साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड पर नई SOP | 17 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
भारत की साइबर अपराध के उन्मूलन की क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के तहत गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के अंतर्गत साइबर वित्तीय धोखाधड़ी संबंधी मामलों के निपटारे हेतु एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को स्वीकृति प्रदान की है।
- इस कदम का उद्देश्य, विशेष रूप से छोटी राशि के मामलों में, धोखाधड़ी से गई धनराशि की त्वरित वापसी सुनिश्चित करना और पीड़ित-केंद्रित शिकायत निवारण में सुधार करना है।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) क्या है?
- परिचय: साइबर वित्तीय अपराध रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) के तहत साइबर वित्तीय धोखाधड़ी संबंधी मामलों के लिये नई SOP को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से लागू किया गया है और इसका समन्वय भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा किया जाता है।
- यह ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों से निपटने के लिये संपूर्ण देश में लागू होने वाला एक समान और एकीकृत ढाँचा प्रदान करता है।
- मुख्य उद्देश्य: SOP का लक्ष्य धोखाधड़ी वाले ट्रांजेक्शन को तुरंत फ्रीज़ करना, पीड़ितों को उनका धन शीघ्र वापस दिलाना और वित्तीय मध्यस्थों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। साथ ही, यह साइबर अपराध प्रतिक्रिया को पीड़ित-केंद्रित और समयबद्ध मॉडल की ओर उन्मुख है।
- SOP में राहत: 50,000 रुपये से कम की धोखाधड़ी के मामलों में, न्यायालयी आदेश के बगैर ही धनवापसी की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
- यदि कोई न्यायालयी या बहाली आदेश मौज़ूद नहीं है, तो बैंकों को 90 दिनों के भीतर फ्रीज़ हटा लेना चाहिये, जिससे धन को अनिश्चित काल तक ब्लॉक होने से रोका जा सके।
- आवश्यकता: भारत ने छह वर्षों में साइबर धोखाधड़ी से 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाया। पीड़ितों को प्रायः विलंब, लंबे समय तक खातों के फ्रीज़ होने और स्पष्टता की कमी का सामना करना पड़ता था।
- यह SOP प्रणालीगत कमियों को दूर करते हुए डिजिटल भुगतान ईकोसिस्टम में विश्वास को और अधिक सुदृढ़ बनाती है।
- संस्थानों के बीच प्रक्रियाओं का मानकीकरण: यह SOP बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), भुगतान एग्रीगेटर्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, स्टॉक-ट्रेडिंग ऐप्स और म्यूचुअल फंड हाउसों के लिये एक समान प्रक्रिया निर्धारित करती है, जिससे साइबर धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों के निपटारे में एकरूपता, तेज़ समन्वय तथा अस्पष्टता में कमी सुनिश्चित होती है।
- डिजिटल प्रणालियाँ: NCRP के अंतर्गत दो नए मॉड्यूल विकसित किये जाएंगे, जो वित्तीय संस्थानों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और पीड़ितों के बीच समन्वय को बेहतर बनाएंगे।
- शिकायत निवारण मॉड्यूल: शिकायतों की निगरानी और समाधान के लिये।
- धन पुनर्स्थापन मॉड्यूल: धोखाधड़ी से निकासी की गई राशि की त्वरित वापसी सुनिश्चित करने के लिये।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP)
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के अंतर्गत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) को वर्ष 2020 में राष्ट्र को समर्पित किया गया था। पूर्ववर्ती CCPWC पोर्ट को, जो केवल बाल यौन शोषण और बलात्कार से संबंधित मामलों तक सीमित था, नया रूप दिया गया। NCRP अब एक ही प्लेटफॉर्म के माध्यम से पूरे भारत में सभी प्रकार के साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करता है।
- इसके प्रमुख फीचर्स में देश भर में साइबर अपराध की रिपोर्टिंग, ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) पर विशेष ध्यान, मामलों की स्थिति की ट्रैकिंग, बहु-स्तरीय निगरानी डैशबोर्ड तथा साइबर वालंटियर्स और वाणी–साइबरदोस्त (Vani–CyberDost) चैटबॉट के माध्यम से सहायता शामिल है।
- NCRP नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) को एकीकृत करता है, जो 85 से अधिक बैंकों और भुगतान मध्यस्थों को जोड़ती है। यह 1930 राष्ट्रीय हेल्पलाइन के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग की सुविधा देती है, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों, RBI, NPCI और अन्य हितधारकों के बीच त्वरित समन्वय संभव होता है, ताकि धन की अवैध निकासी को रोका जा सके तथा नुकसान की क्षतिपूर्ति की जा सके।
नोट: एक अन्य घटनाक्रम में, केंद्र सरकार ने “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम के बढ़ते खतरे से निपटने के लिये गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक उच्च-स्तरीय अंतर-विभागीय समिति का गठन किया है। रिपोर्ट की गई शिकायतों के आधार पर ही इन घोटालों से अब तक लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है और इससे बुज़ुर्ग और कमज़ोर वर्ग के लोग सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
- यह समिति भारतीय रिज़र्व बैंक और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी प्रमुख संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करती है और रियल-टाइम प्रवर्तन की कमियों को दूर करने, पुलिस व न्यायालय की पहचान का दुरुपयोग रोकने तथा बड़े पैमाने पर होने वाली धोखाधड़ी के विरुद्ध सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये Google एवं WhatsApp जैसे प्लेटफॅार्मों के साथ सहयोग कर रही है।
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और पढ़ें: ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर नया SOP क्या है?
यह गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा अनुमोदित एक समान पैन-इंडिया प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य NCRP और CFCFRMS के माध्यम से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों का निपटारा करना है।
2. यह SOP पीड़ितों को कौन-सी प्रमुख राहत प्रदान करता है?
₹50,000 से कम की धोखाधड़ी के मामलों में न्यायालय के आदेश के बिना ही रिफंड की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है तथा यदि कोई आदेश मौजूद नहीं है तो बैंकों को 90 दिनों के भीतर धनराशि पर लगाया गया फ्रीज़ हटाना होगा।
3. इस SOP के अंतर्गत कौन-कौन से संस्थान शामिल हैं?
बैंक, NBFC, पेमेंट एग्रीगेटर्स, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, स्टॉक-ट्रेडिंग ऐप्स तथा म्यूचुअल फंड हाउस।
4. भारत की साइबर अपराध रूपरेखा में NCRP क्यों महत्त्वपूर्ण है?
NCRP देश भर में सभी साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग को सक्षम बनाता है, CFCFRMS को एकीकृत करता है तथा 1930 हेल्पलाइन के माध्यम से 85 से अधिक बैंकों और मध्यस्थों को जोड़कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रिलिम्स
प्रश्न 1. भारत में व्यक्तियों के लिये साइबर बीमा के तहत धन की हानि और अन्य लाभों के भुगतान के अलावा, निम्नलिखित में से कौन-से लाभ आमतौर पर कवर किये जाते हैं? (वर्ष 2020)
- किसी के कंप्यूटर तक पहुँच को बाधित करने वाले मैलवेयर के मामले में कंप्यूटर सिस्टम की बहाली की लागत।
- एक नए कंप्यूटर की लागत अगर ऐसा साबित हो जाता है कि कुछ असामाजिक तत्त्वों ने जानबूझकर इसे नुकसान पहुँचाया है।
- साइबर जबरन वसूली के मामले में नुकसान को कम करने के लिये एक विशेष सलाहकार को काम पर रखने की लागत।
- यदि कोई तीसरा पक्ष मुकदमा दायर करता है तो न्यायालय में बचाव की लागत।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1, 2 और 4
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर: (b)
प्रश्न 2. भारत में निम्नलिखित में से किसके लिये साइबर सुरक्षा घटनाओं पर रिपोर्ट करना कानूनी रूप से अनिवार्य है? (वर्ष 2017)
- सेवा प्रदाता
- डेटा केंद्र
- निगमित निकाय
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
(a) केवल 1
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d)
मेन्स
प्रश्न. साइबर सुरक्षा के विभिन्न घटक क्या हैं? साइबर सुरक्षा में चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जाँच करें कि भारत ने व्यापक राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति को किस हद तक सफलतापूर्वक विकसित किया है? (वर्ष 2022)