमी. में विस्तृत है।
- जैव विविधता: यह विश्व की लगभग 90% शेष वन्य घड़ियाल आबादी और लुप्तप्राय गंगा नदी डॉल्फिन की एक महत्त्वपूर्ण संख्या को आश्रय प्रदान करता है। अन्य प्रमुख प्रजातियों में मगर (मार्श क्रोकोडाइल), रेड-क्राउन रूफ टर्टल, स्मूथ कोटेड ओटर, धारीदार लकड़बग्घा और 330 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ जैसे भारतीय स्किमर शामिल हैं।
- यह मगर प्रजातियों की गंभीर कमी को दूर करने के लिये वर्ष 1975 में शुरू की गई भारतीय परियोजना प्रोजेक्ट क्रोकोडाइल पहल का हिस्सा बना।
- संरक्षण स्थिति: इसे एक महत्त्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (IBA) के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह एक प्रस्तावित रामसर स्थल है, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा पाने के लिये एक उम्मीदवार है, इसे IUCN श्रेणी IV संरक्षित क्षेत्र (आवास/प्रजाति प्रबंधन क्षेत्र) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
- पारिस्थितिक विशिष्टता: चंबल नदी भारत की सबसे स्वच्छ और सबसे अप्रदूषित नदियों में से एक है, जो गहरे चैनलों, रेतीले तटों और रवाइन (बीहड़) का एक अद्वितीय लोटिक (बहते जल) ईकोसिस्टम बनाती है।
- खतरे और चुनौतियाँ: गंभीर खतरों में अवैध रेत खनन शामिल है, जो घड़ियाल और कछुओं जैसी रेत में घोंसला बनाने वाली प्रजातियों के नेस्टिंग साइट्स को नष्ट करता है, साथ ही जल निष्कर्षण और अवैध मत्स्यग्रहण जो जल में शिकार को कम करता है।
